श्री शीतला माता चालीसा
पाठ
गणपति-गिरिजा-सुत सुमिर, करूँ मातु गुणगान। शीतला माता वंदना, देहु आरोग्य-दान॥
जय शीतला माता सुखदाई। आरोग्य की तुम वरदाई॥
गर्दभ पर असवारी तुम्हारी। कर कलश-झाड़ू-नीम धारी॥
सूप शोभित तन शीतलकारी। रूप निरख भक्तन मन-हारी॥
ज्वर-रोग सब हरती माता। चेचक से तुम सबको बचाता॥
शीतलता तन-मन की दाता। जग की रक्षक तुम महतारी॥
जो जन तुमको नित ही ध्यावै। रोग-शोक ता के मिट जावै॥
बासी भोग तुम्हें अति प्यारा। बसोड़ा पर्व जग-हितकारा॥
भक्तन के घर शीतलता लाती। सुख-आरोग्य घर में भर जाती॥
जो नर श्रद्धा से तुम्हें ध्यावै। रोग-शोक भय निकट न आवै॥
शीतला अष्टमी व्रत जो धारे। आरोग्य-सुख माँ ता पर वारे॥
दीन-दुखी की सुनत पुकारा। पल में करती बेड़ा पारा॥
जो जन तुमको शीश नवावै। आरोग्य-सुख सहज वह पावै॥
जल अर्पण जो श्रद्धा करते। आरोग्य-सुख वे घर भरते॥
रोग-महामारी दूर भगाती। शीतलता जग में फैलाती॥
जो नर निशदिन ध्यान लगावै। शीतला-कृपा सहज वह पावै॥
मंगल-कारी विघ्न-विनाशिनि। रोग-हारिणि तुम सुख-प्रदायिनि॥
सन्तान-रक्षा तुम्हीं करती। आरोग्य-दीर्घायु तुम भरती॥
जो श्रद्धा से माँ को ध्यावै। ता के सब बिगड़े बन जावै॥
जो यह शीतला चालीसा गावै। रोग-शोक सब दूर नसावै॥
नित प्रति पाठ करे जो कोई। ता पर कृपा शीतला की होई॥
मन-इच्छित फल सब जन पावैं। आरोग्य-सुख घर में लावैं॥
शीतला-कृपा जिन पर होई। रोग-व्याधि रहे न कोई॥
बसोड़ा पर्व जो जन धारे। एक दिन पूर्व भोग सँवारे॥
जो सत भाव करे यह सेवा। रीझत तुरत शीतला देवा॥
संकट-मोचनि नाम तुम्हारा। भक्त-हृदय में नित्य निवारा॥
महिमा तुम्हरी अति अपारा। वेद-पुराण करत विस्तारा॥
दुर्गा-स्वरूपा तुम कल्याणी। रोग-नाशिनी तुम सुखदानी॥
घर-घर ज्योति तुम्हारी जागै। नर-नारी सब तुमको पागै॥
रोग-संकट जो जन पीड़े। तुम्हें सुमिर कर सब दुख छीड़े॥
शीतला-स्तुति जो जन गावै। रोग-शोक सब दूर भगावै॥
शीतला-धाम की महिमा भारी। आरोग्य-दायिनी जग-हितकारी॥
सन्तान-आरोग्य की दाता। परिवार-सुख की तुम विधाता॥
श्रद्धा-शीतलता का बल बताती। रोग-संकट सब दूर कराती॥
जो जन शीतला गुण गावै। पाप-ताप सब दूर भगावै॥
शीतला-वंदन जो जन गावै। इहलोक-परलोक सुख पावै॥
आरोग्य-सुख घर में आवै। भक्ति-शीतलता-संतोष बढ़ावै॥
रोग-संकट सब दूर हटावै। शीतला जो जन नित ध्यावै॥
आरोग्य-सुख वह सहज वह पावै। शीतला-नाम जो जन गावै॥
शीतलता-सुख-शान्ति घर में लावै। भक्ति-आरोग्य सब बढ़ावै॥
जय जय जय शीतला महारानी। आरोग्य-दायिनी कल्याणी॥
शीतला चालीसा सरल यह, पढ़े प्रेम मन लाय। रोग-शोक सब दूर हो, आरोग्य-सुख घर आय॥
अर्थ (हिन्दी)
- गिरिजा-पुत्र गणपति का स्मरण कर मैं माता का गुणगान करता हूँ; हे शीतला माता, वंदना स्वीकार कर आरोग्य का दान दीजिए।
- हे सुख देने वाली शीतला माता, आपकी जय हो; आप आरोग्य का वरदान देने वाली हैं।
- गर्दभ (गधे) पर आपकी सवारी है; हाथों में कलश, झाड़ू व नीम धारण किए हैं।
- हाथ में सूप शोभित है व आप शीतलता देने वाली हैं; आपका रूप निरखकर भक्तों का मन हर जाता है।
- हे माता, आप ज्वर व रोग सब हर लेती हैं और चेचक से सबको बचाती हैं।
- आप तन-मन की शीतलता की दात्री हैं; हे माता, आप जगत की रक्षक हैं।
- जो जन नित्य आपका ध्यान करता है, उसके रोग-शोक मिट जाते हैं।
- आपको बासी भोग अति प्रिय है; बसोड़ा (शीतला अष्टमी) पर्व जगत का हित करने वाला है।
