FAQ
वसंत पंचमी — सामान्य प्रश्न
वसंत पंचमी पंचमी तिथि, शुक्ल पक्ष, माघ को मनाया जाता है। सटीक तिथि हर वर्ष पंचांग के अनुसार बदलती है — इसी संग्रह का पंचांग पृष्ठ देखें।
वसंत पंचमी माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है और इसे विद्या की देवी सरस्वती के प्राकट्य का दिन माना जाता है। शास्त्रों में इसे श्री पंचमी तथा ऋषि पंचमी भी कहा गया है, और परंपरा में इस दिन सरस्वती के साथ कामदेव व विष्णु का पूजन भी बताया जाता है।
वसंत पंचमी मुख्यतः माँ सरस्वती की आराधना का पर्व माना जाता है। इसी पृष्ठ पर उनसे जुड़े आरती, चालीसा व मंत्र भी दिए गए हैं।
परंपरा में इस दिन पीत अथवा श्वेत वस्त्र धारण करना, सरस्वती प्रतिमा का गंगाजल से अभिषेक तथा पीत पुष्प अर्पण, पुस्तक, कलम अथवा वाद्य-यंत्र रखकर उनका पूजन, बालकों का विद्यारंभ व अक्षर-लेखन आरंभ का विधान बताया जाता है। ये परंपरागत मान्यताएँ हैं; क्षेत्र और परिवार के अनुसार विधि में अंतर मिलता है।
हाँ। वसंत पंचमी से जुड़ी व्रत कथा इसी संग्रह में उपलब्ध है और इस पृष्ठ से जुड़ी हुई है। कथा हिन्दी, IAST व रोमन तीनों लिपियों में पढ़ी जा सकती है।
अनुशंसित पाठ
वसंत पंचमी के लिए अनुशंसित आरती, चालीसा, मंत्र व स्तोत्र
आराध्य देव
