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॥ श्री ॥

शिव सहस्रनाम

सहस्रनाम · श्री शिव

पाठ

॥ ध्यानम् ॥ ॐ नमः शिवाय शान्ताय कारणत्रयहेतवे। निवेदयामि चात्मानं त्वं गतिः परमेश्वर॥

1

ॐ स्थिरः स्थाणुः प्रभुर्भीमः प्रवरो वरदो वरः। सर्वात्मा सर्वविख्यातः सर्वः सर्वकरो भवः॥

आरंभिक नाम (नाम 1–32)

  1. स्थिरः — सदा स्थिर, अचल
  2. स्थाणुः — नित्य, अविचल स्तंभ-रूप
  3. प्रभुः — सर्वसमर्थ स्वामी
  4. भीमः — भयंकर (दुष्टों हेतु)
  5. प्रवरः — सर्वश्रेष्ठ
  6. वरदः — वर देने वाले
  7. वरः — श्रेष्ठ, वरण करने योग्य
  8. सर्वात्मा — समस्त की आत्मा
  9. सर्वविख्यातः — सर्वत्र विख्यात
  10. सर्वः — सर्वस्वरूप
  11. सर्वकरः — सब कुछ करने वाले
  12. भवः — संसार-रूप, उत्पत्ति के कारण
  13. जटी — जटाधारी
  14. चर्मी — चर्म (मृगचर्म) धारण करने वाले
  15. शिखी — शिखा (चूड़ा) धारण करने वाले
  16. खड्गी — खड्ग धारण करने वाले
  17. सर्वाङ्गः — सर्व अंगस्वरूप, पूर्ण
  18. सर्वभावनः — सबको उत्पन्न व भावित करने वाले
  19. हरः — पाप व दुःख हरने वाले
  20. हरिणाक्षः — मृग जैसे नेत्रों वाले
  21. सर्वभूतहरः — प्रलय में समस्त प्राणियों का संहार करने वाले
  22. प्रभुः — सर्वसमर्थ स्वामी
  23. प्रवृत्तिः — सृष्टि-प्रवृत्ति के कारण
  24. निवृत्तिः — निवृत्ति (विरक्ति) स्वरूप
  25. नियतः — नियमबद्ध, संयत
  26. शाश्वतः — नित्य, सनातन
  27. ध्रुवः — अचल, स्थिर
  28. श्मशानवासी — श्मशान में निवास करने वाले
  29. भगवान् — षड्ऐश्वर्य-सम्पन्न
  30. खचरः — आकाश में विचरण करने वाले
  31. गोचरः — इन्द्रिय-गोचर, सर्वत्र विचरने वाले
  32. अर्दनः — दुष्टों को पीड़ित करने वाले

रूप व लीला नाम (नाम 33–63)

  1. अभिवाद्यः — वंदना के योग्य
  2. महाकर्मा — महान कर्म करने वाले
  3. तपस्वी — महान तपस्वी
  4. भूतभावनः — प्राणियों का पालन व उत्पादन करने वाले
  5. उन्मत्तवेषप्रच्छन्नः — उन्मत्त वेष में अपना स्वरूप छिपाने वाले
  6. सर्वलोकप्रजापतिः — समस्त लोकों के प्रजापति
  7. महारूपः — विशाल रूप वाले
  8. महाकायः — विशाल शरीर वाले
  9. वृषरूपः — धर्म (वृष) रूप वाले
  10. महायशाः — महान यशस्वी
  11. महात्मा — महान आत्मा
  12. सर्वभूतात्मा — समस्त प्राणियों की आत्मा
  13. विश्वरूपः — विश्व-रूप धारण करने वाले
  14. महाहनुः — विशाल हनु (ठोड़ी) वाले
  15. लोकपालः — लोकों के रक्षक
  16. अन्तर्हितात्मा — अन्तर्यामी, गूढ़ आत्मा
  17. प्रसादः — प्रसन्नता व कृपा स्वरूप
  18. हयगर्दभिः — अश्व व गर्दभ रूपों में भी व्याप्त
  19. पवित्रम् — परम पवित्र करने वाले
  20. महान् — महान, सर्वोपरि
  21. नियमः — नियमस्वरूप
  22. नियमाश्रितः — नियमों में स्थित रहने वाले
  23. सर्वकर्मा — समस्त कर्म करने वाले
  24. स्वयम्भूतः — स्वयं प्रकट होने वाले
  25. आदिः — सबके आदिकारण
  26. आदिकरः — आदि (प्रथम) सृष्टि करने वाले
  27. निधिः — समस्त निधियों के आधार
  28. सहस्राक्षः — सहस्र नेत्रों वाले
  29. विशालाक्षः — विशाल नेत्रों वाले
  30. सोमः — उमा-सहित (सोम) व चन्द्रस्वरूप
  31. नक्षत्रसाधकः — नक्षत्रों को नियंत्रित-साधने वाले

ग्रह व तप नाम (नाम 64–91)

  1. चन्द्रः — चन्द्रस्वरूप, आह्लादक
  2. सूर्यः — सूर्यस्वरूप, प्रकाशक
  3. शनिः — शनि-रूप
  4. केतुः — केतु-रूप, ध्वजस्वरूप
  5. ग्रहः — ग्रहस्वरूप, ग्रहण करने वाले
  6. ग्रहपतिः — ग्रहों के स्वामी
  7. वरः — श्रेष्ठ, वरदायी
  8. अत्रिः — अत्रि-रूप, त्रिगुणातीत
  9. अत्र्यानमस्कर्ता — अत्रि-पत्नी अनसूया द्वारा नमस्कृत
  10. मृगबाणार्पणः — यज्ञ-मृग पर बाण चढ़ाने वाले
  11. अनघः — निष्पाप, निर्दोष
  12. महातपाः — महान तप करने वाले
  13. घोरतपाः — उग्र तप करने वाले
  14. अदीनः — कभी दीन न होने वाले
  15. दीनसाधकः — दीनों का उद्धार करने वाले
  16. संवत्सरकरः — संवत्सर (काल) के रचयिता
  17. मन्त्रः — मन्त्रस्वरूप
  18. प्रमाणम् — प्रमाणस्वरूप, प्रमाता
  19. परमं तपः — परम तपस्वरूप
  20. योगी — योगयुक्त, महायोगी
  21. योज्यः — योग द्वारा प्राप्य
  22. महाबीजः — सृष्टि के महाबीज
  23. महारेताः — महान तेज (रेतस्) वाले
  24. महाबलः — महाबलशाली
  25. सुवर्णरेताः — स्वर्णमय तेज वाले
  26. सर्वज्ञः — सब कुछ जानने वाले
  27. सुबीजः — उत्तम बीजस्वरूप
  28. बीजवाहनः — सृष्टि-बीज को धारण-वहन करने वाले

गण व आयुध नाम (नाम 92–119)

  1. दशबाहुः — दस भुजाओं वाले
  2. अनिमिषः — पलक न झपकाने वाले, सदा जागृत
  3. नीलकण्ठः — नीले कण्ठ वाले (विषपान से)
  4. उमापतिः — उमा (पार्वती) के पति
  5. विश्वरूपः — विश्व-रूप
  6. स्वयंश्रेष्ठः — स्वयं ही सर्वश्रेष्ठ
  7. बलवीरः — बल व वीरता से युक्त
  8. बलः — बलस्वरूप
  9. गणः — गणस्वरूप, समूहरूप
  10. गणकर्ता — गणों के रचयिता
  11. गणपतिः — गणों के स्वामी
  12. दिग्वासाः — दिशाएँ ही जिनका वस्त्र (दिगम्बर)
  13. कामः — कामनाओं को पूर्ण करने वाले
  14. मन्त्रवित् — मन्त्रों के ज्ञाता
  15. परमः — परम, सर्वोच्च
  16. मन्त्रः — मन्त्रस्वरूप
  17. सर्वभावकरः — समस्त भावों के रचयिता
  18. हरः — समस्त पाप व दुःख हरने वाले
  19. कमण्डलुधरः — कमण्डलु धारण करने वाले
  20. धन्वी — धनुषधारी
  21. बाणहस्तः — हाथ में बाण धारण करने वाले
  22. कपालवान् — कपाल धारण करने वाले
  23. अशनी — वज्र धारण करने वाले
  24. शतघ्नी — शतघ्नी अस्त्र धारण करने वाले
  25. खड्गी — खड्गधारी
  26. पट्टिशी — पट्टिश (परशु-सदृश अस्त्र) धारण करने वाले
  27. आयुधी — समस्त आयुधों से युक्त
  28. महान् — महान, सर्वोपरि

तेज व रूप नाम (नाम 120–144)

