तिरुवल्लिक्केणि

Parthasarathy Temple, Triplicane, Chennai

चेन्नै का सबसे प्राचीन मंदिर, जहाँ कृष्ण मूँछ और युद्ध के बाण-चिह्नों के साथ खड़े हैं — सारथी के रूप में, बालक के रूप में नहीं।

यह स्थान इनमें भी है:108 दिव्य देशम

दिव्य देशम — एक नज़र में

पेरुमाल
वेंकटकृष्णन् (उत्सव-मूर्ति: पार्थसारथी) — खड़ी मुद्रा
थायार
वेदवल्लि थायार
तीर्थम्
कैरवणि

मंगलाशासनम्: पासुरम्पेय आळ्वार तथा अन्य आळ्वार

मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व

तिरुवल्लिक्केणि — जिसे आज **त्रिप्लिकेन** कहा जाता है — **चेन्नै** के हृदय में है और नगर के सबसे प्राचीन ढाँचों में गिना जाता है।

यहाँ मूलवर **वेंकटकृष्णन्** हैं, उत्सव-मूर्ति **पार्थसारथी**, और देवी **वेदवल्लि थायार**।

**मूर्ति ही यहाँ की सबसे विशिष्ट बात है।**

कृष्ण यहाँ **खड़ी मुद्रा** में हैं, हाथ में शंख — और उनके **मूँछ** है। कृष्ण-मंदिरों में यह विरल है।

और मूर्ति पर **बाणों के चिह्न** हैं। परंपरा उन्हें महाभारत के युद्ध से जोड़ती है — **भीष्म के बाणों** से।

कारण भाव में है। "पार्थसारथी" का अर्थ है *पार्थ (अर्जुन) का सारथी*। यह कृष्ण का वह रूप नहीं है जो माखन चुराता है या बाँसुरी बजाता है। यह वह कृष्ण हैं जो **युद्ध के मैदान में रथ हाँक रहे हैं** — और सारथी होने के कारण उन्होंने स्वयं बाण झेले।

उन्होंने प्रतिज्ञा की थी कि शस्त्र नहीं उठाएँगे। उठाया नहीं — पर चोट खाई।

**एक ही परिसर में पाँच रूप हैं** — योग नरसिंह, राम, गजेंद्र वरदराज, रंगनाथ और कृष्ण (पार्थसारथी)।

मंदिर का तीर्थ **कैरवणि** कहलाता है, और उसके चारों ओर पाँच जलस्रोत माने जाते हैं — इंद्र, सोम, अग्नि, मीन और विष्णु।

निर्माण **पल्लव राजा नरसिंहवर्मन् प्रथम** द्वारा, **छठी शताब्दी** में माना जाता है; बाद में चोलों और विजयनगर शासकों ने विस्तार किया। **पेय आळ्वार** ने इसका गान किया।

⚠️ **एक भ्रम टाल लें:** तिरुनांगूर के **तिरु पार्थन्पळ्ळि** के देवता भी पार्थसारथी कहलाते हैं। वह अलग दिव्य देशम है।

  • चेन्नै का सबसे प्राचीन मंदिरों में; निर्माण छठी सदी में पल्लव नरसिंहवर्मन् प्रथम द्वारा।
  • कृष्ण मूँछ के साथ — कृष्ण-मंदिरों में विरल।
  • मूर्ति पर बाणों के चिह्न; परंपरा उन्हें भीष्म के बाणों से जोड़ती है।
  • सारथी-रूप — शस्त्र नहीं उठाया, पर चोट खाई।
  • एक ही परिसर में पाँच रूप — योग नरसिंह, राम, गजेंद्र वरदराज, रंगनाथ व पार्थसारथी।
  • कैरवणि तीर्थ, जिसके चारों ओर पाँच जलस्रोत माने जाते हैं।

पौराणिक कथा

यहाँ की कथा किसी प्राकट्य की नहीं — यह उन चिह्नों की है जो मूर्ति पर आज भी हैं।

जिसने शस्त्र नहीं उठाया, पर चोट खाई

महाभारत के युद्ध में कृष्ण ने प्रतिज्ञा की थी कि वे **शस्त्र नहीं उठाएँगे**। वे केवल अर्जुन के **सारथी** बने — रथ हाँकने वाले।

पर सारथी सबसे आगे बैठता है।

परंपरा कहती है कि **भीष्म के बाण** उन्हें लगे, और उन चिह्नों को मूर्ति आज भी धारण किए हुए है।

यही कारण है कि यहाँ के कृष्ण अन्य कृष्ण-मंदिरों जैसे नहीं दिखते। यहाँ न बाँसुरी है, न माखन। यहाँ **मूँछ** है और शरीर पर घाव के निशान।

यह वह कृष्ण नहीं हैं जिन्हें गोद में लिया जाता है। ये वे कृष्ण हैं जो रथ पर खड़े हैं।

और बात यह है कि उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा तोड़ी नहीं। उन्होंने कोई अस्त्र नहीं चलाया। पर जो सबसे आगे बैठता है, वह मार भी सबसे पहले खाता है।

सारथी होना सुरक्षित पद नहीं था — यही यह मूर्ति कहती है।

पाँच रूप, एक परिसर

इस मंदिर में विष्णु के **पाँच रूप** एक साथ हैं — **योग नरसिंह**, **राम**, **गजेंद्र वरदराज**, **रंगनाथ** और **पार्थसारथी**।

यह सूची अपने आप में एक यात्रा है। गजेंद्र वरदराज का अपना दिव्य देशम कबिस्थलम् में है, रंगनाथ का श्रीरंगम् में।

यहाँ वे सब एक ही परिसर में मिल जाते हैं — ठीक वैसे ही जैसे नागपट्टिनम् के **तिरु नागै** में विष्णु की तीनों मुद्राएँ एक साथ हैं।

बड़े नगरों के मंदिरों में यह प्रवृत्ति दिखती है। जहाँ भक्त दूर-दूर से आते हैं और सब जगह नहीं जा सकते, वहाँ मंदिर स्वयं कई तीर्थों को अपने भीतर समेट लेता है।

स्रोत: स्थल-परंपरा; विवरण en.wikipedia.org/wiki/Parthasarathy_Temple,_Triplicane से, 2026-08-05.

