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॥ श्री ॥
विष्णु सहस्रनाम
सहस्रनाम · श्री विष्णु
पाठ
॥ ध्यानम् ॥ शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
1
ॐ विश्वं विष्णुर्वषट्कारो भूतभव्यभवत्प्रभुः। भूतकृद्भूतभृद्भावो भूतात्मा भूतभावनः॥
आरंभिक नाम (नाम 1–17)
- विश्वम् — समस्त ब्रह्मांड स्वरूप
- विष्णुः — सर्वत्र व्याप्त
- वषट्कारः — यज्ञ में वषट् रूप
- भूतभव्यभवत्प्रभुः — भूत, भविष्य व वर्तमान के प्रभु
- भूतकृत् — प्राणियों के रचयिता
- भूतभृत् — प्राणियों के धारक
- भावः — स्वयं प्रकट सत्ता
- भूतात्मा — समस्त प्राणियों की आत्मा
- भूतभावनः — प्राणियों का पालक व उत्पादक
- पूतात्मा — परम पवित्र आत्मा
- परमात्मा — परम आत्मा
- मुक्तानां परमा गतिः — मुक्त जीवों की परम गति
- अव्ययः — अविनाशी
- पुरुषः — परम पुरुष
- साक्षी — समस्त का साक्षी
- क्षेत्रज्ञः — क्षेत्र (शरीर) को जानने वाला
- अक्षरः — अविनाशी, अक्षर
योग-ऐश्वर्य नाम (नाम 18–50)
- योगः — योगस्वरूप
- योगविदां नेता — योगियों के मार्गदर्शक
- प्रधानपुरुषेश्वरः — प्रकृति व पुरुष के ईश्वर
- नारसिंहवपुः — नरसिंह रूप धारक
- श्रीमान् — श्री (लक्ष्मी) सहित
- केशवः — सुन्दर केशों वाले
- पुरुषोत्तमः — पुरुषों में सर्वोत्तम
- सर्वः — सब कुछ स्वरूप
- शर्वः — संहारकर्ता
- शिवः — कल्याणकारी
- स्थाणुः — स्थिर, अचल
- भूतादिः — भूतों के आदि कारण
- निधिरव्ययः — अविनाशी निधि
- सम्भवः — उत्पत्ति के कारण
- भावनः — सबको उत्पन्न करने वाला
- भर्ता — पालनकर्ता
- प्रभवः — उत्पत्ति-स्थान
- प्रभुः — स्वामी, समर्थ
- ईश्वरः — सर्वशक्तिमान नियंत्रक
- स्वयम्भूः — स्वयं उत्पन्न
- शम्भुः — कल्याण देने वाला
- आदित्यः — आदित्यरूप (सूर्यस्वरूप)
- पुष्कराक्षः — कमल-नेत्रों वाला
- महास्वनः — महाध्वनि वाला
- अनादिनिधनः — जिसका न आदि न अन्त
- धाता — सबका धारक
- विधाता — सृष्टिकर्ता, विधान करने वाला
- धातुरुत्तमः — सब तत्वों में सर्वोत्तम
- अप्रमेयः — प्रमाण से अमेय, अपरिमित
- हृषीकेशः — इन्द्रियों के स्वामी
- पद्मनाभः — नाभि में कमल धारण करने वाले
- अमरप्रभुः — देवताओं के स्वामी
- विश्वकर्मा — विश्व की रचना करने वाले
काल-सिद्धि नाम (नाम 51–100)
- मनुः — मननशील, विचारशील
- त्वष्टा — शरीरों के निर्माता
- स्थविष्ठः — अत्यंत स्थूल रूप
- स्थविरो ध्रुवः — प्राचीन एवं अचल
- अग्राह्यः — इन्द्रियों से न पकड़ में आने वाला
- शाश्वतः — नित्य, सनातन
- कृष्णः — श्याम वर्ण वाले
- लोहिताक्षः — लाल नेत्रों वाले
- प्रतर्दनः — संहारकर्ता
- प्रभूतः — समृद्ध, विशाल
- त्रिककुद्धाम — तीन लोकों के शिखर पर निवास
- पवित्रम् — पवित्र करने वाला
- मङ्गलं परम् — परम मंगलकारी
- ईशानः — शासक, नियंत्रक
- प्राणदः — प्राण देने वाला
- प्राणः — प्राणस्वरूप
- ज्येष्ठः — सबसे ज्येष्ठ
- श्रेष्ठः — सर्वोत्तम
- प्रजापतिः — प्रजाओं के पति
- हिरण्यगर्भः — स्वर्ण-गर्भ (ब्रह्मा रूप)
- भूगर्भः — पृथ्वी को गर्भ में धारण करने वाले
- माधवः — लक्ष्मीपति
- मधुसूदनः — मधु दैत्य के नाशक
- ईश्वरः — ऐश्वर्यवान नियंत्रक
- विक्रमी — विशेष पराक्रमी
- धन्वी — धनुषधारी
- मेधावी — प्रकृष्ट बुद्धि वाला
- विक्रमः — पराक्रम स्वरूप
- क्रमः — व्यवस्थित गति वाला (वामन अवतार के पग)
- अनुत्तमः — जिससे श्रेष्ठ कोई नहीं
- दुराधर्षः — जिसे कोई पराजित न कर सके
- कृतज्ञः — कृत कर्मों को जानने वाला
- कृतिः — कर्मफल स्वरूप
- आत्मवान् — आत्मस्थ, स्वावलंबी
- सुरेशः — देवताओं के ईश
- शरणम् — शरण देने वाला
- शर्म — सुखस्वरूप
- विश्वरेताः — विश्व का बीज
- प्रजाभवः — प्रजाओं की उत्पत्ति का कारण
- अहः — दिनस्वरूप (कालरूप)
- संवत्सरः — वर्षस्वरूप (काल)
- व्यालः — सर्परूप, दुर्निवार्य
- प्रत्ययः — ज्ञानस्वरूप
- सर्वदर्शनः — सबको देखने वाला
- अजः — अजन्मा
- सर्वेश्वरः — सबके ईश्वर
- सिद्धः — सिद्धस्वरूप
- सिद्धिः — सिद्धिस्वरूप
- सर्वादिः — सबका आदिकारण
- अच्युतः — कभी च्युत न होने वाला, पतनरहित
ऋत-धर्म नाम (नाम 101–130)
- वृषाकपिः — धर्म-रक्षक स्वरूप
- अमेयात्मा — अप्रमेय आत्मा
- सर्वयोगविनिःसृतः — समस्त योगों से परे, स्वतः प्रकट
- वसुः — निवास-स्थान स्वरूप
- वसुमनाः — उदार मन वाले
- सत्यः — सत्यस्वरूप
- समात्मा — सम भाव वाली आत्मा
- सम्मितः — शास्त्रों द्वारा सम्यक् मापे गए
- समः — समता स्वरूप
- अमोघः — जिसके कर्म कभी निष्फल न हों
- पुण्डरीकाक्षः — कमल-नेत्रों वाले
- वृषकर्मा — धर्मानुसार कर्म करने वाले
- वृषाकृतिः — धर्मस्वरूप आकृति
- रुद्रः — दुःख-नाशक
- बहुशिरा — अनेक मस्तकों वाले (विराट रूप)
- बभ्रुः — सबका पालन करने वाले
- विश्वयोनिः — विश्व के उत्पत्ति-स्थान
- शुचिश्रवाः — पवित्र यश वाले
- अमृतः — अमरस्वरूप
- शाश्वतस्स्थाणुः — नित्य व अचल स्तम्भ स्वरूप
- वरारोहः — उत्तम गति वाले
- महातपाः — महान तपस्वी
- सर्वगः — सर्वत्र व्याप्त
- सर्वविद्भानुः — सर्वज्ञ व तेजोमय
- विष्वक्सेनः — सर्वत्र व्यूहित सेनाओं के स्वामी
- जनार्दनः — दुष्टों को पीड़ा देने वाले, भक्तों द्वारा प्रार्थित