  1. स्रुवहस्तः — हाथ में स्रुवा (यज्ञपात्र) धारण करने वाले
  2. सुरूपः — सुन्दर रूप वाले
  3. तेजः — तेजस्वरूप
  4. तेजस्करः — तेज प्रदान करने वाले
  5. निधिः — समस्त निधियों के आधार
  6. उष्णीषी — उष्णीष (शिरोवेष्टन) धारण करने वाले
  7. सुवक्त्रः — सुन्दर मुख वाले
  8. उदग्रः — अत्यंत उन्नत, उग्र
  9. विनतः — भक्तों के प्रति विनम्र
  10. दीर्घः — दीर्घ (विशाल) स्वरूप
  11. हरिकेशः — हरित (पिंगल) केश वाले
  12. सुतीर्थः — उत्तम तीर्थस्वरूप
  13. कृष्णः — आकर्षक, श्याम स्वरूप
  14. शृगालरूपः — शृगाल (सियार) रूप भी धारण करने वाले
  15. सिद्धार्थः — जिनके समस्त प्रयोजन सिद्ध हैं
  16. मुण्डः — मुण्डित-शिर रूप
  17. सर्वशुभङ्करः — सबका कल्याण करने वाले
  18. अजः — अजन्मा
  19. बहुरूपः — अनेक रूप धारण करने वाले
  20. गन्धधारी — दिव्य गंध धारण करने वाले
  21. कपर्दी — जटाजूट (कपर्द) धारण करने वाले
  22. ऊर्ध्वरेताः — ऊर्ध्वरेता, परम संयमी
  23. ऊर्ध्वलिङ्गः — ऊर्ध्वलिङ्ग स्वरूप
  24. ऊर्ध्वशायी — ऊर्ध्व (उन्नत) स्थिति में शयन करने वाले
  25. नभःस्थलः — आकाश ही जिनका स्थल है

रुद्र व काल नाम (नाम 145–177)

  1. त्रिजटी — तीन जटाओं वाले
  2. चीरवासाः — वल्कल (चीर) वस्त्र धारण करने वाले
  3. रुद्रः — दुःख व रुदन का नाश करने वाले
  4. सेनापतिः — देव-सेनाओं के नायक
  5. विभुः — सर्वव्यापी, समर्थ
  6. अहश्चरः — दिन में विचरण करने वाले
  7. नक्तञ्चरः — रात्रि में विचरण करने वाले
  8. तिग्ममन्युः — तीव्र क्रोध (मन्यु) वाले
  9. सुवर्चसः — उत्तम तेज (वर्चस्) वाले
  10. गजहा — गजासुर का वध करने वाले
  11. दैत्यहा — दैत्यों का नाश करने वाले
  12. कालः — कालस्वरूप
  13. लोकधाता — लोकों के धारक
  14. गुणाकरः — समस्त गुणों के आकर
  15. सिंहशार्दूलरूपः — सिंह व व्याघ्र रूप धारण करने वाले
  16. आर्द्रचर्माम्बरावृतः — गीले चर्म-वस्त्र से ढके हुए
  17. कालयोगी — काल के साथ योगयुक्त रहने वाले
  18. महानादः — महान नाद (ध्वनि) वाले
  19. सर्वकामः — समस्त कामनाओं के स्वरूप व दाता
  20. चतुष्पथः — चारों मार्गों (पुरुषार्थों) के स्वरूप
  21. निशाचरः — रात्रि में विचरने वाले
  22. प्रेतचारी — प्रेतों के बीच विचरण करने वाले
  23. भूतचारी — भूतगणों के साथ विचरने वाले
  24. महेश्वरः — महान ईश्वर
  25. बहुभूतः — अनेक भूतों के स्वामी
  26. बहुधरः — अनेक रूपों को धारण करने वाले
  27. स्वर्भानुः — स्वर्ग को प्रकाशित करने वाले
  28. अमितः — अपरिमित, असीम
  29. गतिः — समस्त की परम गति
  30. नृत्यप्रियः — नृत्य के प्रेमी
  31. नित्यनर्तः — सदा नृत्य करने वाले
  32. नर्तकः — नटराज, नर्तक स्वरूप
  33. सर्वलालसः — सबमें रुचि रखने वाले, सर्वप्रिय

घोर व गम्भीर नाम (नाम 178–210)

  1. घोरः — भयंकर स्वरूप
  2. महातपाः — महान तपस्वी
  3. पाशः — पाश (बंधन) स्वरूप
  4. नित्यः — शाश्वत, नित्य
  5. गिरिरुहः — पर्वत पर स्थित रहने वाले
  6. नभः — आकाशस्वरूप
  7. सहस्रहस्तः — सहस्र हाथों वाले
  8. विजयः — विजयस्वरूप
  9. व्यवसायः — दृढ़ संकल्प स्वरूप
  10. अतन्द्रितः — आलस्यरहित, सदा सजग
  11. अधर्षणः — जिसे कोई पराभूत न कर सके
  12. धर्षणात्मा — दुष्टों का दमन करने वाले
  13. यज्ञहा — दक्ष-यज्ञ का विध्वंस करने वाले
  14. कामनाशकः — कामदेव का नाश करने वाले
  15. दक्षयागापहारी — दक्ष के यज्ञ को नष्ट करने वाले
  16. सुसहः — सबको सहने वाले, सहनशील
  17. मध्यमः — मध्यस्थ, सर्वत्र समभाव
  18. तेजोपहारी — शत्रुओं का तेज हरने वाले
  19. बलहा — दुष्टों का बल नष्ट करने वाले
  20. मुदितः — सदा प्रसन्न रहने वाले
  21. अर्थः — समस्त पुरुषार्थों के स्वरूप
  22. अजितः — अपराजेय
  23. अवरः — सबसे निकट, आश्रयदाता
  24. गम्भीरघोषः — गंभीर ध्वनि वाले
  25. गम्भीरः — गहन, अथाह
  26. गम्भीरबलवाहनः — गंभीर बल व वाहन वाले
  27. न्यग्रोधरूपः — वटवृक्ष-रूप
  28. न्यग्रोधः — वटवृक्ष स्वरूप, आश्रयदाता
  29. वृक्षपर्णस्थितिः — वृक्ष-पत्र पर स्थित रहने वाले
  30. विभुः — सर्वव्यापक
  31. सुतीक्ष्णदशनः — तीक्ष्ण दाँतों वाले
  32. महाकायः — विशाल शरीर वाले
  33. महाननः — विशाल मुख वाले

यज्ञ व तेज नाम (नाम 211–244)

  1. विष्वक्सेनः — सर्वत्र व्याप्त सेना वाले
  2. हरिः — पाप हरने वाले, हरि-रूप
  3. यज्ञः — यज्ञस्वरूप
  4. संयुगापीडवाहनः — युद्ध में पीड़ादायक वाहन वाले
  5. तीक्ष्णतापः — तीव्र ताप (तेज) वाले
  6. हर्यश्वः — हरित अश्वों वाले
  7. सहायः — सबके सहायक
  8. कर्मकालवित् — कर्म व काल के ज्ञाता
  9. विष्णुप्रसादितः — विष्णु द्वारा प्रसन्न किए गए
  10. यज्ञः — यज्ञस्वरूप
  11. समुद्रः — समुद्र के समान गंभीर
  12. वडवामुखः — वडवानल (समुद्राग्नि) रूप
  13. हुताशनसहायः — अग्नि के सहायक
  14. प्रशान्तात्मा — परम शांत आत्मा
  15. हुताशनः — अग्निस्वरूप, हवि का भोक्ता
  16. उग्रतेजाः — उग्र तेज वाले
  17. महातेजाः — महान तेजस्वी
  18. जन्यः — सबके उत्पादक
  19. विजयकालवित् — विजय के उपयुक्त काल को जानने वाले
  20. ज्योतिषामयनम् — ज्योतिर्गणों की गति-पथ स्वरूप
  21. सिद्धिः — सिद्धिस्वरूप
  22. सर्वविग्रहः — समस्त रूपों के धारक
  23. शिखी — शिखाधारी
  24. मुण्डी — मुण्डित शिर वाले
  25. जटी — जटाधारी
  26. ज्वाली — ज्वालामय, तेजस्वी
  27. मूर्तिजः — मूर्त रूप में प्रकट होने वाले
  28. मूर्धगः — सर्वोच्च (मस्तक) पर स्थित
  29. बली — बलवान
  30. वेणवी — वेणु (बाँसुरी/दण्ड) धारण करने वाले
  31. पणवी — पणव (ढोल) धारण करने वाले
  32. ताली — ताल (झाँझ) धारण करने वाले
  33. खली — खल (अधमों) का दमन करने वाले
  34. कालकटङ्कटः — काल को भी भयभीत करने वाले उग्र रूप

प्रजापति व गुहा नाम (नाम 245–279)

