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लिपि:
॥ श्री ॥
श्री यमुना जी आरती
आरती
पाठ
1
ॐ जय यमुना माता, हरि ॐ जय यमुना माता। जो नहावे फल पावे सुख दुःख की दाता॥
2
पावन श्रीयमुना जल शीतल अगम बहै धारा। जो जन शरण में आया कर दिया निस्तारा॥
3
जो जन प्रातः ही उठकर नित्य स्नान करे। यम के त्रास न पावे जो नित्य ध्यान करे॥
4
कलिकाल में महिमा तुम्हारी अटल रही। तुम्हारा बड़ा महातम चारों वेद कही॥
5
आन तुम्हारे माता प्रभु अवतार लियो। नित्य निर्मल जल पीकर कंस को मार दियो॥
6
नमो मात भय हरणी शुभ मन्गल करणी। मन बेचैन भया है तुम बिन वैतरणी॥
अर्थ (हिन्दी)
- हे यमुना माता, आपकी जय हो; हरि ॐ, आपकी जय हो! जो (आपमें) नहाता है, वह फल पाता है — आप ही सुख-दुख की दाता हैं।
- श्री यमुना का जल पवित्र और शीतल है, उसकी अथाह धारा बहती है; जो जन आपकी शरण में आया, आपने उसका उद्धार कर दिया।
- जो व्यक्ति प्रातः उठकर नित्य (यमुना में) स्नान करता है और नित्य ध्यान करता है, उसे यम का भय नहीं सताता।
- कलियुग में भी आपकी महिमा अटल रही; चारों वेदों ने आपका बड़ा माहात्म्य कहा है।
- हे माता, आपके (तट पर) आकर प्रभु ने अवतार लिया; आपका निर्मल जल नित्य पीकर उन्होंने कंस को मार दिया।
- हे भय हरने वाली, शुभ और मंगल करने वाली माता, आपको नमस्कार; मेरा मन बेचैन हो गया है — आपके बिना (पार कराने वाली) वैतरणी कौन है?
लाभ
- यम के भय से मुक्ति का भाव — "यम के त्रास न पावे, जो नित्य ध्यान करे"।
- भाई दूज (यम द्वितीया) पर गाई जाने वाली आरती।
- कृष्ण-भक्ति से जुड़ाव — यमुना-तट की लीला और कंस-वध का प्रसंग (पद 5)।
कब करें पाठ
भाई दूज (यम द्वितीया) पर · यमुना-स्नान के बाद · प्रातः पूजा में
स्रोत
रचयिता: अज्ञात (किसी प्रति में नाम नहीं). drikpanchang.com — यमुना माता आरती (आधार-पाठ) · knowledgegallery.in — यमुना जी की आरती · bhagwatgeeta.co.in — यमुनाजी आरती · hindi.webdunia.com — ॐ जय यमुना माता (भाई दूज विशेष) · bhaktvatsal.com — यमुना माता जी की आरती
