वसंत पंचमी

Vasant Panchami (Saraswati Puja)

जनवरी–फरवरी

महत्व

वसंत पंचमी माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है और इसे विद्या की देवी सरस्वती के प्राकट्य का दिन माना जाता है। शास्त्रों में इसे श्री पंचमी तथा ऋषि पंचमी भी कहा गया है, और परंपरा में इस दिन सरस्वती के साथ कामदेव व विष्णु का पूजन भी बताया जाता है।

इस दिन का रंग पीला है — पीत वस्त्र, पीत पुष्प, पीली रोली और बेसन के लड्डू। यह संयोग नहीं: माघ के अंत में सरसों के खेत पीले हो जाते हैं, और पर्व उसी ऋतु-परिवर्तन का उत्सव है — शिशिर जाता है, वसंत आता है।

यही दिन विद्यारंभ के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है; बालकों का अक्षर-लेखन इसी दिन आरंभ कराया जाता है और पूजा-स्थान पर पुस्तक, कलम अथवा वाद्य-यंत्र रखकर उनका पूजन किया जाता है।

पूजन विधि व परंपरा

  • पीत अथवा श्वेत वस्त्र धारण करना
  • सरस्वती प्रतिमा का गंगाजल से अभिषेक तथा पीत पुष्प अर्पण
  • पुस्तक, कलम अथवा वाद्य-यंत्र रखकर उनका पूजन
  • बालकों का विद्यारंभ व अक्षर-लेखन आरंभ
  • सरस्वती वंदना, स्तोत्र व अष्टकम् का पाठ
  • बेसन के लड्डू अथवा पीली मिठाई का भोग
  • हवन — "ॐ श्री सरस्वत्यै नमः स्वाहा"

व्रत कथा

वसंत पंचमी की सम्पूर्ण व्रत कथा, पूजन सामग्री, चरण-दर-चरण विधि, व्रत के नियम तथा लाभ — सब कुछ एक ही पृष्ठ पर दिया गया है।

बसंत पंचमी व्रत कथा पढ़ें

तिथि / पंचांग

तिथिपंचमी
पक्षशुक्ल
माहमाघ
समय (लगभग)जनवरी–फरवरी
आराध्यमाँ सरस्वती
मूल परंपरालोक-प्रचलित सरस्वती-प्राकट्य कथा परंपरा
व्रत प्रकारतिथि व्रत (माघ शुक्ल पंचमी) — सरस्वती पूजन सहित
स्रोतhi.wikipedia.org/wiki/वसन्त_पञ्चमी — माघ शुक्ल पंचमी; सरस्वती, कामदेव व विष्णु का पूजन; पीत वस्त्र की परंपरा; "श्री पंचमी" व ऋषि पंचमी नाम · पूजन-विधि व विद्यारंभ की परंपरा — इसी संग्रह की बसंत पंचमी व्रत कथा में स्रोत सहित दर्ज
आज का पंचांग

वसंत पंचमी — सामान्य प्रश्न

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