  1. नक्षत्रविग्रहमतिः — नक्षत्र-रूप शरीर व बुद्धि वाले
  2. गुणबुद्धिः — गुणों की बुद्धि-स्वरूप
  3. लयः — प्रलय (लय) स्वरूप
  4. गमः — सर्वत्र पहुँचने वाले
  5. प्रजापतिः — प्रजाओं के स्वामी
  6. विश्वबाहुः — विश्वव्यापी भुजाओं वाले
  7. विभागः — सबका विभाजन करने वाले
  8. सर्वगोमुखः — सब ओर मुख वाले
  9. विमोचनः — बंधनों से मुक्त करने वाले
  10. सुसरणः — सुगम शरण देने वाले
  11. हिरण्यकवचोद्भवः — स्वर्ण-कवच में प्रकट होने वाले
  12. मेढ्रजः — सृष्टि-बीज से प्रकट
  13. बलचारी — बलपूर्वक विचरण करने वाले
  14. महीचारी — पृथ्वी पर विचरण करने वाले
  15. स्रुतः — सर्वत्र विख्यात, श्रुत
  16. सर्वतूर्यनिनादी — समस्त वाद्यों की ध्वनि करने वाले
  17. सर्वातोद्यपरिग्रहः — समस्त वाद्य-यंत्रों को ग्रहण करने वाले
  18. व्यालरूपः — सर्प-रूप धारण करने वाले
  19. गुहावासी — गुहा (हृदय-गुफा) में निवास करने वाले
  20. गुहः — गूढ़, गुप्त स्वरूप
  21. माली — माला धारण करने वाले
  22. तरङ्गवित् — सृष्टि-तरंगों (गति) के ज्ञाता
  23. त्रिदशः — देवस्वरूप (तीनों अवस्थाओं में व्याप्त)
  24. त्रिकालधृक् — तीनों कालों को धारण करने वाले
  25. कर्म — समस्त कर्मों के स्वरूप
  26. सर्वबन्धविमोचनः — समस्त बंधनों से मुक्त करने वाले
  27. असुरेन्द्राणां बन्धनः — असुर-राजाओं को बाँधने वाले
  28. युधि शत्रुविनाशनः — युद्ध में शत्रुओं का नाश करने वाले
  29. साङ्ख्यप्रसादः — सांख्य-ज्ञान से प्रसन्न होने वाले
  30. दुर्वासाः — दुर्वासा-रूप, कठोर वस्त्र वाले
  31. सर्वसाधुनिषेवितः — समस्त साधुओं द्वारा सेवित
  32. प्रस्कन्दनः — शत्रुओं को परास्त करने वाले
  33. विभागज्ञः — विभाजन (अंश) के ज्ञाता
  34. अतुल्यः — जिसकी कोई तुलना नहीं
  35. यज्ञभागवित् — यज्ञ-भाग के ज्ञाता

सर्वधारी व बल नाम (नाम 280–305)

  1. सर्ववासः — सबमें निवास करने वाले
  2. सर्वचारी — सर्वत्र विचरण करने वाले
  3. दुर्वासाः — कठिन तप व वेष वाले
  4. वासवः — इन्द्र-रूप, ऐश्वर्यवान
  5. अमरः — अमर, मृत्युरहित
  6. हैमः — स्वर्णमय
  7. हेमकरः — स्वर्ण उत्पन्न करने वाले
  8. यज्ञः — यज्ञस्वरूप
  9. सर्वधारी — सबको धारण करने वाले
  10. धरोत्तमः — धारकों में सर्वोत्तम
  11. लोहिताक्षः — लाल नेत्रों वाले
  12. महाक्षः — विशाल नेत्रों वाले
  13. विजयाक्षः — विजयी नेत्रों वाले
  14. विशारदः — सर्व विद्याओं में निपुण
  15. सङ्ग्रहः — सबका संग्रह करने वाले
  16. निग्रहः — दुष्टों का निग्रह करने वाले
  17. कर्ता — समस्त कर्मों के कर्ता
  18. सर्पचीरनिवासनः — सर्प व वल्कल वस्त्र धारण करने वाले
  19. मुख्यः — प्रधान, सर्वप्रमुख
  20. अमुख्यः — गौण रूपों में भी व्याप्त
  21. देहः — समस्त देहों के स्वरूप
  22. काहलिः — रणवाद्य (काहल) स्वरूप
  23. सर्वकामदः — समस्त कामनाएँ पूर्ण करने वाले
  24. सर्वकामप्रसादः — समस्त कामनाओं में कृपा करने वाले
  25. सुबलः — उत्तम बल वाले
  26. बलरूपधृत् — बल-रूप को धारण करने वाले

सर्वद व वेग नाम (नाम 306–329)

  1. सर्वकामवरः — समस्त कामनाओं का श्रेष्ठ वर देने वाले
  2. सर्वदः — सब कुछ देने वाले
  3. सर्वतोमुखः — सब ओर मुख वाले
  4. आकाशनिर्विरूपः — आकाश के समान निराकार
  5. निपाती — दुष्टों पर आक्रमण करने वाले
  6. अवशः — किसी के वश में न आने वाले, स्वतंत्र
  7. खगः — आकाश में गमन करने वाले
  8. रौद्ररूपः — रौद्र (भयंकर) रूप वाले
  9. अंशुः — किरण-स्वरूप
  10. आदित्यः — सूर्य-स्वरूप
  11. बहुरश्मिः — अनेक किरणों वाले
  12. सुवर्चसी — उत्तम तेज वाले
  13. वसुवेगः — वसुओं के समान वेग वाले
  14. महावेगः — महान वेग वाले
  15. मनोवेगः — मन के समान वेगवान
  16. निशाचरः — रात्रि में विचरने वाले
  17. सर्ववासी — सबमें निवास करने वाले
  18. श्रियावासी — श्री (ऐश्वर्य) में निवास करने वाले
  19. उपदेशकरः — ज्ञान का उपदेश देने वाले
  20. अकरः — कर्मफल से अलिप्त, निष्क्रिय स्वरूप
  21. मुनिः — मननशील, मौनी
  22. आत्मनिरालोकः — आत्मा में ही दृष्टि रखने वाले
  23. सम्भग्नः — अहंकार आदि को भग्न करने वाले
  24. सहस्रदः — सहस्रों वरदान देने वाले

काम व सिद्धि नाम (नाम 330–356)

  1. पक्षी — पक्षी-रूप (गरुड़ आदि)
  2. पक्षरूपः — पक्ष (पंख) रूप धारण करने वाले
  3. अतिदीप्तः — अत्यंत प्रकाशमान
  4. विशाम्पतिः — प्रजा के स्वामी
  5. उन्मादः — उन्माद (परम आनन्द) स्वरूप
  6. मदनः — आह्लाद उत्पन्न करने वाले
  7. कामः — इच्छित फल देने वाले
  8. अश्वत्थः — अश्वत्थ (पीपल) वृक्ष स्वरूप
  9. अर्थकरः — अर्थ (प्रयोजन) सिद्ध करने वाले
  10. यशः — यशस्वरूप
  11. वामदेवः — वामदेव-रूप, सुन्दर देव
  12. वामः — सुन्दर, प्रिय
  13. प्राग्दक्षिणः — पूर्व व दक्षिण दिशाओं में व्याप्त
  14. वामनः — वामन (लघु) रूप धारण करने वाले
  15. सिद्धयोगी — सिद्ध योगी
  16. महर्षिः — महान ऋषि
  17. सिद्धार्थः — जिनके प्रयोजन सिद्ध हैं
  18. सिद्धसाधकः — सिद्धि प्रदान करने वाले
  19. भिक्षुः — भिक्षु-रूप
  20. भिक्षुरूपः — भिक्षु का वेष धारण करने वाले
  21. विपणः — व्यापार-रहित, निःस्पृह
  22. मृदुः — कोमल स्वभाव वाले
  23. अव्ययः — अविनाशी
  24. महासेनः — महान सेना वाले
  25. विशाखः — विशाखा-रूप (कार्तिकेय से संबद्ध)
  26. षष्टिभागः — काल के षष्टि अंशों के स्वरूप
  27. गवाम्पतिः — गौओं व किरणों के स्वामी

नन्दी व ईशान नाम (नाम 357–389)

  1. वज्रहस्तः — हाथ में वज्र धारण करने वाले
  2. विष्कम्भी — सबको धारण-रोक रखने वाले
  3. चमूस्तम्भनः — शत्रु-सेना को स्तंभित करने वाले
  4. वृत्तावृत्तकरः — सृष्टि-चक्र को चलाने व रोकने वाले
  5. तालः — ताल (लय) स्वरूप
  6. मधुः — मधुर स्वभाव वाले
  7. मधुकलोचनः — मधुर नेत्रों वाले
  8. वाचस्पत्यः — वाणी के स्वामी
  9. वाजसनः — अन्न व बल प्रदान करने वाले
  10. नित्यमाश्रमपूजितः — सभी आश्रमों में नित्य पूजित
  11. ब्रह्मचारी — ब्रह्मचर्य में स्थित
  12. लोकचारी — लोकों में विचरण करने वाले
  13. सर्वचारी — सर्वत्र विचरने वाले
  14. विचारवित् — विवेक व विचार के ज्ञाता
  15. ईशानः — सर्वशासक, ईशान-रूप
  16. ईश्वरः — सर्वसमर्थ नियंता
  17. कालः — कालस्वरूप
  18. निशाचारी — रात्रि में विचरने वाले
  19. पिनाकवान् — पिनाक धनुष धारण करने वाले
  20. निमित्तस्थः — समस्त कारणों में स्थित
  21. निमित्तम् — सृष्टि के निमित्त-कारण
  22. नन्दिः — आनन्द-स्वरूप
  23. नन्दिकरः — आनन्द प्रदान करने वाले
  24. हरिः — दुःख हरने वाले
  25. नन्दीश्वरः — नन्दी के स्वामी
  26. नन्दी — आनन्दमय, नन्दी-रूप
  27. नन्दनः — सबको आनन्दित करने वाले
  28. नन्दिवर्धनः — आनन्द को बढ़ाने वाले
  29. भगहारी — भग (दक्ष-यज्ञ में) का हरण करने वाले
  30. निहन्ता — दुष्टों का संहार करने वाले
  31. कालः — कालस्वरूप, संहारक
  32. ब्रह्मा — ब्रह्मा-रूप, सृष्टिकर्ता
  33. पितामहः — समस्त लोकों के पितामह

