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॥ श्री ॥

विष्णु सहस्रनाम

सहस्रनाम · श्री विष्णु

पाठ

॥ ध्यानम् ॥ शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

1

ॐ विश्वं विष्णुर्वषट्कारो भूतभव्यभवत्प्रभुः। भूतकृद्भूतभृद्भावो भूतात्मा भूतभावनः॥

आरंभिक नाम (नाम 1–17)

  1. विश्वम् — समस्त ब्रह्मांड स्वरूप
  2. विष्णुः — सर्वत्र व्याप्त
  3. वषट्कारः — यज्ञ में वषट् रूप
  4. भूतभव्यभवत्प्रभुः — भूत, भविष्य व वर्तमान के प्रभु
  5. भूतकृत् — प्राणियों के रचयिता
  6. भूतभृत् — प्राणियों के धारक
  7. भावः — स्वयं प्रकट सत्ता
  8. भूतात्मा — समस्त प्राणियों की आत्मा
  9. भूतभावनः — प्राणियों का पालक व उत्पादक
  10. पूतात्मा — परम पवित्र आत्मा
  11. परमात्मा — परम आत्मा
  12. मुक्तानां परमा गतिः — मुक्त जीवों की परम गति
  13. अव्ययः — अविनाशी
  14. पुरुषः — परम पुरुष
  15. साक्षी — समस्त का साक्षी
  16. क्षेत्रज्ञः — क्षेत्र (शरीर) को जानने वाला
  17. अक्षरः — अविनाशी, अक्षर

योग-ऐश्वर्य नाम (नाम 18–50)

  1. योगः — योगस्वरूप
  2. योगविदां नेता — योगियों के मार्गदर्शक
  3. प्रधानपुरुषेश्वरः — प्रकृति व पुरुष के ईश्वर
  4. नारसिंहवपुः — नरसिंह रूप धारक
  5. श्रीमान् — श्री (लक्ष्मी) सहित
  6. केशवः — सुन्दर केशों वाले
  7. पुरुषोत्तमः — पुरुषों में सर्वोत्तम
  8. सर्वः — सब कुछ स्वरूप
  9. शर्वः — संहारकर्ता
  10. शिवः — कल्याणकारी
  11. स्थाणुः — स्थिर, अचल
  12. भूतादिः — भूतों के आदि कारण
  13. निधिरव्ययः — अविनाशी निधि
  14. सम्भवः — उत्पत्ति के कारण
  15. भावनः — सबको उत्पन्न करने वाला
  16. भर्ता — पालनकर्ता
  17. प्रभवः — उत्पत्ति-स्थान
  18. प्रभुः — स्वामी, समर्थ
  19. ईश्वरः — सर्वशक्तिमान नियंत्रक
  20. स्वयम्भूः — स्वयं उत्पन्न
  21. शम्भुः — कल्याण देने वाला
  22. आदित्यः — आदित्यरूप (सूर्यस्वरूप)
  23. पुष्कराक्षः — कमल-नेत्रों वाला
  24. महास्वनः — महाध्वनि वाला
  25. अनादिनिधनः — जिसका न आदि न अन्त
  26. धाता — सबका धारक
  27. विधाता — सृष्टिकर्ता, विधान करने वाला
  28. धातुरुत्तमः — सब तत्वों में सर्वोत्तम
  29. अप्रमेयः — प्रमाण से अमेय, अपरिमित
  30. हृषीकेशः — इन्द्रियों के स्वामी
  31. पद्मनाभः — नाभि में कमल धारण करने वाले
  32. अमरप्रभुः — देवताओं के स्वामी
  33. विश्वकर्मा — विश्व की रचना करने वाले

काल-सिद्धि नाम (नाम 51–100)

  1. मनुः — मननशील, विचारशील
  2. त्वष्टा — शरीरों के निर्माता
  3. स्थविष्ठः — अत्यंत स्थूल रूप
  4. स्थविरो ध्रुवः — प्राचीन एवं अचल
  5. अग्राह्यः — इन्द्रियों से न पकड़ में आने वाला
  6. शाश्वतः — नित्य, सनातन
  7. कृष्णः — श्याम वर्ण वाले
  8. लोहिताक्षः — लाल नेत्रों वाले
  9. प्रतर्दनः — संहारकर्ता
  10. प्रभूतः — समृद्ध, विशाल
  11. त्रिककुद्धाम — तीन लोकों के शिखर पर निवास
  12. पवित्रम् — पवित्र करने वाला
  13. मङ्गलं परम् — परम मंगलकारी
  14. ईशानः — शासक, नियंत्रक
  15. प्राणदः — प्राण देने वाला
  16. प्राणः — प्राणस्वरूप
  17. ज्येष्ठः — सबसे ज्येष्ठ
  18. श्रेष्ठः — सर्वोत्तम
  19. प्रजापतिः — प्रजाओं के पति
  20. हिरण्यगर्भः — स्वर्ण-गर्भ (ब्रह्मा रूप)
  21. भूगर्भः — पृथ्वी को गर्भ में धारण करने वाले
  22. माधवः — लक्ष्मीपति
  23. मधुसूदनः — मधु दैत्य के नाशक
  24. ईश्वरः — ऐश्वर्यवान नियंत्रक
  25. विक्रमी — विशेष पराक्रमी
  26. धन्वी — धनुषधारी
  27. मेधावी — प्रकृष्ट बुद्धि वाला
  28. विक्रमः — पराक्रम स्वरूप
  29. क्रमः — व्यवस्थित गति वाला (वामन अवतार के पग)
  30. अनुत्तमः — जिससे श्रेष्ठ कोई नहीं
  31. दुराधर्षः — जिसे कोई पराजित न कर सके
  32. कृतज्ञः — कृत कर्मों को जानने वाला
  33. कृतिः — कर्मफल स्वरूप
  34. आत्मवान् — आत्मस्थ, स्वावलंबी
  35. सुरेशः — देवताओं के ईश
  36. शरणम् — शरण देने वाला
  37. शर्म — सुखस्वरूप
  38. विश्वरेताः — विश्व का बीज
  39. प्रजाभवः — प्रजाओं की उत्पत्ति का कारण
  40. अहः — दिनस्वरूप (कालरूप)
  41. संवत्सरः — वर्षस्वरूप (काल)
  42. व्यालः — सर्परूप, दुर्निवार्य
  43. प्रत्ययः — ज्ञानस्वरूप
  44. सर्वदर्शनः — सबको देखने वाला
  45. अजः — अजन्मा
  46. सर्वेश्वरः — सबके ईश्वर
  47. सिद्धः — सिद्धस्वरूप
  48. सिद्धिः — सिद्धिस्वरूप
  49. सर्वादिः — सबका आदिकारण
  50. अच्युतः — कभी च्युत न होने वाला, पतनरहित

ऋत-धर्म नाम (नाम 101–130)

  1. वृषाकपिः — धर्म-रक्षक स्वरूप
  2. अमेयात्मा — अप्रमेय आत्मा
  3. सर्वयोगविनिःसृतः — समस्त योगों से परे, स्वतः प्रकट
  4. वसुः — निवास-स्थान स्वरूप
  5. वसुमनाः — उदार मन वाले
  6. सत्यः — सत्यस्वरूप
  7. समात्मा — सम भाव वाली आत्मा
  8. सम्मितः — शास्त्रों द्वारा सम्यक् मापे गए
  9. समः — समता स्वरूप
  10. अमोघः — जिसके कर्म कभी निष्फल न हों
  11. पुण्डरीकाक्षः — कमल-नेत्रों वाले
  12. वृषकर्मा — धर्मानुसार कर्म करने वाले
  13. वृषाकृतिः — धर्मस्वरूप आकृति
  14. रुद्रः — दुःख-नाशक
  15. बहुशिरा — अनेक मस्तकों वाले (विराट रूप)
  16. बभ्रुः — सबका पालन करने वाले
  17. विश्वयोनिः — विश्व के उत्पत्ति-स्थान
  18. शुचिश्रवाः — पवित्र यश वाले
  19. अमृतः — अमरस्वरूप
  20. शाश्वतस्स्थाणुः — नित्य व अचल स्तम्भ स्वरूप
  21. वरारोहः — उत्तम गति वाले
  22. महातपाः — महान तपस्वी
  23. सर्वगः — सर्वत्र व्याप्त
  24. सर्वविद्भानुः — सर्वज्ञ व तेजोमय
  25. विष्वक्सेनः — सर्वत्र व्यूहित सेनाओं के स्वामी
  26. जनार्दनः — दुष्टों को पीड़ा देने वाले, भक्तों द्वारा प्रार्थित
  27. वेदः — वेदस्वरूप
  28. वेदविद् — वेद के ज्ञाता
  29. अव्यङ्गः — पूर्ण, अंगहीनता-रहित
  30. वेदाङ्गः — वेद के अंगस्वरूप