- वेदः — वेदस्वरूप
- वेदविद् — वेद के ज्ञाता
- अव्यङ्गः — पूर्ण, अंगहीनता-रहित
- वेदाङ्गः — वेद के अंगस्वरूप
चतुर्व्यूह नाम (नाम 131–150)
- वेदवित् — वेद के सार को जानने वाले
- कविः — सर्वज्ञ, कवि स्वरूप
- लोकाध्यक्षः — लोकों के अध्यक्ष
- सुराध्यक्षः — देवताओं के अध्यक्ष
- धर्माध्यक्षः — धर्म के अध्यक्ष
- कृताकृतः — कृत व अकृत दोनों स्वरूप
- चतुरात्मा — चार स्वरूपों वाले (वासुदेव-संकर्षण-प्रद्युम्न-अनिरुद्ध)
- चतुर्व्यूहः — चार व्यूहों वाले
- चतुर्दंष्ट्रः — चार दाँतों वाले (वराह/नृसिंह रूप)
- चतुर्भुजः — चार भुजाओं वाले
- भ्राजिष्णुः — तेजस्वी, प्रकाशमान
- भोजनम् — भोग्य पदार्थ स्वरूप
- भोक्ता — भोगकर्ता
- सहिष्णुः — सहनशील
- जगदादिजः — जगत के आदि में उत्पन्न
- अनघः — पापरहित
- विजयः — विजय स्वरूप
- जेता — विजेता
- विश्वयोनिः — विश्व के उत्पत्ति-कारण
- पुनर्वसुः — पुनः-पुनः निवास करने वाले
उपेन्द्र-सुरारिहा नाम (नाम 151–208)
- उपेन्द्रः — इन्द्र के लघु भ्राता रूप (वामन अवतार)
- वामनः — वामन अवतार धारी
- प्रांशुः — त्रिविक्रम रूप में अत्यंत ऊँचे
- अमोघः — कभी निष्फल न होने वाले
- शुचिः — पवित्र
- ऊर्जितः — बलशाली, तेजस्वी
- अतीन्द्रः — इन्द्र से भी श्रेष्ठ
- संग्रहः — सबका आधार, संग्रहकर्ता
- सर्गः — सृष्टिस्वरूप
- धृतात्मा — स्थिर आत्मा वाले
- नियमः — नियमस्वरूप
- यमः — नियंत्रक, संयमकर्ता
- वेद्यः — वेदों द्वारा जानने योग्य
- वैद्यः — भवरोग के वैद्य
- सदायोगी — सदैव योगयुक्त
- वीरहा — दुष्ट वीरों का नाश करने वाले
- माधवः — लक्ष्मीपति
- मधुः — मधुर स्वभाव वाले
- अतीन्द्रियः — इन्द्रियों से परे
- महामायः — महामाया के स्वामी
- महोत्साहः — महान उत्साही
- महाबलः — महाबलशाली
- महाबुद्धिः — महाबुद्धिमान
- महावीर्यः — महान वीर्यवान
- महाशक्तिः — महाशक्तिशाली
- महाद्युतिः — महातेजस्वी
- अनिर्देश्यवपुः — जिसका स्वरूप वर्णन से परे
- श्रीमान् — श्री-संपन्न
- अमेयात्मा — अप्रमेय आत्मा
- महाद्रिधृक् — महान पर्वत को धारण करने वाले
- महेष्वासः — महान धनुर्धर
- महीभर्ता — पृथ्वी के पालक
- श्रीनिवासः — लक्ष्मी के निवास-स्थान
- सतांगतिः — सज्जनों की परम गति
- अनिरुद्धः — अबाधित, अप्रतिरुद्ध
- सुरानन्दः — देवताओं को आनंद देने वाले
- गोविन्दः — गौओं व वेदवाणी के ज्ञाता-रक्षक
- गोविदांपतिः — ज्ञानियों के स्वामी
- मरीचिः — किरण स्वरूप
- दमनः — दुष्टों का दमन करने वाले
- हंसः — हंस स्वरूप (परमात्मा)
- सुपर्णः — गरुड़ रूप, सुंदर पंखों वाले
- भुजगोत्तमः — सर्पों में श्रेष्ठ (शेषनाग रूप)
- हिरण्यनाभः — स्वर्ण-नाभि वाले
- सुतपाः — उत्तम तप करने वाले
- पद्मनाभः — नाभि में कमल धारण करने वाले
- प्रजापतिः — प्रजाओं के पति
- अमृत्युः — मृत्युरहित
- सर्वदृक् — सबको देखने वाले
- सिंहः — सिंह स्वरूप (पराक्रमी)
- संधाता — संयोजक, मिलाने वाले
- संधिमान् — संधि करने में समर्थ
- स्थिरः — स्थिर, अचल
- अजः — अजन्मा
- दुर्मर्षणः — जिसे शत्रु सह न सकें
- शास्ता — शासक, नियंत्रक
- विश्रुतात्मा — प्रसिद्ध स्वरूप
- सुरारिहा — देवताओं के शत्रुओं (दैत्यों) का नाश करने वाले
गुरु-भास्करद्युति नाम (नाम 209–284)
- गुरुः — गुरु, ज्ञान देने वाले
- गुरुतमः — गुरुओं में भी सर्वश्रेष्ठ
- धाम — परम तेज, निवास-स्थान
- सत्यः — सत्यस्वरूप
- सत्यपराक्रमः — सत्य पराक्रम वाले
- निमिषः — निमेष (पलक झपकने) स्वरूप काल
- अनिमिषः — सदा जागृत, पलक न झपकाने वाले
- स्रग्वी — वैजयन्ती माला धारण करने वाले
- वाचस्पतिः — वाणी के स्वामी
- उदारधीः — उदार बुद्धि वाले
- अग्रणीः — सबको आगे ले जाने वाले
- ग्रामणीः — समूहों के नेता
- श्रीमान् — श्री-संपन्न
- न्यायः — न्यायस्वरूप
- नेता — नेतृत्व करने वाले
- समीरणः — वायुस्वरूप, प्रेरक
- सहस्रमूर्धा — सहस्र मस्तकों वाले
- विश्वात्मा — विश्व की आत्मा
- सहस्राक्षः — सहस्र नेत्रों वाले
- सहस्रपात् — सहस्र चरणों वाले
- आवर्तनः — संसार-चक्र चलाने वाले
- निवृत्तात्मा — निवृत्ति स्वरूप आत्मा
- संवृतः — सब ओर से आवृत
- सम्प्रमर्दनः — दुष्टों का संपूर्ण नाश करने वाले
- अहः — दिनस्वरूप
- संवर्तकः — प्रलयकर्ता
- वह्निः — अग्निस्वरूप
- अनिलः — वायुस्वरूप
- धरणीधरः — पृथ्वी को धारण करने वाले
- सुप्रसादः — सुंदर कृपा करने वाले
- प्रसन्नात्मा — प्रसन्न आत्मा वाले
- विश्वधृक् — विश्व को धारण करने वाले
- विश्वभुक् — विश्व का भरण-पोषण करने वाले
- विभुः — सर्वव्यापी
- सत्कर्ता — सत्कर्म करने वाले
- सत्कृतः — सत्पुरुषों द्वारा सम्मानित
- साधुः — साधुस्वरूप
- जह्नुः — गंगा को धारण करने वाले
- नारायणः — जल में निवास करने वाले, सबके आश्रय
- नरः — नर रूप धारक
- असंख्येयः — जिसकी गणना न हो सके
- अप्रमेयात्मा — अप्रमेय आत्मा वाले
- विशिष्टः — विशिष्ट, श्रेष्ठ
- शिष्टकृत् — सज्जनों का निर्माण करने वाले
- शुचिः — पवित्र
- सिद्धार्थः — जिनका प्रयोजन सिद्ध है
- सिद्धसंकल्पः — जिनके संकल्प सिद्ध होते हैं
- सिद्धिदः — सिद्धि देने वाले
- सिद्धिसाधनः — सिद्धि प्राप्ति का साधन
- वृषाही — धर्म को धारण करने वाले
