श्री तुकाराम महाराज आरती

śrī tukārāma mahārāja āratī

Sant Tukaram Maharaj Aarti

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

स्रोत: पारंपरिक संत तुकाराम आरती

उद्भव / पृष्ठभूमि

संत तुकाराम महाराज महाराष्ट्र के वारकरी सम्प्रदाय के महान संत व विठ्ठल-भक्त हैं, जिनके अभंग आज भी जन-जन में गूँजते हैं। इन्हें "तुका" कहकर भक्त स्मरण करते हैं। यह आरती तुकाराम बीज व विठ्ठल-भक्ति सत्संग में गाई जाती है।

आरती (लिरिक्स)

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जय जय संत तुकाराम, विठ्ठल के ध्यानी। अभंग-वाणी गाई, तुम भक्त-शिरोमणि॥

हे संत तुकाराम, हे विठ्ठल के ध्यानी, आपकी जय हो! आपने अभंग-वाणी गाई और आप भक्त-शिरोमणि हैं।

"जय जय राम कृष्ण हरि", धुन सदा लगाई। पंढरी के विठोबा की, महिमा बरसाई॥

"जय जय राम कृष्ण हरि" की धुन आपने सदा लगाई; पंढरी के विठोबा (विठ्ठल) की महिमा का गान किया।

सरल भाव में भक्ति, जग को समझाई। आडम्बर को तजकर, सच्ची राह दिखाई॥

आपने सरल भाव की भक्ति जगत को समझाई; आडम्बर त्यागकर सच्चा मार्ग दिखाया।

अभंगों की गंगा से, भव-ताप मिटाया। भक्तन के मन-मंदिर, तुकाराम समाया॥

अभंगों की गंगा से आपने भव-ताप (संसार-दुःख) मिटाया; हे तुकाराम, आप भक्तों के मन-मंदिर में समाए हुए हैं।

तुकाराम की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। नाम-भक्ति रस पावे, सहज शान्ति पावे॥

जो भक्त श्रद्धा से संत तुकाराम की यह आरती गाता है, वह नाम-भक्ति का रस तथा सहज शांति प्राप्त करता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे संत तुकाराम, हे विठ्ठल के ध्यानी, आपकी जय हो! आपने अभंग-वाणी गाई और आप भक्त-शिरोमणि हैं।
  2. "जय जय राम कृष्ण हरि" की धुन आपने सदा लगाई; पंढरी के विठोबा (विठ्ठल) की महिमा का गान किया।
  3. आपने सरल भाव की भक्ति जगत को समझाई; आडम्बर त्यागकर सच्चा मार्ग दिखाया।
  4. अभंगों की गंगा से आपने भव-ताप (संसार-दुःख) मिटाया; हे तुकाराम, आप भक्तों के मन-मंदिर में समाए हुए हैं।
  5. जो भक्त श्रद्धा से संत तुकाराम की यह आरती गाता है, वह नाम-भक्ति का रस तथा सहज शांति प्राप्त करता है।

लाभ

  • नाम-स्मरण व सरल भक्ति का भाव गहरा होता है।
  • मन को सहज शांति व संतोष की प्राप्ति होती है।
  • भक्ति-रस व आध्यात्मिक उन्नति बढ़ती है।

कब करें पाठ

तुकाराम बीज (फाल्गुन) परआषाढ़ी/कार्तिकी एकादशी (वारी) परनित्य संध्या व सत्संग में

पाठ विधि

भगवान विठ्ठल व संत तुकाराम के समक्ष तुलसी व पुष्प अर्पित करें, "जय जय राम कृष्ण हरि" व अभंग गाते हुए श्रद्धापूर्वक आरती करें। एकादशी व वारकरी सत्संग में इसका विशेष महत्व है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक संत आरती संग्रह
रचयितापारंपरिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

श्री तुकाराम महाराज आरती — सामान्य प्रश्न

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