अपनी मुफ़्त वैदिक जन्म कुंडली बनाएं
लग्न, चंद्र राशि, नक्षत्र, ग्रह स्थिति, D1/D9 चक्र, विंशोत्तरी दशा, योग-दोष, गोचर व जीवन विश्लेषण — सब एक रिपोर्ट में।
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वैदिक ज्योतिष की मूल अवधारणाएँ — सरल हिंदी में
कुंडली क्या है?
जन्म कुंडली (Janam Kundali) जन्म के क्षण आकाश में ग्रहों की स्थिति का चित्रात्मक मानचित्र है। इसमें 12 भाव होते हैं जो जीवन के विभिन्न क्षेत्रों — व्यक्तित्व, धन, परिवार, शिक्षा, करियर, विवाह व स्वास्थ्य — का प्रतिनिधित्व करते हैं। वैदिक ज्योतिष में यह निरयन (sidereal) पद्धति व लाहिरी अयनांश पर आधारित होती है।
लग्न क्या है?
लग्न (Ascendant) वह राशि है जो जन्म के समय पूर्वी क्षितिज पर उदित हो रही थी। यह कुंडली के प्रथम भाव का आधार है और व्यक्ति के स्वभाव, शरीर, आत्म-छवि व जीवन-दिशा को दर्शाता है। लग्न जन्म समय पर अत्यधिक निर्भर है — कुछ मिनटों का अंतर भी लग्न बदल सकता है।
नवमांश (D9) क्या है?
नवमांश वर्ग कुंडली में प्रत्येक राशि को 9 भागों में बाँटा जाता है। इसे विवाह, दांपत्य-सुख व भाग्य का सूक्ष्म चक्र माना जाता है। जन्म कुंडली (D1) के साथ नवमांश (D9) का अध्ययन ग्रहों के वास्तविक बल व जीवन के गहरे फलों को स्पष्ट करता है।
दशा क्या है?
विंशोत्तरी दशा 120 वर्ष का ग्रह-काल चक्र है जो जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र से प्रारंभ होता है। प्रत्येक ग्रह की महादशा व उसके भीतर अंतर्दशाएँ जीवन की घटनाओं का समय निर्धारित करती हैं — यही बताती हैं कि किस अवधि में कौन-सा फल प्रकट होगा।
योग क्या हैं?
योग ग्रहों के विशेष संयोग हैं जो शुभ फल देते हैं — जैसे गजकेसरी योग, राज योग, धन योग, बुधादित्य योग व पंच-महापुरुष योग। ये योग व्यक्ति की प्रतिभा, सफलता, समृद्धि व प्रतिष्ठा के संकेतक होते हैं।
दोष क्या हैं?
दोष ग्रहों की कुछ स्थितियाँ हैं जिन पर सजगता आवश्यक होती है — जैसे मांगलिक (कुज) दोष, कालसर्प दोष, साढ़े साती व केमद्रुम दोष। उचित विचार व उपायों से इनके प्रभाव को संतुलित किया जा सकता है। VedikMarg दोषों को बिना भय फैलाए, संतुलित रूप में प्रस्तुत करता है।
कुंडली व ज्योतिष टूल्स
अपनी कुंडली, राशि, नक्षत्र व पंचांग — सब मुफ़्त में जानें
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