- वृषभः — धर्मस्वरूप वृषभ
- विष्णुः — सर्वव्यापी
- वृषपर्वा — धर्म जिनकी सीढ़ी है
- वृषोदरः — उदर में धर्म धारण करने वाले
- वर्धनः — वृद्धि करने वाले
- वर्धमानः — निरंतर वृद्धि पाने वाले
- विविक्तः — विविक्त, शुद्ध
- श्रुतिसागरः — श्रुतियों (वेदों) के सागर
- सुभुजः — सुंदर भुजाओं वाले
- दुर्धरः — जिसे धारण करना कठिन हो
- वाग्मी — उत्तम वाणी वाले
- महेन्द्रः — महान इन्द्र स्वरूप
- वसुदः — धन देने वाले
- वसुः — निवासस्वरूप
- नैकरूपः — अनेक रूपों वाले
- बृहद्रूपः — विशाल रूप वाले
- शिपिविष्टः — किरणों में प्रविष्ट, तीव्र तेजयुक्त
- प्रकाशनः — प्रकाश करने वाले
- ओजस्तेजोद्युतिधरः — ओज, तेज व द्युति धारण करने वाले
- प्रकाशात्मा — प्रकाशस्वरूप आत्मा
- प्रतापनः — प्रताप देने वाले
- ऋद्धः — समृद्ध
- स्पष्टाक्षरः — स्पष्ट उच्चारण/अक्षर स्वरूप
- मन्त्रः — मंत्रस्वरूप
- चन्द्रांशुः — चंद्रमा की किरणों जैसे शीतल
- भास्करद्युतिः — सूर्य के समान तेजोमय
अमृतांशूद्भव-पद्मनिभेक्षण नाम (नाम 285–348)
- अमृतांशूद्भवः — अमृत की किरणों (चंद्रमा) से उत्पन्न
- भानुः — सूर्यस्वरूप, तेजोमय
- शशबिन्दुः — चंद्रमा रूप (हरिण-चिह्न धारी)
- सुरेश्वरः — देवताओं के ईश्वर
- औषधम् — रोगनाशक औषधि स्वरूप
- जगतःसेतुः — संसार-सागर को पार कराने वाला सेतु
- सत्यधर्मपराक्रमः — सत्य और धर्म में पराक्रमी
- भूतभव्यभवन्नाथः — भूत, भविष्य व वर्तमान के स्वामी
- पवनः — वायुस्वरूप
- पावनः — पवित्र करने वाले, शुद्धिकर्ता
- अनलः — अग्निस्वरूप
- कामहा — काम (वासना) का नाश करने वाले
- कामकृत् — इच्छाएँ पूर्ण करने वाले
- कान्तः — अत्यंत सुंदर
- कामः — इच्छास्वरूप
- कामप्रदः — इच्छाएँ प्रदान करने वाले
- प्रभुः — सर्वसमर्थ स्वामी
- युगादिकृत् — युगों का आरंभ करने वाले
- युगावर्तः — युगों का चक्र चलाने वाले
- नैकमायः — अनेक माया धारण करने वाले
- महाशनः — सब कुछ समाहित कर जाने वाले
- अदृश्यः — दिखाई न देने वाले
- व्यक्तरूपः — प्रकट रूप वाले
- सहस्रजित् — सहस्रों को जीतने वाले
- अनन्तजित् — अनंत को जीतने वाले, सदा विजयी
- इष्टः — सबको प्रिय
- अविशिष्टः — सर्वत्र समान रूप से व्याप्त
- शिष्टेष्टः — सज्जनों को प्रिय
- शिखण्डी — मोरपंख धारण करने वाले
- नहुषः — जीवों को मायाजाल में बाँधने वाले
- वृषः — धर्मस्वरूप
- क्रोधहा — क्रोध का नाश करने वाले
- क्रोधकृत् — धर्म-रक्षा हेतु क्रोध करने वाले
- कर्ता — सृष्टिकर्ता
- विश्वबाहुः — विश्व ही जिनकी भुजाएँ हैं
- महीधरः — पृथ्वी को धारण करने वाले
- अच्युतः — कभी च्युत न होने वाले
- प्रथितः — सुप्रसिद्ध
- प्राणः — प्राणस्वरूप
- प्राणदः — प्राण देने वाले
- वासवानुजः — इन्द्र के लघु भ्राता (वामन रूप)
- अपांनिधिः — जल के निधि (समुद्र) स्वरूप
- अधिष्ठानम् — सबका आधार
- अप्रमत्तः — सदा सजग, असावधानी रहित
- प्रतिष्ठितः — सुस्थिर, सबका आश्रय
- स्कन्दः — तेजस्वरूप
- स्कन्दधरः — तेज को धारण करने वाले
- धुर्यः — सृष्टि का भार वहन करने वाले
- वरदः — वर देने वाले
- वायुवाहनः — वायु को चलाने वाले
- वासुदेवः — वसुदेव-पुत्र, सर्वव्यापी
- बृहद्भानुः — महान तेजस्वी
- आदिदेवः — आदि देव (सबसे प्राचीन)
- पुरन्दरः — शत्रुओं के नगर नष्ट करने वाले
- अशोकः — शोकरहित
- तारणः — भवसागर से तारने वाले
- तारः — तारने वाले, ॐ स्वरूप
- शूरः — शूरवीर
- शौरिः — शूरसेन-वंशज (कृष्ण रूप)
- जनेश्वरः — प्रजाओं के ईश्वर
- अनुकूलः — सबके अनुकूल, हितकारी
- शतावर्तः — सैकड़ों रूपों में आवर्तित होने वाले
- पद्मी — कमल धारण करने वाले
- पद्मनिभेक्षणः — कमल के समान नेत्रों वाले
पद्मनाभ-धर्मविदुत्तम नाम (नाम 349–408)
- पद्मनाभः — नाभि में कमल धारण करने वाले
- अरविन्दाक्षः — कमल नेत्रों वाले
- पद्मगर्भः — कमल जिनके गर्भ में है
- शरीरभृत् — शरीर का धारण-पोषण करने वाले
- महर्द्धिः — महान ऐश्वर्य वाले
- ऋद्धः — समृद्ध
- वृद्धात्मा — सनातन आत्मा वाले
- महाक्षः — विशाल नेत्रों वाले
- गरुडध्वजः — गरुड़-चिह्नित ध्वज वाले
- अतुलः — अतुलनीय
- शरभः — महाबलशाली
- भीमः — भयानक, महाबलशाली
- समयज्ञः — उचित समय के ज्ञाता
- हविः — यज्ञ-हवि स्वरूप
- हरिः — पापों व दुखों का हरण करने वाले
- सर्वलक्षणलक्षण्यः — सभी शुभ लक्षणों से युक्त
- लक्ष्मीवान् — लक्ष्मी सहित
- समितिञ्जयः — युद्धों में विजयी
- विक्षरः — क्षयरहित
- रोहितः — मत्स्य अवतार रूप
- मार्गः — मोक्ष-मार्ग स्वरूप
- हेतुः — सृष्टि का कारण
- दामोदरः — उदर में रज्जु-बंधन धारण करने वाले
- सहः — सहनशील, सर्वसमर्थ
- महीधरः — पृथ्वी को धारण करने वाले
- महाभागः — महान सौभाग्य वाले
- वेगवान् — अत्यंत वेगवान्
- अमिताशनः — असीमित संहार-शक्ति वाले
- उद्भवः — सृष्टि के उद्गम स्वरूप
- क्षोभणः — प्रकृति को क्षुब्ध (सक्रिय) करने वाले
- देवः — देवस्वरूप
- श्रीगर्भः — श्री को गर्भ में धारण करने वाले
- परमेश्वरः — परम ईश्वर
- करणम् — साधन/उपकरण स्वरूप
- कारणम् — मूल कारण स्वरूप
- कर्ता — सृष्टिकर्ता
- विकर्ता — सृष्टि को विविध रूपों में रचने वाले
- गहनः — अगाध, गूढ़ स्वरूप
