श्री स्वामीनारायण आरती
śrī svāmīnārāyaṇa āratī
Swaminarayan Aarti (Jai Sadguru Swami)
परिचय
स्रोत: पारंपरिक स्वामीनारायण आरती
उद्भव / पृष्ठभूमि
भगवान स्वामीनारायण (सहजानंद स्वामी) स्वामीनारायण सम्प्रदाय के संस्थापक व भक्तों द्वारा पुरुषोत्तम नारायण रूप में पूजित हैं। यह प्रसिद्ध आरती "जय सद्गुरु स्वामी" मंदिरों में नित्य गाई जाती है, जिससे भक्ति, शांति व सदाचार की प्रेरणा मिलती है।
आरती (लिरिक्स)
जय सद्गुरु स्वामी, प्रभु जय सद्गुरु स्वामी। सहजानंद दयालु, तुम अन्तर्यामी॥
हे सद्गुरु स्वामी, आपकी जय हो! हे दयालु सहजानंद, आप सबके अन्तर्यामी (अन्तरात्मा को जानने वाले) हैं।
चरण-कमल सुखदाई, दर्शन अति प्यारा। भव-बंधन से छूटे, जो लेवे सहारा॥
आपके चरण-कमल सुख देने वाले हैं, दर्शन अति प्रिय है; जो आपका सहारा लेता है, वह भव-बंधन से मुक्त हो जाता है।
धर्म-भक्ति का मारग, जग को दिखलाया। सत्संग की महिमा से, भव-पार लगाया॥
आपने जगत को धर्म व भक्ति का मार्ग दिखाया; सत्संग की महिमा से आपने (भक्तों को) भवसागर से पार लगाया।
अहिंसा सत्य सिखाया, सदाचार धारा। भक्तन के हृदय में, बसे प्रभु प्यारा॥
आपने अहिंसा, सत्य व सदाचार की धारा सिखाई; हे प्यारे प्रभु, आप भक्तों के हृदय में निवास करते हैं।
स्वामीनारायण आरती, जो जन श्रद्धा गावे। भक्ति-शान्ति वह पावे, प्रभु-कृपा पावे॥
जो भक्त श्रद्धा से स्वामीनारायण की यह आरती गाता है, वह भक्ति-शांति तथा प्रभु की कृपा प्राप्त करता है।
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अर्थ (हिन्दी)
- हे सद्गुरु स्वामी, आपकी जय हो! हे दयालु सहजानंद, आप सबके अन्तर्यामी (अन्तरात्मा को जानने वाले) हैं।
- आपके चरण-कमल सुख देने वाले हैं, दर्शन अति प्रिय है; जो आपका सहारा लेता है, वह भव-बंधन से मुक्त हो जाता है।
- आपने जगत को धर्म व भक्ति का मार्ग दिखाया; सत्संग की महिमा से आपने (भक्तों को) भवसागर से पार लगाया।
- आपने अहिंसा, सत्य व सदाचार की धारा सिखाई; हे प्यारे प्रभु, आप भक्तों के हृदय में निवास करते हैं।
- जो भक्त श्रद्धा से स्वामीनारायण की यह आरती गाता है, वह भक्ति-शांति तथा प्रभु की कृपा प्राप्त करता है।
लाभ
- मन को शांति, भक्ति व सदाचार की प्रेरणा मिलती है।
- सत्संग व धर्म के प्रति श्रद्धा बढ़ती है।
- आध्यात्मिक उन्नति व सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
कब करें पाठ
पाठ विधि
भगवान स्वामीनारायण के समक्ष दीप-धूप जलाकर पुष्प अर्पित करें, "स्वामीनारायण" नाम का स्मरण करते हुए आरती गाएँ। मंदिरों में यह आरती नित्य प्रातः-संध्या गाई जाती है।