चतुर्व्यूह नाम (नाम 131–150)

  1. वेदवित् — वेद के सार को जानने वाले
  2. कविः — सर्वज्ञ, कवि स्वरूप
  3. लोकाध्यक्षः — लोकों के अध्यक्ष
  4. सुराध्यक्षः — देवताओं के अध्यक्ष
  5. धर्माध्यक्षः — धर्म के अध्यक्ष
  6. कृताकृतः — कृत व अकृत दोनों स्वरूप
  7. चतुरात्मा — चार स्वरूपों वाले (वासुदेव-संकर्षण-प्रद्युम्न-अनिरुद्ध)
  8. चतुर्व्यूहः — चार व्यूहों वाले
  9. चतुर्दंष्ट्रः — चार दाँतों वाले (वराह/नृसिंह रूप)
  10. चतुर्भुजः — चार भुजाओं वाले
  11. भ्राजिष्णुः — तेजस्वी, प्रकाशमान
  12. भोजनम् — भोग्य पदार्थ स्वरूप
  13. भोक्ता — भोगकर्ता
  14. सहिष्णुः — सहनशील
  15. जगदादिजः — जगत के आदि में उत्पन्न
  16. अनघः — पापरहित
  17. विजयः — विजय स्वरूप
  18. जेता — विजेता
  19. विश्वयोनिः — विश्व के उत्पत्ति-कारण
  20. पुनर्वसुः — पुनः-पुनः निवास करने वाले

उपेन्द्र-सुरारिहा नाम (नाम 151–208)

  1. उपेन्द्रः — इन्द्र के लघु भ्राता रूप (वामन अवतार)
  2. वामनः — वामन अवतार धारी
  3. प्रांशुः — त्रिविक्रम रूप में अत्यंत ऊँचे
  4. अमोघः — कभी निष्फल न होने वाले
  5. शुचिः — पवित्र
  6. ऊर्जितः — बलशाली, तेजस्वी
  7. अतीन्द्रः — इन्द्र से भी श्रेष्ठ
  8. संग्रहः — सबका आधार, संग्रहकर्ता
  9. सर्गः — सृष्टिस्वरूप
  10. धृतात्मा — स्थिर आत्मा वाले
  11. नियमः — नियमस्वरूप
  12. यमः — नियंत्रक, संयमकर्ता
  13. वेद्यः — वेदों द्वारा जानने योग्य
  14. वैद्यः — भवरोग के वैद्य
  15. सदायोगी — सदैव योगयुक्त
  16. वीरहा — दुष्ट वीरों का नाश करने वाले
  17. माधवः — लक्ष्मीपति
  18. मधुः — मधुर स्वभाव वाले
  19. अतीन्द्रियः — इन्द्रियों से परे
  20. महामायः — महामाया के स्वामी
  21. महोत्साहः — महान उत्साही
  22. महाबलः — महाबलशाली
  23. महाबुद्धिः — महाबुद्धिमान
  24. महावीर्यः — महान वीर्यवान
  25. महाशक्तिः — महाशक्तिशाली
  26. महाद्युतिः — महातेजस्वी
  27. अनिर्देश्यवपुः — जिसका स्वरूप वर्णन से परे
  28. श्रीमान् — श्री-संपन्न
  29. अमेयात्मा — अप्रमेय आत्मा
  30. महाद्रिधृक् — महान पर्वत को धारण करने वाले
  31. महेष्वासः — महान धनुर्धर
  32. महीभर्ता — पृथ्वी के पालक
  33. श्रीनिवासः — लक्ष्मी के निवास-स्थान
  34. सतांगतिः — सज्जनों की परम गति
  35. अनिरुद्धः — अबाधित, अप्रतिरुद्ध
  36. सुरानन्दः — देवताओं को आनंद देने वाले
  37. गोविन्दः — गौओं व वेदवाणी के ज्ञाता-रक्षक
  38. गोविदांपतिः — ज्ञानियों के स्वामी
  39. मरीचिः — किरण स्वरूप
  40. दमनः — दुष्टों का दमन करने वाले
  41. हंसः — हंस स्वरूप (परमात्मा)
  42. सुपर्णः — गरुड़ रूप, सुंदर पंखों वाले
  43. भुजगोत्तमः — सर्पों में श्रेष्ठ (शेषनाग रूप)
  44. हिरण्यनाभः — स्वर्ण-नाभि वाले
  45. सुतपाः — उत्तम तप करने वाले
  46. पद्मनाभः — नाभि में कमल धारण करने वाले
  47. प्रजापतिः — प्रजाओं के पति
  48. अमृत्युः — मृत्युरहित
  49. सर्वदृक् — सबको देखने वाले
  50. सिंहः — सिंह स्वरूप (पराक्रमी)
  51. संधाता — संयोजक, मिलाने वाले
  52. संधिमान् — संधि करने में समर्थ
  53. स्थिरः — स्थिर, अचल
  54. अजः — अजन्मा
  55. दुर्मर्षणः — जिसे शत्रु सह न सकें
  56. शास्ता — शासक, नियंत्रक
  57. विश्रुतात्मा — प्रसिद्ध स्वरूप
  58. सुरारिहा — देवताओं के शत्रुओं (दैत्यों) का नाश करने वाले

गुरु-भास्करद्युति नाम (नाम 209–284)

  1. गुरुः — गुरु, ज्ञान देने वाले
  2. गुरुतमः — गुरुओं में भी सर्वश्रेष्ठ
  3. धाम — परम तेज, निवास-स्थान
  4. सत्यः — सत्यस्वरूप
  5. सत्यपराक्रमः — सत्य पराक्रम वाले
  6. निमिषः — निमेष (पलक झपकने) स्वरूप काल
  7. अनिमिषः — सदा जागृत, पलक न झपकाने वाले
  8. स्रग्वी — वैजयन्ती माला धारण करने वाले
  9. वाचस्पतिः — वाणी के स्वामी
  10. उदारधीः — उदार बुद्धि वाले
  11. अग्रणीः — सबको आगे ले जाने वाले
  12. ग्रामणीः — समूहों के नेता
  13. श्रीमान् — श्री-संपन्न
  14. न्यायः — न्यायस्वरूप
  15. नेता — नेतृत्व करने वाले
  16. समीरणः — वायुस्वरूप, प्रेरक
  17. सहस्रमूर्धा — सहस्र मस्तकों वाले
  18. विश्वात्मा — विश्व की आत्मा
  19. सहस्राक्षः — सहस्र नेत्रों वाले
  20. सहस्रपात् — सहस्र चरणों वाले
  21. आवर्तनः — संसार-चक्र चलाने वाले
  22. निवृत्तात्मा — निवृत्ति स्वरूप आत्मा
  23. संवृतः — सब ओर से आवृत
  24. सम्प्रमर्दनः — दुष्टों का संपूर्ण नाश करने वाले
  25. अहः — दिनस्वरूप
  26. संवर्तकः — प्रलयकर्ता
  27. वह्निः — अग्निस्वरूप
  28. अनिलः — वायुस्वरूप
  29. धरणीधरः — पृथ्वी को धारण करने वाले
  30. सुप्रसादः — सुंदर कृपा करने वाले
  31. प्रसन्नात्मा — प्रसन्न आत्मा वाले
  32. विश्वधृक् — विश्व को धारण करने वाले
  33. विश्वभुक् — विश्व का भरण-पोषण करने वाले
  34. विभुः — सर्वव्यापी
  35. सत्कर्ता — सत्कर्म करने वाले
  36. सत्कृतः — सत्पुरुषों द्वारा सम्मानित
  37. साधुः — साधुस्वरूप
  38. जह्नुः — गंगा को धारण करने वाले
  39. नारायणः — जल में निवास करने वाले, सबके आश्रय
  40. नरः — नर रूप धारक
  41. असंख्येयः — जिसकी गणना न हो सके
  42. अप्रमेयात्मा — अप्रमेय आत्मा वाले
  43. विशिष्टः — विशिष्ट, श्रेष्ठ
  44. शिष्टकृत् — सज्जनों का निर्माण करने वाले
  45. शुचिः — पवित्र
  46. सिद्धार्थः — जिनका प्रयोजन सिद्ध है
  47. सिद्धसंकल्पः — जिनके संकल्प सिद्ध होते हैं
  48. सिद्धिदः — सिद्धि देने वाले
  49. सिद्धिसाधनः — सिद्धि प्राप्ति का साधन
  50. वृषाही — धर्म को धारण करने वाले
  51. वृषभः — धर्मस्वरूप वृषभ
  52. विष्णुः — सर्वव्यापी
  53. वृषपर्वा — धर्म जिनकी सीढ़ी है
  54. वृषोदरः — उदर में धर्म धारण करने वाले
  55. वर्धनः — वृद्धि करने वाले
  56. वर्धमानः — निरंतर वृद्धि पाने वाले
  57. विविक्तः — विविक्त, शुद्ध
  58. श्रुतिसागरः — श्रुतियों (वेदों) के सागर
  59. सुभुजः — सुंदर भुजाओं वाले
  60. दुर्धरः — जिसे धारण करना कठिन हो
  61. वाग्मी — उत्तम वाणी वाले
  62. महेन्द्रः — महान इन्द्र स्वरूप
  63. वसुदः — धन देने वाले
  64. वसुः — निवासस्वरूप
  65. नैकरूपः — अनेक रूपों वाले
  66. बृहद्रूपः — विशाल रूप वाले
  67. शिपिविष्टः — किरणों में प्रविष्ट, तीव्र तेजयुक्त
  68. प्रकाशनः — प्रकाश करने वाले
  69. ओजस्तेजोद्युतिधरः — ओज, तेज व द्युति धारण करने वाले
  70. प्रकाशात्मा — प्रकाशस्वरूप आत्मा
  71. प्रतापनः — प्रताप देने वाले
  72. ऋद्धः — समृद्ध
  73. स्पष्टाक्षरः — स्पष्ट उच्चारण/अक्षर स्वरूप
  74. मन्त्रः — मंत्रस्वरूप
  75. चन्द्रांशुः — चंद्रमा की किरणों जैसे शीतल
  76. भास्करद्युतिः — सूर्य के समान तेजोमय