- गुहः — गुहा (हृदय) में छिपे रहने वाले
- व्यवसायः — निश्चयस्वरूप
- व्यवस्थानः — व्यवस्था करने वाले
- संस्थानः — सबका आश्रय-स्थान
- स्थानदः — स्थान/पद देने वाले
- ध्रुवः — अचल, स्थिर
- परर्द्धिः — परम ऐश्वर्य वाले
- परमस्पष्टः — पूर्णतः स्पष्ट, प्रकट
- तुष्टः — संतुष्ट
- पुष्टः — पूर्ण, समृद्ध
- शुभेक्षणः — शुभ दृष्टि वाले
- रामः — आनंदस्वरूप (रामावतार)
- विरामः — सबकी अंतिम विश्रांति (मोक्ष) स्वरूप
- विरजः — रजोगुण/मल रहित
- मार्गः — मार्गस्वरूप
- नेयः — प्रमाण द्वारा जानने योग्य
- नयः — नीतिस्वरूप
- अनयः — जिनका कोई नियंत्रक नहीं
- वीरः — वीर
- शक्तिमतांश्रेष्ठः — शक्तिशालियों में श्रेष्ठ
- धर्मः — धर्मस्वरूप
- धर्मविदुत्तमः — धर्म के ज्ञाताओं में सर्वोत्तम
वैकुण्ठ-विदारण नाम (नाम 409–469)
- वैकुण्ठः — वैकुंठ धाम के स्वामी
- पुरुषः — सर्वव्यापी पुरुष-स्वरूप
- प्राणः — प्राणस्वरूप
- प्राणदः — प्राण देने वाले
- प्रणवः — ॐ (ओम्) स्वरूप
- पृथुः — विस्तृत स्वरूप वाले
- हिरण्यगर्भः — स्वर्ण-गर्भ (ब्रह्मा) स्वरूप
- शत्रुघ्नः — शत्रुओं का नाश करने वाले
- व्याप्तः — सर्वत्र व्याप्त
- वायुः — वायुस्वरूप
- अधोक्षजः — इन्द्रियों के अधीन न होने वाले
- ऋतुः — ऋतुस्वरूप
- सुदर्शनः — शुभ दर्शन वाले, सुदर्शन-चक्रधारी
- कालः — कालस्वरूप
- परमेष्ठी — परम पद पर स्थित (ब्रह्मा रूप)
- परिग्रहः — सबको ग्रहण करने वाले
- उग्रः — तीव्र, प्रचंड
- संवत्सरः — वर्ष-स्वरूप (काल-चक्र)
- दक्षः — कुशल, समर्थ
- विश्रामः — विश्राम-स्थल स्वरूप
- विश्वदक्षिणः — विश्व को दक्षिणा रूप में देने वाले
- विस्तारः — विस्तारस्वरूप
- स्थावरस्थाणुः — स्थावर वस्तुओं में स्थिर, अचल स्तंभ रूप
- प्रमाणम् — प्रमाणस्वरूप
- बीजम् — सृष्टि का मूल बीज
- अव्ययम् — अक्षय, नाशरहित
- अर्थः — प्रयोजन/धन स्वरूप
- अनर्थः — जिनके लिए कोई प्रयोजन शेष नहीं
- महाकोशः — महान कोश (निधि) स्वरूप
- महाभोगः — महान भोग वाले
- महाधनः — महान धन वाले
- अनिर्विण्णः — कभी खिन्न न होने वाले
- स्थविष्ठः — अत्यंत स्थूल, विशाल
- अभूः — अजन्मा
- धर्मयूपः — धर्म-यज्ञ का यूप (स्तंभ) स्वरूप
- महामखः — महान यज्ञ-स्वरूप
- नक्षत्रनेमिः — नक्षत्रों के चक्र की धुरी
- नक्षत्री — नक्षत्रों के स्वामी (चंद्रमा रूप)
- क्षमः — समर्थ
- क्षामः — क्षीण होते हुए भी अविनाशी
- समीहनः — उचित प्रयास करने वाले
- यज्ञः — यज्ञस्वरूप
- इज्यः — पूजनीय
- महेज्यः — महान पूजा के योग्य
- क्रतुः — यज्ञ-कर्म स्वरूप
- सत्रम् — सत्रयज्ञ स्वरूप
- सतांगतिः — सज्जनों की परम गति
- सर्वदर्शी — सबको देखने वाले
- विमुक्तात्मा — सदा मुक्त आत्मा वाले
- सर्वज्ञः — सर्वज्ञाता
- ज्ञानमुत्तमम् — परम उत्तम ज्ञान-स्वरूप
- सुव्रतः — उत्तम व्रत वाले
- सुमुखः — सुंदर मुख वाले
- सूक्ष्मः — सूक्ष्म, अतीन्द्रिय
- सुघोषः — मधुर घोष (शंखध्वनि) वाले
- सुखदः — सुख देने वाले
- सुहृत् — सबका सच्चा मित्र
- मनोहरः — मन को हरने वाले
- जितक्रोधः — क्रोध को जीतने वाले
- वीरबाहुः — वीर भुजाओं वाले
- विदारणः — दुष्टों का विदारण करने वाले
स्वापन-सात्वतांपति नाम (नाम 470–518)
- स्वापनः — सबको निद्रा में लय करने वाले
- स्ववशः — स्वयं अपने अधीन, स्वतंत्र
- व्यापी — सर्वव्यापी
- नैकात्मा — अनेक रूपों में विद्यमान आत्मा
- नैककर्मकृत् — अनेक कर्म करने वाले
- वत्सरः — वर्षस्वरूप
- वत्सलः — प्रेमपूर्ण, स्नेही
- वत्सी — भक्तों के पालक
- रत्नगर्भः — रत्नों के गर्भ (समुद्र) स्वरूप
- धनेश्वरः — धन के स्वामी
- धर्मगुप् — धर्म की रक्षा करने वाले
- धर्मकृत् — धर्म का आचरण करने वाले
- धर्मी — धर्मस्वरूप
- सत् — सत्-स्वरूप (अस्तित्व)
- असत् — कार्य-कारण भेद से असत् रूप में भी प्रकट
- क्षरम् — नाशवान जगत-स्वरूप
- अक्षरम् — अविनाशी ब्रह्म-स्वरूप
- अविज्ञाता — इन्द्रियों द्वारा न जाने जा सकने वाले
- सहस्रांशुः — सहस्र किरणों वाले
- विधाता — सृष्टि की विधि रचने वाले
- कृतलक्षणः — शास्त्रों में जिनके लक्षण निश्चित किए गए
- गभस्तिनेमिः — सूर्य की किरणों के चक्र स्वरूप
- सत्त्वस्थः — सत्त्वगुण में स्थित
- सिंहः — सिंह स्वरूप
- भूतमहेश्वरः — समस्त प्राणियों के महान ईश्वर
- आदिदेवः — आदि देव
- महादेवः — महान देव
- देवेशः — देवताओं के ईश
- देवभृत् — देवताओं का भरण-पोषण करने वाले
- गुरुः — गुरु, ज्ञानदाता
- उत्तरः — सबसे श्रेष्ठ, उद्धारक
- गोपतिः — गौओं/पृथ्वी के स्वामी
- गोप्ता — रक्षक
- ज्ञानगम्यः — ज्ञान से प्राप्त होने योग्य
- पुरातनः — सनातन, प्राचीन
- शरीरभूतभृत् — शरीरधारी प्राणियों का पालक
- भोक्ता — भोगकर्ता
- कपीन्द्रः — वानरों के स्वामी (राम रूप)
- भूरिदक्षिणः — अपार दक्षिणा देने वाले
- सोमपः — सोमरस पीने वाले
- अमृतपः — अमृत पान करने वाले
- सोमः — सोमस्वरूप
- पुरुजित् — बहुतों को जीतने वाले
- पुरुसत्तमः — पुरुषों में सर्वश्रेष्ठ
- विनयः — विनयस्वरूप
- जयः — विजयस्वरूप
- सत्यसन्धः — सत्य की प्रतिज्ञा करने वाले
- दाशार्हः — दशार्ह कुल में अवतरित
- सात्वतांपतिः — सात्वत वंशजों के स्वामी (कृष्ण रूप)
