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लिपि:
॥ दैनिक साधना ॥

स्वास्थ्य व शांति साधना

आरोग्य व मानसिक शांति चाहने वालों के लिए · 15 मिनट

1. आरंभिक प्रार्थना — ॐ गं गणपतये नमः

11 बार।

ॐ गं गणपतये नमः॥

2. मंत्र — महामृत्युंजय मंत्र

आरोग्य व रक्षा हेतु — 11 बार।

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

3. मंत्र — ॐ नमः शिवाय

शांति हेतु — 21 बार।

ॐ नमः शिवाय॥

4. आरती — श्री शिव आरती

भगवान शिव की आराधना।

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे। हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे। त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥

अक्षमाला वनमाला, मुण्डमाला धारी। चंदन मृगमद सोहै, भाले शशिधारी॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे। सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥

कर के मध्य कमंडल, चक्र त्रिशूलधारी। सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका॥

त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे। कहत शिवानंद स्वामी सुख संपति पावे॥

लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा। पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा॥

पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा। भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा॥

जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला। शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥

काशी में विराजे विश्वनाथ, नंदी ब्रह्मचारी। नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥

5. समापन चिंतन

शरीर व मन में शांति का अनुभव करें। कुछ क्षण गहरी, धीमी श्वास लेते हुए विश्राम करें।

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