अमृतांशूद्भव-पद्मनिभेक्षण नाम (नाम 285–348)

  1. अमृतांशूद्भवः — अमृत की किरणों (चंद्रमा) से उत्पन्न
  2. भानुः — सूर्यस्वरूप, तेजोमय
  3. शशबिन्दुः — चंद्रमा रूप (हरिण-चिह्न धारी)
  4. सुरेश्वरः — देवताओं के ईश्वर
  5. औषधम् — रोगनाशक औषधि स्वरूप
  6. जगतःसेतुः — संसार-सागर को पार कराने वाला सेतु
  7. सत्यधर्मपराक्रमः — सत्य और धर्म में पराक्रमी
  8. भूतभव्यभवन्नाथः — भूत, भविष्य व वर्तमान के स्वामी
  9. पवनः — वायुस्वरूप
  10. पावनः — पवित्र करने वाले, शुद्धिकर्ता
  11. अनलः — अग्निस्वरूप
  12. कामहा — काम (वासना) का नाश करने वाले
  13. कामकृत् — इच्छाएँ पूर्ण करने वाले
  14. कान्तः — अत्यंत सुंदर
  15. कामः — इच्छास्वरूप
  16. कामप्रदः — इच्छाएँ प्रदान करने वाले
  17. प्रभुः — सर्वसमर्थ स्वामी
  18. युगादिकृत् — युगों का आरंभ करने वाले
  19. युगावर्तः — युगों का चक्र चलाने वाले
  20. नैकमायः — अनेक माया धारण करने वाले
  21. महाशनः — सब कुछ समाहित कर जाने वाले
  22. अदृश्यः — दिखाई न देने वाले
  23. व्यक्तरूपः — प्रकट रूप वाले
  24. सहस्रजित् — सहस्रों को जीतने वाले
  25. अनन्तजित् — अनंत को जीतने वाले, सदा विजयी
  26. इष्टः — सबको प्रिय
  27. अविशिष्टः — सर्वत्र समान रूप से व्याप्त
  28. शिष्टेष्टः — सज्जनों को प्रिय
  29. शिखण्डी — मोरपंख धारण करने वाले
  30. नहुषः — जीवों को मायाजाल में बाँधने वाले
  31. वृषः — धर्मस्वरूप
  32. क्रोधहा — क्रोध का नाश करने वाले
  33. क्रोधकृत् — धर्म-रक्षा हेतु क्रोध करने वाले
  34. कर्ता — सृष्टिकर्ता
  35. विश्वबाहुः — विश्व ही जिनकी भुजाएँ हैं
  36. महीधरः — पृथ्वी को धारण करने वाले
  37. अच्युतः — कभी च्युत न होने वाले
  38. प्रथितः — सुप्रसिद्ध
  39. प्राणः — प्राणस्वरूप
  40. प्राणदः — प्राण देने वाले
  41. वासवानुजः — इन्द्र के लघु भ्राता (वामन रूप)
  42. अपांनिधिः — जल के निधि (समुद्र) स्वरूप
  43. अधिष्ठानम् — सबका आधार
  44. अप्रमत्तः — सदा सजग, असावधानी रहित
  45. प्रतिष्ठितः — सुस्थिर, सबका आश्रय
  46. स्कन्दः — तेजस्वरूप
  47. स्कन्दधरः — तेज को धारण करने वाले
  48. धुर्यः — सृष्टि का भार वहन करने वाले
  49. वरदः — वर देने वाले
  50. वायुवाहनः — वायु को चलाने वाले
  51. वासुदेवः — वसुदेव-पुत्र, सर्वव्यापी
  52. बृहद्भानुः — महान तेजस्वी
  53. आदिदेवः — आदि देव (सबसे प्राचीन)
  54. पुरन्दरः — शत्रुओं के नगर नष्ट करने वाले
  55. अशोकः — शोकरहित
  56. तारणः — भवसागर से तारने वाले
  57. तारः — तारने वाले, ॐ स्वरूप
  58. शूरः — शूरवीर
  59. शौरिः — शूरसेन-वंशज (कृष्ण रूप)
  60. जनेश्वरः — प्रजाओं के ईश्वर
  61. अनुकूलः — सबके अनुकूल, हितकारी
  62. शतावर्तः — सैकड़ों रूपों में आवर्तित होने वाले
  63. पद्मी — कमल धारण करने वाले
  64. पद्मनिभेक्षणः — कमल के समान नेत्रों वाले

पद्मनाभ-धर्मविदुत्तम नाम (नाम 349–408)

  1. पद्मनाभः — नाभि में कमल धारण करने वाले
  2. अरविन्दाक्षः — कमल नेत्रों वाले
  3. पद्मगर्भः — कमल जिनके गर्भ में है
  4. शरीरभृत् — शरीर का धारण-पोषण करने वाले
  5. महर्द्धिः — महान ऐश्वर्य वाले
  6. ऋद्धः — समृद्ध
  7. वृद्धात्मा — सनातन आत्मा वाले
  8. महाक्षः — विशाल नेत्रों वाले
  9. गरुडध्वजः — गरुड़-चिह्नित ध्वज वाले
  10. अतुलः — अतुलनीय
  11. शरभः — महाबलशाली
  12. भीमः — भयानक, महाबलशाली
  13. समयज्ञः — उचित समय के ज्ञाता
  14. हविः — यज्ञ-हवि स्वरूप
  15. हरिः — पापों व दुखों का हरण करने वाले
  16. सर्वलक्षणलक्षण्यः — सभी शुभ लक्षणों से युक्त
  17. लक्ष्मीवान् — लक्ष्मी सहित
  18. समितिञ्जयः — युद्धों में विजयी
  19. विक्षरः — क्षयरहित
  20. रोहितः — मत्स्य अवतार रूप
  21. मार्गः — मोक्ष-मार्ग स्वरूप
  22. हेतुः — सृष्टि का कारण
  23. दामोदरः — उदर में रज्जु-बंधन धारण करने वाले
  24. सहः — सहनशील, सर्वसमर्थ
  25. महीधरः — पृथ्वी को धारण करने वाले
  26. महाभागः — महान सौभाग्य वाले
  27. वेगवान् — अत्यंत वेगवान्
  28. अमिताशनः — असीमित संहार-शक्ति वाले
  29. उद्भवः — सृष्टि के उद्गम स्वरूप
  30. क्षोभणः — प्रकृति को क्षुब्ध (सक्रिय) करने वाले
  31. देवः — देवस्वरूप
  32. श्रीगर्भः — श्री को गर्भ में धारण करने वाले
  33. परमेश्वरः — परम ईश्वर
  34. करणम् — साधन/उपकरण स्वरूप
  35. कारणम् — मूल कारण स्वरूप
  36. कर्ता — सृष्टिकर्ता
  37. विकर्ता — सृष्टि को विविध रूपों में रचने वाले
  38. गहनः — अगाध, गूढ़ स्वरूप
  39. गुहः — गुहा (हृदय) में छिपे रहने वाले
  40. व्यवसायः — निश्चयस्वरूप
  41. व्यवस्थानः — व्यवस्था करने वाले
  42. संस्थानः — सबका आश्रय-स्थान
  43. स्थानदः — स्थान/पद देने वाले
  44. ध्रुवः — अचल, स्थिर
  45. परर्द्धिः — परम ऐश्वर्य वाले
  46. परमस्पष्टः — पूर्णतः स्पष्ट, प्रकट
  47. तुष्टः — संतुष्ट
  48. पुष्टः — पूर्ण, समृद्ध
  49. शुभेक्षणः — शुभ दृष्टि वाले
  50. रामः — आनंदस्वरूप (रामावतार)
  51. विरामः — सबकी अंतिम विश्रांति (मोक्ष) स्वरूप
  52. विरजः — रजोगुण/मल रहित
  53. मार्गः — मार्गस्वरूप
  54. नेयः — प्रमाण द्वारा जानने योग्य
  55. नयः — नीतिस्वरूप
  56. अनयः — जिनका कोई नियंत्रक नहीं
  57. वीरः — वीर
  58. शक्तिमतांश्रेष्ठः — शक्तिशालियों में श्रेष्ठ
  59. धर्मः — धर्मस्वरूप
  60. धर्मविदुत्तमः — धर्म के ज्ञाताओं में सर्वोत्तम

