पंच केदार गढ़वाल हिमालय में फैले पाँच शिव मंदिर हैं, जिन्हें परंपरा एक ही कथा से जोड़ती है। इन्हें प्रथम से पंचम केदार कहा जाता है, और यह क्रम नाम का है — यात्रा का मार्ग इससे भिन्न होता है।
पाँच अंग, पाँच स्थान
परंपरा के अनुसार नंदी-रूप धरे शिव के अलग-अलग अंग इन पाँच स्थानों पर प्रकट हुए — केदारनाथ में पीठ का कूबड़, मध्यमहेश्वर में नाभि और उदर, तुंगनाथ में भुजाएँ, रुद्रनाथ में मुख और कल्पेश्वर में जटा।
इनमें केदारनाथ बारह ज्योतिर्लिंगों में भी है, इसलिए वही सबसे अधिक जाना जाता है। शेष चार तक पहुँचना कठिन है और इसीलिए वहाँ भीड़ कम रहती है — जो कई यात्रियों के लिए कारण भी बन जाता है।
ये पाँच एक जैसे नहीं हैं
इन्हें एक "यात्रा" कहकर एक-सा मान लेना भूल होगी। कल्पेश्वर तक अब सड़क लगभग मंदिर के पास तक जाती है और वह वर्ष भर खुला रहता है। रुद्रनाथ तक पहुँचने के लिए बीस किलोमीटर से अधिक की चढ़ाई है और उसे पाँचों में सबसे कठिन माना जाता है।
हर मंदिर की अपनी ऊँचाई, अपना मार्ग और अपनी शीतकालीन गद्दी है। योजना बनाते समय इन्हें अलग-अलग ही देखना पड़ता है।
पंच केदार — पूरी सूची
| # | मंदिर | क्रम-नाम | शिव का अंग | स्थान | विवरण |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | केदारनाथ | प्रथम केदार | पीठ / कूबड़ | रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड | ज्योतिर्लिंग भी |
| 2 | मध्यमहेश्वर | द्वितीय केदार | नाभि व उदर | रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड | — |
| 3 | तुंगनाथ | तृतीय केदार | भुजाएँ | रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड | विश्व का सर्वोच्च शिव मंदिर |
| 4 | रुद्रनाथ | चतुर्थ केदार | मुख | चमोली, उत्तराखंड | — |
| 5 | कल्पेश्वर | पंचम केदार | जटा (केश) | चमोली, उत्तराखंड | वर्ष भर सुलभ एकमात्र केदार |
सूची का स्रोत: क्रम, अंग व स्थान — docs/tirth-collections-s0-list.md §3
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