कांजनूर

Agniswarar Temple, Kanjanur

नवग्रह मंदिरों में शुक्र का स्थान — जहाँ शिव अग्नीश्वर के रूप में पूजे जाते हैं।

यह स्थान इनमें भी है:नवग्रह मंदिर

मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व

कांजनूर मयिलाडुतुरै ज़िले में है और नवग्रह मंदिरों में **शुक्र** का स्थान। मुख्य देवता **अग्नीश्वर** हैं — शिव — और शुक्र की अपनी अलग सन्निधि है।

नाम अग्नि से बना है। परंपरा कहती है कि अग्निदेव ने यहीं शिव की आराधना की थी, और इसी से मुख्य देवता अग्नीश्वर कहलाए।

ज्योतिष में शुक्र को सुख, सौंदर्य, कला और दांपत्य से जोड़ा जाता है, और इन्हीं से जुड़ी प्रार्थनाओं के लिए भक्त यहाँ आते हैं।

  • नवग्रह मंदिरों में शुक्र का स्थान।
  • मुख्य देवता अग्नीश्वर — नाम अग्नि से; परंपरा कहती है अग्निदेव ने यहीं आराधना की।
  • सुख, सौंदर्य, कला व दांपत्य से जुड़ी प्रार्थनाओं के लिए जाना जाता है।

दर्शन का समय

कांजनूर के लिए कोई आधिकारिक दर्शन-समय या पूजा-तालिका सत्यापित स्रोत पर उपलब्ध नहीं मिली।

दक्षिण भारत के मंदिरों में सामान्यतः प्रातःकाल से मध्याह्न तक और फिर सायंकाल से रात्रि तक दर्शन होते हैं। परंपरा में शुक्र का वार शुक्रवार है।

हमने यहाँ कोई समय इसलिए नहीं छापा कि वह किसी आधिकारिक स्रोत पर उपलब्ध नहीं है। यात्रा-वेबसाइटों पर मिलने वाले समय आपस में मेल नहीं खाते, और एक ग़लत समय ऐसे स्थान पर बहुत महँगा पड़ता है।

कैसे पहुँचें

निकटतम एयरपोर्ट: तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
निकटतम रेलवे स्टेशन: कुंभकोणम् रेलवे स्टेशन

हवाई मार्ग

तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा

वहाँ से कुंभकोणम् तक सड़क मार्ग से लगभग दो घंटे।

रेल मार्ग

कुंभकोणम् रेलवे स्टेशन

कुंभकोणम् से मंदिर तक टैक्सी व बस उपलब्ध।

सड़क मार्ग

कुंभकोणम्

नवग्रह यात्रा के मार्ग पर; सूर्यनार कोविल के पास।

अंतिम चरण: सड़क मंदिर तक जाती है; कोई चढ़ाई नहीं।

सुगमता: सुगम — कोई चढ़ाई नहीं।

कब जाएँ

सर्वोत्तम समय: नवंबर से फ़रवरी। परंपरा में शुक्रवार शुक्र का वार माना जाता है।

आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल

यात्रा सुझाव

वस्त्र: शालीन वस्त्र।

ठहरने की व्यवस्था: ठहरने के विकल्प कुंभकोणम् में हैं।

एक नज़र में

प्रकारमंदिर
मंदिरश्री अग्नीश्वर मंदिर
स्थानकांजनूर, कुंभकोणम् के निकट
ज़िलामयिलाडुतुरै
राज्यतमिलनाडु

कांजनूर — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न