श्री स्वामिनारायण आरती

śrī svāminārāyaṇa āratī

Swaminarayan Aarti (Jai Sadguru Swami — Gujarati)

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
6
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
स्वामिनारायण जयंती (रामनवमी); एकादशी; नित्य संध्या
उद्देश्य:आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual growth)मुक्ति (Liberation)शांति (Peace)
✓ संपूर्ण

स्वामिनारायण संप्रदाय की आरती "जय सद्‌गुरु स्वामी, प्रभु जय सद्‌गुरु स्वामी; सहजानंद दयाळुं, बळवंत बहुनामी" गुजराती में है, और इसके छह पद हैं। अंतिम पद में रचयिता की छाप है — "मुक्तानंद कहे मुक्ति, सुगम करी सीधी"। आरती सहजानंद स्वामी (भगवान स्वामिनारायण) को उस पुरुषोत्तम के रूप में गाती है, जिसके दर्शन से मनुष्य कुटुंब सहित तर जाता है।

परिचय

स्रोत: "જય સદ્‌ગુરુ સ્વામી" — स्वामिनारायण संप्रदाय की आरती; अंतिम पद में छाप "मुक्तानंद"

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री स्वामिनारायण आरती
IASTśrī svāminārāyaṇa āratī
मूल स्रोत"જય સદ્‌ગુરુ સ્વામી" — स्वामिनारायण संप्रदाय की आरती; अंतिम पद में छाप "मुक्तानंद"
शुभ दिनस्वामिनारायण जयंती (रामनवमी); एकादशी; नित्य संध्या
पाठ समय3 मिनट
कठिनाईमध्यम

उद्भव / पृष्ठभूमि

यह आरती सहजानंद स्वामी — जिन्हें अनुयायी भगवान स्वामिनारायण कहते हैं — की स्तुति है, और इसके रचयिता संप्रदाय के संत-कवि मुक्तानंद स्वामी हैं (अंतिम पद की छाप)।

सहजानंद (पद 1–2). "सहजानंद दयाळुं, बळवंत बहुनामी" — दयालु, बलवान और अनेक नामों वाले सहजानंद; उनके चरण-कमलों में चित्त लगाने से दुख टूट जाते हैं।

अवतार (पद 3). "नारायण सुखदाता, द्विजकुळ तनुधारी" — सुख देने वाले नारायण ने ब्राह्मण-कुल में देह धारण की, और अगणित पामर और पतित नर-नारियों का उद्धार किया।

चरणों में तीर्थ (पद 4). "अडसठ तीरथ चरणे, कोटि गया काशी" — उनके चरणों में अड़सठ तीर्थ हैं, करोड़ों गया और काशी।

प्रकट पुरुषोत्तम (पद 5–6). "पुरुषोत्तम प्रगटनुं जे दर्शन करशे, काळ करमथी छूटी, कुटुंब सहित तरशे" — जो प्रकट पुरुषोत्तम के दर्शन करेगा, वह काल और कर्म से छूटकर परिवार सहित तर जाएगा; और मुक्तानंद कहते हैं कि इस अवसर पर करुणानिधि ने मुक्ति सुगम और सीधी कर दी।

आरती (लिरिक्स)

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जय सद्‌गुरु स्वामी, (प्रभु) जय सद्‌गुरु स्वामी, सहजानंद दयाळुं, बळवंत बहुनामी॥

हे सद्गुरु स्वामी, हे प्रभु, आपकी जय हो! हे दयालु सहजानंद, आप बलवान और अनेक नामों वाले हैं।

चरणसरोज तमारां, वंदुं कर जोडी, चरणे चित्त धर्याथी, दुःख नाख्यां तोडी॥

मैं हाथ जोड़कर आपके चरण-कमलों की वंदना करता हूँ; चरणों में चित्त धरने से (आपने) दुख तोड़कर फेंक दिए।

नारायण सुखदाता, द्विजकुळ तनुधारी, पामर पतित उद्धार्यां, अगणित नरनारी॥

सुख देने वाले नारायण ने ब्राह्मण-कुल में देह धारण की, और अगणित पामर और पतित नर-नारियों का उद्धार किया।

नित्य नित्य नौतम लीला, करता अविनाशी, अडसठ तीरथ चरणे, कोटि गया काशी॥

अविनाशी (प्रभु) नित्य-नित्य नई लीलाएँ करते हैं; उनके चरणों में अड़सठ तीर्थ हैं — करोड़ों गया और काशी।

पुरुषोत्तम प्रगटनुं, जे दर्शन करशे, काळ करमथी छूटी, कुटुंब सहित तरशे॥

जो प्रकट पुरुषोत्तम के दर्शन करेगा, वह काल और कर्म (के बंधन) से छूटकर कुटुंब सहित (भवसागर से) तर जाएगा।

आ अवसर करुणानिधि, करुणा बहु कीधी, मुक्तानंद कहे मुक्ति, सुगम करी सीधी॥

इस अवसर पर करुणा के सागर ने बहुत करुणा की; मुक्तानंद कहते हैं — (उन्होंने) मुक्ति सुगम और सीधी कर दी।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे सद्गुरु स्वामी, हे प्रभु, आपकी जय हो! हे दयालु सहजानंद, आप बलवान और अनेक नामों वाले हैं।
  2. मैं हाथ जोड़कर आपके चरण-कमलों की वंदना करता हूँ; चरणों में चित्त धरने से (आपने) दुख तोड़कर फेंक दिए।
  3. सुख देने वाले नारायण ने ब्राह्मण-कुल में देह धारण की, और अगणित पामर और पतित नर-नारियों का उद्धार किया।
  4. अविनाशी (प्रभु) नित्य-नित्य नई लीलाएँ करते हैं; उनके चरणों में अड़सठ तीर्थ हैं — करोड़ों गया और काशी।
  5. जो प्रकट पुरुषोत्तम के दर्शन करेगा, वह काल और कर्म (के बंधन) से छूटकर कुटुंब सहित (भवसागर से) तर जाएगा।
  6. इस अवसर पर करुणा के सागर ने बहुत करुणा की; मुक्तानंद कहते हैं — (उन्होंने) मुक्ति सुगम और सीधी कर दी।

लाभ

  • सहजानंद स्वामी के चरणों में शरणागति — "चरणे चित्त धर्याथी, दुःख नाख्यां तोडी"।
  • मुक्ति का भरोसा — "मुक्तानंद कहे मुक्ति, सुगम करी सीधी"।

कब करें पाठ

नित्य संध्या आरती मेंस्वामिनारायण जयंती (रामनवमी) परएकादशी पर

पाठ विधि

भगवान स्वामिनारायण की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीपक से आरती करें। टेक "जय सद्‌गुरु स्वामी, (प्रभु) जय सद्‌गुरु स्वामी" आरंभ में और हर पद के बाद गाई जाती है। आरती गुजराती में है; हिन्दी अर्थ हर पद के साथ दिया गया है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराanirdesh.com — कीर्तन मुक्तावली 1-154: જય સદ્‌ગુરુ સ્વામી (आधार-पाठ, गुजराती) · knowledgemandir.com — સ્વામિનારાયણ આરતી (જય સદગુરુ સ્વામી)
रचयितामुक्तानंद स्वामी (अंतिम पद की छाप)
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

श्री स्वामिनारायण आरती — सामान्य प्रश्न

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