तीर्थ व मंदिर

tīrtha va mandira

भारत के प्रमुख तीर्थ-समूह एक जगह — हर स्थान की कथा, महत्व, दर्शन समय और यात्रा की व्यावहारिक जानकारी।

धाम, पीठ, पुरी और प्रयाग — अंतर क्या है

भारत के तीर्थ किसी एक सूची में नहीं आते। अलग-अलग परंपराओं ने अलग-अलग समूह गिनाए, और हर समूह के पीछे अपना कारण है — कहीं दिशा, कहीं कथा, कहीं एक श्लोक।

धाम वे हैं जिन्हें परंपरा ने भगवान का निवास कहा — चार धाम चार दिशाओं में हैं। पीठ शक्ति के स्थान हैं, जहाँ परंपरा के अनुसार माता सती के अंग गिरे। पुरी नगर हैं, मंदिर नहीं — गरुड़ पुराण का एक श्लोक सात पुरियों को मोक्षदायिनी कहता है। और प्रयाग संगम हैं, जहाँ नदियाँ मिलती हैं; वहाँ दर्शन नहीं, स्नान होता है।

यही कारण है कि इन पृष्ठों पर हर स्थान की जानकारी एक-सी नहीं दिखती। एक संगम की आरती का समय नहीं होता, और एक नगर के कपाट नहीं खुलते-बंद होते। जो सूचना उस स्थान पर लागू ही नहीं होती, वह यहाँ नहीं दिखाई जाती।

जानकारी कैसे जुटाई गई

दर्शन समय, आरती और दूरियाँ मंदिर की आधिकारिक जानकारी से सत्यापित की जाती हैं, और हर पृष्ठ पर सत्यापन की तिथि छपती है। जो तथ्य सत्यापित नहीं हो पाता, वह अनुमान से भरा नहीं जाता — वह खंड दिखता ही नहीं।

12 तीर्थ-समूह

कौन-सा तीर्थ किस राज्य में

नौ समूहों के 159 स्थान, राज्य के अनुसार। एक ही स्थान कई समूहों में हो सकता है — जैसे बद्रीनाथ, जो चार धाम, छोटा चार धाम और पंच बद्री तीनों में है — पर यहाँ वह एक ही बार आता है।

उत्तराखंड · 20

गुजरात · 3

ओडिशा · 1

तमिलनाडु · 95

उत्तर प्रदेश · 9

मध्य प्रदेश · 1

महाराष्ट्र · 8

पुदुच्चेरी · 1

राजस्थान · 2

दिल्ली · 1

हिमाचल प्रदेश · 1

कर्नाटक · 1

केरल · 11

आंध्र प्रदेश · 2

गंडकी प्रदेश · 1

दिव्य लोक — पार्थिव नहीं · 2