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लिपि:
॥ श्री ॥
ॐ त्र्यम्बकाय नमः
मंत्र · श्री शिव
पाठ
1
ॐ त्र्यम्बकाय नमः॥
अर्थ (हिन्दी)
- त्रिनेत्रधारी शिव को नमस्कार। जिनके तीन नेत्र — सूर्य, चंद्र व अग्नि — तीनों कालों और तीनों लोकों को देखते हैं, उन महादेव को मैं प्रणाम करता हूँ।
लाभ
- परंपरा में इसे आरोग्य, दीर्घायु व अकाल मृत्यु से रक्षा से जोड़ा जाता है।
- विवेक व अंतर्दृष्टि जागने की मान्यता है — तीसरा नेत्र ज्ञान का प्रतीक है।
- जिन साधकों के लिए पूर्ण महामृत्युंजय कठिन हो, उनके लिए सरल विकल्प माना जाता है।
- त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग उपासना में इसका जप प्रचलित है।
कब करें पाठ
ब्रह्म मुहूर्त में · सोमवार व प्रदोष काल में · महाशिवरात्रि व श्रावण मास में · रोग या स्वास्थ्य-संकट के समय
स्रोत
शिव शतनामावली — नाम "त्रियम्बक" क्रम 96 (drikpanchang) · ऋग्वेद 7.59.12 — "त्र्यम्बकं यजामहे" (महामृत्युंजय ऋचा का मूल पद) · त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग उपासना परंपरा, नासिक
