समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
6
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
स्वामिनारायण जयंती (रामनवमी); एकादशी; नित्य संध्या
उद्देश्य:आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual growth)मुक्ति (Liberation)शांति (Peace)
✓ संपूर्ण
स्वामिनारायण संप्रदाय की आरती "जय सद्गुरु स्वामी, प्रभु जय सद्गुरु स्वामी; सहजानंद दयाळुं, बळवंत बहुनामी" गुजराती में है, और इसके छह पद हैं। अंतिम पद में रचयिता की छाप है — "मुक्तानंद कहे मुक्ति, सुगम करी सीधी"। आरती सहजानंद स्वामी (भगवान स्वामिनारायण) को उस पुरुषोत्तम के रूप में गाती है, जिसके दर्शन से मनुष्य कुटुंब सहित तर जाता है।
FAQ
श्री स्वामिनारायण आरती — सामान्य प्रश्न
मुक्तानंद स्वामी ने — अंतिम पद में उनकी छाप है: "मुक्तानंद कहे मुक्ति, सुगम करी सीधी"।
गुजराती में। इस पृष्ठ पर देवनागरी में जो पाठ है, वह गुजराती लिपि का सीधा लिप्यंतरण है — कोई शब्द बदला नहीं गया; "दयाळुं", "बळवंत", "तमारां" जैसे रूप गुजराती के हैं। हर पद का हिन्दी अर्थ साथ दिया गया है।
कुछ साइटों पर इसका जो "हिन्दी" पाठ मिलता है ("चरण सरोज ताम्र वंदू", "परमार पति उदधि"), वह रोमन लिपि से अनुमान लगाकर बनाया गया बिगड़ा रूप है। मूल गुजराती में ये पंक्तियाँ "चरणसरोज तमारां, वंदुं कर जोडी" और "पामर पतित उद्धार्यां" हैं।
दो गुजराती प्रतियों से — अनिर्देश कीर्तन मुक्तावली (1-154) और नॉलेज मंदिर। दोनों शब्दशः एक हैं।
पर्व
