ॐ त्र्यम्बकाय नमः

oṃ tryambakāya namaḥ

Tryambak Mantra (Om Tryambakaya Namah)

समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
सोमवार, प्रदोष व महाशिवरात्रि
उद्देश्य:स्वास्थ्य (Health)रक्षा (Protection)ज्ञान (Knowledge)
✓ संपूर्ण नाम जाप

ॐ त्र्यम्बकाय नमः का अर्थ है “तीन नेत्रों वाले शिव को नमस्कार”। यही “त्र्यम्बक” पद ऋग्वेद 7.59.12 की उस ऋचा का आरंभ है जिससे महामृत्युंजय मंत्र बना। परंपरा में इसे आरोग्य, दीर्घायु व विवेक से जोड़ा जाता है; नासिक का त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग इसी नाम पर है।

परिचय

महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।

स्रोत: शिव शतनामावली — नाम "त्रियम्बक"; मूल पद ऋग्वेद 7.59.12

एक नज़र में

मंत्र / पाठॐ त्र्यम्बकाय नमः
IASToṃ tryambakāya namaḥ
प्रकारनाम जाप
देवताश्री शिव
मूल स्रोतशिव शतनामावली — नाम "त्रियम्बक"; मूल पद ऋग्वेद 7.59.12
जप संख्या108
मालारुद्राक्ष माला
शुभ दिनसोमवार, प्रदोष व महाशिवरात्रि
पाठ समय30 सेकंड
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

त्र्यम्बक अर्थात् "तीन नेत्रों वाले"। शिव के दो नेत्र सूर्य व चंद्र माने जाते हैं और ललाट पर स्थित तीसरा नेत्र अग्नि — अर्थात् विवेक व ज्ञान का नेत्र, जो भीतर के अज्ञान को जलाता है। एक दूसरी व्याख्या में "अम्बक" का अर्थ माता भी लिया जाता है, जिससे त्र्यम्बक का भाव "तीनों लोकों की माता के स्वामी" बनता है।

यह शब्द वैदिक है — ऋग्वेद (7.59.12) की जिस ऋचा से महामृत्युंजय मंत्र बना है, वह "त्र्यम्बकं यजामहे" से ही आरंभ होती है। इसी नाम पर नासिक के निकट स्थित त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग का नाम पड़ा, जो गोदावरी के उद्गम ब्रह्मगिरि पर्वत की तलहटी में है। नाम-मंत्र के रूप में इसका जप उन साधकों में प्रचलित है जो पूर्ण महामृत्युंजय का पाठ नहीं कर पाते।

मंत्र

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ॐ त्र्यम्बकाय नमः॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ त्र्यम्बकाय नमः॥

oṃ tryambakāya namaḥ ||

Om Tryambakaya Namah.

उच्चारण मार्गदर्शन: सबसे कठिन भाग आरंभ में है — "त्र्यम्" एक ही संयुक्ताक्षर है (त् + र् + य), इसे "ति-रि-यम" की तरह तोड़कर न बोलें। "त्र्यम्-ब-काय" — तीन मात्राओं में। "काय" का "आ" दीर्घ है। धीमे अभ्यास से आरंभ करें, गति बाद में बढ़ाएँ।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

ॐप्रणव — परब्रह्म का प्रतीक
त्रितीन
अम्बकनेत्र (एक व्याख्या में — माता)
त्र्यम्बकायतीन नेत्रों वाले (शिव) को
नमःनमस्कार, समर्पण

अर्थ (हिन्दी)

  1. त्रिनेत्रधारी शिव को नमस्कार। जिनके तीन नेत्र — सूर्य, चंद्र व अग्नि — तीनों कालों और तीनों लोकों को देखते हैं, उन महादेव को मैं प्रणाम करता हूँ।

लाभ

  • परंपरा में इसे आरोग्य, दीर्घायु व अकाल मृत्यु से रक्षा से जोड़ा जाता है।
  • विवेक व अंतर्दृष्टि जागने की मान्यता है — तीसरा नेत्र ज्ञान का प्रतीक है।
  • जिन साधकों के लिए पूर्ण महामृत्युंजय कठिन हो, उनके लिए सरल विकल्प माना जाता है।
  • त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग उपासना में इसका जप प्रचलित है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: रुद्राक्ष माला

उत्तम समय: ब्रह्म मुहूर्त व प्रदोष काल

जप का उत्तम समय

ब्रह्म मुहूर्त मेंसोमवार व प्रदोष काल मेंमहाशिवरात्रि व श्रावण मास मेंरोग या स्वास्थ्य-संकट के समय

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

स्नान के बाद शुद्ध आसन पर बैठकर शिवलिंग या शिव-चित्र के समक्ष रुद्राक्ष माला से 108 बार जप करें। जल का पात्र पास रखकर जप के अंत में उसे शिवलिंग पर अर्पित करने की परंपरा है। यदि महामृत्युंजय का संपूर्ण पाठ करना हो तो यह नाम-मंत्र उसकी पूर्व-तैयारी के रूप में जपा जाता है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराशिव शतनामावली — नाम "त्रियम्बक" क्रम 96 (drikpanchang) · ऋग्वेद 7.59.12 — "त्र्यम्बकं यजामहे" (महामृत्युंजय ऋचा का मूल पद) · त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग उपासना परंपरा, नासिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री शिव

Lord Shiva

महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।

देवता वर्गसंहार · योग · ध्यान · कल्याण · मोक्ष
वाहननंदी (वृषभ)
संबंधित वारसोमवार
मुख्य मंत्रॐ नमः शिवाय
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ॐ त्र्यम्बकाय नमः — सामान्य प्रश्न

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