sarasvatī gāyatrī mantra
Saraswati Gayatri Mantra
माँ सरस्वती विद्या, बुद्धि, संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी हैं।
स्रोत: पारंपरिक सरस्वती गायत्री (गायत्री छंद)
ॐ वाग्देव्यै च विद्महे कामराजाय धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्॥
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oṃ vāgdevyai ca vidmahe kāmarājāya dhīmahi | tanno devī pracodayāt ||
Om Vagdevyai Cha Vidmahe Kamarajaya Dhimahi, Tanno Devi Prachodayat.
उच्चारण मार्गदर्शन: "वाग्-देव्यै", "विद्-म-हे", "धी-म-हि" स्पष्ट बोलें। "धीमहि" में "धी" दीर्घ; "प्रचोदयात्" का "त्" हल्का हलन्त।
जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।
माला: स्फटिक माला
उत्तम समय: प्रातः व बुधवार
सरस्वती जी के समक्ष श्वेत पुष्प अर्पित कर स्फटिक माला से 108 बार जप करें। बसंत पंचमी व अध्ययन-काल में जप विशेष फलदायी होता है।
Goddess Saraswati
मंत्र
आरती
चालीसा
आरती, चालीसा, मंत्र, स्तोत्र, अष्टकम, सहस्रनाम और अन्य भक्ति पाठ