प्रसिद्ध हनुमान मंदिर

hanumān mandira

देश भर के ग्यारह प्रमुख हनुमान मंदिर — हर एक अपनी दर्ज ऐतिहासिक प्रतिष्ठा के साथ।

यह सूची कैसे बनी

चार धाम या अष्टविनायक की तरह इसकी कोई शास्त्रीय निर्धारित सूची नहीं है। यह चयन है, और उसका आधार यहाँ खुला रखा गया है — एक मंदिर तभी इस सूची में है जब वह तीनों कसौटियों पर खरा उतरे:

  • ऐतिहासिक प्रतिष्ठा दर्ज — प्रतिष्ठापक या निर्माण-काल किसी स्रोत में दर्ज हो
  • अखिल-भारतीय मान्यता — केवल स्थानीय प्रसिद्धि पर्याप्त नहीं
  • क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व — सूची किसी एक राज्य में सिमटे नहीं

ये ग्यारह मंदिर देश के अलग-अलग कोनों में हैं — वाराणसी से नामक्कल तक, शिमला से सारंगपुर तक। इन्हें किसी एक परंपरा ने एक साथ नहीं गिनाया; यह चयन है, और उसका आधार ऊपर लिखा है।

ग्यारह अलग-अलग हनुमान

इन मंदिरों को एक साथ देखने पर जो बात सबसे पहले दिखती है वह यह है कि हनुमान यहाँ एक जैसे नहीं हैं।

प्रयागराज में वे **लेटे हुए** हैं — बीस फुट लंबी शयन-मुद्रा की प्रतिमा, जो भूमि से छह-सात फुट नीचे है। नामक्कल में वे **अठारह फुट ऊँचे खड़े** हैं, और उनके ऊपर छत तक नहीं। हम्पी में वे **पद्मासन में**, एक षट्कोण यंत्र के भीतर बैठे हैं। सालासर में उनके **दाढ़ी-मूँछ** हैं। अयोध्या और दिल्ली में वे **बालक** हैं।

हनुमान की छवि हमारे मन में प्रायः एक ही होती है — गदा उठाए, उड़ते हुए। ये ग्यारह मंदिर बताते हैं कि परंपरा ने उन्हें कहीं अधिक रूपों में देखा।

क्या साझा है

रूप अलग हैं, पर एक बात लगभग सब में लौटती है — इनमें से अधिकांश मंदिर **संकट से मुक्ति** के लिए जाने जाते हैं।

वाराणसी में वे संकट मोचन हैं, सारंगपुर में कष्टभंजन। चित्रकूट में जलधारा उनके अपने घाव पर गिरती है। मेहंदीपुर में लोग अपने सबसे कठिन दुख लेकर आते हैं।

हनुमान की भक्ति में यह भाव केंद्रीय है। वे स्वयं देवता होकर भी सेवक हैं, और शायद इसीलिए लोग उनसे वह माँग पाते हैं जो किसी और से माँगने में संकोच होता है।

प्रसिद्ध हनुमान मंदिर — पूरी सूची

#मंदिरस्थानविवरण
1संकट मोचन हनुमान मंदिरवाराणसी, उत्तर प्रदेशतुलसीदास द्वारा स्थापित, 16वीं सदी के आरंभ में
2हनुमान गढ़ीअयोध्या, उत्तर प्रदेश76 सीढ़ियाँ; 1855 में अवध के नवाब का भूमि-राजस्व अनुदान
3सालासर बालाजीचूरू, राजस्थानलगभग 1754; दाढ़ी-मूँछ युक्त विशिष्ट स्वरूप
4मेहंदीपुर बालाजीदौसा, राजस्थानविशिष्ट अनुष्ठान-परंपरा; 2013 से अंतरराष्ट्रीय शोध-दल का अध्ययन
5श्री हनुमान मंदिर, कनॉट प्लेसनई दिल्लीशिखर पर ॐ के स्थान पर अर्धचंद्र
6बड़े हनुमान जी (लेटे हनुमान)प्रयागराज, उत्तर प्रदेश20 फुट लंबी शयन-मुद्रा प्रतिमा, भूमि से नीचे
7जाखू मंदिरशिमला, हिमाचल प्रदेश108 फुट ऊँची प्रतिमा (2010); गिनीज़ कीर्तिमान
8हनुमान धाराचित्रकूट, उत्तर प्रदेशप्रतिमा पर वर्ष भर गिरती जलधारा
9कष्टभंजन देव हनुमानसारंगपुर, गुजरात1849, गोपालानंद स्वामी; चरणों में शनि
10यंत्रोद्धारक हनुमानहम्पी, कर्नाटकव्यासराज द्वारा प्रतिष्ठित; षट्कोण यंत्र व बारह वानर
11अंजनेयर मंदिरनामक्कल, तमिलनाडु18 फुट एकाश्म प्रतिमा; गर्भगृह पर छत नहीं

सूची का स्रोत: सम्पादकीय चयन, मानदंड सहित; docs/tirth-collections-s0-list.md §9

यात्रा

ये ग्यारह मंदिर एक यात्रा-मार्ग नहीं बनाते — वे देश भर में बिखरे हैं और इन्हें एक साथ करने की कोई परंपरा नहीं है। यह सूची यात्रा-क्रम नहीं, परिचय है।

जो यात्री इन्हें जोड़ना चाहें, उनके लिए क्षेत्र-वार देखना अधिक व्यावहारिक रहेगा — वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या और चित्रकूट एक ही अंचल में हैं; सालासर और मेहंदीपुर राजस्थान में; हम्पी और नामक्कल दक्षिण में।

परंपरा में मंगलवार और शनिवार हनुमान के वार माने जाते हैं, और इनमें से कई मंदिरों में उन दिनों भीड़ कई गुना बढ़ जाती है।