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लिपि:
॥ श्री ॥

श्री स्वामीनारायण आरती

आरती

पाठ

1

जय सद्गुरु स्वामी, प्रभु जय सद्गुरु स्वामी। सहजानंद दयालु, तुम अन्तर्यामी॥

2

चरण-कमल सुखदाई, दर्शन अति प्यारा। भव-बंधन से छूटे, जो लेवे सहारा॥

3

धर्म-भक्ति का मारग, जग को दिखलाया। सत्संग की महिमा से, भव-पार लगाया॥

4

अहिंसा सत्य सिखाया, सदाचार धारा। भक्तन के हृदय में, बसे प्रभु प्यारा॥

5

स्वामीनारायण आरती, जो जन श्रद्धा गावे। भक्ति-शान्ति वह पावे, प्रभु-कृपा पावे॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. हे सद्गुरु स्वामी, आपकी जय हो! हे दयालु सहजानंद, आप सबके अन्तर्यामी (अन्तरात्मा को जानने वाले) हैं।
  2. आपके चरण-कमल सुख देने वाले हैं, दर्शन अति प्रिय है; जो आपका सहारा लेता है, वह भव-बंधन से मुक्त हो जाता है।
  3. आपने जगत को धर्म व भक्ति का मार्ग दिखाया; सत्संग की महिमा से आपने (भक्तों को) भवसागर से पार लगाया।
  4. आपने अहिंसा, सत्य व सदाचार की धारा सिखाई; हे प्यारे प्रभु, आप भक्तों के हृदय में निवास करते हैं।
  5. जो भक्त श्रद्धा से स्वामीनारायण की यह आरती गाता है, वह भक्ति-शांति तथा प्रभु की कृपा प्राप्त करता है।

लाभ

  • मन को शांति, भक्ति व सदाचार की प्रेरणा मिलती है।
  • सत्संग व धर्म के प्रति श्रद्धा बढ़ती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति व सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

कब करें पाठ

नित्य प्रातः व संध्या आरती में · एकादशी व पूर्णिमा को · सत्संग व मंदिर-पूजन में

स्रोत

रचयिता: सद्. मुक्तानंद स्वामी. पारंपरिक स्वामीनारायण आरती संग्रह

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