जीव-महामना नाम (नाम 519–566)
- जीवः — जीवस्वरूप
- विनयिता — विनय कराने वाले
- साक्षी — सबके साक्षी
- मुकुन्दः — मोक्ष देने वाले
- अमितविक्रमः — असीम पराक्रम वाले
- अम्भोनिधिः — जल के निधि (समुद्र) स्वरूप
- अनन्तात्मा — अनंत आत्मा वाले
- महोदधिशयः — महासागर में शयन करने वाले
- अन्तकः — अंत करने वाले (संहारक)
- अजः — अजन्मा
- महार्हः — महान पूजा के योग्य
- स्वाभाव्यः — स्वाभाविक रूप से सिद्ध
- जितामित्रः — शत्रुओं को जीतने वाले
- प्रमोदनः — आनंद देने वाले
- आनन्दः — आनंदस्वरूप
- नन्दनः — आनंदित करने वाले
- नन्दः — आनंदस्वरूप
- सत्यधर्मा — सत्य धर्म वाले
- त्रिविक्रमः — तीन पगों में त्रिलोक मापने वाले
- महर्षिः — महान ऋषि
- कपिलाचार्यः — कपिल मुनि रूप आचार्य
- कृतज्ञः — भक्तों का भाव जानने वाले
- मेदिनीपतिः — पृथ्वी के स्वामी
- त्रिपदः — तीन पगों वाले (वामन रूप)
- त्रिदशाध्यक्षः — देवताओं के अध्यक्ष
- महाशृङ्गः — महान शृंग (मत्स्यावतार) वाले
- कृतान्तकृत् — प्रलयकर्ता
- महावराहः — महान वराह अवतार
- गोविन्दः — गौओं व ज्ञान के रक्षक
- सुषेणः — सुंदर सेना वाले
- कनकाङ्गदी — स्वर्ण भुजबंध धारण करने वाले
- गुह्यः — रहस्यमय
- गभीरः — गंभीर स्वभाव वाले
- गहनः — अगाध
- गुप्तः — गुप्त, अप्रकट
- चक्रगदाधरः — चक्र व गदा धारण करने वाले
- वेधाः — सृष्टि-रचयिता
- स्वाङ्गः — स्वयं अपने अंगों से युक्त
- अजितः — अपराजित
- कृष्णः — कृष्ण रूप (श्याम वर्ण)
- दृढः — दृढ़, अचल
- संकर्षणः — प्रलयकाल में सबको खींच लेने वाले
- अच्युतः — कभी च्युत न होने वाले
- वरुणः — जल के देवता रूप
- वारुणः — वरुण-संबंधी
- वृक्षः — वृक्ष रूप (आश्रयदाता)
- पुष्कराक्षः — कमल जैसे नेत्रों वाले
- महामनाः — उदार हृदय वाले
भगवान्-श्रीमतांवर नाम (नाम 567–615)
- भगवान् — सर्व ऐश्वर्य संपन्न
- भगहा — प्रलयकाल में ऐश्वर्य का संहार करने वाले
- आनन्दी — आनंदस्वरूप
- वनमाली — वनमाला धारण करने वाले
- हलायुधः — हल को आयुध बनाने वाले (बलराम रूप)
- आदित्यः — आदिति-पुत्र (सूर्य रूप)
- ज्योतिरादित्यः — सूर्य रूप तेज
- सहिष्णुः — सहनशील
- गतिसत्तमः — सर्वोत्तम गति (मोक्ष) देने वाले
- सुधन्वा — उत्तम धनुष (शार्ङ्ग) धारण करने वाले
- खण्डपरशुः — परशु धारण करने वाले (परशुराम रूप)
- दारुणः — दुष्टों के लिए भयानक
- द्रविणप्रदः — धन देने वाले
- दिवस्पृक् — आकाश को स्पर्श करने वाले (त्रिविक्रम रूप)
- सर्वदृक् — सबको देखने वाले
- व्यासः — वेद-विस्तारक (व्यास रूप)
- वाचस्पतिः — वाणी के स्वामी
- अयोनिजः — योनि से उत्पन्न न होने वाले
- त्रिसामा — तीन सामवेद-स्तुतियों से स्तुत
- सामगः — सामगान करने वाले
- साम — सामवेद-स्वरूप
- निर्वाणम् — मोक्षस्वरूप
- भेषजम् — औषधि स्वरूप
- भिषक् — वैद्य (रोगनाशक)
- संन्यासकृत् — संन्यास की स्थापना करने वाले
- शमः — मन की शांति स्वरूप
- शान्तः — शांतस्वरूप
- निष्ठा — सबका आश्रय
- शान्तिः — शांतिस्वरूप
- परायणम् — परम लक्ष्य/आश्रय
- शुभाङ्गः — शुभ अंगों वाले
- शान्तिदः — शांति देने वाले
- स्रष्टा — सृष्टिकर्ता
- कुमुदः — कुमुद के समान आनंद देने वाले
- कुवलेशयः — जल में शयन करने वाले
- गोहितः — गौओं/पृथ्वी का हित करने वाले
- गोपतिः — गौओं के स्वामी
- गोप्ता — रक्षक
- वृषभाक्षः — वृषभ के समान नेत्रों वाले
- वृषप्रियः — धर्म को प्रिय मानने वाले
- अनिवर्ती — कभी पीछे न हटने वाले
- निवृत्तात्मा — निवृत्ति-स्वरूप आत्मा वाले
- संक्षेप्ता — प्रलयकाल में सृष्टि का संक्षेप करने वाले
- क्षेमकृत् — कल्याण करने वाले
- शिवः — मंगलस्वरूप
- श्रीवत्सवक्षाः — वक्षस्थल पर श्रीवत्स-चिह्न धारण करने वाले
- श्रीवासः — श्री के निवास-स्थान
- श्रीपतिः — लक्ष्मीपति
- श्रीमतांवरः — श्रीसंपन्नों में श्रेष्ठ
श्रीद-हरि नाम (नाम 616–663)
- श्रीदः — श्री (समृद्धि) देने वाले
- श्रीशः — श्री के स्वामी
- श्रीनिवासः — श्री के निवास-स्थान
- श्रीनिधिः — श्री की निधि स्वरूप
- श्रीविभावनः — श्री का प्रसार करने वाले
- श्रीधरः — श्री को धारण करने वाले
- श्रीकरः — श्री (शुभता) करने वाले
- श्रेयः — कल्याणस्वरूप
- श्रीमान् — श्री-संपन्न
- लोकत्रयाश्रयः — तीनों लोकों के आश्रय
- स्वक्षः — सुंदर नेत्रों वाले
- स्वङ्गः — सुंदर अंगों वाले
- शतानन्दः — अनंत आनंद-स्वरूप
- नन्दिः — आनंदस्वरूप
- ज्योतिः — तेजस्वरूप
- गणेश्वरः — गणों के स्वामी
- विजितात्मा — जिनका मन पूर्ण विजित है
- अविधेयात्मा — किसी के नियंत्रण में न आने वाले
- सत्कीर्तिः — सत्य कीर्ति वाले
- छिन्नसंशयः — संदेहों को छिन्न करने वाले
- उदीर्णः — उत्कृष्ट, सर्वोपरि
- सर्वतश्चक्षुः — सब दिशाओं में नेत्र वाले
- अनीशः — जिनका कोई स्वामी नहीं
- शाश्वतः — सनातन
- स्थिरः — स्थिर
- भूशयः — पृथ्वी पर शयन करने वाले
- भूषणः — आभूषण स्वरूप
- भूतिः — ऐश्वर्यस्वरूप
- विशोकः — शोकरहित
- शोकनाशनः — शोक का नाश करने वाले
- अर्चिष्मान् — तेजोमय
- अर्चितः — पूजित
- कुम्भः — कुंभ स्वरूप, पूर्णता के प्रतीक
- विशुद्धात्मा — विशुद्ध आत्मा वाले
- विशोधनः — शुद्ध करने वाले