लिङ्ग व ब्रह्म नाम (नाम 390–424)

  1. चतुर्मुखः — चार मुख वाले (ब्रह्मा-रूप)
  2. महालिङ्गः — महान लिङ्ग-स्वरूप
  3. चारुलिङ्गः — सुन्दर लिङ्ग-स्वरूप
  4. लिङ्गाध्यक्षः — समस्त लिङ्गों (चिह्नों) के अध्यक्ष
  5. सुराध्यक्षः — देवताओं के अध्यक्ष
  6. योगाध्यक्षः — योग के अध्यक्ष
  7. युगावहः — युगों को प्रवर्तित करने वाले
  8. बीजाध्यक्षः — सृष्टि-बीज के अध्यक्ष
  9. बीजकर्ता — सृष्टि-बीज के रचयिता
  10. अध्यात्मानुगतः — अध्यात्म-ज्ञान में अनुस्यूत
  11. बलः — बलस्वरूप
  12. इतिहासः — इतिहास-स्वरूप
  13. सकल्पः — कल्प (विधि) सहित
  14. गौतमः — गौतम-रूप ऋषि
  15. निशाकरः — चन्द्र-स्वरूप (रात्रि-कर्ता)
  16. दम्भः — दुष्टों के प्रति दम्भ-स्वरूप
  17. अदम्भः — निष्कपट, दम्भरहित
  18. वैदम्भः — दम्भियों का दमन करने वाले
  19. वश्यः — भक्तों के वश में रहने वाले
  20. वशकरः — सबको वश में करने वाले
  21. कलिः — कलह व संघर्ष के स्वरूप
  22. लोककर्ता — लोकों के रचयिता
  23. पशुपतिः — समस्त जीवों (पशुओं) के स्वामी
  24. महाकर्ता — महान कर्ता
  25. अनौषधः — जिनके लिए कोई औषधि-उपाय अपेक्षित नहीं
  26. अक्षरम् — अविनाशी अक्षर-ब्रह्म
  27. परमं ब्रह्म — परब्रह्म
  28. बलवत् — बलयुक्त
  29. शक्रः — सामर्थ्यवान (इन्द्र-रूप)
  30. नीतिः — नीति-स्वरूप
  31. अनीतिः — नीति से परे, मायातीत
  32. शुद्धात्मा — परम शुद्ध आत्मा
  33. शुद्धः — निर्मल, पवित्र
  34. मान्यः — सबके लिए माननीय
  35. गतागतः — आवागमन (गति-आगति) के स्वरूप

अग्नि व महाकाय नाम (नाम 425–473)

  1. बहुप्रसादः — बहुत प्रसन्न होने व कृपा करने वाले
  2. सुस्वप्नः — शुभ स्वप्न देने वाले
  3. दर्पणः — दर्पण के समान सब प्रतिबिंबित करने वाले
  4. अमित्रजित् — शत्रुओं को जीतने वाले
  5. वेदकारः — वेदों के रचयिता
  6. मन्त्रकारः — मन्त्रों के रचयिता
  7. विद्वान् — सर्वज्ञ विद्वान
  8. समरमर्दनः — युद्ध में शत्रुओं का मर्दन करने वाले
  9. महामेघनिवासी — महामेघों में निवास करने वाले
  10. महाघोरः — अत्यंत घोर रूप वाले
  11. वशीकरः — सबको वश में करने वाले
  12. अग्निः — अग्नि-स्वरूप
  13. ज्वालः — ज्वाला-स्वरूप
  14. महाज्वालः — महान ज्वाला वाले
  15. अतिधूम्रः — अत्यंत धूम्रवर्ण वाले
  16. हुतः — हवि (आहुति) स्वरूप
  17. हविः — यज्ञ-हवि स्वरूप
  18. वृषणः — धर्म व कामनाओं की वर्षा करने वाले
  19. शङ्करः — कल्याण करने वाले
  20. नित्यः — शाश्वत
  21. वर्चस्वी — तेजस्वी
  22. धूमकेतनः — धूम-ध्वज (अग्नि) वाले
  23. नीलः — नील-वर्ण (कण्ठ) वाले
  24. अङ्गलुब्धः — अपने स्वरूप में रमे रहने वाले
  25. शोभनः — अत्यंत शोभायमान
  26. निरवग्रहः — किसी से न रुकने वाले, स्वतंत्र
  27. स्वस्तिदः — कल्याण (स्वस्ति) देने वाले
  28. स्वस्तिभावः — मंगल-स्वरूप
  29. भागी — यज्ञ-भाग के अधिकारी
  30. भागकरः — सबको उनका भाग देने वाले
  31. लघुः — सूक्ष्म व सुगम स्वरूप
  32. उत्सङ्गः — सबका आश्रय (गोद) स्वरूप
  33. महाङ्गः — विशाल अंगों वाले
  34. महागर्भपरायणः — महान गर्भ (सृष्टि-मूल) में स्थित
  35. कृष्णवर्णः — श्याम वर्ण वाले
  36. सुवर्णः — स्वर्ण के समान कांति वाले
  37. इन्द्रियम् — समस्त देहधारियों की इन्द्रिय-शक्ति स्वरूप
  38. महापादः — विशाल चरणों वाले
  39. महाहस्तः — विशाल हाथों वाले
  40. महाकायः — विशाल शरीर वाले
  41. महायशाः — महान यश वाले
  42. महामूर्धा — विशाल मस्तक वाले
  43. महामात्रः — महान परिमाण वाले
  44. महानेत्रः — विशाल नेत्रों वाले
  45. निशालयः — रात्रि (तमस्) के आश्रय
  46. महान्तकः — महान अन्तक (मृत्यु को भी नियंत्रित करने वाले)
  47. महाकर्णः — विशाल कानों वाले
  48. महोष्ठः — विशाल ओष्ठों वाले
  49. महाहनुः — विशाल हनु वाले

अन्तरात्मा व महामुख नाम (नाम 474–501)

  1. महावक्षाः — विशाल वक्षःस्थल वाले
  2. महोरस्कः — विशाल छाती वाले
  3. अन्तरात्मा — सबकी अन्तरात्मा
  4. मृगालयः — मृगों के आश्रय (वनवासी)
  5. लम्बनः — सबको अवलंबन देने वाले
  6. लम्बितोष्ठः — लंबे ओष्ठ वाले
  7. महामायः — महामाया के स्वामी
  8. पयोनिधिः — समुद्र-स्वरूप, करुणा-निधि
  9. महादन्तः — विशाल दाँतों वाले
  10. महादंष्ट्रः — विशाल दाढ़ों वाले
  11. महाजिह्वः — विशाल जिह्वा वाले
  12. महामुखः — विशाल मुख वाले
  13. महानखः — विशाल नखों वाले
  14. महारोमा — विशाल रोमों वाले
  15. महाकेशः — घने केशों वाले
  16. महाजटः — विशाल जटाओं वाले
  17. प्रसन्नः — सदा प्रसन्न रहने वाले
  18. प्रसादः — कृपा-स्वरूप
  19. प्रत्ययः — ज्ञान व विश्वास के स्वरूप
  20. गिरिसाधनः — पर्वत (कैलास) को साधन बनाने वाले
  21. स्नेहनः — स्नेह (प्रेम) करने वाले
  22. अस्नेहनः — आसक्ति-रहित
  23. अजितः — अपराजेय
  24. महामुनिः — महान मननशील मुनि
  25. वृक्षाकारः — वृक्ष के समान स्थिर व आश्रयदाता
  26. वृक्षकेतुः — वृक्ष-ध्वज वाले
  27. अनलः — अग्नि-स्वरूप
  28. वायुवाहनः — वायु को वाहन बनाने वाले

वेद व प्रकाश नाम (नाम 502–535)

