यंत्रोद्धारक हनुमान

Yantrodharaka Hanuman Temple, Hampi

हम्पी का वह मंदिर जहाँ हनुमान पद्मासन में, एक षट्कोण यंत्र के भीतर विराजते हैं — और यंत्र पर बारह वानर एक-दूसरे की पूँछ थामे हैं।

यह स्थान इनमें भी है:प्रसिद्ध हनुमान मंदिर

मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व

यंत्रोद्धारक हनुमान मंदिर हम्पी में तुंगभद्रा नदी के तट पर एक पहाड़ी पर है, विरूपाक्ष मंदिर से लगभग दो किलोमीटर दूर। नदी का एक भाग यहाँ **चक्रतीर्थ** कहलाता है।

यह प्रतिमा भारत के किसी और हनुमान मंदिर जैसी नहीं। **हनुमान यहाँ पद्मासन में बैठे हैं — एक षट्कोण यंत्र के ठीक बीच में।** दाहिने हाथ में व्याख्यानमुद्रा है और बाएँ में ध्यानमुद्रा।

यानी वे यहाँ न उड़ रहे हैं, न गदा उठाए हैं, न युद्ध में हैं। वे बैठे हैं — ध्यान में, और सिखाते हुए।

यंत्र पर **बारह वानरों** की आकृतियाँ उकेरी हैं, जो एक-दूसरे की पूँछ थामे पीछे की ओर मुख किए हैं। परंपरा कहती है कि ये बारह दिन दर्शाते हैं, जितने दिन व्यासराज ने प्रार्थना की थी।

प्रतिष्ठा **श्री व्यासराज तीर्थ** ने की — द्वैत परंपरा के आचार्य और विजयनगर साम्राज्य के राजगुरु — लगभग पाँच सौ वर्ष पूर्व।

हम्पी का यह क्षेत्र **किष्किंधा** से जोड़ा जाता है, यानी रामायण की वह भूमि जहाँ राम की भेंट हनुमान और सुग्रीव से हुई। इसलिए यहाँ हनुमान का मंदिर होना कथा और भूगोल दोनों से बैठता है।

  • हनुमान पद्मासन में, एक षट्कोण यंत्र के ठीक बीच में — यह विन्यास दुर्लभ है।
  • दाहिने हाथ में व्याख्यानमुद्रा, बाएँ में ध्यानमुद्रा।
  • यंत्र पर बारह वानरों की आकृतियाँ, एक-दूसरे की पूँछ थामे — व्यासराज की बारह दिन की प्रार्थना का प्रतीक।
  • प्रतिष्ठा विजयनगर के राजगुरु श्री व्यासराज तीर्थ द्वारा, लगभग 500 वर्ष पूर्व।
  • तुंगभद्रा के तट पर; नदी का यह भाग चक्रतीर्थ कहलाता है।
  • हम्पी का क्षेत्र रामायण की किष्किंधा से जोड़ा जाता है।

पौराणिक कथा

इस मंदिर की कथा एक ऐसे व्यक्ति की है जिसे एक छवि पीछा नहीं छोड़ रही थी।

व्यासराज का ध्यान

परंपरा कहती है कि श्री व्यासराज तीर्थ प्रतिदिन तुंगभद्रा के तट पर ध्यान करते थे।

एक बार ध्यान में बैठे हुए हनुमान की एक छवि उनके मन में बार-बार आती रही। वे उसे हटा नहीं पा रहे थे।

उसी रात उन्हें स्वप्न में आदेश मिला कि वे उसी स्थान पर हनुमान की प्रतिमा स्थापित करें जहाँ वे दिन में ध्यान करते हैं।

यंत्र और बारह वानर

प्रतिमा को यंत्र के भीतर स्थापित करने का विन्यास इसी से आया — "यंत्रोद्धारक" यानी वे जो यंत्र द्वारा धारण किए गए हैं।

यंत्र पर बारह वानर एक-दूसरे की पूँछ थामे उकेरे गए हैं, और वे उन बारह दिनों को दर्शाते हैं जितने दिन व्यासराज प्रार्थना में लगे रहे।

एक-दूसरे की पूँछ थामे वानरों की यह शृंखला अपने आप में एक चित्र है — बारह दिन, एक के बाद एक, कोई कड़ी टूटे बिना।

जो छवि मन से नहीं जा रही थी, उसे अंततः पत्थर में बिठा दिया गया — और वह पाँच सौ वर्ष से वहीं बैठी है।

