या कुन्देन्दुतुषारहारधवला — सरस्वती वंदना

yā kundendutuṣārahāradhavalā

Saraswati Vandana (Ya Kundendu Tushara Hara Dhavala)

समय
45 सेकंड
जप संख्या
11
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
बसंत पंचमी, गुरुवार व विद्यारंभ पर
उद्देश्य:ज्ञान व विद्या (Knowledge)परीक्षा सफलता (Exam Success)वाणी-शुद्धि (Speech)
✓ संपूर्ण साधना मंत्र

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला — यह सरस्वती वंदना है और श्री सरस्वती स्तोत्रम् का प्रथम श्लोक। इसमें देवी को कुंद-पुष्प, चंद्रमा व हिम के समान श्वेत, श्वेत वस्त्रधारिणी, वीणाधारिणी और श्वेत कमल पर विराजमान कहकर प्रार्थना की गई है कि वे जड़ता का पूर्ण नाश करें।

परिचय

माँ सरस्वती विद्या, बुद्धि, संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी हैं।

स्रोत: श्री सरस्वती स्तोत्रम् का प्रथम श्लोक; स्वतंत्र रूप से "सरस्वती वंदना"

एक नज़र में

मंत्र / पाठया कुन्देन्दुतुषारहारधवला — सरस्वती वंदना
IASTyā kundendutuṣārahāradhavalā
प्रकारसाधना मंत्र
देवतामाँ सरस्वती
मूल स्रोतश्री सरस्वती स्तोत्रम् का प्रथम श्लोक; स्वतंत्र रूप से "सरस्वती वंदना"
जप संख्या11
मालास्फटिक माला
शुभ दिनबसंत पंचमी, गुरुवार व विद्यारंभ पर
पाठ समय45 सेकंड
कठिनाईमध्यम

उद्भव / पृष्ठभूमि

यह श्लोक सरस्वती-उपासना का सबसे परिचित पद है। भारत के विद्यालयों में प्रार्थना-सभा में, विद्यारंभ संस्कार में और बसंत पंचमी की पूजा में यही श्लोक सबसे अधिक पढ़ा जाता है। यह श्री सरस्वती स्तोत्रम् का प्रथम श्लोक है, पर स्वतंत्र "सरस्वती वंदना" के रूप में इसकी प्रसिद्धि स्तोत्र से भी अधिक है।

पहली दो पंक्तियाँ पूरी तरह श्वेत रंग की हैं — कुंद का फूल, चंद्रमा, हिम, हार, श्वेत वस्त्र, श्वेत कमल। परंपरा में श्वेत वर्ण को शुद्ध सत्त्व का प्रतीक कहा जाता है: जहाँ कोई मिलावट नहीं, वहीं ज्ञान ठहरता है। इसी कारण सरस्वती-पूजन में श्वेत वस्त्र, श्वेत पुष्प व श्वेत आसन का विधान बताया जाता है।

अंतिम पद इस श्लोक का हृदय माना जाता है — "निःशेषजाड्यापहा", अर्थात् जो जड़ता का निःशेष (पूर्ण, बिना बचे) नाश करती हैं। यहाँ "जाड्य" केवल मूर्खता नहीं है; परंपरा में इसका अर्थ मन की वह जड़ता भी लिया जाता है जो समझने से रोकती है। ध्यान रहे कि यह सरस्वती का वैदिक मंत्र नहीं है — वह ऋग्वेद 1.3.10 है और इस संग्रह में उसका अलग पृष्ठ है।

मंत्र

PDF डाउनलोड

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥

लिपि बदलने के लिए ऊपर देवनागरी / IAST / Roman चुनें।

उच्चारण (Pronunciation)

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥

yā kundendutuṣārahāradhavalā yā śubhravastrāvṛtā yā vīṇāvaradaṇḍamaṇḍitakarā yā śvetapadmāsanā | yā brahmācyutaśaṅkaraprabhṛtibhir devaiḥ sadā vanditā sā māṃ pātu sarasvatī bhagavatī niḥśeṣajāḍyāpahā ||

Ya Kundendu-tushara-hara-dhavala Ya Shubhra-vastravrita, Ya Vina-vara-danda-mandita-kara Ya Shveta-padmasana, Ya Brahma-achyuta-shankara-prabhritibhir Devaih Sada Vandita, Sa Mam Patu Saraswati Bhagavati Nihshesha-jadyapaha.

