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लिपि:
॥ श्री ॥

ॐ त्रिपुरान्तकाय नमः

मंत्र · श्री शिव

पाठ

1

ॐ त्रिपुरान्तकाय नमः॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. त्रिपुरान्तक शिव को नमस्कार। जिन्होंने एक ही बाण से तीनों असुर-नगरों का अंत कर धर्म की रक्षा की — और जो जीव के तीनों बंधनों का नाश करते हैं — उन्हें मैं प्रणाम करता हूँ।

लाभ

  • परंपरा में इसे शत्रु-बाधा व विघ्नों पर विजय से जोड़ा जाता है।
  • अहंकार, कर्म-बंधन व माया — तीनों के शमन का प्रतीक मंत्र माना जाता है।
  • दीर्घ संघर्ष में धैर्य व निर्णायक क्षण की प्रतीक्षा का भाव सिखाने वाला कहा जाता है।
  • कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) की उपासना में इसका जप विशेष है।

कब करें पाठ

कार्तिक पूर्णिमा — त्रिपुरारि पूर्णिमा पर · सोमवार व प्रदोष काल में · महाशिवरात्रि पर · शत्रु-बाधा या दीर्घ संघर्ष के समय

स्रोत

शिव अष्टोत्तर शतनामावली (शक्तिप्रमोद) — नाम 38 "ॐ त्रिपुरान्तकाय नमः" · शिव शतनामावली — नाम "त्रिपुरान्तक" क्रम 24 (drikpanchang) · त्रिपुर दहन प्रसंग — पारंपरिक पुराण कथा

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