वैकुण्ठ-विदारण नाम (नाम 409–469)

  1. वैकुण्ठः — वैकुंठ धाम के स्वामी
  2. पुरुषः — सर्वव्यापी पुरुष-स्वरूप
  3. प्राणः — प्राणस्वरूप
  4. प्राणदः — प्राण देने वाले
  5. प्रणवः — ॐ (ओम्) स्वरूप
  6. पृथुः — विस्तृत स्वरूप वाले
  7. हिरण्यगर्भः — स्वर्ण-गर्भ (ब्रह्मा) स्वरूप
  8. शत्रुघ्नः — शत्रुओं का नाश करने वाले
  9. व्याप्तः — सर्वत्र व्याप्त
  10. वायुः — वायुस्वरूप
  11. अधोक्षजः — इन्द्रियों के अधीन न होने वाले
  12. ऋतुः — ऋतुस्वरूप
  13. सुदर्शनः — शुभ दर्शन वाले, सुदर्शन-चक्रधारी
  14. कालः — कालस्वरूप
  15. परमेष्ठी — परम पद पर स्थित (ब्रह्मा रूप)
  16. परिग्रहः — सबको ग्रहण करने वाले
  17. उग्रः — तीव्र, प्रचंड
  18. संवत्सरः — वर्ष-स्वरूप (काल-चक्र)
  19. दक्षः — कुशल, समर्थ
  20. विश्रामः — विश्राम-स्थल स्वरूप
  21. विश्वदक्षिणः — विश्व को दक्षिणा रूप में देने वाले
  22. विस्तारः — विस्तारस्वरूप
  23. स्थावरस्थाणुः — स्थावर वस्तुओं में स्थिर, अचल स्तंभ रूप
  24. प्रमाणम् — प्रमाणस्वरूप
  25. बीजम् — सृष्टि का मूल बीज
  26. अव्ययम् — अक्षय, नाशरहित
  27. अर्थः — प्रयोजन/धन स्वरूप
  28. अनर्थः — जिनके लिए कोई प्रयोजन शेष नहीं
  29. महाकोशः — महान कोश (निधि) स्वरूप
  30. महाभोगः — महान भोग वाले
  31. महाधनः — महान धन वाले
  32. अनिर्विण्णः — कभी खिन्न न होने वाले
  33. स्थविष्ठः — अत्यंत स्थूल, विशाल
  34. अभूः — अजन्मा
  35. धर्मयूपः — धर्म-यज्ञ का यूप (स्तंभ) स्वरूप
  36. महामखः — महान यज्ञ-स्वरूप
  37. नक्षत्रनेमिः — नक्षत्रों के चक्र की धुरी
  38. नक्षत्री — नक्षत्रों के स्वामी (चंद्रमा रूप)
  39. क्षमः — समर्थ
  40. क्षामः — क्षीण होते हुए भी अविनाशी
  41. समीहनः — उचित प्रयास करने वाले
  42. यज्ञः — यज्ञस्वरूप
  43. इज्यः — पूजनीय
  44. महेज्यः — महान पूजा के योग्य
  45. क्रतुः — यज्ञ-कर्म स्वरूप
  46. सत्रम् — सत्रयज्ञ स्वरूप
  47. सतांगतिः — सज्जनों की परम गति
  48. सर्वदर्शी — सबको देखने वाले
  49. विमुक्तात्मा — सदा मुक्त आत्मा वाले
  50. सर्वज्ञः — सर्वज्ञाता
  51. ज्ञानमुत्तमम् — परम उत्तम ज्ञान-स्वरूप
  52. सुव्रतः — उत्तम व्रत वाले
  53. सुमुखः — सुंदर मुख वाले
  54. सूक्ष्मः — सूक्ष्म, अतीन्द्रिय
  55. सुघोषः — मधुर घोष (शंखध्वनि) वाले
  56. सुखदः — सुख देने वाले
  57. सुहृत् — सबका सच्चा मित्र
  58. मनोहरः — मन को हरने वाले
  59. जितक्रोधः — क्रोध को जीतने वाले
  60. वीरबाहुः — वीर भुजाओं वाले
  61. विदारणः — दुष्टों का विदारण करने वाले

स्वापन-सात्वतांपति नाम (नाम 470–518)

  1. स्वापनः — सबको निद्रा में लय करने वाले
  2. स्ववशः — स्वयं अपने अधीन, स्वतंत्र
  3. व्यापी — सर्वव्यापी
  4. नैकात्मा — अनेक रूपों में विद्यमान आत्मा
  5. नैककर्मकृत् — अनेक कर्म करने वाले
  6. वत्सरः — वर्षस्वरूप
  7. वत्सलः — प्रेमपूर्ण, स्नेही
  8. वत्सी — भक्तों के पालक
  9. रत्नगर्भः — रत्नों के गर्भ (समुद्र) स्वरूप
  10. धनेश्वरः — धन के स्वामी
  11. धर्मगुप् — धर्म की रक्षा करने वाले
  12. धर्मकृत् — धर्म का आचरण करने वाले
  13. धर्मी — धर्मस्वरूप
  14. सत् — सत्-स्वरूप (अस्तित्व)
  15. असत् — कार्य-कारण भेद से असत् रूप में भी प्रकट
  16. क्षरम् — नाशवान जगत-स्वरूप
  17. अक्षरम् — अविनाशी ब्रह्म-स्वरूप
  18. अविज्ञाता — इन्द्रियों द्वारा न जाने जा सकने वाले
  19. सहस्रांशुः — सहस्र किरणों वाले
  20. विधाता — सृष्टि की विधि रचने वाले
  21. कृतलक्षणः — शास्त्रों में जिनके लक्षण निश्चित किए गए
  22. गभस्तिनेमिः — सूर्य की किरणों के चक्र स्वरूप
  23. सत्त्वस्थः — सत्त्वगुण में स्थित
  24. सिंहः — सिंह स्वरूप
  25. भूतमहेश्वरः — समस्त प्राणियों के महान ईश्वर
  26. आदिदेवः — आदि देव
  27. महादेवः — महान देव
  28. देवेशः — देवताओं के ईश
  29. देवभृत् — देवताओं का भरण-पोषण करने वाले
  30. गुरुः — गुरु, ज्ञानदाता
  31. उत्तरः — सबसे श्रेष्ठ, उद्धारक
  32. गोपतिः — गौओं/पृथ्वी के स्वामी
  33. गोप्ता — रक्षक
  34. ज्ञानगम्यः — ज्ञान से प्राप्त होने योग्य
  35. पुरातनः — सनातन, प्राचीन
  36. शरीरभूतभृत् — शरीरधारी प्राणियों का पालक
  37. भोक्ता — भोगकर्ता
  38. कपीन्द्रः — वानरों के स्वामी (राम रूप)
  39. भूरिदक्षिणः — अपार दक्षिणा देने वाले
  40. सोमपः — सोमरस पीने वाले
  41. अमृतपः — अमृत पान करने वाले
  42. सोमः — सोमस्वरूप
  43. पुरुजित् — बहुतों को जीतने वाले
  44. पुरुसत्तमः — पुरुषों में सर्वश्रेष्ठ
  45. विनयः — विनयस्वरूप
  46. जयः — विजयस्वरूप
  47. सत्यसन्धः — सत्य की प्रतिज्ञा करने वाले
  48. दाशार्हः — दशार्ह कुल में अवतरित
  49. सात्वतांपतिः — सात्वत वंशजों के स्वामी (कृष्ण रूप)