उच्चारण मार्गदर्शन: यह शार्दूलविक्रीडित छंद है — लंबा और लयबद्ध; इसे ठहरकर पढ़ें। "कुन्देन्दुतुषारहारधवला" सबसे लंबा समास है: "कुन्द + इन्दु + तुषार + हार + धवला" — पाँच अंशों में तोड़कर अभ्यास करें। "वीणावरदण्डमण्डितकरा" में तीन "ण" हैं, सभी मूर्धन्य। "ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिः" = "ब्रह्मा + अच्युत + शङ्कर + प्रभृतिभिः"। अंत में "निःशेषजाड्यापहा" = "निःशेष + जाड्य + अपहा"।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

कुन्दकुंद का श्वेत पुष्प
इन्दुचंद्रमा
तुषारहिम, बर्फ़
धवलाश्वेत, उज्ज्वल
शुभ्रवस्त्रावृताश्वेत वस्त्रों से आवृत
वीणावरदण्डमण्डितकराजिनका हाथ वीणा व वरदण्ड से सुशोभित है
श्वेतपद्मासनाश्वेत कमल पर विराजमान
ब्रह्माच्युतशङ्करब्रह्मा, विष्णु व शंकर
सदा वन्दितासदा वंदित
सा मां पातुवे मेरी रक्षा करें
निःशेषजाड्यापहाजड़ता का पूर्ण (बिना बचे) नाश करने वाली

अर्थ (हिन्दी)

  1. जो कुंद के पुष्प, चंद्रमा, हिम और मोती के हार के समान श्वेत हैं; जो श्वेत वस्त्रों से आवृत हैं; जिनका हाथ वीणा व वरदण्ड से सुशोभित है; जो श्वेत कमल पर विराजमान हैं; और जो ब्रह्मा, विष्णु व शंकर आदि देवों द्वारा सदा वंदित हैं — वे भगवती सरस्वती, जो जड़ता का पूर्ण नाश करती हैं, मेरी रक्षा करें।

लाभ

  • विद्यालयों की प्रार्थना-सभा व विद्यारंभ संस्कार का सर्वाधिक प्रचलित श्लोक है।
  • परंपरा में इसे बुद्धि, स्मरण-शक्ति व वाणी-शुद्धि से जोड़ा जाता है।
  • "जाड्य" — मन की जड़ता — के नाश की प्रार्थना इसका केंद्रीय भाव है।
  • बसंत पंचमी की पूजा में पाठ विहित बताया जाता है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 11 बार (एक माला)।

माला: स्फटिक माला

उत्तम समय: प्रातः व अध्ययन से पूर्व

जप का उत्तम समय

बसंत पंचमी परविद्यारंभ संस्कार व अध्ययन आरंभ परपरीक्षा या साक्षात्कार से पूर्वप्रातः प्रार्थना के समय

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

श्वेत आसन पर बैठकर, सरस्वती-विग्रह या पुस्तक-वीणा के समक्ष दीपक जलाएँ, श्वेत पुष्प अर्पित करें और 1, 3 या 11 बार पाठ करें। परंपरा में श्वेत वस्त्र धारण करने की बात कही जाती है, क्योंकि श्लोक स्वयं श्वेत वर्ण का ही वर्णन करता है। यह वंदना-श्लोक है, इसलिए इसे माला से बार-बार जपने के बजाय भाव-सहित पढ़ने का विधान बताया जाता है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
मूल ग्रंथश्री सरस्वती स्तोत्रम् — प्रथम श्लोक
स्रोत परंपराश्री सरस्वती स्तोत्रम् — प्रथम श्लोक · विद्यारंभ संस्कार व बसंत पंचमी प्रार्थना परंपरा
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

माँ सरस्वती

Goddess Saraswati

माँ सरस्वती विद्या, बुद्धि, संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी हैं।

देवता वर्गविद्या · ज्ञान · संगीत · कला · वाणी
वाहनहंस
मुख्य मंत्रॐ ऐं सरस्वत्यै नमः
माँ सरस्वती के पाठ
सभी पाठ देखें

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला — सरस्वती वंदना — सामान्य प्रश्न

संबंधित पर्व व व्रत

माँ सरस्वती भक्ति संग्रह

आरती, चालीसा, मंत्र, स्तोत्र, अष्टकम, सहस्रनाम और अन्य भक्ति पाठ