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लिपि:
॥ श्री ॥

शिव सहस्रनाम

सहस्रनाम · श्री शिव

पाठ

॥ ध्यानम् ॥ ॐ नमः शिवाय शान्ताय कारणत्रयहेतवे। निवेदयामि चात्मानं त्वं गतिः परमेश्वर॥

आरंभिक नाम (नाम 1–12)

  1. स्थिरःसदा स्थिर, अचल
  2. स्थाणुःनित्य, अविचल स्तंभ-रूप
  3. प्रभुःसर्वसमर्थ स्वामी
  4. भीमःभयंकर (दुष्टों हेतु)
  5. प्रवरःसर्वश्रेष्ठ
  6. वरदःवर देने वाले
  7. वरःश्रेष्ठ, वरण करने योग्य
  8. सर्वात्मासमस्त की आत्मा
  9. सर्वविख्यातःसर्वत्र विख्यात
  10. सर्वःसर्वस्वरूप
  11. सर्वकरःसब कुछ करने वाले
  12. भवःसंसार-रूप, उत्पत्ति के कारण

अर्थ (हिन्दी)

  1. शांत स्वरूप, सृष्टि-स्थिति-संहार तीनों के कारण भगवान शिव को नमस्कार। हे परमेश्वर, मैं अपने आत्मा को आपको समर्पित करता हूँ; आप ही मेरी गति हैं।

लाभ

  • मन को शांति व निर्भयता प्राप्त होती है।
  • रोग, भय व बाधाओं का नाश माना जाता है।
  • शिव के प्रति गहन भक्ति व आध्यात्मिक उन्नति होती है।

कब करें पाठ

सोमवार व प्रदोष काल में · महाशिवरात्रि पर · प्रातः पूजा में

स्रोत

रचयिता: वेदव्यास (महाभारत). महाभारत — अनुशासन पर्व

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