तिरु नैमिषारण्यम्

Devaraja Perumal Temple, Naimisharanya, Sitapur

वह वन जहाँ परंपरा के अनुसार पुराण सुनाए गए — यानी वह स्थान जहाँ से इस सूची की अधिकांश कथाएँ आती हैं।

यह स्थान इनमें भी है:108 दिव्य देशम

दिव्य देशम — एक नज़र में

पेरुमाल
देवराज पेरुमाल
तीर्थम्
चक्र तीर्थ

मंगलाशासनम्: पासुरम्आळ्वारों के दिव्य प्रबंधम् में उल्लिखित

मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व

तिरु नैमिषारण्यम् उत्तर प्रदेश के **सीतापुर** ज़िले में है, और **नैमिषारण्य** (नीमसार) नाम से जाना जाता है। यहाँ विष्णु **देवराज पेरुमाल** रूप में विराजते हैं।

**यह स्थान भारत की कथा-परंपरा के लिए मूलभूत है।**

परंपरा कहती है कि **नैमिषारण्य वह वन है जहाँ ऋषियों की सभा को पुराणों का श्रवण हुआ**।

⭐ **इस संग्रह के लिए इसका विशेष अर्थ है।**

हमने इन एक सौ आठ पृष्ठों में बार-बार लिखा — *"पुराण कहते हैं"*, *"परंपरा कहती है"*।

गजेंद्र की पुकार, वामन के तीन डग, समुद्र-मंथन, नरसिंह का प्राकट्य, ब्रह्मा का कटा शीश — ये सब कथाएँ पुराणों से आती हैं।

और परंपरा के अनुसार **वे यहीं कही गईं**।

यानी यह वह स्थान है जहाँ से इस पूरी सूची की कथाएँ निकलीं — जैसे **तिरुक्कोविलूर** वह स्थान है जहाँ से उन कथाओं का **गान** निकला।

एक जगह कथाएँ कही गईं, दूसरी जगह वे गाई गईं। और उनके बीच लगभग दो हज़ार किलोमीटर हैं।

⚠️ **एक बात स्पष्ट कर देनी चाहिए।** नैमिषारण्य की पुराण-सभा का विस्तृत वृत्तांत — कौन-सा पुराण, कितने ऋषि, वक्ता कौन — स्रोतों में भिन्न-भिन्न मिलता है। इसलिए हमने केवल वही लिखा है जो व्यापक रूप से माना जाता है, और विस्तार नहीं गढ़ा।

यह दिव्य देशम-सूची के उन थोड़े सदस्यों में है जो **उत्तर भारत** में हैं। दक्षिण के आळ्वारों ने इसका भी गान किया — जैसे उन्होंने देवप्रयाग, जोशीमठ, बद्रीनाथ और मुक्तिनाथ का किया।

  • परंपरा के अनुसार यहीं ऋषियों की सभा को पुराणों का श्रवण हुआ।
  • यानी इस पूरी सूची की अधिकांश कथाओं का कथन-स्थल यही माना जाता है।
  • तिरुक्कोविलूर से पूरक — वहाँ कथाओं का गान आरंभ हुआ, यहाँ वे कही गईं।
  • दिव्य देशम-सूची के थोड़े उत्तर भारतीय सदस्यों में से एक।

पौराणिक कथा

यहाँ की कथा यह है कि यहाँ कथाएँ कही गईं।

वह वन जहाँ पुराण सुनाए गए

परंपरा कहती है कि **नैमिषारण्य** वह वन है जहाँ **ऋषियों की सभा** को **पुराणों** का श्रवण हुआ।

⚠️ इसका विस्तृत वृत्तांत स्रोतों में भिन्न-भिन्न है — कौन-सा पुराण, कितने ऋषि, वक्ता कौन — इसलिए हम केवल वही लिख रहे हैं जो व्यापक रूप से माना जाता है।

