समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
बसंत पंचमी, गुरुवार व अध्ययन आरंभ पर
उद्देश्य:ज्ञान व विद्या (Knowledge)परीक्षा सफलता (Exam Success)वाणी-शुद्धि (Speech)
✓ संपूर्ण वैदिक मंत्र
सरस्वती का वैदिक मंत्र “पावका नः सरस्वती वाजेभिर्वाजिनीवती। यज्ञं वष्टु धियावसुः॥” ऋग्वेद 1.3.10 है। इसका अर्थ है — पवित्र करने वाली सरस्वती, जो बल व अन्न से सम्पन्न हैं और बुद्धि रूपी धन देती हैं, हमारे यज्ञ को स्वीकार करें। यह सरस्वती का सर्वाधिक प्राचीन उपलब्ध मंत्र है।
FAQ
सरस्वती वैदिक मंत्र — पावका नः सरस्वती — सामान्य प्रश्न
"ॐ पावका नः सरस्वती वाजेभिर्वाजिनीवती। यज्ञं वष्टु धियावसुः॥" — यह ऋग्वेद के प्रथम मण्डल, सूक्त 3, ऋचा 10 है और सरस्वती का सर्वाधिक प्राचीन उपलब्ध मंत्र माना जाता है।
दोनों। ऋग्वेद में वे सरस्वती नदी भी हैं — जिसे "नदीतमा" यानी नदियों में श्रेष्ठ कहा गया — और वाग्-देवी भी, अर्थात् वाणी, बुद्धि व प्रेरित वचन की अधिष्ठात्री। पौराणिक वीणाधारिणी व हंसवाहिनी स्वरूप बहुत बाद विकसित हुआ।
"धी" अर्थात् बुद्धि और "वसु" अर्थात् धन — यानी जिनका धन ही बुद्धि है। परंपरा में इसे इस ऋचा का केंद्रीय भाव माना जाता है: सरस्वती के पास जो सम्पदा है वह स्वर्ण नहीं, बुद्धि है, और वही वे भक्त को देती हैं।
परंपरा में बसंत पंचमी, विद्यारंभ संस्कार और अध्ययन आरंभ करने से पूर्व इसका पाठ विहित बताया जाता है। विद्यार्थी परीक्षा या साक्षात्कार से पहले भी इसका जप करते हैं।
परंपरा में इस मंत्र का जप 108 बार — अर्थात एक माला — करने का विधान कहा जाता है, और इसके लिए स्फटिक माला का प्रयोग बताया जाता है। जप का सुझाया गया समय ब्रह्म मुहूर्त व अध्ययन से पूर्व है। संख्या से अधिक महत्व नियमितता तथा शुद्ध उच्चारण का माना गया है — प्रतिदिन एक माला, बीच-बीच में छोड़कर की गई अधिक संख्या से श्रेष्ठ कही जाती है।
यह वैदिक मंत्र है। परंपरा में वैदिक मंत्रों को गुरु के मुख से, शुद्ध उच्चारण तथा स्वर सहित सीखना श्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि इनमें स्वर का भी विधान होता है। बिना गुरु के केवल भाव सहित पाठ करने का निषेध नहीं कहा जाता, किंतु विधिवत जप के लिए सीखना उत्तम बताया गया है।
"पावका" में दोनों "आ" दीर्घ हैं। परंपरा में कहा जाता है कि मंत्र-जप में शुद्ध उच्चारण का विशेष महत्व है, इसलिए आरंभ में धीरे-धीरे व स्पष्ट बोलकर अभ्यास करें और गति बाद में बढ़ाएँ।
पर्व