  1. गण्डली — गणसमूह से युक्त
  2. मेरुधामा — मेरु पर्वत को धाम बनाने वाले
  3. देवाधिपतिः — देवताओं के अधिपति
  4. अथर्वशीर्षः — अथर्ववेद ही जिनका शीर्ष
  5. सामास्यः — सामवेद ही जिनका मुख
  6. ऋक्सहस्रामितेक्षणः — सहस्र ऋचाओं रूपी असीम नेत्रों वाले
  7. यजुःपादभुजः — यजुर्वेद ही जिनके पाद-भुज
  8. गुह्यः — गूढ़, रहस्यमय
  9. प्रकाशः — स्वयं-प्रकाश स्वरूप
  10. जङ्गमः — चराचर में व्याप्त, गतिशील
  11. अमोघार्थः — जिनका प्रयोजन कभी निष्फल नहीं
  12. प्रसादः — कृपा-स्वरूप
  13. अभिगम्यः — सहज प्राप्य
  14. सुदर्शनः — सुन्दर दर्शन वाले
  15. उपकारः — सबका उपकार करने वाले
  16. प्रियः — सबके प्रिय
  17. सर्वः — सर्वस्वरूप
  18. कनकः — स्वर्ण के समान कांतिमान
  19. काञ्चनच्छविः — स्वर्ण-सी छवि वाले
  20. नाभिः — सृष्टि के केन्द्र-स्वरूप
  21. नन्दिकरः — आनन्द देने वाले
  22. भावः — सत्ता व भाव-स्वरूप
  23. पुष्करस्थपतिः — पुष्कर (आकाश/जल) के स्वामी
  24. स्थिरः — अचल, स्थिर
  25. द्वादशः — द्वादश आदित्यों के स्वरूप
  26. त्रासनः — दुष्टों को भयभीत करने वाले
  27. आद्यः — सबसे आदि
  28. यज्ञः — यज्ञ-स्वरूप
  29. यज्ञसमाहितः — यज्ञ में समाहित (स्थित)
  30. नक्तम् — रात्रि-स्वरूप
  31. कलिः — कलह-स्वरूप
  32. कालः — काल-स्वरूप
  33. मकरः — मकर-स्वरूप
  34. कालपूजितः — काल द्वारा भी पूजित

भस्म व शुचि नाम (नाम 536–571)

  1. सगणः — गणों सहित रहने वाले
  2. गणकारः — गणों के रचयिता
  3. भूतवाहनसारथिः — भूतगणों के वाहन व सारथि
  4. भस्मशयः — भस्म पर शयन करने वाले
  5. भस्मगोप्ता — भस्म से रक्षा करने वाले
  6. भस्मभूतः — भस्म-रूप (विभूति) धारण करने वाले
  7. तरुः — वृक्ष-स्वरूप, आश्रयदाता
  8. गणः — गण-स्वरूप
  9. लोकपालः — लोकों के रक्षक
  10. लोकः — समस्त लोक-स्वरूप
  11. महात्मा — महान आत्मा
  12. सर्वपूजितः — सबके द्वारा पूजित
  13. शुक्लः — श्वेत, शुद्ध स्वरूप
  14. त्रिशुक्लः — त्रिगुण से शुद्ध
  15. सम्पन्नः — समस्त ऐश्वर्य से सम्पन्न
  16. शुचिः — परम पवित्र
  17. भूतनिषेवितः — समस्त प्राणियों द्वारा सेवित
  18. आश्रमस्थः — समस्त आश्रमों में स्थित
  19. क्रियावस्थः — समस्त क्रियाओं में स्थित
  20. विश्वकर्ममतिः — विश्वकर्मा-सदृश बुद्धि वाले
  21. वरः — श्रेष्ठ, वरदायी
  22. विशालशाखः — विशाल शाखाओं (भुजाओं) वाले
  23. ताम्रोष्ठः — ताम्र-वर्ण ओष्ठ वाले
  24. अम्बुजालः — जल-समूह (सृष्टि) के आधार
  25. सुनिश्चलः — अत्यंत अचल, स्थिर
  26. कपिलः — कपिल-वर्ण (पिंगल) वाले
  27. कपिशः — भूरे-वर्ण वाले
  28. शुक्लः — श्वेत स्वरूप
  29. आयुः — आयु-स्वरूप (जीवन-शक्ति)
  30. परः — परम, सर्वोच्च
  31. अपरः — अपर (निकटतम) भी
  32. गन्धर्वः — गन्धर्व-स्वरूप
  33. अदितिः — अदिति-रूप, अखण्ड
  34. तार्क्ष्यः — गरुड़-स्वरूप
  35. सुविज्ञेयः — भक्तों द्वारा सहज जान लिए जाने वाले
  36. सुशारदः — शरद् ऋतु-सा निर्मल, ज्ञानप्रद

देव व वंश नाम (नाम 572–605)

  1. परश्वधायुधः — परशु (फरसा) आयुध धारण करने वाले
  2. देवः — देव-स्वरूप, द्योतमान
  3. अनुकारी — भक्तों का अनुसरण करने वाले
  4. सुबान्धवः — सबके सच्चे बन्धु
  5. तुम्बवीणः — तुम्बी की वीणा धारण करने वाले
  6. महाक्रोधः — दुष्टों पर महान क्रोध करने वाले
  7. ऊर्ध्वरेताः — परम संयमी (ऊर्ध्वरेता)
  8. जलेशयः — जल में शयन करने वाले
  9. उग्रः — उग्र स्वरूप
  10. वंशकरः — वंश (परम्परा) चलाने वाले
  11. वंशः — वंश-स्वरूप
  12. वंशनादः — वंशी (वेणु) का नाद करने वाले
  13. अनिन्दितः — निन्दा-रहित, निर्दोष
  14. सर्वाङ्गरूपः — समस्त अंगों में व्याप्त रूप वाले
  15. मायावी — माया के स्वामी
  16. सुहृत् — सबके हितैषी मित्र
  17. अनिलः — वायु-स्वरूप
  18. अनलः — अग्नि-स्वरूप
  19. बन्धनः — दुष्टों को बाँधने वाले
  20. बन्धकर्ता — संसार-बन्धन रचने वाले
  21. सुबन्धनविमोचनः — बन्धनों से सुगमता से मुक्त करने वाले
  22. यज्ञारिः — दक्ष-यज्ञ के शत्रु
  23. कामारिः — कामदेव के शत्रु
  24. महादंष्ट्रः — विशाल दाढ़ों वाले
  25. महायुधः — महान आयुध वाले
  26. बहुधानिन्दितः — अज्ञानियों द्वारा अनेक प्रकार से अनिन्दित
  27. शर्वः — संहारकर्ता
  28. शङ्करः — कल्याण करने वाले
  29. शङ्करः — सुख व मंगल देने वाले
  30. अधनः — धन-रहित (अपरिग्रही)
  31. अमरेशः — देवताओं के ईश
  32. महादेवः — देवों के देव, महादेव
  33. विश्वदेवः — समस्त विश्व के देव
  34. सुरारिहा — देव-शत्रुओं (असुरों) का नाश करने वाले

देवरूप व ग्रह नाम (नाम 606–643)

  1. अहिर्बुध्न्यः — अहिर्बुध्न्य (रुद्र) स्वरूप
  2. अनिलाभः — वायु के समान आभा वाले
  3. चेकितानः — सर्वज्ञ, चैतन्यमय
  4. हविः — यज्ञ-हवि स्वरूप
  5. अजैकपात् — अजैकपात् (रुद्र) स्वरूप
  6. कापाली — कपाल धारण करने वाले
  7. त्रिशङ्कुः — त्रिशंकु-रूप, तीन लोकों में स्थित
  8. अजितः — अपराजेय
  9. शिवः — परम कल्याणकारी
  10. धन्वन्तरिः — धन्वन्तरि-रूप (आरोग्यदाता)
  11. धूमकेतुः — धूम-ध्वज (अग्नि/केतु) स्वरूप
  12. स्कन्दः — स्कन्द (कार्तिकेय) स्वरूप
  13. वैश्रवणः — कुबेर-स्वरूप
  14. धाता — सबके धारक व विधाता
  15. शक्रः — इन्द्र-स्वरूप
  16. विष्णुः — विष्णु-स्वरूप, सर्वव्यापी
  17. मित्रः — सबके मित्र
  18. त्वष्टा — रूपों के निर्माता
  19. ध्रुवः — अचल, ध्रुव
  20. धरः — सबको धारण करने वाले
  21. प्रभावः — समस्त ऐश्वर्य के मूल
  22. सर्वगः — सर्वत्र व्याप्त
  23. वायुः — वायु-स्वरूप
  24. अर्यमा — अर्यमा (पितरों के अधिपति) स्वरूप
  25. सविता — सृष्टि के प्रेरक सूर्य
  26. रविः — सूर्य-स्वरूप
  27. उषङ्गुः — भक्तों के प्रति हितकारी
  28. विधाता — सृष्टि-विधान करने वाले
  29. मान्धाता — जगत् का मनन व धारण करने वाले
  30. भूतभावनः — प्राणियों का पालन-पोषण करने वाले
  31. विभुः — सर्वव्यापक
  32. वर्णविभावी — वर्णों (रूप-रंग) को प्रकट करने वाले
  33. सर्वकामगुणावहः — समस्त कामनाओं व गुणों को प्रदान करने वाले
  34. पद्मनाभः — नाभि-कमल वाले
  35. महागर्भः — महान गर्भ (सृष्टि-मूल) वाले
  36. चन्द्रवक्त्रः — चन्द्र-सा मुख वाले
  37. अनिलः — वायु-स्वरूप
  38. अनलः — अग्नि-स्वरूप

अन्तिम नाम (नाम 644–694)

