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लिपि:
॥ श्री ॥
जपाकुसुमसंकाशं — सूर्य ध्यान मंत्र
मंत्र · श्री सूर्य देव
पाठ
1
ॐ जपाकुसुमसंकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम्। तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥
अर्थ (हिन्दी)
- जो जपा (गुड़हल) के पुष्प के समान लाल वर्ण वाले हैं, जो कश्यप ऋषि के वंशज और महान तेजस्वी हैं; जो अंधकार के शत्रु और समस्त पापों के नाशक हैं — उन दिवाकर (सूर्य) को मैं प्रणाम करता हूँ।
लाभ
- नवग्रह स्तोत्र का प्रथम श्लोक — सूर्य उपासना का सर्वाधिक प्रचलित प्रणाम मंत्र।
- परंपरा में इसे आरोग्य, तेज व आत्मविश्वास से जोड़ा जाता है।
- सूर्य को अर्घ्य देते समय पाठ का विधान बताया जाता है।
- नवग्रह शांति व सूर्य-दोष निवारण में प्रचलित।
कब करें पाठ
सूर्योदय के समय अर्घ्य देते हुए · रविवार को · मकर संक्रांति व रथ सप्तमी पर · नवग्रह शांति व सूर्य-दोष निवारण में
स्रोत
रचयिता: वेदव्यास. नवग्रह स्तोत्रम् — वेदव्यास कृत, प्रथम श्लोक (सूर्य) · सूर्य अर्घ्य व नवग्रह शांति की पूजा-पद्धति