**पर इस संग्रह के लिए इसका अर्थ बड़ा है।**

इन एक सौ आठ पृष्ठों में हमने अनगिनत बार लिखा — *"पुराण कहते हैं"*।

**गजेंद्र** की पुकार और उसका मोक्ष। **वामन** के तीन डग और बलि का सिर। **समुद्र-मंथन**, जिससे अमृत और लक्ष्मी दोनों निकलीं। **नरसिंह** का खंभे से प्रकट होना। **ब्रह्मा** का कटा हुआ शीश और शिव पर लगा दोष। **जटायु** का गिरना।

ये सब कथाएँ पुराणों से आती हैं।

और परंपरा के अनुसार **वे यहीं कही गईं** — इसी वन में, ऋषियों की उसी सभा में।

यानी इस पूरी सूची की कथाएँ यहाँ से निकलीं।

कहा यहाँ गया, गाया वहाँ

इस सूची में एक और स्थान है जो इसी तरह मूलभूत है — **तिरुक्कोविलूर**।

वहाँ तीन आळ्वार एक साँकरी जगह में मिले, और वहीं से **दिव्य प्रबंधम्** आरंभ हुआ। जिन पदों से ये एक सौ आठ बने, उनकी शुरुआत वहीं हुई।

और **यहाँ** वे कथाएँ **कही गईं** जिन्हें आगे चलकर उन पदों ने गाया।

दोनों के बीच लगभग **दो हज़ार किलोमीटर** हैं। एक उत्तर के वन में, दूसरा दक्षिण के एक गाँव में।

पर वे एक ही परंपरा के दो सिरे हैं — **कथन** और **गान**।

और दोनों इसी एक सूची में हैं।

स्रोत: स्थल-परंपरा; विवरण संबद्ध स्थल-स्रोतों से, 2026-08-05.

दर्शन का समय

इस मंदिर के दर्शन-समय किसी आधिकारिक स्रोत पर सत्यापित नहीं हो सके।

सामान्यतः प्रातःकाल से सायंकाल तक दर्शन होते हैं। नैमिषारण्य एक बड़ा तीर्थ-क्षेत्र है जिसमें कई स्थल हैं — चक्र तीर्थ सहित — इसलिए एक दिन रखना उचित है।

हमने यहाँ कोई समय इसलिए नहीं छापा कि वह किसी आधिकारिक स्रोत पर उपलब्ध नहीं है। यात्रा-वेबसाइटों पर मिलने वाले समय आपस में मेल नहीं खाते, और एक ग़लत समय ऐसे स्थान पर बहुत महँगा पड़ता है।

कैसे पहुँचें

निकटतम एयरपोर्ट: लखनऊ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
निकटतम रेलवे स्टेशन: सीतापुर / नीमसार

हवाई मार्ग

लखनऊ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा

वहाँ से सड़क मार्ग से लगभग तीन घंटे।

रेल मार्ग

सीतापुर / नीमसार

लखनऊ से रेल व सड़क दोनों से जुड़ा।

सड़क मार्ग

नैमिषारण्य

लखनऊ व सीतापुर से नियमित बस उपलब्ध।

अंतिम चरण: सड़क मंदिर तक जाती है; कोई चढ़ाई नहीं।

सुगमता: सुगम — कोई चढ़ाई नहीं।

कब जाएँ

सर्वोत्तम समय: अक्टूबर से मार्च। उत्तर भारत में ग्रीष्म कठिन होती है।

आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल

  • चक्र तीर्थ — नैमिषारण्य का प्रमुख तीर्थ।

यात्रा सुझाव

वस्त्र: शालीन वस्त्र।

ठहरने की व्यवस्था: ठहरने के विकल्प नैमिषारण्य व सीतापुर में हैं; लखनऊ भी दूर नहीं।

एक नज़र में

प्रकारमंदिर
मंदिरश्री देवराज पेरुमाल मंदिर, नैमिषारण्य
स्थाननैमिषारण्य (नीमसार), सीतापुर के निकट
ज़िलासीतापुर
राज्यउत्तर प्रदेश

तिरु नैमिषारण्यम् — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न