- अनिरुद्धः — अबाधित
- अप्रतिरथः — जिनके समान कोई रथी (योद्धा) नहीं
- प्रद्युम्नः — अत्यंत तेजस्वी (कृष्ण-पुत्र रूप)
- अमितविक्रमः — असीम पराक्रम वाले
- कालनेमिनिहा — कालनेमि दैत्य का नाश करने वाले
- वीरः — वीर
- शौरिः — शूरसेन-वंशज
- शूरजनेश्वरः — शूर पुरुषों के ईश्वर
- त्रिलोकात्मा — तीनों लोकों की आत्मा
- त्रिलोकेशः — तीनों लोकों के ईश
- केशवः — सुंदर केशों वाले, केशी असुर के नाशक
- केशिहा — केशी असुर का नाश करने वाले
- हरिः — पापों का हरण करने वाले
कामदेव-हवि नाम (नाम 664–711)
- कामदेवः — इच्छाओं के अधिष्ठाता
- कामपालः — इच्छाओं की रक्षा करने वाले
- कामी — समस्त इच्छाओं से युक्त (पूर्ण-काम)
- कान्तः — अत्यंत सुंदर
- कृतागमः — शास्त्रों (आगमों) की रचना करने वाले
- अनिर्देश्यवपुः — जिनका स्वरूप वर्णन से परे
- विष्णुः — सर्वव्यापी
- वीरः — वीर
- अनन्तः — अनंत
- धनञ्जयः — धन को जीतने वाले (अर्जुन-सखा रूप)
- ब्रह्मण्यः — ब्रह्मज्ञान के हितैषी
- ब्रह्मकृत् — वेदों की रचना करने वाले
- ब्रह्मा — सृष्टिकर्ता ब्रह्मा-स्वरूप
- ब्रह्म — परब्रह्म-स्वरूप
- ब्रह्मविवर्धनः — ब्रह्मज्ञान को बढ़ाने वाले
- ब्रह्मविद् — ब्रह्मज्ञानी
- ब्राह्मणः — ब्राह्मण-स्वरूप
- ब्रह्मी — ब्रह्म से युक्त
- ब्रह्मज्ञः — ब्रह्म को जानने वाले
- ब्राह्मणप्रियः — ब्राह्मणों को प्रिय
- महाक्रमः — महान पगों वाले (त्रिविक्रम रूप)
- महाकर्मा — महान कर्म करने वाले
- महातेजाः — महान तेजस्वी
- महोरगः — महान सर्प (शेषनाग) रूप
- महाक्रतुः — महान यज्ञ-स्वरूप
- महायज्वा — महान यज्ञ करने वाले
- महायज्ञः — महान यज्ञ-स्वरूप
- महाहविः — महान हवि-स्वरूप
- स्तव्यः — स्तुति किए जाने योग्य
- स्तवप्रियः — स्तुति को प्रिय मानने वाले
- स्तोत्रम् — स्तोत्र-स्वरूप
- स्तुतिः — स्तुति-स्वरूप
- स्तोता — स्तुति करने वाले
- रणप्रियः — युद्ध को प्रिय मानने वाले
- पूर्णः — पूर्ण
- पूरयिता — सबकी इच्छाएँ पूर्ण करने वाले
- पुण्यः — पुण्यस्वरूप
- पुण्यकीर्तिः — पवित्र कीर्ति वाले
- अनामयः — रोगरहित
- मनोजवः — मन के समान वेगवान्
- तीर्थकरः — तीर्थों के निर्माता
- वसुरेताः — वसु रूप तेज वाले
- वसुप्रदः — धन देने वाले
- वसुप्रदः — धन देने वाले (मूल पाठ में पुनरुक्त नाम)
- वासुदेवः — वसुदेव-पुत्र
- वसुः — निवासस्वरूप
- वसुमनाः — उदार हृदय वाले
- हविः — यज्ञ-हवि स्वरूप
सद्गति-चल नाम (नाम 712–759)
- सद्गतिः — सत्य गति (मोक्ष) देने वाले
- सत्कृतिः — सत्कर्म स्वरूप
- सत्ता — अस्तित्व-स्वरूप
- सद्भूतिः — सत् ऐश्वर्य वाले
- सत्परायणः — सज्जनों का परम आश्रय
- शूरसेनः — शूर सेना वाले
- यदुश्रेष्ठः — यदुवंशियों में श्रेष्ठ
- सन्निवासः — भक्तों का निवास-स्थान
- सुयामुनः — यमुना तट के निवासी
- भूतावासः — समस्त प्राणियों के निवास-स्थान
- वासुदेवः — वसुदेव-पुत्र
- सर्वासुनिलयः — सब प्राणों के आश्रय
- अनलः — अग्निस्वरूप
- दर्पहा — अहंकार का नाश करने वाले
- दर्पदः — उचित आत्मगौरव देने वाले
- दृप्तः — तेजोमय, उल्लसित
- दुर्धरः — जिन्हें धारण करना कठिन
- अपराजितः — अपराजित
- विश्वमूर्तिः — विश्वस्वरूप मूर्ति वाले
- महामूर्तिः — महान स्वरूप वाले
- दीप्तमूर्तिः — तेजोमय स्वरूप वाले
- अमूर्तिमान् — निराकार होते हुए भी आकार धारण करने वाले
- अनेकमूर्तिः — अनेक रूप धारण करने वाले
- अव्यक्तः — अप्रकट
- शतमूर्तिः — सैकड़ों रूप वाले
- शताननः — सैकड़ों मुख वाले
- एकः — एक, अद्वैत
- नैकः — अनेक रूपों में प्रकट
- सवः — सृष्टि-कर्ता
- कः — जिज्ञासित ब्रह्म-स्वरूप
- किम् — जिज्ञासा का विषय परमतत्त्व
- यत् — निर्गुण ब्रह्म का सूचक
- तत् — परम तत्त्व का सूचक
- पदमनुत्तमम् — सर्वोत्कृष्ट पद/अवस्था
- लोकबन्धुः — लोक के बंधु (सखा)
- लोकनाथः — लोक के स्वामी
- माधवः — लक्ष्मी के पति
- भक्तवत्सलः — भक्तों पर स्नेह रखने वाले
- सुवर्णवर्णः — स्वर्ण के समान वर्ण वाले
- हेमाङ्गः — स्वर्णिम अंगों वाले
- वराङ्गः — सुंदर अंगों वाले
- चन्दनाङ्गदी — चन्दन-लेपित भुजबंध धारण करने वाले
- वीरहा — शत्रु वीरों का नाश करने वाले
- विषमः — जिनके समान कोई नहीं
- शून्यः — शून्यस्वरूप (निर्गुण)
- घृताशीः — घृत समान आशीष देने वाले
- अचलः — अचल, स्थिर
- चलः — गतिमान (सृष्टि-संचालक रूप में)
अमानी-कृतागम नाम (नाम 760–802)
- अमानी — अहंकार रहित
- मानदः — सम्मान देने वाले
- मान्यः — सम्मान के योग्य
- लोकस्वामी — लोक के स्वामी
- त्रिलोकधृक् — तीनों लोकों को धारण करने वाले
- सुमेधा — उत्तम बुद्धि वाले
- मेधजः — यज्ञ से उत्पन्न
- धन्यः — धन्य, सौभाग्यशाली
- सत्यमेधा — सत्य बुद्धि वाले
- धराधरः — पृथ्वी को धारण करने वाले
- तेजोवृषः — तेज की वर्षा करने वाले
- द्युतिधरः — दिव्य कांति धारण करने वाले
- सर्वशस्त्रभृतांवरः — सब शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ
- प्रग्रहः — नियंत्रण करने वाले
- निग्रहः — दमन करने वाले
- व्यग्रः — कार्यतत्पर
- नैकशृङ्गः — अनेक शृंगों (मत्स्यावतार) वाले
- गदाग्रजः — गद के अग्रज (बलराम रूप)
- चतुर्मूर्तिः — चार रूपों वाले