इतिहास

मंदिर का निर्माण पल्लव राजा नरसिंहवर्मन् प्रथम द्वारा छठी शताब्दी में माना जाता है। बाद में चोलों और विजयनगर शासकों ने इसका विस्तार किया। पेय आळ्वार के गान के कारण यह चेन्नै के सबसे प्राचीन ढाँचों में गिना जाता है।

छठी शताब्दी
पल्लव राजा नरसिंहवर्मन् प्रथम द्वारा निर्माण
बाद के काल
चोल व विजयनगर शासकों द्वारा विस्तार

दर्शन का समय

तिरुवल्लिक्केणि प्रातः 6:00 – दोपहर 12:00 · सायं 4:00 – रात्रि 9:00 (शनिवार को भिन्न) दर्शन हेतु खुला रहता है।

⚠️ **शनिवार का समय अलग है** — प्रातः 5:30 से दोपहर 1:00 और सायं 4:00 से रात्रि 10:00। साथ ही, आधिकारिक पृष्ठ पर प्रातः सत्र का अंत एक जगह 12:00 और पूजा-सूची में तिरुक्काप्पु 12:30 पर बताया गया है; दोनों वहीं दर्ज हैं, इसलिए दोपहर के समय थोड़ा पहले पहुँचना उचित है।

दर्शन समय 5 अगस्त 2026 को सत्यापित। पर्व व विशेष अवसरों पर समय बदलता है — यात्रा से पूर्व आधिकारिक वेबसाइट से पुष्टि अवश्य करें।

आरती

आरतीसमयविवरण
तिरुमंजनम्प्रातः 5:45 – 5:55
विश्वरूप पूजाप्रातः 6:00
तिरुवाराधनम्प्रातः 6:15
काल संधिप्रातः 8:00
उच्चिकालप्रातः 11:00
तिरुक्काप्पु (कपाट बंद)दोपहर 12:30आधिकारिक पृष्ठ पर सामान्य समय-सूची में 12:00 भी लिखा है
तिरुक्काप्पु (कपाट खुलना)सायं 4:00 – 4:15
नित्य अनुष्ठानम्सायं 6:00
रात्रि तिरुवाराधनम्रात्रि 7:00 – 7:30
अर्धजामरात्रि 9:00 – 9:15शनिवार को नहीं

कैसे पहुँचें

निकटतम एयरपोर्ट: चेन्नै अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
निकटतम रेलवे स्टेशन: चेन्नै एग्मोर / चेन्नै सेंट्रल

हवाई मार्ग

चेन्नै अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा

नगर के भीतर; सड़क मार्ग से लगभग एक घंटा।

रेल मार्ग

चेन्नै एग्मोर / चेन्नै सेंट्रल

दोनों से त्रिप्लिकेन पास है।

सड़क मार्ग

त्रिप्लिकेन, चेन्नै

नगर-बस, मेट्रो व ऑटो — सब उपलब्ध। मरीना बीच पास ही है।

अंतिम चरण: सड़क मंदिर तक जाती है; कोई चढ़ाई नहीं।

सुगमता: सुगम — कोई चढ़ाई नहीं। नगर के भीतर होने से पहुँच सबसे सरल है।

कब जाएँ

सर्वोत्तम समय: नवंबर से फ़रवरी, जब चेन्नै का मौसम सबसे अनुकूल रहता है। वैकुंठ एकादशी (मार्गऴि) व चित्तिरै ब्रह्मोत्सवम् पर भीड़ बहुत अधिक होती है।

प्रमुख त्योहार

  • ब्रह्मोत्सवम् (चित्तिरै)
  • तेप्पम् / तैरती उत्सव (मासि)
  • वैकुंठ एकादशी (मार्गऴि)
  • कृष्ण जयंती
  • नरसिंह ब्रह्मोत्सवम्

आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल

  • मरीना बीच — मंदिर के पास ही।
  • चेन्नै क्षेत्र के अन्य दिव्य देशम — तिरुनीर्मलै, तिरु निंद्रवूर आदि।

यात्रा सुझाव

वस्त्र: शालीन वस्त्र।

ठहरने की व्यवस्था: चेन्नै में हर श्रेणी के ठहरने के विकल्प हैं; यह पूरे उत्तर-तमिलनाडु के दिव्य देशम के लिए अच्छा आधार है।

एक नज़र में

प्रकारमंदिर
मंदिरअरुळ्मिगु पार्थसारथी स्वामी मंदिर
स्थानत्रिप्लिकेन (तिरुवल्लिक्केणि), चेन्नै
ज़िलाचेन्नै
राज्यतमिलनाडु
प्रबंधनतमिलनाडु हिंदू धार्मिक व धर्मादाय बंदोबस्ती विभाग (HR&CE)
आधिकारिकवेबसाइट

तिरुवल्लिक्केणि — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न