दिव्य देशम — एक नज़र में
मंगलाशासनम्: पासुरम् — नम्माळ्वार
मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व
तिरुवन्वंदूर केरल के **चेंगन्नूर** क्षेत्र में, **पंपा** नदी के तट पर है। यहाँ विष्णु **पांबनैयप्प पेरुमाल** रूप में विराजते हैं।
**यह पंच पांडव मंदिरों में से एक है, और परंपरा इसे नकुल का मंदिर मानती है।** दर्शन के परंपरागत क्रम में यह **चौथा** है।
(पाँचों की साझा कथा **तिरुच्चेंकुंड्रूर** के पृष्ठ पर है।)
**नाम ध्यान देने योग्य है।**
मलयालम में **"पांबु" यानी सर्प**, और **पांबनैयप्पन्** का अर्थ है ***शेष-शय्या वाले*** — यानी वे, जो सर्प पर शयन करते हैं।
यह इस सूची में एक और स्थान की याद दिलाता है। महाबलिपुरम् के **तिरु कडल्मलै** में भगवान **शेषनाग के बिना**, सीधे भूमि पर लेटे हैं — और स्रोत कहते हैं कि 108 में वह अकेला ऐसा स्थान है।
यहाँ नाम ही उस शय्या पर है जो वहाँ नहीं थी।
- पंच पांडव मंदिरों में नकुल का मंदिर।
- दर्शन के परंपरागत क्रम में चौथा।
- नाम की व्युत्पत्ति — मलयालम "पांबु" यानी सर्प; पांबनैयप्पन् यानी शेष-शय्या वाले।
- पंपा नदी के तट पर, चेंगन्नूर क्षेत्र में।
पौराणिक कथा
पंच पांडव मंदिरों की साझा कथा तिरुच्चेंकुंड्रूर पर है। यहाँ नाम की बात है।
सर्प की शय्या
यहाँ के भगवान **पांबनैयप्पन्** कहलाते हैं। मलयालम में **"पांबु" यानी सर्प**, और नाम का अर्थ है ***शेष-शय्या वाले***।
विष्णु की शयन-मूर्तियाँ प्रायः शेषनाग पर होती हैं — इतनी बार कि वह सामान्य लगने लगता है।
पर इस सूची में हमने वह भी देखा जहाँ वह **नहीं** था। महाबलिपुरम् के **तिरु कडल्मलै** में भगवान सीधे **भूमि पर** लेटे हैं, और स्रोत कहते हैं कि 108 में वह अकेला ऐसा स्थान है।
यहाँ नाम ही उस शय्या पर पड़ा है।
यानी एक जगह उसका न होना विशेष है, और दूसरी जगह उसका होना — इतना कि देवता उसी से पहचाने जाते हैं।
स्रोत: स्थल-परंपरा; साझा कथा हेतु देखें तिरुच्चेंकुंड्रूर। विवरण संबद्ध स्रोतों से, 2026-08-05.
दर्शन का समय
इस मंदिर के दर्शन-समय किसी आधिकारिक देवस्वम् स्रोत पर सत्यापित नहीं हो सके।
⚠️ केरल के मंदिरों के वस्त्र-नियम कड़े हैं — पुरुषों को प्रायः ऊपरी वस्त्र उतारकर मुंडु/धोती में प्रवेश करना होता है। मध्याह्न का अवकाश लंबा रहता है।
कैसे पहुँचें
हवाई मार्ग
कोच्चि / तिरुवनंतपुरम् अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
रेल मार्ग
चेंगन्नूर रेलवे स्टेशन
मंदिर चेंगन्नूर क्षेत्र में ही है।
सड़क मार्ग
चेंगन्नूर
पंच पांडव मंदिरों के मार्ग पर।
अंतिम चरण: सड़क मंदिर तक जाती है; कोई चढ़ाई नहीं।
सुगमता: सुगम — कोई चढ़ाई नहीं।
कब जाएँ
सर्वोत्तम समय: अक्टूबर से फ़रवरी। पंच पांडव मंदिरों के लिए एक दिन रखना उचित है।
आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल
- तिरुच्चेंकुंड्रूर — पंपा तट, केरल
- तिरु कडल्मलै — महाबलिपुरम् (मामल्लपुरम्), तमिलनाडु
- पंच पांडव मंदिरों के शेष चार
