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लिपि:
॥ श्री ॥
सरस्वती वैदिक मंत्र — पावका नः सरस्वती
मंत्र · माँ सरस्वती
पाठ
1
ॐ पावका नः सरस्वती वाजेभिर्वाजिनीवती। यज्ञं वष्टु धियावसुः॥
अर्थ (हिन्दी)
- पवित्र करने वाली सरस्वती, जो बल व अन्न से सम्पन्न हैं और जिनका धन ही बुद्धि है — वे हमारे यज्ञ को स्वीकार करें और उसकी कामना करें।
लाभ
- सरस्वती का सर्वाधिक प्राचीन उपलब्ध मंत्र — ऋग्वेद में ही उपस्थित।
- परंपरा में इसे बुद्धि, विद्या व वाणी-शुद्धि से जोड़ा जाता है।
- विद्यारंभ संस्कार, बसंत पंचमी व अध्ययन-आरंभ पर पाठ विहित बताया जाता है।
- विद्यार्थियों व शिक्षकों में परीक्षा-सफलता के संकल्प के साथ जप प्रचलित है।
कब करें पाठ
बसंत पंचमी पर · अध्ययन या विद्यारंभ के आरंभ में · परीक्षा या साक्षात्कार से पूर्व · प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में
स्रोत
रचयिता: मधुच्छन्दा वैश्वामित्र (ऋग्वेद प्रथम मण्डल). ऋग्वेद 1.3.10 — ऋषि मधुच्छन्दा वैश्वामित्र · सरस्वती सूक्त व विद्यारंभ संस्कार परंपरा
