श्री सरस्वती आरती

śrī sarasvatī āratī

Saraswati Aarti (Jai Saraswati Mata)

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
7
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
वसंत पंचमी; विद्यारंभ; परीक्षा से पहले
उद्देश्य:विद्या (Learning)परीक्षा में सफलता (Exam success)वाणी व कला (Speech and the arts)
✓ संपूर्ण

"जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता" विद्या की देवी सरस्वती की प्रचलित आरती है, जो वसंत पंचमी पर विशेष रूप से गाई जाती है। इसके छह पद और एक फलश्रुति हैं, और इसकी मुख्य माँग है — "ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो": माँ, ज्ञान की आँख दो।

परिचय

माँ सरस्वती विद्या, बुद्धि, संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी हैं।

स्रोत: "जय सरस्वती माता" — परंपरागत आरती

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री सरस्वती आरती
IASTśrī sarasvatī āratī
देवतामाँ सरस्वती
मूल स्रोत"जय सरस्वती माता" — परंपरागत आरती
शुभ दिनवसंत पंचमी; विद्यारंभ; परीक्षा से पहले
पाठ समय3 मिनट
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

यह आरती सरस्वती से धन या विजय नहीं, केवल ज्ञान माँगती है — और उसे अंधकार के विरुद्ध प्रकाश की तरह देखती है।

रूप (पद 1–3). सद्गुण और वैभव से भरी, तीनों लोकों में प्रसिद्ध; चंद्रमा-सा मुख, कमल पर आसन, हंस की सवारी; बाएँ हाथ में वीणा, दाएँ में माला, सिर पर मणि-जड़ा मुकुट और गले में मोतियों की माला।

मंथरा का प्रसंग (पद 4). "पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया" — यह पंक्ति रामचरितमानस के अयोध्याकाण्ड से जुड़ती है, जहाँ सरस्वती कैकेयी की दासी मंथरा की बुद्धि फेर देती हैं: "नामु मंथरा मंदमति चेरी कैकइ केरि। अजस पेटारी ताहि करि गई गिरा मति फेरि॥" उसी से राम का वनवास हुआ, और वनवास से रावण का संहार। आरती कहती है कि यह भी सरस्वती का ही काम था।

ज्ञान की माँग (पद 5–6). "मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो" — मोह, अज्ञान और अंधकार का नाश; और अंत में धूप-दीप-फल-मेवा के बदले एक ही माँग: "ज्ञानचक्षु दे माता"।

आरती (लिरिक्स)

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जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता। सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥

हे सरस्वती माता, हे मैया, आपकी जय हो! आप सद्गुणों और वैभव से सुशोभित हैं और तीनों लोकों में विख्यात हैं।

चन्द्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी। सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥

आपका मुख चंद्रमा-सा है, आप कमल पर आसीन हैं, और आपकी आभा मंगल करने वाली है; शुभ हंस की सवारी शोभा पाती है, और आप अतुलनीय तेज धारण करती हैं।

बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला। शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला॥

बाएँ हाथ में वीणा और दाएँ हाथ में माला है; सिर पर मणि-जड़ा मुकुट और गले में मोतियों की माला शोभा पाती है।

देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया। पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया॥

हे देवी, जो आपकी शरण आए, उनका आपने उद्धार किया; आप मंथरा दासी (की बुद्धि) में पैठीं और (इस प्रकार) रावण का संहार कराया।

विद्या ज्ञान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो। मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो॥

हे विद्या और ज्ञान देने वाली, (हममें) ज्ञान का प्रकाश भरिए; मोह, अज्ञान और अंधकार का जगत से नाश कीजिए।

धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो। ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो॥

हे माँ, धूप, दीप, फल और मेवा स्वीकार कीजिए; हे माता, ज्ञान की आँख देकर जगत का उद्धार कीजिए।

माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे। हितकारी सुखकारी ज्ञान भक्ति पावे॥

(फलश्रुति) जो कोई माँ सरस्वती की यह आरती गाता है, वह हितकारी और सुखकारी ज्ञान और भक्ति पाता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे सरस्वती माता, हे मैया, आपकी जय हो! आप सद्गुणों और वैभव से सुशोभित हैं और तीनों लोकों में विख्यात हैं।
  2. आपका मुख चंद्रमा-सा है, आप कमल पर आसीन हैं, और आपकी आभा मंगल करने वाली है; शुभ हंस की सवारी शोभा पाती है, और आप अतुलनीय तेज धारण करती हैं।
  3. बाएँ हाथ में वीणा और दाएँ हाथ में माला है; सिर पर मणि-जड़ा मुकुट और गले में मोतियों की माला शोभा पाती है।
  4. हे देवी, जो आपकी शरण आए, उनका आपने उद्धार किया; आप मंथरा दासी (की बुद्धि) में पैठीं और (इस प्रकार) रावण का संहार कराया।
  5. हे विद्या और ज्ञान देने वाली, (हममें) ज्ञान का प्रकाश भरिए; मोह, अज्ञान और अंधकार का जगत से नाश कीजिए।
  6. हे माँ, धूप, दीप, फल और मेवा स्वीकार कीजिए; हे माता, ज्ञान की आँख देकर जगत का उद्धार कीजिए।
  7. (फलश्रुति) जो कोई माँ सरस्वती की यह आरती गाता है, वह हितकारी और सुखकारी ज्ञान और भक्ति पाता है।

लाभ

  • विद्या और बुद्धि की कामना — आरती की मुख्य माँग "ज्ञानचक्षु दे माता" है।
  • विद्यार्थियों के लिए परीक्षा और विद्यारंभ से पहले का पाठ।
  • अज्ञान और मोह से मुक्ति का भाव — "मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो"।
  • फलश्रुति: आरती गाने वाला ज्ञान और भक्ति पाता है।

कब करें पाठ

वसंत पंचमी परविद्यारंभ और परीक्षा से पहलेप्रातः पूजा में

पाठ विधि

माँ सरस्वती के समक्ष दीप और धूप जलाएँ, श्वेत या पीले पुष्प, फल और मेवा अर्पित करें — पद 6 यही गिनाता है। पास में पुस्तक, कलम या वाद्य रखें। टेक "जय सरस्वती माता" हर पद के बाद दोहराएँ।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराdrikpanchang.com — आरती श्री सरस्वती जी (आधार-पाठ) · bhaktibharat.com — आरती: माँ सरस्वती जी · hindi.webdunia.com — ॐ जय सरस्वती माता · मंथरा प्रसंग: श्रीरामचरितमानस, अयोध्याकाण्ड
रचयिताअज्ञात (किसी प्रति में छाप नहीं)
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

यह भी देखें

देव परिचय

माँ सरस्वती

Goddess Saraswati

माँ सरस्वती विद्या, बुद्धि, संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी हैं।

देवता वर्गविद्या · ज्ञान · संगीत · कला · वाणी
वाहनहंस
मुख्य मंत्रॐ ऐं सरस्वत्यै नमः
माँ सरस्वती के पाठ
सभी पाठ देखें

श्री सरस्वती आरती — सामान्य प्रश्न

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