जीव-महामना नाम (नाम 519–566)

  1. जीवः — जीवस्वरूप
  2. विनयिता — विनय कराने वाले
  3. साक्षी — सबके साक्षी
  4. मुकुन्दः — मोक्ष देने वाले
  5. अमितविक्रमः — असीम पराक्रम वाले
  6. अम्भोनिधिः — जल के निधि (समुद्र) स्वरूप
  7. अनन्तात्मा — अनंत आत्मा वाले
  8. महोदधिशयः — महासागर में शयन करने वाले
  9. अन्तकः — अंत करने वाले (संहारक)
  10. अजः — अजन्मा
  11. महार्हः — महान पूजा के योग्य
  12. स्वाभाव्यः — स्वाभाविक रूप से सिद्ध
  13. जितामित्रः — शत्रुओं को जीतने वाले
  14. प्रमोदनः — आनंद देने वाले
  15. आनन्दः — आनंदस्वरूप
  16. नन्दनः — आनंदित करने वाले
  17. नन्दः — आनंदस्वरूप
  18. सत्यधर्मा — सत्य धर्म वाले
  19. त्रिविक्रमः — तीन पगों में त्रिलोक मापने वाले
  20. महर्षिः — महान ऋषि
  21. कपिलाचार्यः — कपिल मुनि रूप आचार्य
  22. कृतज्ञः — भक्तों का भाव जानने वाले
  23. मेदिनीपतिः — पृथ्वी के स्वामी
  24. त्रिपदः — तीन पगों वाले (वामन रूप)
  25. त्रिदशाध्यक्षः — देवताओं के अध्यक्ष
  26. महाशृङ्गः — महान शृंग (मत्स्यावतार) वाले
  27. कृतान्तकृत् — प्रलयकर्ता
  28. महावराहः — महान वराह अवतार
  29. गोविन्दः — गौओं व ज्ञान के रक्षक
  30. सुषेणः — सुंदर सेना वाले
  31. कनकाङ्गदी — स्वर्ण भुजबंध धारण करने वाले
  32. गुह्यः — रहस्यमय
  33. गभीरः — गंभीर स्वभाव वाले
  34. गहनः — अगाध
  35. गुप्तः — गुप्त, अप्रकट
  36. चक्रगदाधरः — चक्र व गदा धारण करने वाले
  37. वेधाः — सृष्टि-रचयिता
  38. स्वाङ्गः — स्वयं अपने अंगों से युक्त
  39. अजितः — अपराजित
  40. कृष्णः — कृष्ण रूप (श्याम वर्ण)
  41. दृढः — दृढ़, अचल
  42. संकर्षणः — प्रलयकाल में सबको खींच लेने वाले
  43. अच्युतः — कभी च्युत न होने वाले
  44. वरुणः — जल के देवता रूप
  45. वारुणः — वरुण-संबंधी
  46. वृक्षः — वृक्ष रूप (आश्रयदाता)
  47. पुष्कराक्षः — कमल जैसे नेत्रों वाले
  48. महामनाः — उदार हृदय वाले

भगवान्-श्रीमतांवर नाम (नाम 567–615)

  1. भगवान् — सर्व ऐश्वर्य संपन्न
  2. भगहा — प्रलयकाल में ऐश्वर्य का संहार करने वाले
  3. आनन्दी — आनंदस्वरूप
  4. वनमाली — वनमाला धारण करने वाले
  5. हलायुधः — हल को आयुध बनाने वाले (बलराम रूप)
  6. आदित्यः — आदिति-पुत्र (सूर्य रूप)
  7. ज्योतिरादित्यः — सूर्य रूप तेज
  8. सहिष्णुः — सहनशील
  9. गतिसत्तमः — सर्वोत्तम गति (मोक्ष) देने वाले
  10. सुधन्वा — उत्तम धनुष (शार्ङ्ग) धारण करने वाले
  11. खण्डपरशुः — परशु धारण करने वाले (परशुराम रूप)
  12. दारुणः — दुष्टों के लिए भयानक
  13. द्रविणप्रदः — धन देने वाले
  14. दिवस्पृक् — आकाश को स्पर्श करने वाले (त्रिविक्रम रूप)
  15. सर्वदृक् — सबको देखने वाले
  16. व्यासः — वेद-विस्तारक (व्यास रूप)
  17. वाचस्पतिः — वाणी के स्वामी
  18. अयोनिजः — योनि से उत्पन्न न होने वाले
  19. त्रिसामा — तीन सामवेद-स्तुतियों से स्तुत
  20. सामगः — सामगान करने वाले
  21. साम — सामवेद-स्वरूप
  22. निर्वाणम् — मोक्षस्वरूप
  23. भेषजम् — औषधि स्वरूप
  24. भिषक् — वैद्य (रोगनाशक)
  25. संन्यासकृत् — संन्यास की स्थापना करने वाले
  26. शमः — मन की शांति स्वरूप
  27. शान्तः — शांतस्वरूप
  28. निष्ठा — सबका आश्रय
  29. शान्तिः — शांतिस्वरूप
  30. परायणम् — परम लक्ष्य/आश्रय
  31. शुभाङ्गः — शुभ अंगों वाले
  32. शान्तिदः — शांति देने वाले
  33. स्रष्टा — सृष्टिकर्ता
  34. कुमुदः — कुमुद के समान आनंद देने वाले
  35. कुवलेशयः — जल में शयन करने वाले
  36. गोहितः — गौओं/पृथ्वी का हित करने वाले
  37. गोपतिः — गौओं के स्वामी
  38. गोप्ता — रक्षक
  39. वृषभाक्षः — वृषभ के समान नेत्रों वाले
  40. वृषप्रियः — धर्म को प्रिय मानने वाले
  41. अनिवर्ती — कभी पीछे न हटने वाले
  42. निवृत्तात्मा — निवृत्ति-स्वरूप आत्मा वाले
  43. संक्षेप्ता — प्रलयकाल में सृष्टि का संक्षेप करने वाले
  44. क्षेमकृत् — कल्याण करने वाले
  45. शिवः — मंगलस्वरूप
  46. श्रीवत्सवक्षाः — वक्षस्थल पर श्रीवत्स-चिह्न धारण करने वाले
  47. श्रीवासः — श्री के निवास-स्थान
  48. श्रीपतिः — लक्ष्मीपति
  49. श्रीमतांवरः — श्रीसंपन्नों में श्रेष्ठ

श्रीद-हरि नाम (नाम 616–663)

  1. श्रीदः — श्री (समृद्धि) देने वाले
  2. श्रीशः — श्री के स्वामी
  3. श्रीनिवासः — श्री के निवास-स्थान
  4. श्रीनिधिः — श्री की निधि स्वरूप
  5. श्रीविभावनः — श्री का प्रसार करने वाले
  6. श्रीधरः — श्री को धारण करने वाले
  7. श्रीकरः — श्री (शुभता) करने वाले
  8. श्रेयः — कल्याणस्वरूप
  9. श्रीमान् — श्री-संपन्न
  10. लोकत्रयाश्रयः — तीनों लोकों के आश्रय
  11. स्वक्षः — सुंदर नेत्रों वाले
  12. स्वङ्गः — सुंदर अंगों वाले
  13. शतानन्दः — अनंत आनंद-स्वरूप
  14. नन्दिः — आनंदस्वरूप
  15. ज्योतिः — तेजस्वरूप
  16. गणेश्वरः — गणों के स्वामी
  17. विजितात्मा — जिनका मन पूर्ण विजित है
  18. अविधेयात्मा — किसी के नियंत्रण में न आने वाले
  19. सत्कीर्तिः — सत्य कीर्ति वाले
  20. छिन्नसंशयः — संदेहों को छिन्न करने वाले
  21. उदीर्णः — उत्कृष्ट, सर्वोपरि
  22. सर्वतश्चक्षुः — सब दिशाओं में नेत्र वाले
  23. अनीशः — जिनका कोई स्वामी नहीं
  24. शाश्वतः — सनातन
  25. स्थिरः — स्थिर
  26. भूशयः — पृथ्वी पर शयन करने वाले
  27. भूषणः — आभूषण स्वरूप
  28. भूतिः — ऐश्वर्यस्वरूप
  29. विशोकः — शोकरहित
  30. शोकनाशनः — शोक का नाश करने वाले
  31. अर्चिष्मान् — तेजोमय
  32. अर्चितः — पूजित
  33. कुम्भः — कुंभ स्वरूप, पूर्णता के प्रतीक
  34. विशुद्धात्मा — विशुद्ध आत्मा वाले
  35. विशोधनः — शुद्ध करने वाले
  36. अनिरुद्धः — अबाधित
  37. अप्रतिरथः — जिनके समान कोई रथी (योद्धा) नहीं
  38. प्रद्युम्नः — अत्यंत तेजस्वी (कृष्ण-पुत्र रूप)
  39. अमितविक्रमः — असीम पराक्रम वाले
  40. कालनेमिनिहा — कालनेमि दैत्य का नाश करने वाले
  41. वीरः — वीर
  42. शौरिः — शूरसेन-वंशज
  43. शूरजनेश्वरः — शूर पुरुषों के ईश्वर
  44. त्रिलोकात्मा — तीनों लोकों की आत्मा
  45. त्रिलोकेशः — तीनों लोकों के ईश
  46. केशवः — सुंदर केशों वाले, केशी असुर के नाशक
  47. केशिहा — केशी असुर का नाश करने वाले
  48. हरिः — पापों का हरण करने वाले

