श्री स्वामीनारायण आरती

śrī svāmīnārāyaṇa āratī

Swaminarayan Aarti (Jai Sadguru Swami)

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

स्रोत: पारंपरिक स्वामीनारायण आरती

उद्भव / पृष्ठभूमि

भगवान स्वामीनारायण (सहजानंद स्वामी) स्वामीनारायण सम्प्रदाय के संस्थापक व भक्तों द्वारा पुरुषोत्तम नारायण रूप में पूजित हैं। यह प्रसिद्ध आरती "जय सद्गुरु स्वामी" मंदिरों में नित्य गाई जाती है, जिससे भक्ति, शांति व सदाचार की प्रेरणा मिलती है।

आरती (लिरिक्स)

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जय सद्गुरु स्वामी, प्रभु जय सद्गुरु स्वामी। सहजानंद दयालु, तुम अन्तर्यामी॥

हे सद्गुरु स्वामी, आपकी जय हो! हे दयालु सहजानंद, आप सबके अन्तर्यामी (अन्तरात्मा को जानने वाले) हैं।

चरण-कमल सुखदाई, दर्शन अति प्यारा। भव-बंधन से छूटे, जो लेवे सहारा॥

आपके चरण-कमल सुख देने वाले हैं, दर्शन अति प्रिय है; जो आपका सहारा लेता है, वह भव-बंधन से मुक्त हो जाता है।

धर्म-भक्ति का मारग, जग को दिखलाया। सत्संग की महिमा से, भव-पार लगाया॥

आपने जगत को धर्म व भक्ति का मार्ग दिखाया; सत्संग की महिमा से आपने (भक्तों को) भवसागर से पार लगाया।

अहिंसा सत्य सिखाया, सदाचार धारा। भक्तन के हृदय में, बसे प्रभु प्यारा॥

आपने अहिंसा, सत्य व सदाचार की धारा सिखाई; हे प्यारे प्रभु, आप भक्तों के हृदय में निवास करते हैं।

स्वामीनारायण आरती, जो जन श्रद्धा गावे। भक्ति-शान्ति वह पावे, प्रभु-कृपा पावे॥

जो भक्त श्रद्धा से स्वामीनारायण की यह आरती गाता है, वह भक्ति-शांति तथा प्रभु की कृपा प्राप्त करता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे सद्गुरु स्वामी, आपकी जय हो! हे दयालु सहजानंद, आप सबके अन्तर्यामी (अन्तरात्मा को जानने वाले) हैं।
  2. आपके चरण-कमल सुख देने वाले हैं, दर्शन अति प्रिय है; जो आपका सहारा लेता है, वह भव-बंधन से मुक्त हो जाता है।
  3. आपने जगत को धर्म व भक्ति का मार्ग दिखाया; सत्संग की महिमा से आपने (भक्तों को) भवसागर से पार लगाया।
  4. आपने अहिंसा, सत्य व सदाचार की धारा सिखाई; हे प्यारे प्रभु, आप भक्तों के हृदय में निवास करते हैं।
  5. जो भक्त श्रद्धा से स्वामीनारायण की यह आरती गाता है, वह भक्ति-शांति तथा प्रभु की कृपा प्राप्त करता है।

लाभ

  • मन को शांति, भक्ति व सदाचार की प्रेरणा मिलती है।
  • सत्संग व धर्म के प्रति श्रद्धा बढ़ती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति व सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

कब करें पाठ

नित्य प्रातः व संध्या आरती मेंएकादशी व पूर्णिमा कोसत्संग व मंदिर-पूजन में

पाठ विधि

भगवान स्वामीनारायण के समक्ष दीप-धूप जलाकर पुष्प अर्पित करें, "स्वामीनारायण" नाम का स्मरण करते हुए आरती गाएँ। मंदिरों में यह आरती नित्य प्रातः-संध्या गाई जाती है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक स्वामीनारायण आरती संग्रह
रचयितासद्. मुक्तानंद स्वामी
अंतिम अद्यतनजून 2026

श्री स्वामीनारायण आरती — सामान्य प्रश्न

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