  1. बलवान् — बलशाली
  2. उपशान्तः — परम शांत
  3. पुराणः — सनातन, अति प्राचीन
  4. पुण्यचञ्चुरी — पुण्य में निपुण व पुण्यदायी
  5. कुरुकर्ता — सत्कर्म करने व कराने वाले
  6. कुरुवासी — कुरुक्षेत्र आदि पवित्र स्थलों में निवास करने वाले
  7. कुरुभूतः — समस्त कर्मों के रूप में विद्यमान
  8. गुणौषधः — गुणों रूपी भवरोग की औषधि
  9. सर्वाशयः — सबके आश्रय व अन्तःकरण में स्थित
  10. दर्भचारी — कुश (दर्भ) पर विचरण करने वाले तपस्वी
  11. सर्वेषां प्राणिनां पतिः — समस्त प्राणियों के स्वामी
  12. देवदेवः — देवों के भी देव
  13. सुखासक्तः — परम आनन्द में स्थित
  14. सत् — सत्-स्वरूप (नित्य सत्ता)
  15. असत् — असत् (परिवर्तनशील) रूप में भी व्याप्त
  16. सर्वरत्नवित् — समस्त रत्नों (मूल्यवान तत्वों) के ज्ञाता
  17. कैलासगिरिवासी — कैलास पर्वत पर निवास करने वाले
  18. हिमवद्गिरिसंश्रयः — हिमालय पर्वत का आश्रय लेने वाले
  19. कूलहारी — तटों (मर्यादाओं) का संहार करने वाले
  20. कूलकर्ता — तट (आश्रय व मर्यादा) रचने वाले
  21. बहुविद्यः — अनेक विद्याओं के ज्ञाता
  22. बहुप्रदः — बहुत कुछ प्रदान करने वाले
  23. वणिजः — व्यापारी (कर्मफल का लेन-देन करने वाले) स्वरूप
  24. वर्धकी — सृष्टि का निर्माण-संवर्धन करने वाले
  25. वृक्षः — वृक्ष-स्वरूप, आश्रयदाता
  26. बकुलः — बकुल वृक्ष-स्वरूप
  27. चन्दनः — चन्दन के समान शीतल व सुगंधित
  28. छदः — सबको ढकने व आश्रय देने वाले
  29. सारग्रीवः — दृढ़ (सारयुक्त) ग्रीवा वाले
  30. महाजत्रुः — विशाल कंधों वाले
  31. अलोलः — चंचलता-रहित, स्थिरचित्त
  32. महौषधः — भवरोग की महान औषधि
  33. सिद्धार्थकारी — भक्तों के प्रयोजन सिद्ध करने वाले
  34. सिद्धार्थः — जिनके समस्त प्रयोजन सिद्ध हैं
  35. छन्दोव्याकरणोत्तरः — छन्द व व्याकरण में सर्वोत्तम
  36. सिंहनादः — सिंह-गर्जना करने वाले
  37. सिंहदंष्ट्रः — सिंह जैसी दाढ़ों वाले
  38. सिंहगः — सिंह पर गमन करने वाले
  39. सिंहवाहनः — सिंह को वाहन बनाने वाले
  40. प्रभावात्मा — प्रभावशाली आत्मा
  41. जगत्कालस्थालः — जगत् व काल के आधार
  42. लोकहितः — लोकों का हित करने वाले
  43. तरुः — वृक्ष-सा आश्रयदाता
  44. सारङ्गः — सार-तत्व में रमने वाले
  45. नवचक्राङ्गः — नौ चक्रों (शरीर-केन्द्रों) में व्याप्त
  46. केतुमाली — तेज-किरणों की माला वाले
  47. सभावनः — सबको भावित (उत्पन्न-पालित) करने वाले
  48. भूतालयः — समस्त प्राणियों के आश्रय
  49. भूतपतिः — समस्त भूतों के स्वामी
  50. अहोरात्रम् — दिन-रात (काल) के स्वरूप
  51. अनिन्दितः — निन्दा-रहित, परम पावन

धृति व गोपति नाम (नाम 695–734)

  1. सर्वभूतवाहिता — समस्त प्राणियों को धारण-वहन करने वाली शक्ति
  2. निलयः — सबके आश्रय-स्थान
  3. विभुः — सर्वव्यापक
  4. भवः — संसार के मूल
  5. अमोघः — अमोघ, कभी निष्फल न होने वाले
  6. संयतः — पूर्ण संयमी
  7. अश्वः — व्यापक व वेगवान अश्व-स्वरूप
  8. भोजनः — पालक, भोग्य प्रदान करने वाले
  9. प्राणधारणः — प्राणों के धारक
  10. धृतिमान् — धैर्यवान
  11. मतिमान् — बुद्धिमान
  12. दक्षः — कुशल, समर्थ
  13. सत्कृतः — सबके द्वारा सम्मानित
  14. युगाधिपः — युगों के अधिपति
  15. गोपालिः — गौ व पृथ्वी के पालक
  16. गोपतिः — गौओं व इन्द्रियों के स्वामी
  17. ग्रामः — समूह-स्वरूप
  18. गोचर्मवसनः — गोचर्म (मृगचर्म) वस्त्र वाले
  19. हरिः — पाप व दुःख हरने वाले
  20. हिरण्यबाहुः — स्वर्ण-भुजाओं वाले
  21. गुहापालः — गुहा (हृदय-गुफा) में प्रवेश करने वालों के रक्षक
  22. प्रकृष्टारिः — प्रबल शत्रुओं का नाश करने वाले
  23. महाहर्षः — महान आनन्द वाले
  24. जितकामः — काम को जीतने वाले
  25. जितेन्द्रियः — इन्द्रियों को जीतने वाले
  26. गान्धारः — गान्धार (संगीत-स्वर) स्वरूप
  27. सुवासः — सुगंधमय, उत्तम निवास वाले
  28. तपःसक्तः — तप में रत
  29. रतिः — आनन्द-स्वरूप
  30. नरः — सनातन पुरुष
  31. महागीतः — महान संगीत के प्रेमी
  32. महानृत्यः — महान नृत्य करने वाले
  33. अप्सरोगणसेवितः — अप्सरा-गणों द्वारा सेवित
  34. महाकेतुः — महान ध्वजा वाले
  35. महाधातुः — महान धातु व आधार
  36. नैकसानुचरः — अनेक शिखरों पर विचरने वाले
  37. चलः — गतिशील
  38. आवेदनीयः — जानने व प्रार्थना करने योग्य
  39. आदेशः — उपदेश व आदेश-स्वरूप
  40. सर्वगन्धसुखावहः — समस्त सुगंध व सुख देने वाले

तोरण व युक्त नाम (नाम 735–761)

  1. तोरणः — प्रवेश-द्वार (तोरण) स्वरूप
  2. तारणः — भवसागर से तारने वाले
  3. वातः — वायु-स्वरूप
  4. परिधिः — सबको घेरने वाली सीमा
  5. पतिः — स्वामी
  6. खेचरः — आकाशचारी
  7. संयोगः — योग व मिलन-स्वरूप
  8. वर्धनः — वृद्धि करने वाले
  9. वृद्धः — सबसे प्राचीन
  10. अतिवृद्धः — अत्यंत प्राचीन
  11. गुणाधिकः — गुणों में सबसे अधिक
  12. नित्यः — शाश्वत
  13. आत्मसहायः — स्वयं ही अपने सहायक (स्वावलंबी)
  14. देवासुरपतिः — देव व असुर दोनों के स्वामी
  15. पतिः — सर्वस्वामी
  16. युक्तः — योगयुक्त
  17. युक्तबाहुः — सुगठित भुजाओं वाले
  18. देवः — द्योतमान देव
  19. सुपर्वा — स्वर्ग में श्रेष्ठ (देवों में पूज्य)
  20. आषाढः — आषाढ (दण्डधारी मुनि) स्वरूप
  21. सुषाढः — सब कुछ सहने व जीतने वाले
  22. ध्रुवः — अचल, स्थिर
  23. हरिणः — हरित व हरिण-स्वरूप
  24. हरः — हरने वाले
  25. वपुः — दिव्य रूप-स्वरूप
  26. वसुश्रेष्ठः — वसुओं में श्रेष्ठ
  27. महापथः — महान मार्ग-स्वरूप

योग व तीर्थ नाम (नाम 762–785)

  1. शिरोहारी — (दक्ष/ब्रह्मा का) शिर हरने वाले
  2. विमर्शः — विवेक व विचार-स्वरूप
  3. सर्वलक्षणलक्षितः — समस्त शुभ लक्षणों से युक्त
  4. अक्षः — धुरी व इन्द्रिय-स्वरूप
  5. रथयोगी — रथ पर आरूढ़ योगी
  6. सर्वयोगी — समस्त योगों से युक्त
  7. महाबलः — महाबलशाली
  8. समाम्नायः — वेद-परम्परा स्वरूप
  9. असमाम्नायः — परम्परा से परे
  10. तीर्थदेवः — तीर्थों के देव
  11. महारथः — महान रथी
  12. निर्जीवः — प्राण-धर्म से परे (निर्विकार)
  13. जीवनः — जीवन देने वाले
  14. मन्त्रः — मन्त्र-स्वरूप
  15. शुभाक्षः — शुभ नेत्रों वाले
  16. बहुकर्कशः — दुष्टों के प्रति अत्यंत कठोर
  17. रत्नप्रभूतः — रत्नों के उद्भव-स्थान
  18. रत्नाङ्गः — रत्नमय अंगों वाले
  19. महार्णवनिपानवित् — महासागर रूपी जलाशय के ज्ञाता
  20. मूलम् — सबके मूल कारण
  21. विशालः — विशाल, व्यापक
  22. अमृतः — अमर
  23. व्यक्ताव्यक्तः — व्यक्त व अव्यक्त दोनों स्वरूप
  24. तपोनिधिः — तप के भण्डार

