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लिपि:
॥ श्री ॥

ॐ विरूपाक्षाय नमः

मंत्र · श्री शिव

पाठ

1

ॐ विरूपाक्षाय नमः॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. विरूपाक्ष शिव को नमस्कार। जिनके नेत्र विषम हैं — दो सामान्य और तीसरा ललाट पर — और जिनकी दृष्टि रूप नहीं, तत्त्व देखती है, उन्हें मैं प्रणाम करता हूँ।

लाभ

  • परंपरा में इसे अंतर्दृष्टि व विवेक जागने से जोड़ा जाता है।
  • भ्रम, संशय व गलत निर्णय से बचाव की मान्यता है।
  • नेत्र-संबंधी उपासना में भी इसका जप प्रचलित है।
  • हम्पी के श्री विरूपाक्ष मंदिर की उपासना में यह मूल नाम-मंत्र है।

कब करें पाठ

प्रातः स्नान के बाद · सोमवार व प्रदोष काल में · महाशिवरात्रि पर · किसी कठिन निर्णय या दुविधा के समय

स्रोत

शिव अष्टोत्तर शतनामावली (शक्तिप्रमोद) — नाम 7 "ॐ विरूपाक्षाय नमः" · श्री विरूपाक्ष मंदिर उपासना परंपरा, हम्पी

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