- चतुर्बाहुः — चार भुजाओं वाले
- चतुर्व्यूहः — चार व्यूह रूप
- चतुर्गतिः — चार प्रकार की गति देने वाले
- चतुरात्मा — चतुर्विध आत्मा वाले
- चतुर्भावः — चार भावों वाले
- चतुर्वेदविद् — चारों वेदों को जानने वाले
- एकपात् — एक पाद (अंश) में स्थित
- समावर्तः — संसार-चक्र चलाने वाले
- अनिवृत्तात्मा — कभी निवृत्त न होने वाली आत्मा वाले
- दुर्जयः — जिन्हें जीतना कठिन
- दुरतिक्रमः — जिनका उल्लंघन कठिन
- दुर्लभः — दुर्लभ
- दुर्गमः — जिन तक पहुँचना कठिन
- दुर्गः — दुर्ग रूप, अभेद्य
- दुरावासः — जिनका निवास खोजना कठिन
- दुरारिहा — दुष्ट शत्रुओं का नाश करने वाले
- शुभाङ्गः — शुभ अंगों वाले
- लोकसारङ्गः — लोक के सार को ग्रहण करने वाले
- सुतन्तुः — उत्तम विस्तार करने वाले
- तन्तुवर्धनः — सृष्टि के विस्तार को बढ़ाने वाले
- इन्द्रकर्मा — इन्द्र के समान कर्म करने वाले
- महाकर्मा — महान कर्म करने वाले
- कृतकर्मा — कर्म-सिद्ध
- कृतागमः — शास्त्रों की रचना करने वाले
उद्भव-भयनाशन नाम (नाम 803–848)
- उद्भवः — सृष्टि की उत्पत्ति-स्थान
- सुन्दरः — सुंदर
- सुन्दः — सौंदर्ययुक्त
- रत्ननाभः — रत्न समान नाभि वाले
- सुलोचनः — सुंदर नेत्रों वाले
- अर्कः — सूर्य रूप
- वाजसनः — बल/अन्न देने वाले
- शृङ्गी — शृंग धारण करने वाले (मत्स्यावतार)
- जयन्तः — विजय करने वाले
- सर्वविद् — सब कुछ जानने वाले
- जयी — सदा विजयी
- सुवर्णबिन्दुः — स्वर्ण के समान तेजोबिंदु वाले
- अक्षोभ्यः — कभी विचलित न होने वाले
- सर्ववागीश्वरेश्वरः — वाणी के सब स्वामियों के भी ईश्वर
- महाह्रदः — महान सरोवर रूप
- महागर्तः — महान गर्त (गहराई) रूप
- महाभूतः — महाभूत-स्वरूप
- महानिधिः — महान निधि-स्वरूप
- कुमुदः — कुमुद के समान आनंद देने वाले
- कुन्दरः — कुंद फूल के समान शुभ्र
- कुन्दः — कुंद-स्वरूप
- पर्जन्यः — मेघ रूप, वर्षा करने वाले
- पावनः — पवित्र करने वाले
- अनिलः — वायु रूप
- अमृताशः — अमृत की आशा/स्रोत वाले
- अमृतवपुः — अमृत समान शरीर वाले
- सर्वज्ञः — सर्वज्ञ
- सर्वतोमुखः — सब दिशाओं में मुख वाले
- सुलभः — भक्तों को सुलभ
- सुव्रतः — उत्तम व्रत वाले
- सिद्धः — सिद्ध
- शत्रुजित् — शत्रुओं को जीतने वाले
- शत्रुतापनः — शत्रुओं को संतप्त करने वाले
- न्यग्रोधः — वट वृक्ष रूप
- उदुम्बरः — गूलर वृक्ष रूप
- अश्वत्थः — पीपल वृक्ष रूप
- चाणूरान्ध्रनिषूदनः — चाणूर व आंध्र मल्लों का नाश करने वाले
- सहस्रार्चिः — सहस्र किरणों वाले
- सप्तजिह्वः — सात जिह्वा (अग्नि) रूप
- सप्तैधाः — सात ज्वालाओं वाले
- सप्तवाहनः — सात अश्व (सूर्य-रथ) वाहन वाले
- अमूर्तिः — निराकार
- अनघः — पापरहित
- अचिन्त्यः — चिंतन से परे
- भयकृत् — दुष्टों में भय उत्पन्न करने वाले
- भयनाशनः — भक्तों का भय नाश करने वाले
अणु-रविलोचन नाम (नाम 849–899)
- अणुः — अणु रूप, सूक्ष्मतम
- बृहत् — बृहद् रूप, विशालतम
- कृशः — कृश, सूक्ष्म
- स्थूलः — स्थूल, विराट रूप
- गुणभृत् — गुणों को धारण करने वाले
- निर्गुणः — गुणातीत
- महान् — महान
- अधृतः — किसी से समर्थित न होने वाले
- स्वधृतः — स्वयं अपने आधार पर स्थित
- स्वास्यः — सुंदर मुख वाले
- प्राग्वंशः — प्राचीन वंश के मूल
- वंशवर्धनः — वंश को बढ़ाने वाले
- भारभृत् — पृथ्वी के भार को धारण करने वाले
- कथितः — शास्त्रों में वर्णित
- योगी — योगस्वरूप
- योगीशः — योगियों के ईश
- सर्वकामदः — सब इच्छाएँ पूर्ण करने वाले
- आश्रमः — आश्रम-स्वरूप, शरणस्थल
- श्रमणः — तपस्वी
- क्षामः — क्षमाशील
- सुपर्णः — सुंदर पंखों वाले (गरुड़ रूप)
- वायुवाहनः — वायु को वाहन बनाने वाले
- धनुर्धरः — धनुष धारण करने वाले
- धनुर्वेदः — धनुर्विद्या-स्वरूप
- दण्डः — दंड-स्वरूप, न्यायकर्ता
- दमयिता — दमन करने वाले
- दमः — आत्म-संयम स्वरूप
- अपराजितः — अपराजित
- सर्वसहः — सब कुछ सहन करने वाले
- नियन्ता — नियंत्रक
- अनियमः — किसी नियम से बंधे न होने वाले
- अयमः — मृत्यु (यम) से रहित
- सत्त्ववान् — सत्त्वगुण से युक्त
- सात्त्विकः — सात्त्विक
- सत्यः — सत्यस्वरूप
- सत्यधर्मपरायणः — सत्य धर्म में रत
- अभिप्रायः — सभी का अभिप्राय (लक्ष्य)
- प्रियार्हः — प्रिय होने योग्य
- अर्हः — पूजा के योग्य
- प्रियकृत् — प्रिय कार्य करने वाले
- प्रीतिवर्धनः — प्रीति बढ़ाने वाले
- विहायसगतिः — आकाश में गति करने वाले
- ज्योतिः — ज्योतिस्वरूप
- सुरुचिः — सुंदर कांति वाले
- हुतभुक् — हवि (आहुति) ग्रहण करने वाले
- विभुः — सर्वव्यापी
- रविः — सूर्यरूप
- विरोचनः — प्रकाशमान
- सूर्यः — सूर्यस्वरूप
- सविता — उत्पत्तिकर्ता (सूर्यरूप)
- रविलोचनः — सूर्य के समान नेत्रों वाले
अनन्त-पर्यवस्थित नाम (नाम 900–945)
- अनन्तः — अनंत
- हुतभुक् — हवि ग्रहण करने वाले
- भोक्ता — भोगकर्ता
- सुखदः — सुख देने वाले
- नैकजः — अनेक रूपों में जन्म लेने वाले
- अग्रजः — सबसे पहले उत्पन्न
- अनिर्विण्णः — कभी खिन्न न होने वाले
- सदामर्षी — सदा सहनशील
- लोकाधिष्ठानम् — लोक का आधार
- अद्भुतः — अद्भुत
- सनात् — सनातन काल से
- सनातनतमः — सबसे प्राचीन, सनातनतम
- कपिलः — कपिल मुनि रूप