स्रोत: द्वैत परंपरा की स्थल-कथा; विवरण संबद्ध स्रोतों से, 2026-08-04 को देखे गए

इतिहास

व्यासराज तीर्थ और विजयनगर

प्रतिष्ठा श्री व्यासराज तीर्थ ने की, जो द्वैत परंपरा के आचार्य और विजयनगर साम्राज्य के राजगुरु थे। यह लगभग पाँच सौ वर्ष पूर्व की बात है।

विजयनगर उस काल में दक्षिण भारत की सबसे बड़ी शक्ति था, और हम्पी उसकी राजधानी। यह मंदिर उसी काल के हम्पी का हिस्सा है, यद्यपि वह उन विशाल मंदिरों जितना बड़ा नहीं जिनके लिए हम्पी जाना जाता है।

स्रोत: संबद्ध स्रोत, 2026-08-04 को देखे गए

लगभग 16वीं शताब्दी
श्री व्यासराज तीर्थ द्वारा प्रतिमा की प्रतिष्ठा।

दर्शन का समय

यंत्रोद्धारक हनुमान मंदिर के लिए कोई आधिकारिक दर्शन-समय सत्यापित स्रोत पर उपलब्ध नहीं मिली।

मंदिर दिन के उजाले में दर्शन हेतु खुला रहता है। हम्पी घूमने वाले अधिकांश यात्री इसे विरूपाक्ष मंदिर के साथ जोड़ लेते हैं।

हमने यहाँ कोई समय इसलिए नहीं छापा कि वह किसी आधिकारिक स्रोत पर उपलब्ध नहीं है। यात्रा-वेबसाइटों पर मिलने वाले समय आपस में मेल नहीं खाते, और एक ग़लत समय ऐसे स्थान पर बहुत महँगा पड़ता है।

कैसे पहुँचें

निकटतम एयरपोर्ट: हुबली हवाई अड्डा
निकटतम रेलवे स्टेशन: होसपेट (विजयनगर) रेलवे स्टेशन

हवाई मार्ग

हुबली हवाई अड्डा

बेंगलुरु से भी सड़क व रेल मार्ग से पहुँचा जा सकता है।

रेल मार्ग

होसपेट (विजयनगर) रेलवे स्टेशन

होसपेट से हम्पी लगभग आधे घंटे की दूरी पर।

सड़क मार्ग

हम्पी

मंदिर विरूपाक्ष मंदिर से लगभग 2 किमी दूर है; हम्पी में साइकिल व ऑटो सुगमता से मिल जाते हैं।

पैदल यात्रा (ट्रेक)

तुंगभद्रा तट से लगभग किमी की चढ़ाई — लगभग 15 से 20 मिनट · कठिनाई: सरल — थोड़ी चढ़ाई

मंदिर एक पहाड़ी पर है और वहाँ तक थोड़ी चढ़ाई करनी पड़ती है। मार्ग बना हुआ है और चढ़ाई अधिक नहीं।

स्रोत: संबद्ध स्रोत, 2026-08-04

अंतिम चरण: तुंगभद्रा तट से थोड़ी चढ़ाई।

सुगमता: थोड़ी चढ़ाई है, पर वह अधिक नहीं। हम्पी के अन्य स्थलों की तुलना में यह सुगम है।

कब जाएँ

सर्वोत्तम समय: अक्टूबर से फ़रवरी, जब हम्पी में मौसम सबसे अनुकूल रहता है। मार्च से जून तक यहाँ अत्यधिक गर्मी पड़ती है।

प्रमुख त्योहार

  • हनुमान जयंती

आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल

  • विरूपाक्ष मंदिर (लगभग 2 किमी) — हम्पी का प्रमुख मंदिर; यूनेस्को विश्व धरोहर क्षेत्र का केंद्र।
  • चक्रतीर्थ — तुंगभद्रा का वह भाग जो मंदिर के नीचे बहता है।
  • अंजनाद्रि पहाड़ी — परंपरा में हनुमान का जन्मस्थान माना जाता है; हम्पी के पास।

यात्रा सुझाव

वस्त्र: शालीन वस्त्र और चलने योग्य जूते — हम्पी में बहुत पैदल चलना पड़ता है।

ठहरने की व्यवस्था: हम्पी व होसपेट दोनों में ठहरने के विकल्प उपलब्ध हैं।

एक नज़र में

प्रकारमंदिर
मंदिरश्री यंत्रोद्धारक हनुमान मंदिर
स्थानहम्पी
ज़िलाविजयनगर
राज्यकर्नाटक

यंत्रोद्धारक हनुमान — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न