कामदेव-हवि नाम (नाम 664–711)

  1. कामदेवः — इच्छाओं के अधिष्ठाता
  2. कामपालः — इच्छाओं की रक्षा करने वाले
  3. कामी — समस्त इच्छाओं से युक्त (पूर्ण-काम)
  4. कान्तः — अत्यंत सुंदर
  5. कृतागमः — शास्त्रों (आगमों) की रचना करने वाले
  6. अनिर्देश्यवपुः — जिनका स्वरूप वर्णन से परे
  7. विष्णुः — सर्वव्यापी
  8. वीरः — वीर
  9. अनन्तः — अनंत
  10. धनञ्जयः — धन को जीतने वाले (अर्जुन-सखा रूप)
  11. ब्रह्मण्यः — ब्रह्मज्ञान के हितैषी
  12. ब्रह्मकृत् — वेदों की रचना करने वाले
  13. ब्रह्मा — सृष्टिकर्ता ब्रह्मा-स्वरूप
  14. ब्रह्म — परब्रह्म-स्वरूप
  15. ब्रह्मविवर्धनः — ब्रह्मज्ञान को बढ़ाने वाले
  16. ब्रह्मविद् — ब्रह्मज्ञानी
  17. ब्राह्मणः — ब्राह्मण-स्वरूप
  18. ब्रह्मी — ब्रह्म से युक्त
  19. ब्रह्मज्ञः — ब्रह्म को जानने वाले
  20. ब्राह्मणप्रियः — ब्राह्मणों को प्रिय
  21. महाक्रमः — महान पगों वाले (त्रिविक्रम रूप)
  22. महाकर्मा — महान कर्म करने वाले
  23. महातेजाः — महान तेजस्वी
  24. महोरगः — महान सर्प (शेषनाग) रूप
  25. महाक्रतुः — महान यज्ञ-स्वरूप
  26. महायज्वा — महान यज्ञ करने वाले
  27. महायज्ञः — महान यज्ञ-स्वरूप
  28. महाहविः — महान हवि-स्वरूप
  29. स्तव्यः — स्तुति किए जाने योग्य
  30. स्तवप्रियः — स्तुति को प्रिय मानने वाले
  31. स्तोत्रम् — स्तोत्र-स्वरूप
  32. स्तुतिः — स्तुति-स्वरूप
  33. स्तोता — स्तुति करने वाले
  34. रणप्रियः — युद्ध को प्रिय मानने वाले
  35. पूर्णः — पूर्ण
  36. पूरयिता — सबकी इच्छाएँ पूर्ण करने वाले
  37. पुण्यः — पुण्यस्वरूप
  38. पुण्यकीर्तिः — पवित्र कीर्ति वाले
  39. अनामयः — रोगरहित
  40. मनोजवः — मन के समान वेगवान्
  41. तीर्थकरः — तीर्थों के निर्माता
  42. वसुरेताः — वसु रूप तेज वाले
  43. वसुप्रदः — धन देने वाले
  44. वसुप्रदः — धन देने वाले (मूल पाठ में पुनरुक्त नाम)
  45. वासुदेवः — वसुदेव-पुत्र
  46. वसुः — निवासस्वरूप
  47. वसुमनाः — उदार हृदय वाले
  48. हविः — यज्ञ-हवि स्वरूप

सद्गति-चल नाम (नाम 712–759)

  1. सद्गतिः — सत्य गति (मोक्ष) देने वाले
  2. सत्कृतिः — सत्कर्म स्वरूप
  3. सत्ता — अस्तित्व-स्वरूप
  4. सद्भूतिः — सत् ऐश्वर्य वाले
  5. सत्परायणः — सज्जनों का परम आश्रय
  6. शूरसेनः — शूर सेना वाले
  7. यदुश्रेष्ठः — यदुवंशियों में श्रेष्ठ
  8. सन्निवासः — भक्तों का निवास-स्थान
  9. सुयामुनः — यमुना तट के निवासी
  10. भूतावासः — समस्त प्राणियों के निवास-स्थान
  11. वासुदेवः — वसुदेव-पुत्र
  12. सर्वासुनिलयः — सब प्राणों के आश्रय
  13. अनलः — अग्निस्वरूप
  14. दर्पहा — अहंकार का नाश करने वाले
  15. दर्पदः — उचित आत्मगौरव देने वाले
  16. दृप्तः — तेजोमय, उल्लसित
  17. दुर्धरः — जिन्हें धारण करना कठिन
  18. अपराजितः — अपराजित
  19. विश्वमूर्तिः — विश्वस्वरूप मूर्ति वाले
  20. महामूर्तिः — महान स्वरूप वाले
  21. दीप्तमूर्तिः — तेजोमय स्वरूप वाले
  22. अमूर्तिमान् — निराकार होते हुए भी आकार धारण करने वाले
  23. अनेकमूर्तिः — अनेक रूप धारण करने वाले
  24. अव्यक्तः — अप्रकट
  25. शतमूर्तिः — सैकड़ों रूप वाले
  26. शताननः — सैकड़ों मुख वाले
  27. एकः — एक, अद्वैत
  28. नैकः — अनेक रूपों में प्रकट
  29. सवः — सृष्टि-कर्ता
  30. कः — जिज्ञासित ब्रह्म-स्वरूप
  31. किम् — जिज्ञासा का विषय परमतत्त्व
  32. यत् — निर्गुण ब्रह्म का सूचक
  33. तत् — परम तत्त्व का सूचक
  34. पदमनुत्तमम् — सर्वोत्कृष्ट पद/अवस्था
  35. लोकबन्धुः — लोक के बंधु (सखा)
  36. लोकनाथः — लोक के स्वामी
  37. माधवः — लक्ष्मी के पति
  38. भक्तवत्सलः — भक्तों पर स्नेह रखने वाले
  39. सुवर्णवर्णः — स्वर्ण के समान वर्ण वाले
  40. हेमाङ्गः — स्वर्णिम अंगों वाले
  41. वराङ्गः — सुंदर अंगों वाले
  42. चन्दनाङ्गदी — चन्दन-लेपित भुजबंध धारण करने वाले
  43. वीरहा — शत्रु वीरों का नाश करने वाले
  44. विषमः — जिनके समान कोई नहीं
  45. शून्यः — शून्यस्वरूप (निर्गुण)
  46. घृताशीः — घृत समान आशीष देने वाले
  47. अचलः — अचल, स्थिर
  48. चलः — गतिमान (सृष्टि-संचालक रूप में)

अमानी-कृतागम नाम (नाम 760–802)