- कपिः — जल पीने वाले, वराह रूप
- अव्ययः — अव्यय, अक्षय
- स्वस्तिदः — कल्याण देने वाले
- स्वस्तिकृत् — कल्याण करने वाले
- स्वस्ति — कल्याण-स्वरूप
- स्वस्तिभुक् — कल्याण का उपभोग करने वाले
- स्वस्तिदक्षिणः — कल्याण रूपी दक्षिणा देने वाले
- अरौद्रः — क्रोध रहित
- कुण्डली — कुंडल धारण करने वाले
- चक्री — चक्र धारण करने वाले
- विक्रमी — पराक्रमी
- ऊर्जितशासनः — प्रबल शासन वाले
- शब्दातिगः — शब्दों (वर्णन) से परे
- शब्दसहः — शब्दों को सहन करने वाले (वेद-स्वरूप)
- शिशिरः — शीतल, शांत स्वभाव वाले
- शर्वरीकरः — रात्रि का निर्माण करने वाले
- अक्रूरः — क्रूरता रहित
- पेशलः — सौम्य, सुंदर
- दक्षः — कुशल, दक्ष
- दक्षिणः — उदार, दानशील
- क्षमिणांवरः — क्षमाशीलों में श्रेष्ठ
- विद्वत्तमः — विद्वानों में सर्वश्रेष्ठ
- वीतभयः — भयरहित
- पुण्यश्रवणकीर्तनः — जिनका श्रवण-कीर्तन पुण्यदायी है
- उत्तारणः — भवसागर से पार कराने वाले
- दुष्कृतिहा — दुष्कर्मों का नाश करने वाले
- पुण्यः — पुण्यस्वरूप
- दुःस्वप्ननाशनः — बुरे स्वप्नों का नाश करने वाले
- वीरहा — शत्रु वीरों का नाश करने वाले
- रक्षणः — रक्षक
- सन्तः — सज्जनस्वरूप
- जीवनः — जीवनदाता
- पर्यवस्थितः — सर्वत्र व्यापक रूप से स्थित
अनन्तरूप-यज्ञवाहन नाम (नाम 946–990)
- अनन्तरूपः — अनंत रूपों वाले
- अनन्तश्रीः — अनंत ऐश्वर्य वाले
- जितमन्युः — क्रोध को जीतने वाले
- भयापहः — भय का नाश करने वाले
- चतुरश्रः — चतुष्कोणीय, पूर्णता का प्रतीक
- गभीरात्मा — गंभीर आत्मा वाले
- विदिशः — दिशाओं को प्रदान करने वाले
- व्यादिशः — विशेष आदेश देने वाले
- दिशः — दिशाओं के स्वामी
- अनादिः — आदि रहित
- भूः — पृथ्वी-स्वरूप
- भुवः — अंतरिक्ष-स्वरूप
- लक्ष्मीः — लक्ष्मी-स्वरूप
- सुवीरः — उत्तम वीर
- रुचिराङ्गदः — सुंदर भुजबंध धारण करने वाले
- जननः — जन्मदाता
- जनजन्मादिः — जीवों के जन्म का मूल कारण
- भीमः — दुष्टों के लिए भयानक
- भीमपराक्रमः — भीम पराक्रम वाले
- आधारनिलयः — आधार रूप निवास-स्थान
- अधाता — अद्वितीय धारणकर्ता
- पुष्पहासः — फूलों के समान मुस्कान वाले
- प्रजागरः — सदा जागृत
- ऊर्ध्वगः — ऊर्ध्व गति वाले
- सत्पथाचारः — सन्मार्ग पर चलने वाले
- प्राणदः — प्राण देने वाले
- प्रणवः — ॐ-स्वरूप
- पणः — व्यवहार/विनिमय स्वरूप
- प्रमाणम् — प्रमाण-स्वरूप
- प्राणनिलयः — प्राणों के आश्रय
- प्राणभृत् — प्राणों को धारण करने वाले
- प्राणजीवनः — प्राणों को जीवन देने वाले
- तत्त्वम् — तत्त्व-स्वरूप
- तत्त्वविद् — तत्त्व को जानने वाले
- एकात्मा — एक आत्मा वाले
- जन्ममृत्युजरातिगः — जन्म-मृत्यु-जरा से परे
- भूर्भुवःस्वस्तरुः — भूः-भुवः-स्वः लोकों के वृक्ष-स्वरूप
- तारः — तारणकर्ता
- सविता — उत्पत्तिकर्ता
- प्रपितामहः — ब्रह्मा के भी पिता, परम पितामह
- यज्ञः — यज्ञ-स्वरूप
- यज्ञपतिः — यज्ञ के स्वामी
- यज्वा — यज्ञ करने वाले
- यज्ञाङ्गः — यज्ञ के अंग-स्वरूप
- यज्ञवाहनः — यज्ञ को सम्पन्न कराने वाले
यज्ञभृत्-सर्वप्रहरणायुध नाम (नाम 991–1015)
- यज्ञभृत् — यज्ञ को धारण करने वाले
- यज्ञकृत् — यज्ञ संपन्न करने वाले
- यज्ञी — यज्ञस्वरूप
- यज्ञभुक् — यज्ञ-फल का भोग करने वाले
- यज्ञसाधनः — यज्ञ का साधन-स्वरूप
- यज्ञान्तकृत् — यज्ञ का समापन करने वाले
- यज्ञगुह्यम् — यज्ञ का रहस्य-स्वरूप
- अन्नम् — अन्न-स्वरूप
- अन्नादः — अन्न का भोग करने वाले
- आत्मयोनिः — स्वयं अपने ही कारण
- स्वयंजातः — स्वयं उत्पन्न
- वैखानः — वराह रूप, पृथ्वी खोदने वाले
- सामगायनः — सामगान करने वाले
- देवकीनन्दनः — देवकी के पुत्र (कृष्ण रूप)
- स्रष्टा — सृष्टिकर्ता
- क्षितीशः — पृथ्वी के ईश
- पापनाशनः — पापों का नाश करने वाले
- शङ्खभृत् — शंख धारण करने वाले
- नन्दकी — नंदक खड्ग धारण करने वाले
- चक्री — चक्र धारण करने वाले
- शार्ङ्गधन्वा — शार्ङ्ग धनुष धारण करने वाले
- गदाधरः — गदा धारण करने वाले
- रथाङ्गपाणिः — रथचक्र (सुदर्शन) को हाथ में धारण करने वाले
- अक्षोभ्यः — कभी विचलित न होने वाले
- सर्वप्रहरणायुधः — सब प्रकार के शस्त्र-आयुध वाले — परंपरा में इसे सहस्रनाम का समापन-नाम माना जाता है
अर्थ (हिन्दी)
- शांत स्वरूप, शेषनाग पर शयन करने वाले, नाभि से कमल वाले, देवों के स्वामी, विश्व के आधार, आकाश के समान व्यापक, मेघ-वर्ण, शुभ अंगों वाले, लक्ष्मीपति, कमलनयन, योगियों द्वारा ध्यान में प्राप्य — संसार के भय को हरने वाले, समस्त लोकों के एकमात्र नाथ भगवान विष्णु की मैं वंदना करता हूँ।
- पहला श्लोक (प्रथम नाम-समूह): विष्णु ही "विश्व" हैं, वषट्कार स्वरूप हैं, भूत-भविष्य-वर्तमान के प्रभु हैं; वे भूतों के रचयिता, धारक, स्वरूप, आत्मा तथा पालक हैं। (इस प्रकार आगे क्रमशः एक हजार नाम आते हैं।)
लाभ
- मन को गहन शांति, एकाग्रता व आध्यात्मिक बल मिलता है।
- भय, रोग व बाधाओं का नाश माना जाता है।
- भगवान विष्णु के प्रति भक्ति व समर्पण बढ़ता है।
कब करें पाठ
गुरुवार, एकादशी व शनिवार को · प्रातः पूजा में · सत्यनारायण व्रत में
स्रोत
रचयिता: वेदव्यास (महाभारत); भीष्म कथित. महाभारत — अनुशासन पर्व (विष्णु सहस्रनाम)
