श्री तुकाराम महाराज आरती
śrī tukārāma mahārāja āratī
Sant Tukaram Maharaj Aarti
परिचय
स्रोत: पारंपरिक संत तुकाराम आरती
उद्भव / पृष्ठभूमि
संत तुकाराम महाराज महाराष्ट्र के वारकरी सम्प्रदाय के महान संत व विठ्ठल-भक्त हैं, जिनके अभंग आज भी जन-जन में गूँजते हैं। इन्हें "तुका" कहकर भक्त स्मरण करते हैं। यह आरती तुकाराम बीज व विठ्ठल-भक्ति सत्संग में गाई जाती है।
आरती (लिरिक्स)
जय जय संत तुकाराम, विठ्ठल के ध्यानी। अभंग-वाणी गाई, तुम भक्त-शिरोमणि॥
हे संत तुकाराम, हे विठ्ठल के ध्यानी, आपकी जय हो! आपने अभंग-वाणी गाई और आप भक्त-शिरोमणि हैं।
"जय जय राम कृष्ण हरि", धुन सदा लगाई। पंढरी के विठोबा की, महिमा बरसाई॥
"जय जय राम कृष्ण हरि" की धुन आपने सदा लगाई; पंढरी के विठोबा (विठ्ठल) की महिमा का गान किया।
सरल भाव में भक्ति, जग को समझाई। आडम्बर को तजकर, सच्ची राह दिखाई॥
आपने सरल भाव की भक्ति जगत को समझाई; आडम्बर त्यागकर सच्चा मार्ग दिखाया।
अभंगों की गंगा से, भव-ताप मिटाया। भक्तन के मन-मंदिर, तुकाराम समाया॥
अभंगों की गंगा से आपने भव-ताप (संसार-दुःख) मिटाया; हे तुकाराम, आप भक्तों के मन-मंदिर में समाए हुए हैं।
तुकाराम की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। नाम-भक्ति रस पावे, सहज शान्ति पावे॥
जो भक्त श्रद्धा से संत तुकाराम की यह आरती गाता है, वह नाम-भक्ति का रस तथा सहज शांति प्राप्त करता है।
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अर्थ (हिन्दी)
- हे संत तुकाराम, हे विठ्ठल के ध्यानी, आपकी जय हो! आपने अभंग-वाणी गाई और आप भक्त-शिरोमणि हैं।
- "जय जय राम कृष्ण हरि" की धुन आपने सदा लगाई; पंढरी के विठोबा (विठ्ठल) की महिमा का गान किया।
- आपने सरल भाव की भक्ति जगत को समझाई; आडम्बर त्यागकर सच्चा मार्ग दिखाया।
- अभंगों की गंगा से आपने भव-ताप (संसार-दुःख) मिटाया; हे तुकाराम, आप भक्तों के मन-मंदिर में समाए हुए हैं।
- जो भक्त श्रद्धा से संत तुकाराम की यह आरती गाता है, वह नाम-भक्ति का रस तथा सहज शांति प्राप्त करता है।
लाभ
- नाम-स्मरण व सरल भक्ति का भाव गहरा होता है।
- मन को सहज शांति व संतोष की प्राप्ति होती है।
- भक्ति-रस व आध्यात्मिक उन्नति बढ़ती है।
कब करें पाठ
पाठ विधि
भगवान विठ्ठल व संत तुकाराम के समक्ष तुलसी व पुष्प अर्पित करें, "जय जय राम कृष्ण हरि" व अभंग गाते हुए श्रद्धापूर्वक आरती करें। एकादशी व वारकरी सत्संग में इसका विशेष महत्व है।