रूप व आयुध नाम (उत्तर) (नाम 786–821)

  1. आरोहणः — उन्नति (आरोहण) देने वाले
  2. अधिरोहः — आरोहण-स्वरूप
  3. शीलधारी — शील (सदाचार) धारण करने वाले
  4. महायशाः — महायशस्वी
  5. सेनाकल्पः — सेना-सदृश सामर्थ्य वाले
  6. महाकल्पः — महान कल्प (विधि) स्वरूप
  7. योगः — योग-स्वरूप
  8. युगकरः — युगों के रचयिता
  9. हरिः — हरने वाले
  10. युगरूपः — युग-रूप
  11. महारूपः — महान रूप वाले
  12. महानागहनः — महान नागों/शत्रुओं का नाश करने वाले
  13. वधः — दुष्टों के वध-स्वरूप
  14. न्यायनिर्वपणः — न्याय की स्थापना करने वाले
  15. पादः — सबके आधार (चरण) स्वरूप
  16. पण्डितः — परम ज्ञानी
  17. अचलोपमः — पर्वत के समान अचल
  18. बहुमालः — अनेक मालाओं वाले
  19. महामालः — महान माला वाले
  20. शशी — चन्द्र धारण करने वाले
  21. हरसुलोचनः — सुन्दर नेत्रों वाले हर
  22. विस्तारः — विस्तार-स्वरूप
  23. लवणः — समुद्र (लवण) स्वरूप, रसमय
  24. कूपः — गहन आश्रय-स्वरूप
  25. त्रियुगः — तीन युगों में प्रकट होने वाले
  26. सफलोदयः — सफल उदय वाले
  27. त्रिलोचनः — तीन नेत्रों वाले
  28. विषण्णाङ्गः — गंभीर (संहार-काल में क्षीण) अंगों वाले
  29. मणिविद्धः — मणियों से जड़े (आभूषित)
  30. जटाधरः — जटा धारण करने वाले
  31. बिन्दुः — नाद-बिन्दु स्वरूप
  32. विसर्गः — विसर्जन (प्रलय) स्वरूप
  33. सुमुखः — सुन्दर मुख वाले
  34. शरः — बाण-स्वरूप
  35. सर्वायुधः — समस्त आयुधों से युक्त
  36. सहः — सहनशील

गन्ध व लोक नाम (नाम 822–850)

  1. निवेदनः — आत्म-निवेदन (समर्पण) स्वरूप
  2. सुखाजातः — सुखपूर्वक प्रकट होने वाले
  3. सुगन्धारः — उत्तम गंध वाले
  4. महाधनुः — महान धनुष वाले
  5. गन्धपाली — गन्ध (पृथ्वी) के पालक
  6. भगवान् — षड्ऐश्वर्य-सम्पन्न
  7. सर्वकर्मोत्थानः — समस्त कर्मों के उत्थान व प्रेरक
  8. मन्थानः — मथने वाले (समुद्र-मंथन)
  9. बहुलः — विस्तृत, बहुल
  10. वायुः — वायु-स्वरूप
  11. सकलः — समस्त कलाओं से युक्त
  12. सर्वलोचनः — सब ओर नेत्रों वाले
  13. तलः — आधार-स्वरूप
  14. तालः — ताल (लय) स्वरूप
  15. करस्थाली — हाथ ही जिनका पात्र
  16. ऊर्ध्वसंहननः — ऊर्ध्व (दृढ़) गठन वाले
  17. महान् — महान
  18. छत्रम् — छत्र (रक्षक) स्वरूप
  19. सुच्छत्रः — उत्तम छत्र वाले
  20. विख्यातः — सर्वविख्यात
  21. लोकः — लोक-स्वरूप
  22. सर्वाश्रयः — सबके आश्रय
  23. क्रमः — क्रम (व्यवस्था) स्वरूप
  24. मुण्डः — मुण्डित-शिर रूप
  25. विरूपः — विचित्र रूप वाले
  26. विकृतः — नाना विकृत रूप धारण करने वाले
  27. दण्डी — दण्डधारी
  28. कुण्डी — कमण्डलु धारण करने वाले
  29. विकुर्वणः — नाना रूप रचने वाले

सहस्रमूर्धा व ब्रह्म नाम (नाम 851–884)

  1. हर्यक्षः — सिंह-नेत्र / पीत-नेत्र वाले
  2. ककुभः — दिशा-स्वरूप, श्रेष्ठ
  3. वज्रः — वज्र-स्वरूप
  4. शतजिह्वः — सौ जिह्वाओं वाले
  5. सहस्रपात् — सहस्र चरणों वाले
  6. सहस्रमूर्धा — सहस्र मस्तकों वाले
  7. देवेन्द्रः — देवों के इन्द्र
  8. सर्वदेवमयः — समस्त देवमय
  9. गुरुः — जगद्गुरु
  10. सहस्रबाहुः — सहस्र भुजाओं वाले
  11. सर्वाङ्गः — सर्व-अंगमय
  12. शरण्यः — शरण देने योग्य
  13. सर्वलोककृत् — समस्त लोकों के रचयिता
  14. पवित्रम् — परम पवित्र
  15. त्रिककुत् — तीन शिखरों/लोकों के स्वामी
  16. मन्त्रः — मन्त्र-स्वरूप
  17. कनिष्ठः — सूक्ष्मतम रूप में भी व्याप्त
  18. कृष्णपिङ्गलः — श्याम व पिंगल वर्ण वाले
  19. ब्रह्मदण्डविनिर्माता — ब्रह्मदण्ड (दिव्य अस्त्र) के निर्माता
  20. शतघ्नीपाशशक्तिमान् — शतघ्नी, पाश व शक्ति आयुध धारी
  21. पद्मगर्भः — कमल-गर्भ में स्थित
  22. महागर्भः — महान गर्भ (सृष्टि-मूल)
  23. ब्रह्मगर्भः — ब्रह्म को गर्भ में धारण करने वाले
  24. जलोद्भवः — जल से प्रकट होने वाले
  25. गभस्तिः — किरण-स्वरूप
  26. ब्रह्मकृत् — ब्रह्म (वेद व सृष्टि) के कर्ता
  27. ब्रह्मी — ब्रह्म-स्वरूप
  28. ब्रह्मविद् — ब्रह्म के ज्ञाता
  29. ब्राह्मणः — ब्रह्मनिष्ठ, ब्राह्मण-स्वरूप
  30. गतिः — परम गति
  31. अनन्तरूपः — अनन्त रूप वाले
  32. नैकात्मा — अनेक रूपों में विद्यमान आत्मा
  33. तिग्मतेजाः — तीव्र तेज वाले
  34. स्वयम्भूः — स्वयं प्रकट होने वाले

उमापति व वराह नाम (नाम 885–916)

  1. ऊर्ध्वगात्मा — ऊर्ध्वगामी आत्मा
  2. पशुपतिः — जीवों के स्वामी
  3. वातरंहाः — वायु के समान वेग वाले
  4. मनोजवः — मन के समान वेगवान
  5. चन्दनी — चन्दन-लेपित, शीतल
  6. पद्मनालाग्रः — कमल-नाल के अग्र पर स्थित
  7. सुरभ्युत्तरणः — गौ (सुरभि) का उद्धार करने वाले
  8. नरः — पुरुष-स्वरूप
  9. कर्णिकारमहास्रग्वी — कर्णिकार-पुष्पों की महामाला वाले
  10. नीलमौलिः — नील मुकुट वाले
  11. पिनाकधृत् — पिनाक धनुष धारण करने वाले
  12. उमापतिः — उमा के पति
  13. उमाकान्तः — उमा के प्रिय
  14. जाह्नवीधृक् — गंगा को धारण करने वाले
  15. उमाधवः — उमा के स्वामी
  16. वरः — श्रेष्ठ
  17. वराहः — वराह-स्वरूप
  18. वरदः — वर देने वाले
  19. वरेण्यः — वरण योग्य, श्रेष्ठ
  20. सुमहास्वनः — महान ध्वनि वाले
  21. महाप्रसादः — महान कृपालु
  22. दमनः — दमन करने वाले
  23. शत्रुहा — शत्रुओं का नाश करने वाले
  24. श्वेतपिङ्गलः — श्वेत व पिंगल वर्ण वाले
  25. पीतात्मा — पवित्र (पीत-वर्ण) आत्मा
  26. परमात्मा — परम आत्मा
  27. प्रयतात्मा — संयमित आत्मा
  28. प्रधानधृत् — प्रकृति (प्रधान) को धारण करने वाले
  29. सर्वपार्श्वमुखः — सब ओर मुख वाले
  30. त्र्यक्षः — तीन नेत्रों वाले
  31. धर्मसाधारणः — धर्म के समान सर्वाधार
  32. वरः — श्रेष्ठ, वरदायी

काल व कला नाम (नाम 917–950)

