तिरु देवनार तोगै

Thiruthevanarthogai (Deiva Nayaga Perumal Temple), Thirunangur

तिरुनांगूर का वह दिव्य देशम जहाँ परंपरा के अनुसार देव समूह में आकर विष्णु के विवाह-वेश के दर्शन करते हैं — और नाम ही उस समूह का है।

यह स्थान इनमें भी है:108 दिव्य देशम

दिव्य देशम — एक नज़र में

पेरुमाल
देवनायकन् (उत्सव-मूर्ति: माधव पेरुमाल)
थायार
कडल्मगळ् नाच्चियार

मंगलाशासनम्: पासुरम्तिरुमंगै आळ्वार

मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व

तिरु देवनार तोगै शिरकाळि के पास **कीऴच्चालै** में, **तिरुनांगूर** के ग्यारह दिव्य देशम में से एक है। यहाँ विष्णु **देवनायकन्** रूप में विराजते हैं, उत्सव-मूर्ति **माधव पेरुमाल** कहलाती है — इसीलिए मंदिर को माधव पेरुमाल मंदिर भी कहा जाता है — और देवी **कडल्मगळ् नाच्चियार** उनके साथ हैं।

**नाम, देवी का नाम और कथा — तीनों यहाँ एक-दूसरे से मेल खाते हैं, और यही इस मंदिर की सबसे सुंदर बात है।**

तमिल में **"तोगै" का अर्थ है समूह**। परंपरा कहती है कि क्षीरसागर-मंथन के बाद जब लक्ष्मी समुद्र से प्रकट हुईं और नारायण के वक्ष पर विराजीं, तब देव और ऋषि **समूह में** इसी भूमि पर एकत्र हुए — भगवान के **विवाह-वेश** के दर्शन करने। उसी समूह से स्थान का नाम पड़ा।

और देवी का नाम देखिए — **कडल्मगळ्**, यानी *समुद्र की पुत्री*। यह वही लक्ष्मी हैं जो क्षीरसागर से निकलीं।

यानी यहाँ नाम कथा को दोहराता है और देवी का नाम उसे फिर से दोहराता है। तिरुनांगूर की कई कथाओं में यह संगति नहीं मिलती; यहाँ मिलती है।

  • तिरुनांगूर के ग्यारह दिव्य देशम में से एक; कीऴच्चालै में स्थित।
  • नाम की व्युत्पत्ति — तमिल "तोगै" यानी समूह; देव समूह में आकर दर्शन करते हैं।
  • थायार का नाम कडल्मगळ् — समुद्र की पुत्री, यानी क्षीरसागर से प्रकट लक्ष्मी।
  • उत्सव-मूर्ति माधव पेरुमाल; मंदिर उसी नाम से भी जाना जाता है।
  • परंपरा: देव व ऋषि यहाँ विष्णु के विवाह-वेश के दर्शन करते हैं।

पौराणिक कथा

तिरुनांगूर के ग्यारह की साझा कथा तिरु अरिमेय विण्णगरम् के पृष्ठ पर है। यहाँ इस स्थान की अपनी कथा है।

समुद्र से निकलीं, और सब देखने आए

परंपरा कहती है कि जब देव और असुर अमृत के लिए क्षीरसागर मथ रहे थे, तब उस समुद्र से **लक्ष्मी** प्रकट हुईं — ऐश्वर्य के साथ — और नारायण के वक्ष पर विराजीं।

उसके बाद देव और ऋषि इसी भूमि पर **समूह में** एकत्र हुए, ताकि भगवान के **विवाह-वेश** के दर्शन कर सकें।

तमिल में "तोगै" का अर्थ है समूह। स्थान का नाम वहीं से पड़ा — **देवनार तोगै**, यानी देवों का समूह।

नाम जो कथा को दोहराते हैं

यहाँ की देवी का नाम **कडल्मगळ्** है, जिसका अर्थ है *समुद्र की पुत्री*।

यह अलग से दिया गया कोई अलंकार नहीं है। यह ठीक वही बात है जो कथा कहती है — लक्ष्मी क्षीरसागर से निकलीं।

यानी स्थान का नाम बताता है कि कौन आए, और देवी का नाम बताता है कि वे किसे देखने आए थे। दोनों मिलकर पूरी कथा कह देते हैं, बिना कथा कहे।

तिरुनांगूर के कई मंदिरों में नाम और कथा का यह मेल नहीं मिलता — कहीं नाम किसी घटना पर पड़ा है, कहीं किसी वस्तु पर। यहाँ नाम स्वयं कथा है।

स्रोत: स्थल-परंपरा; विवरण संबद्ध स्रोतों से, 2026-08-05. ग्यारहों की साझा कथा हेतु देखें तिरु अरिमेय विण्णगरम्।

दर्शन का समय

इस मंदिर के दर्शन-समय किसी आधिकारिक स्रोत पर सत्यापित नहीं हो सके।

दक्षिण भारत के मंदिरों में सामान्यतः प्रातःकाल से मध्याह्न तक और फिर सायंकाल से रात्रि तक दर्शन होते हैं। तिरुनांगूर के ग्यारह मंदिर पास-पास हैं और प्रायः एक ही दिन में किए जाते हैं।

हमने यहाँ कोई समय इसलिए नहीं छापा कि वह किसी आधिकारिक स्रोत पर उपलब्ध नहीं है। यात्रा-वेबसाइटों पर मिलने वाले समय आपस में मेल नहीं खाते, और एक ग़लत समय ऐसे स्थान पर बहुत महँगा पड़ता है।

कैसे पहुँचें

निकटतम एयरपोर्ट: तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
निकटतम रेलवे स्टेशन: शिरकाळि रेलवे स्टेशन

हवाई मार्ग

तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा

वहाँ से सड़क मार्ग से लगभग तीन घंटे।

रेल मार्ग

शिरकाळि रेलवे स्टेशन

शिरकाळि से कीऴच्चालै पास ही है।

सड़क मार्ग

कीऴच्चालै

ग्यारह मंदिर आसपास ही हैं और एक दिन में किए जा सकते हैं।

अंतिम चरण: सड़क मंदिर तक जाती है; कोई चढ़ाई नहीं।

सुगमता: सुगम — कोई चढ़ाई नहीं।

कब जाएँ

सर्वोत्तम समय: नवंबर से फ़रवरी। तै मास की गरुड सेवै में तिरुनांगूर के ग्यारहों की उत्सव-मूर्तियाँ एकत्र होती हैं।

प्रमुख त्योहार

  • तिरुमंगै आळ्वार मंगलाशासन उत्सवम् / गरुड सेवै (तै मास)

आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल

  • तिरुनांगूर के अन्य दस दिव्य देशम — ग्यारहों पास-पास हैं।

यात्रा सुझाव

वस्त्र: शालीन वस्त्र।

ठहरने की व्यवस्था: ठहरने के विकल्प शिरकाळि व मयिलाडुतुरै में हैं।

एक नज़र में

प्रकारमंदिर
मंदिरश्री देवनायक पेरुमाल मंदिर
स्थानकीऴच्चालै, तिरुनांगूर के पास, शिरकाळि के निकट
ज़िलामयिलाडुतुरै
राज्यतमिलनाडु
प्रबंधनतमिलनाडु हिंदू धार्मिक व धर्मादाय बंदोबस्ती विभाग (HR&CE)

तिरु देवनार तोगै — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न