वापस
लिपि:
॥ श्री ॥
संत तुकाराम महाराज आरती
आरती
पाठ
आरती तुकारामा। स्वामी सद्गुरुधामा। सच्चिदानंद मूर्ती। पायी दाखवीं आम्हां॥
1
राघवें सागरांत। जैसे पाषाण तारिले। तैसे हे तुकोबाचे। अभंग उदकीं रक्षिले॥
2
तुकितां तुलनेसी। ब्रह्म तुकासी आलें। म्हणोनी रामेश्वरें। चरणी मस्तक ठेविलें॥
अर्थ (हिन्दी)
- (ध्रुवपद) सद्गुरु के धाम स्वामी तुकाराम की आरती! हे सच्चिदानंद की मूर्ति, हमें अपने चरणों के दर्शन कराइए।
- जैसे राघव (राम) ने सागर में पत्थर तैरा दिए, वैसे ही तुकोबा के ये अभंग जल में सुरक्षित रहे।
- तराज़ू पर तौलने पर तुका ब्रह्म के बराबर निकले; इसलिए रामेश्वर ने (उनके) चरणों में मस्तक रख दिया।
लाभ
- संत-भक्ति और वारकरी परंपरा का पाठ।
- सद्गुरु के चरणों की शरण — "सच्चिदानंद मूर्ती, पायी दाखवीं आम्हां"।
कब करें पाठ
तुकाराम बीज पर · एकादशी पर · अभंग-भजन के बाद
स्रोत
रचयिता: रामेश्वर (अंतिम पद की छाप). santsahitya.in — संत तुकाराम महाराज आरती (आधार-पाठ) · bhaktibharat.com — तुकाराम आरती
