समय
2 मिनट
श्लोक/चौपाई
3
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
तुकाराम बीज; एकादशी
उद्देश्य:गुरु-भक्ति (Devotion to the Guru)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual growth)शांति (Peace)
✓ संपूर्ण
संत तुकाराम महाराज की प्रचलित आरती मराठी में है — "आरती तुकारामा, स्वामी सद्गुरुधामा; सच्चिदानंद मूर्ती, पायी दाखवीं आम्हां"। इसमें ध्रुवपद और दो पद हैं। पहला पद तुकाराम के अभंगों के जल में सुरक्षित रहने की बात करता है — "तैसे हे तुकोबाचे अभंग उदकीं रक्षिले" — और दूसरे में छाप है: "म्हणोनी रामेश्वरें चरणी मस्तक ठेविलें"।
FAQ
संत तुकाराम महाराज आरती — सामान्य प्रश्न
ध्रुवपद ("आरती तुकारामा, स्वामी सद्गुरुधामा") और दो पद। संत साहित्य और भक्तिभारत — दोनों में ये सब हैं।
दूसरे पद की छाप — "म्हणोनी रामेश्वरें चरणी मस्तक ठेविलें" — कहती है कि रामेश्वर ने तुकाराम के चरणों में मस्तक रखा। यही पंक्ति आरती के रचयिता की छाप है।
तुकाराम के अभंग जल में भी सुरक्षित रहे। आरती इसकी तुलना राम के सागर पर पत्थर तैराने से करती है — "राघवें सागरांत जैसे पाषाण तारिले, तैसे हे तुकोबाचे अभंग उदकीं रक्षिले"।
दो प्रकाशित प्रतियों से — संत साहित्य (आधार, मराठी) और भक्तिभारत। ध्रुवपद और दोनों पद दोनों में हैं।
पर्व