  1. अमानी — अहंकार रहित
  2. मानदः — सम्मान देने वाले
  3. मान्यः — सम्मान के योग्य
  4. लोकस्वामी — लोक के स्वामी
  5. त्रिलोकधृक् — तीनों लोकों को धारण करने वाले
  6. सुमेधा — उत्तम बुद्धि वाले
  7. मेधजः — यज्ञ से उत्पन्न
  8. धन्यः — धन्य, सौभाग्यशाली
  9. सत्यमेधा — सत्य बुद्धि वाले
  10. धराधरः — पृथ्वी को धारण करने वाले
  11. तेजोवृषः — तेज की वर्षा करने वाले
  12. द्युतिधरः — दिव्य कांति धारण करने वाले
  13. सर्वशस्त्रभृतांवरः — सब शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ
  14. प्रग्रहः — नियंत्रण करने वाले
  15. निग्रहः — दमन करने वाले
  16. व्यग्रः — कार्यतत्पर
  17. नैकशृङ्गः — अनेक शृंगों (मत्स्यावतार) वाले
  18. गदाग्रजः — गद के अग्रज (बलराम रूप)
  19. चतुर्मूर्तिः — चार रूपों वाले
  20. चतुर्बाहुः — चार भुजाओं वाले
  21. चतुर्व्यूहः — चार व्यूह रूप
  22. चतुर्गतिः — चार प्रकार की गति देने वाले
  23. चतुरात्मा — चतुर्विध आत्मा वाले
  24. चतुर्भावः — चार भावों वाले
  25. चतुर्वेदविद् — चारों वेदों को जानने वाले
  26. एकपात् — एक पाद (अंश) में स्थित
  27. समावर्तः — संसार-चक्र चलाने वाले
  28. अनिवृत्तात्मा — कभी निवृत्त न होने वाली आत्मा वाले
  29. दुर्जयः — जिन्हें जीतना कठिन
  30. दुरतिक्रमः — जिनका उल्लंघन कठिन
  31. दुर्लभः — दुर्लभ
  32. दुर्गमः — जिन तक पहुँचना कठिन
  33. दुर्गः — दुर्ग रूप, अभेद्य
  34. दुरावासः — जिनका निवास खोजना कठिन
  35. दुरारिहा — दुष्ट शत्रुओं का नाश करने वाले
  36. शुभाङ्गः — शुभ अंगों वाले
  37. लोकसारङ्गः — लोक के सार को ग्रहण करने वाले
  38. सुतन्तुः — उत्तम विस्तार करने वाले
  39. तन्तुवर्धनः — सृष्टि के विस्तार को बढ़ाने वाले
  40. इन्द्रकर्मा — इन्द्र के समान कर्म करने वाले
  41. महाकर्मा — महान कर्म करने वाले
  42. कृतकर्मा — कर्म-सिद्ध
  43. कृतागमः — शास्त्रों की रचना करने वाले

उद्भव-भयनाशन नाम (नाम 803–848)

  1. उद्भवः — सृष्टि की उत्पत्ति-स्थान
  2. सुन्दरः — सुंदर
  3. सुन्दः — सौंदर्ययुक्त
  4. रत्ननाभः — रत्न समान नाभि वाले
  5. सुलोचनः — सुंदर नेत्रों वाले
  6. अर्कः — सूर्य रूप
  7. वाजसनः — बल/अन्न देने वाले
  8. शृङ्गी — शृंग धारण करने वाले (मत्स्यावतार)
  9. जयन्तः — विजय करने वाले
  10. सर्वविद् — सब कुछ जानने वाले
  11. जयी — सदा विजयी
  12. सुवर्णबिन्दुः — स्वर्ण के समान तेजोबिंदु वाले
  13. अक्षोभ्यः — कभी विचलित न होने वाले
  14. सर्ववागीश्वरेश्वरः — वाणी के सब स्वामियों के भी ईश्वर
  15. महाह्रदः — महान सरोवर रूप
  16. महागर्तः — महान गर्त (गहराई) रूप
  17. महाभूतः — महाभूत-स्वरूप
  18. महानिधिः — महान निधि-स्वरूप
  19. कुमुदः — कुमुद के समान आनंद देने वाले
  20. कुन्दरः — कुंद फूल के समान शुभ्र
  21. कुन्दः — कुंद-स्वरूप
  22. पर्जन्यः — मेघ रूप, वर्षा करने वाले
  23. पावनः — पवित्र करने वाले
  24. अनिलः — वायु रूप
  25. अमृताशः — अमृत की आशा/स्रोत वाले
  26. अमृतवपुः — अमृत समान शरीर वाले
  27. सर्वज्ञः — सर्वज्ञ
  28. सर्वतोमुखः — सब दिशाओं में मुख वाले
  29. सुलभः — भक्तों को सुलभ
  30. सुव्रतः — उत्तम व्रत वाले
  31. सिद्धः — सिद्ध
  32. शत्रुजित् — शत्रुओं को जीतने वाले
  33. शत्रुतापनः — शत्रुओं को संतप्त करने वाले
  34. न्यग्रोधः — वट वृक्ष रूप
  35. उदुम्बरः — गूलर वृक्ष रूप
  36. अश्वत्थः — पीपल वृक्ष रूप
  37. चाणूरान्ध्रनिषूदनः — चाणूर व आंध्र मल्लों का नाश करने वाले
  38. सहस्रार्चिः — सहस्र किरणों वाले
  39. सप्तजिह्वः — सात जिह्वा (अग्नि) रूप
  40. सप्तैधाः — सात ज्वालाओं वाले
  41. सप्तवाहनः — सात अश्व (सूर्य-रथ) वाहन वाले
  42. अमूर्तिः — निराकार
  43. अनघः — पापरहित
  44. अचिन्त्यः — चिंतन से परे
  45. भयकृत् — दुष्टों में भय उत्पन्न करने वाले
  46. भयनाशनः — भक्तों का भय नाश करने वाले

अणु-रविलोचन नाम (नाम 849–899)

  1. अणुः — अणु रूप, सूक्ष्मतम
  2. बृहत् — बृहद् रूप, विशालतम
  3. कृशः — कृश, सूक्ष्म
  4. स्थूलः — स्थूल, विराट रूप
  5. गुणभृत् — गुणों को धारण करने वाले
  6. निर्गुणः — गुणातीत
  7. महान् — महान
  8. अधृतः — किसी से समर्थित न होने वाले
  9. स्वधृतः — स्वयं अपने आधार पर स्थित
  10. स्वास्यः — सुंदर मुख वाले
  11. प्राग्वंशः — प्राचीन वंश के मूल
  12. वंशवर्धनः — वंश को बढ़ाने वाले
  13. भारभृत् — पृथ्वी के भार को धारण करने वाले
  14. कथितः — शास्त्रों में वर्णित
  15. योगी — योगस्वरूप
  16. योगीशः — योगियों के ईश
  17. सर्वकामदः — सब इच्छाएँ पूर्ण करने वाले
  18. आश्रमः — आश्रम-स्वरूप, शरणस्थल
  19. श्रमणः — तपस्वी
  20. क्षामः — क्षमाशील
  21. सुपर्णः — सुंदर पंखों वाले (गरुड़ रूप)
  22. वायुवाहनः — वायु को वाहन बनाने वाले
  23. धनुर्धरः — धनुष धारण करने वाले
  24. धनुर्वेदः — धनुर्विद्या-स्वरूप
  25. दण्डः — दंड-स्वरूप, न्यायकर्ता
  26. दमयिता — दमन करने वाले
  27. दमः — आत्म-संयम स्वरूप
  28. अपराजितः — अपराजित
  29. सर्वसहः — सब कुछ सहन करने वाले
  30. नियन्ता — नियंत्रक
  31. अनियमः — किसी नियम से बंधे न होने वाले
  32. अयमः — मृत्यु (यम) से रहित
  33. सत्त्ववान् — सत्त्वगुण से युक्त
  34. सात्त्विकः — सात्त्विक
  35. सत्यः — सत्यस्वरूप
  36. सत्यधर्मपरायणः — सत्य धर्म में रत
  37. अभिप्रायः — सभी का अभिप्राय (लक्ष्य)
  38. प्रियार्हः — प्रिय होने योग्य
  39. अर्हः — पूजा के योग्य
  40. प्रियकृत् — प्रिय कार्य करने वाले
  41. प्रीतिवर्धनः — प्रीति बढ़ाने वाले
  42. विहायसगतिः — आकाश में गति करने वाले
  43. ज्योतिः — ज्योतिस्वरूप
  44. सुरुचिः — सुंदर कांति वाले
  45. हुतभुक् — हवि (आहुति) ग्रहण करने वाले
  46. विभुः — सर्वव्यापी
  47. रविः — सूर्यरूप
  48. विरोचनः — प्रकाशमान
  49. सूर्यः — सूर्यस्वरूप
  50. सविता — उत्पत्तिकर्ता (सूर्यरूप)
  51. रविलोचनः — सूर्य के समान नेत्रों वाले

अनन्त-पर्यवस्थित नाम (नाम 900–945)

