श्री यमुना जी आरती

śrī yamunā jī āratī

Yamuna Ji Aarti (Om Jai Yamuna Mata)

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
6
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
भाई दूज (यम द्वितीया); प्रातः स्नान के बाद
उद्देश्य:यम-भय से मुक्ति (Freedom from fear of death)पवित्रता (Purity)कृष्ण-भक्ति (Devotion to Krishna)
✓ संपूर्ण

"ॐ जय यमुना माता, हरि ॐ जय यमुना माता" यमुना जी की प्रचलित आरती है, जो विशेषकर भाई दूज पर गाई जाती है। इसके छह पद हैं, और केंद्रीय वचन यम के भय से मुक्ति है — "यम के त्रास न पावे, जो नित्य ध्यान करे"। आरती कृष्ण और कंस-वध से भी जुड़ती है।

परिचय

स्रोत: "ॐ जय यमुना माता, हरि ॐ जय यमुना माता" — परंपरागत आरती

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री यमुना जी आरती
IASTśrī yamunā jī āratī
मूल स्रोत"ॐ जय यमुना माता, हरि ॐ जय यमुना माता" — परंपरागत आरती
शुभ दिनभाई दूज (यम द्वितीया); प्रातः स्नान के बाद
पाठ समय3 मिनट
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

यमुना सूर्य की पुत्री और यमराज की बहन मानी जाती हैं, और यह आरती उसी संबंध के कारण उन्हें यम के भय से छुड़ाने वाली कहती है।

स्नान का फल (पद 1, 3). "जो नहावे फल पावे" — जो यमुना में नहाता है, फल पाता है; और "जो जन प्रातः ही उठकर नित्य स्नान करे, यम के त्रास न पावे" — प्रातः स्नान और ध्यान करने वाले को यम का भय नहीं सताता।

कलियुग में अटल महिमा (पद 4). "कलिकाल में महिमा तुम्हारी अटल रही; तुम्हारा बड़ा महातम चारों वेद कही"।

कृष्ण (पद 5). "आन तुम्हारे माता प्रभु अवतार लियो; नित्य निर्मल जल पीकर कंस को मार दियो" — यमुना के तट पर प्रभु ने अवतार लिया, और उसी का निर्मल जल पीकर कंस को मारा।

वैतरणी (पद 6). अंतिम पद यमुना को भय हरने वाली, शुभ-मंगल करने वाली कहता है, और भक्त की बेचैनी कहता है — "मन बेचैन भया है तुम बिन वैतरणी": संसार-सागर पार कराने वाली वैतरणी तो आप ही हैं।

आरती (लिरिक्स)

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ॐ जय यमुना माता, हरि ॐ जय यमुना माता। जो नहावे फल पावे सुख दुःख की दाता॥

हे यमुना माता, आपकी जय हो; हरि ॐ, आपकी जय हो! जो (आपमें) नहाता है, वह फल पाता है — आप ही सुख-दुख की दाता हैं।

पावन श्रीयमुना जल शीतल अगम बहै धारा। जो जन शरण में आया कर दिया निस्तारा॥

श्री यमुना का जल पवित्र और शीतल है, उसकी अथाह धारा बहती है; जो जन आपकी शरण में आया, आपने उसका उद्धार कर दिया।

जो जन प्रातः ही उठकर नित्य स्नान करे। यम के त्रास न पावे जो नित्य ध्यान करे॥

जो व्यक्ति प्रातः उठकर नित्य (यमुना में) स्नान करता है और नित्य ध्यान करता है, उसे यम का भय नहीं सताता।

कलिकाल में महिमा तुम्हारी अटल रही। तुम्हारा बड़ा महातम चारों वेद कही॥

कलियुग में भी आपकी महिमा अटल रही; चारों वेदों ने आपका बड़ा माहात्म्य कहा है।

आन तुम्हारे माता प्रभु अवतार लियो। नित्य निर्मल जल पीकर कंस को मार दियो॥

हे माता, आपके (तट पर) आकर प्रभु ने अवतार लिया; आपका निर्मल जल नित्य पीकर उन्होंने कंस को मार दिया।

नमो मात भय हरणी शुभ मन्गल करणी। मन बेचैन भया है तुम बिन वैतरणी॥

हे भय हरने वाली, शुभ और मंगल करने वाली माता, आपको नमस्कार; मेरा मन बेचैन हो गया है — आपके बिना (पार कराने वाली) वैतरणी कौन है?

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे यमुना माता, आपकी जय हो; हरि ॐ, आपकी जय हो! जो (आपमें) नहाता है, वह फल पाता है — आप ही सुख-दुख की दाता हैं।
  2. श्री यमुना का जल पवित्र और शीतल है, उसकी अथाह धारा बहती है; जो जन आपकी शरण में आया, आपने उसका उद्धार कर दिया।
  3. जो व्यक्ति प्रातः उठकर नित्य (यमुना में) स्नान करता है और नित्य ध्यान करता है, उसे यम का भय नहीं सताता।
  4. कलियुग में भी आपकी महिमा अटल रही; चारों वेदों ने आपका बड़ा माहात्म्य कहा है।
  5. हे माता, आपके (तट पर) आकर प्रभु ने अवतार लिया; आपका निर्मल जल नित्य पीकर उन्होंने कंस को मार दिया।
  6. हे भय हरने वाली, शुभ और मंगल करने वाली माता, आपको नमस्कार; मेरा मन बेचैन हो गया है — आपके बिना (पार कराने वाली) वैतरणी कौन है?

लाभ

  • यम के भय से मुक्ति का भाव — "यम के त्रास न पावे, जो नित्य ध्यान करे"।
  • भाई दूज (यम द्वितीया) पर गाई जाने वाली आरती।
  • कृष्ण-भक्ति से जुड़ाव — यमुना-तट की लीला और कंस-वध का प्रसंग (पद 5)।

कब करें पाठ

भाई दूज (यम द्वितीया) परयमुना-स्नान के बादप्रातः पूजा में

पाठ विधि

यमुना-तट पर, या घर में यमुना-जल के पात्र के समक्ष, दीपक जलाकर पुष्प अर्पित करें। टेक "ॐ जय यमुना माता, हरि ॐ जय यमुना माता" हर पद के बाद दोहराएँ।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराdrikpanchang.com — यमुना माता आरती (आधार-पाठ) · knowledgegallery.in — यमुना जी की आरती · bhagwatgeeta.co.in — यमुनाजी आरती · hindi.webdunia.com — ॐ जय यमुना माता (भाई दूज विशेष) · bhaktvatsal.com — यमुना माता जी की आरती
रचयिताअज्ञात (किसी प्रति में नाम नहीं)
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

श्री यमुना जी आरती — सामान्य प्रश्न