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लिपि:
॥ श्री ॥

ॐ वासुदेवाय नमः

मंत्र · श्री कृष्ण

पाठ

1

ॐ वासुदेवाय नमः॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. वासुदेव को नमस्कार। जो वसुदेव के पुत्र हैं तथा जो समस्त प्राणियों में निवास करते हैं और जिनमें सम्पूर्ण सृष्टि निवास करती है — उन श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ।

लाभ

  • भागवत परंपरा में इसे मोक्ष-मार्ग का मूल नाम-मंत्र माना जाता है।
  • सर्वव्यापकता का भाव — "सब में वही हैं" — जगने की मान्यता है।
  • मन की स्थिरता व समता बढ़ाने वाला कहा जाता है।
  • पाञ्चरात्र व्यूह-उपासना का प्रथम व प्रधान नाम है।

कब करें पाठ

बुधवार व एकादशी को · प्रातः व संध्या नित्य पूजा में · जन्माष्टमी पर · ध्यान व साधना के आरंभ में

स्रोत

श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली (नारद पञ्चरात्र) — नाम 3 "ॐ वासुदेवाय नमः" · श्री कृष्ण चतुर्विंशति नामावली — नाम 14 "श्री वासुदेवाय नमः" (drikpanchang) · पाञ्चरात्र आगम — चतुर्व्यूह उपासना परंपरा

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