  1. चराचरात्मा — चर-अचर की आत्मा
  2. सूक्ष्मात्मा — सूक्ष्म आत्मा
  3. अमृतः — अमर
  4. गोवृषेश्वरः — वृषभ (नन्दी) के स्वामी
  5. साध्यर्षिः — साध्य-गण व ऋषि स्वरूप
  6. वसुः — वसु-स्वरूप, निवास-स्थान
  7. आदित्यः — आदित्य-स्वरूप
  8. विवस्वान् — सूर्य-स्वरूप
  9. सविता — प्रेरक सूर्य
  10. अमृतः — अमरस्वरूप
  11. व्यासः — विस्तारक, व्यास-स्वरूप
  12. सर्गः — सृष्टि-स्वरूप
  13. सुसङ्क्षेपः — संक्षेप (संहार) स्वरूप
  14. विस्तरः — विस्तार-स्वरूप
  15. पर्ययः — परिवर्तन व क्रम स्वरूप
  16. नरः — पुरुष-स्वरूप
  17. ऋतुः — ऋतु-स्वरूप
  18. संवत्सरः — वर्ष-स्वरूप
  19. मासः — मास-स्वरूप
  20. पक्षः — पक्ष-स्वरूप
  21. सङ्ख्यासमापनः — काल-गणना के समापक
  22. कला — कला (काल-अंश) स्वरूप
  23. काष्ठा — काष्ठा (काल-अंश) स्वरूप
  24. लवा — लव (काल-अंश) स्वरूप
  25. मात्रा — मात्रा (काल-अंश) स्वरूप
  26. मुहूर्तः — मुहूर्त-स्वरूप
  27. अहः — दिन-स्वरूप
  28. क्षपा — रात्रि-स्वरूप
  29. क्षणः — क्षण-स्वरूप
  30. विश्वक्षेत्रम् — विश्व-रूपी क्षेत्र
  31. प्रजाबीजम् — प्रजा (सृष्टि) के बीज
  32. लिङ्गम् — लिङ्ग (चिह्न व कारण) स्वरूप
  33. आद्यः — सबसे आदि
  34. निर्गमः — सबका उद्गम व लय-स्थान

द्वार व देवासुर नाम (नाम 951–982)

  1. सत् — सत्-स्वरूप (नित्य सत्ता)
  2. असत् — असत् (परिवर्तनशील) स्वरूप
  3. व्यक्तम् — व्यक्त (प्रकट) स्वरूप
  4. अव्यक्तम् — अव्यक्त (अप्रकट) स्वरूप
  5. पिता — सबके पिता
  6. माता — सबकी माता
  7. पितामहः — सबके पितामह
  8. स्वर्गद्वारम् — स्वर्ग के द्वार
  9. प्रजाद्वारम् — प्रजा (सृष्टि) के द्वार
  10. मोक्षद्वारम् — मोक्ष के द्वार
  11. त्रिविष्टपम् — त्रिलोक व स्वर्ग-स्वरूप
  12. निर्वाणम् — निर्वाण (परम शांति) स्वरूप
  13. ह्लादनः — आह्लाद देने वाले
  14. ब्रह्मलोकः — ब्रह्मलोक-स्वरूप
  15. परा गतिः — परम गति
  16. देवासुरविनिर्माता — देव व असुरों के निर्माता
  17. देवासुरपरायणः — देव-असुर दोनों के आश्रय
  18. देवासुरगुरुः — देव-असुरों के गुरु
  19. देवः — देव
  20. देवासुरनमस्कृतः — देव-असुरों द्वारा नमस्कृत
  21. देवासुरमहामात्रः — देव-असुरों में महान
  22. देवासुरगणाश्रयः — देव-असुर गणों के आश्रय
  23. देवातिदेवः — देवों से भी श्रेष्ठ देव
  24. देवर्षिः — देवर्षि-स्वरूप
  25. देवासुरवरप्रदः — देव-असुरों को वर देने वाले
  26. देवासुरेश्वरः — देव-असुरों के ईश्वर
  27. विश्वः — विश्व-स्वरूप
  28. देवासुरमहेश्वरः — देव-असुरों के महेश्वर
  29. सर्वदेवमयः — समस्त देवमय
  30. अचिन्त्यः — चिन्तन से परे
  31. देवतात्मा — देवताओं की आत्मा
  32. आत्मसम्भवः — स्वयं से प्रकट होने वाले

अन्तिम दिव्य नाम (नाम 983–1037)

  1. उद्भित् — सृष्टि को अंकुरित-प्रकट करने वाले
  2. त्रिविक्रमः — तीन पगों में जगत् नापने वाले
  3. वैद्यः — भवरोग के वैद्य
  4. विरजः — रजोगुण-रहित, निर्मल
  5. नीरजः — मल-रहित, शुद्ध
  6. अमरः — अमर
  7. ईड्यः — स्तुति के योग्य
  8. हस्तीश्वरः — गजेन्द्र व हाथियों के स्वामी
  9. व्याघ्रः — व्याघ्र-स्वरूप
  10. देवसिंहः — देवों में सिंह
  11. नरर्षभः — नरों में श्रेष्ठ (वृषभ)
  12. विबुधः — परम ज्ञानी, देव
  13. अग्रवरः — सर्वश्रेष्ठ
  14. सूक्ष्मः — सूक्ष्म
  15. सर्वदेवः — समस्त देव-स्वरूप
  16. तपोमयः — तपोमय
  17. सुयुक्तः — भली-भाँति योगयुक्त
  18. शोभनः — शोभायमान
  19. वज्री — वज्रधारी
  20. प्रासानां प्रभवः — प्रास (अस्त्रों) के उद्गम
  21. अव्ययः — अविनाशी
  22. गुहः — गूढ़, गुहा में स्थित
  23. कान्तः — कमनीय, सुन्दर
  24. निजः — नित्य स्व-स्वरूप
  25. सर्गः — सृष्टि-स्वरूप
  26. पवित्रम् — पवित्र करने वाले
  27. सर्वपावनः — सबको पवित्र करने वाले
  28. शृङ्गी — शृंग (शिखर/सींग) धारण करने वाले
  29. शृङ्गप्रियः — शृंग (पर्वत-शिखर) के प्रेमी
  30. बभ्रुः — भरण करने वाले, भूरे वर्ण
  31. राजराजः — राजाओं के राजा
  32. निरामयः — रोग-रहित
  33. अभिरामः — परम सुन्दर, आनन्ददायी
  34. सुरगणः — देवगण-स्वरूप
  35. विरामः — विश्राम (लय) स्वरूप
  36. सर्वसाधनः — समस्त साधनों के स्वरूप
  37. ललाटाक्षः — ललाट में नेत्र वाले
  38. विश्वदेवः — विश्व के देव
  39. हरिणः — हरिण-स्वरूप
  40. ब्रह्मवर्चसः — ब्रह्मतेज से युक्त
  41. स्थावराणां पतिः — स्थावर (अचल) जगत् के स्वामी
  42. नियमेन्द्रियवर्धनः — नियम व इन्द्रिय-संयम को बढ़ाने वाले
  43. सिद्धार्थः — जिनके प्रयोजन सिद्ध हैं
  44. सिद्धभूतार्थः — जिनके समस्त अर्थ सिद्ध हो चुके हैं
  45. अचिन्त्यः — अचिन्त्य
  46. सत्यव्रतः — सत्य-व्रती
  47. शुचिः — पवित्र
  48. व्रताधिपः — व्रतों के अधिपति
  49. परं ब्रह्म — परब्रह्म
  50. भक्तानां परमा गतिः — भक्तों की परम गति
  51. विमुक्तः — पूर्णतः मुक्त
  52. मुक्ततेजाः — अबाधित तेज वाले
  53. श्रीमान् — श्री-सम्पन्न
  54. श्रीवर्धनः — श्री (ऐश्वर्य) बढ़ाने वाले
  55. जगत् — सम्पूर्ण जगत्-स्वरूप

अर्थ (हिन्दी)

  1. शांत स्वरूप, सृष्टि-स्थिति-संहार तीनों के कारण भगवान शिव को नमस्कार। हे परमेश्वर, मैं अपने आत्मा को आपको समर्पित करता हूँ; आप ही मेरी गति हैं।
  2. आरंभिक श्लोक: शिव स्थिर, स्थाणु (अचल), प्रभु, भीम, श्रेष्ठ, वरदाता व वरण-योग्य हैं; वे सबकी आत्मा, सर्वविख्यात, सर्वस्वरूप, सब कुछ करने वाले व संसार के कारण हैं। (इसी क्रम में आगे एक हजार नाम आते हैं।)

लाभ

  • मन को शांति व निर्भयता प्राप्त होती है।
  • रोग, भय व बाधाओं का नाश माना जाता है।
  • शिव के प्रति गहन भक्ति व आध्यात्मिक उन्नति होती है।

कब करें पाठ

सोमवार व प्रदोष काल में · महाशिवरात्रि पर · प्रातः पूजा में

स्रोत

रचयिता: वेदव्यास (महाभारत). महाभारत — अनुशासन पर्व (शिव सहस्रनाम स्तोत्र) · hindunidhi.com — श्री शिवसहस्रनाम स्तोत्रम् · stotram.co.in — शिव सहस्रनाम स्तोत्रम् (महाभारत)

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