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लिपि:
॥ श्री ॥

श्री तुकाराम महाराज आरती

आरती

पाठ

1

जय जय संत तुकाराम, विठ्ठल के ध्यानी। अभंग-वाणी गाई, तुम भक्त-शिरोमणि॥

2

"जय जय राम कृष्ण हरि", धुन सदा लगाई। पंढरी के विठोबा की, महिमा बरसाई॥

3

सरल भाव में भक्ति, जग को समझाई। आडम्बर को तजकर, सच्ची राह दिखाई॥

4

अभंगों की गंगा से, भव-ताप मिटाया। भक्तन के मन-मंदिर, तुकाराम समाया॥

5

तुकाराम की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। नाम-भक्ति रस पावे, सहज शान्ति पावे॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. हे संत तुकाराम, हे विठ्ठल के ध्यानी, आपकी जय हो! आपने अभंग-वाणी गाई और आप भक्त-शिरोमणि हैं।
  2. "जय जय राम कृष्ण हरि" की धुन आपने सदा लगाई; पंढरी के विठोबा (विठ्ठल) की महिमा का गान किया।
  3. आपने सरल भाव की भक्ति जगत को समझाई; आडम्बर त्यागकर सच्चा मार्ग दिखाया।
  4. अभंगों की गंगा से आपने भव-ताप (संसार-दुःख) मिटाया; हे तुकाराम, आप भक्तों के मन-मंदिर में समाए हुए हैं।
  5. जो भक्त श्रद्धा से संत तुकाराम की यह आरती गाता है, वह नाम-भक्ति का रस तथा सहज शांति प्राप्त करता है।

लाभ

  • नाम-स्मरण व सरल भक्ति का भाव गहरा होता है।
  • मन को सहज शांति व संतोष की प्राप्ति होती है।
  • भक्ति-रस व आध्यात्मिक उन्नति बढ़ती है।

कब करें पाठ

तुकाराम बीज (फाल्गुन) पर · आषाढ़ी/कार्तिकी एकादशी (वारी) पर · नित्य संध्या व सत्संग में

स्रोत

रचयिता: पारंपरिक. पारंपरिक संत आरती संग्रह

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