  1. अनन्तः — अनंत
  2. हुतभुक् — हवि ग्रहण करने वाले
  3. भोक्ता — भोगकर्ता
  4. सुखदः — सुख देने वाले
  5. नैकजः — अनेक रूपों में जन्म लेने वाले
  6. अग्रजः — सबसे पहले उत्पन्न
  7. अनिर्विण्णः — कभी खिन्न न होने वाले
  8. सदामर्षी — सदा सहनशील
  9. लोकाधिष्ठानम् — लोक का आधार
  10. अद्भुतः — अद्भुत
  11. सनात् — सनातन काल से
  12. सनातनतमः — सबसे प्राचीन, सनातनतम
  13. कपिलः — कपिल मुनि रूप
  14. कपिः — जल पीने वाले, वराह रूप
  15. अव्ययः — अव्यय, अक्षय
  16. स्वस्तिदः — कल्याण देने वाले
  17. स्वस्तिकृत् — कल्याण करने वाले
  18. स्वस्ति — कल्याण-स्वरूप
  19. स्वस्तिभुक् — कल्याण का उपभोग करने वाले
  20. स्वस्तिदक्षिणः — कल्याण रूपी दक्षिणा देने वाले
  21. अरौद्रः — क्रोध रहित
  22. कुण्डली — कुंडल धारण करने वाले
  23. चक्री — चक्र धारण करने वाले
  24. विक्रमी — पराक्रमी
  25. ऊर्जितशासनः — प्रबल शासन वाले
  26. शब्दातिगः — शब्दों (वर्णन) से परे
  27. शब्दसहः — शब्दों को सहन करने वाले (वेद-स्वरूप)
  28. शिशिरः — शीतल, शांत स्वभाव वाले
  29. शर्वरीकरः — रात्रि का निर्माण करने वाले
  30. अक्रूरः — क्रूरता रहित
  31. पेशलः — सौम्य, सुंदर
  32. दक्षः — कुशल, दक्ष
  33. दक्षिणः — उदार, दानशील
  34. क्षमिणांवरः — क्षमाशीलों में श्रेष्ठ
  35. विद्वत्तमः — विद्वानों में सर्वश्रेष्ठ
  36. वीतभयः — भयरहित
  37. पुण्यश्रवणकीर्तनः — जिनका श्रवण-कीर्तन पुण्यदायी है
  38. उत्तारणः — भवसागर से पार कराने वाले
  39. दुष्कृतिहा — दुष्कर्मों का नाश करने वाले
  40. पुण्यः — पुण्यस्वरूप
  41. दुःस्वप्ननाशनः — बुरे स्वप्नों का नाश करने वाले
  42. वीरहा — शत्रु वीरों का नाश करने वाले
  43. रक्षणः — रक्षक
  44. सन्तः — सज्जनस्वरूप
  45. जीवनः — जीवनदाता
  46. पर्यवस्थितः — सर्वत्र व्यापक रूप से स्थित

अनन्तरूप-यज्ञवाहन नाम (नाम 946–990)

  1. अनन्तरूपः — अनंत रूपों वाले
  2. अनन्तश्रीः — अनंत ऐश्वर्य वाले
  3. जितमन्युः — क्रोध को जीतने वाले
  4. भयापहः — भय का नाश करने वाले
  5. चतुरश्रः — चतुष्कोणीय, पूर्णता का प्रतीक
  6. गभीरात्मा — गंभीर आत्मा वाले
  7. विदिशः — दिशाओं को प्रदान करने वाले
  8. व्यादिशः — विशेष आदेश देने वाले
  9. दिशः — दिशाओं के स्वामी
  10. अनादिः — आदि रहित
  11. भूः — पृथ्वी-स्वरूप
  12. भुवः — अंतरिक्ष-स्वरूप
  13. लक्ष्मीः — लक्ष्मी-स्वरूप
  14. सुवीरः — उत्तम वीर
  15. रुचिराङ्गदः — सुंदर भुजबंध धारण करने वाले
  16. जननः — जन्मदाता
  17. जनजन्मादिः — जीवों के जन्म का मूल कारण
  18. भीमः — दुष्टों के लिए भयानक
  19. भीमपराक्रमः — भीम पराक्रम वाले
  20. आधारनिलयः — आधार रूप निवास-स्थान
  21. अधाता — अद्वितीय धारणकर्ता
  22. पुष्पहासः — फूलों के समान मुस्कान वाले
  23. प्रजागरः — सदा जागृत
  24. ऊर्ध्वगः — ऊर्ध्व गति वाले
  25. सत्पथाचारः — सन्मार्ग पर चलने वाले
  26. प्राणदः — प्राण देने वाले
  27. प्रणवः — ॐ-स्वरूप
  28. पणः — व्यवहार/विनिमय स्वरूप
  29. प्रमाणम् — प्रमाण-स्वरूप
  30. प्राणनिलयः — प्राणों के आश्रय
  31. प्राणभृत् — प्राणों को धारण करने वाले
  32. प्राणजीवनः — प्राणों को जीवन देने वाले
  33. तत्त्वम् — तत्त्व-स्वरूप
  34. तत्त्वविद् — तत्त्व को जानने वाले
  35. एकात्मा — एक आत्मा वाले
  36. जन्ममृत्युजरातिगः — जन्म-मृत्यु-जरा से परे
  37. भूर्भुवःस्वस्तरुः — भूः-भुवः-स्वः लोकों के वृक्ष-स्वरूप
  38. तारः — तारणकर्ता
  39. सविता — उत्पत्तिकर्ता
  40. प्रपितामहः — ब्रह्मा के भी पिता, परम पितामह
  41. यज्ञः — यज्ञ-स्वरूप
  42. यज्ञपतिः — यज्ञ के स्वामी
  43. यज्वा — यज्ञ करने वाले
  44. यज्ञाङ्गः — यज्ञ के अंग-स्वरूप
  45. यज्ञवाहनः — यज्ञ को सम्पन्न कराने वाले

यज्ञभृत्-सर्वप्रहरणायुध नाम (नाम 991–1015)

  1. यज्ञभृत् — यज्ञ को धारण करने वाले
  2. यज्ञकृत् — यज्ञ संपन्न करने वाले
  3. यज्ञी — यज्ञस्वरूप
  4. यज्ञभुक् — यज्ञ-फल का भोग करने वाले
  5. यज्ञसाधनः — यज्ञ का साधन-स्वरूप
  6. यज्ञान्तकृत् — यज्ञ का समापन करने वाले
  7. यज्ञगुह्यम् — यज्ञ का रहस्य-स्वरूप
  8. अन्नम् — अन्न-स्वरूप
  9. अन्नादः — अन्न का भोग करने वाले
  10. आत्मयोनिः — स्वयं अपने ही कारण
  11. स्वयंजातः — स्वयं उत्पन्न
  12. वैखानः — वराह रूप, पृथ्वी खोदने वाले
  13. सामगायनः — सामगान करने वाले
  14. देवकीनन्दनः — देवकी के पुत्र (कृष्ण रूप)
  15. स्रष्टा — सृष्टिकर्ता
  16. क्षितीशः — पृथ्वी के ईश
  17. पापनाशनः — पापों का नाश करने वाले
  18. शङ्खभृत् — शंख धारण करने वाले
  19. नन्दकी — नंदक खड्ग धारण करने वाले
  20. चक्री — चक्र धारण करने वाले
  21. शार्ङ्गधन्वा — शार्ङ्ग धनुष धारण करने वाले
  22. गदाधरः — गदा धारण करने वाले
  23. रथाङ्गपाणिः — रथचक्र (सुदर्शन) को हाथ में धारण करने वाले
  24. अक्षोभ्यः — कभी विचलित न होने वाले
  25. सर्वप्रहरणायुधः — सब प्रकार के शस्त्र-आयुध वाले — परंपरा में इसे सहस्रनाम का समापन-नाम माना जाता है

अर्थ (हिन्दी)

  1. शांत स्वरूप, शेषनाग पर शयन करने वाले, नाभि से कमल वाले, देवों के स्वामी, विश्व के आधार, आकाश के समान व्यापक, मेघ-वर्ण, शुभ अंगों वाले, लक्ष्मीपति, कमलनयन, योगियों द्वारा ध्यान में प्राप्य — संसार के भय को हरने वाले, समस्त लोकों के एकमात्र नाथ भगवान विष्णु की मैं वंदना करता हूँ।
  2. पहला श्लोक (प्रथम नाम-समूह): विष्णु ही "विश्व" हैं, वषट्कार स्वरूप हैं, भूत-भविष्य-वर्तमान के प्रभु हैं; वे भूतों के रचयिता, धारक, स्वरूप, आत्मा तथा पालक हैं। (इस प्रकार आगे क्रमशः एक हजार नाम आते हैं।)

लाभ

  • मन को गहन शांति, एकाग्रता व आध्यात्मिक बल मिलता है।
  • भय, रोग व बाधाओं का नाश माना जाता है।
  • भगवान विष्णु के प्रति भक्ति व समर्पण बढ़ता है।

कब करें पाठ

गुरुवार, एकादशी व शनिवार को · प्रातः पूजा में · सत्यनारायण व्रत में

स्रोत

रचयिता: वेदव्यास (महाभारत); भीष्म कथित. महाभारत — अनुशासन पर्व (विष्णु सहस्रनाम) · vishnusahasranamam.org — विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र (नाम-मिलान 95%)

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