- आप भक्तों के घर शीतलता लाती हैं; घर में सुख व आरोग्य भर जाता है।
- जो मनुष्य श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके निकट रोग, शोक व भय नहीं आते।
- जो शीतला अष्टमी का व्रत धारण करता है, हे माँ, आप उस पर आरोग्य-सुख न्योछावर करती हैं।
- आप दीन-दुखियों की पुकार सुनते ही पल भर में उनका बेड़ा पार कर देती हैं।
- जो जन आपको शीश नवाता है, वह सहज ही आरोग्य व सुख पाता है।
- जो श्रद्धा से जल अर्पण करते हैं, वे आरोग्य व सुख से घर भरते हैं।
- आप रोग व महामारी दूर भगाती हैं और जगत में शीतलता फैलाती हैं।
- जो मनुष्य दिन-रात ध्यान लगाता है, वह सहज ही शीतला-कृपा प्राप्त करता है।
- आप मंगलकारी व विघ्नों की विनाशिनी हैं; रोग हरकर सुख प्रदान करती हैं।
- आप ही सन्तान की रक्षा करती हैं और आरोग्य व दीर्घायु प्रदान करती हैं।
- जो श्रद्धा से माँ का ध्यान करता है, उसके सब बिगड़े कार्य बन जाते हैं।
- जो यह शीतला चालीसा गाता है, उसके रोग व शोक सब दूर नष्ट हो जाते हैं।
- जो कोई नित्य पाठ करता है, उस पर माँ शीतला की कृपा होती है।
- सब जन मन-इच्छित फल पाते हैं और घर में आरोग्य व सुख लाते हैं।
- जिन पर माँ शीतला की कृपा होती है, उनमें कोई रोग-व्याधि नहीं रहती।
- जो बसोड़ा पर्व मनाते हैं, वे एक दिन पूर्व ही भोग तैयार कर लेते हैं।
- जो सच्चे भाव से यह सेवा करता है, उस पर माँ शीतला तुरंत रीझ (प्रसन्न हो) जाती हैं।
- आपका नाम संकट-मोचनी है; आप भक्तों के हृदय में नित्य निवास कर कष्ट दूर करती हैं।
- आपकी महिमा अति अपार है, जिसका विस्तार वेद-पुराण करते हैं।
- आप दुर्गा-स्वरूपा कल्याणी हैं; रोग-नाशिनी व सुख देने वाली हैं।
- घर-घर में आपकी ज्योति जगती है; नर-नारी सब आपमें अनुरक्त हो जाते हैं।
- जो जन रोग-संकट से पीड़ित हैं, वे आपका स्मरण कर समस्त दुःख दूर कर लेते हैं।
- जो जन शीतला-स्तुति गाता है, वह समस्त रोग-शोक दूर भगा देता है।
- शीतला-धाम की महिमा अति महान है; आप आरोग्य-दायिनी व जगत-हितकारी हैं।
- आप सन्तान-आरोग्य की दात्री व परिवार-सुख की विधात्री हैं।
- आप श्रद्धा व शीतलता का बल बताती हैं और रोग-संकट सब दूर कराती हैं।
- जो जन शीतला माता के गुण गाता है, वह समस्त पाप-ताप दूर भगा देता है।
- जो जन शीतला-वंदना गाता है, वह इस लोक व परलोक दोनों में सुख पाता है।
- घर में आरोग्य व सुख आता है और भक्ति, शीतलता व संतोष बढ़ता है।
- जो जन शीतला माता का नित्य ध्यान करता है, वह रोग व संकट सब दूर हटा देता है।
- जो जन शीतला-नाम गाता है, वह सहज ही आरोग्य व सुख पा लेता है।
- घर में शीतलता, सुख व शांति आती है और भक्ति व आरोग्य बढ़ता है।
- हे शीतला महारानी, आपकी जय हो; आप आरोग्य देने वाली कल्याणी हैं।
- जो प्रेमपूर्वक मन लगाकर यह सरल शीतला चालीसा पढ़ता है, उसके रोग-शोक दूर होते हैं और घर में आरोग्य-सुख आता है।
लाभ
- आरोग्य की प्राप्ति होकर रोग-व्याधि से रक्षा होती है।
- परिवार में शीतलता, सुख व शांति बनी रहती है।
- चेचक, ज्वर आदि रोगों के भय से मुक्ति मिलती है।
- सन्तान की रक्षा व दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
कब करें पाठ
शीतला अष्टमी (बसोड़ा) पर · चैत्र मास में · प्रातः पूजा में
स्रोत
रचयिता: पारंपरिक. पारंपरिक शीतला माता चालीसा · गीता प्रेस, गोरखपुर — चालीसा संग्रह
