हनुमान धारा

Hanuman Dhara, Chitrakoot

चित्रकूट की पहाड़ी पर वह स्थान जहाँ वर्ष भर एक जलधारा हनुमान की प्रतिमा पर गिरती रहती है।

यह स्थान इनमें भी है:प्रसिद्ध हनुमान मंदिर

मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व

हनुमान धारा चित्रकूट में एक खड़ी पहाड़ी पर है, रामघाट से लगभग पाँच किलोमीटर दूर। ऊपर पहुँचने के लिए लगभग **साढ़े तीन से चार सौ सीढ़ियाँ** चढ़नी पड़ती हैं।

यहाँ की सबसे विशिष्ट बात नाम में ही है — **धारा**। प्रतिमा के ऊपर से एक जलधारा वर्ष भर गिरती रहती है, कभी रुकती नहीं। वह धारा नीचे एक कुंड में गिरती है और वहीं लुप्त हो जाती है।

यह जलधारा किसी अनुष्ठान का हिस्सा नहीं है और न किसी ने इसे चढ़ाया है। वह बस बहती रहती है, और परंपरा उसका कारण एक कथा में बताती है — कि लंका-दहन के बाद हनुमान की पूँछ की जलन शांत करने के लिए राम ने यह धारा निकाली थी।

चित्रकूट स्वयं रामायण से गहराई से जुड़ा है — वनवास के आरंभिक वर्ष राम, सीता और लक्ष्मण ने यहीं बिताए माने जाते हैं। हनुमान धारा उसी भूमि का एक हिस्सा है।

  • प्रतिमा पर वर्ष भर एक जलधारा गिरती रहती है — कभी रुकती नहीं।
  • धारा नीचे एक कुंड में गिरकर वहीं लुप्त हो जाती है।
  • रामघाट से लगभग 5 किमी; ऊपर तक लगभग 360–400 सीढ़ियाँ।
  • चित्रकूट की उस भूमि पर, जहाँ राम, सीता व लक्ष्मण ने वनवास के आरंभिक वर्ष बिताए माने जाते हैं।

पौराणिक कथा

हनुमान धारा की कथा उस क्षण की है जब सबसे बड़ा काम पूरा हो चुका था — और उसके बाद क्या हुआ।

लंका-दहन के बाद

कथा कहती है कि लंका जलाकर लौटने पर हनुमान की पूँछ जल चुकी थी और जलन शांत नहीं हो रही थी।

उन्होंने राम से ऐसा स्थान माँगा जहाँ वह जलन शांत हो सके।

राम ने अपने बाण से पर्वत की चोटी को बेध दिया, और वहाँ से एक जलधारा फूट पड़ी। उन्होंने हनुमान से कहा कि वे यहीं विश्राम करें, और यह धारा उनकी पूँछ पर गिरती रहे।

वह धारा आज भी गिर रही है।

जो काम के बाद आता है

रामायण की कथाओं में लंका-दहन एक विजय का क्षण है — पराक्रम का शिखर। पर यह कथा उसके तुरंत बाद की है, और उसमें कोई विजय नहीं है।

इसमें केवल एक घाव है, और उसका ठंडा किया जाना।

जिसने सबसे बड़ा काम किया, उसे उसके बाद उपचार चाहिए था — और उसने माँगा भी। परंपरा ने इस माँग को छोटा नहीं समझा; उसने उसके लिए पहाड़ चीरकर एक धारा निकाल दी, और वह धारा तब से बह रही है।

चित्रकूट में खड़े होकर यह सोचा जा सकता है कि कितने काम पूरे होने के बाद कोई पूछता ही नहीं कि करने वाले को क्या लगा।

स्रोत: स्थानीय स्थल-परंपरा; विवरण संबद्ध स्रोतों से, 2026-08-04 को देखे गए

दर्शन का समय

हनुमान धारा के लिए कोई आधिकारिक दर्शन-समय सत्यापित स्रोत पर उपलब्ध नहीं मिली।

मंदिर दिन के उजाले में दर्शन हेतु खुला रहता है। सीढ़ियों की चढ़ाई को देखते हुए सुबह जल्दी चलना सबसे व्यावहारिक है — दोपहर की गर्मी में यह चढ़ाई कठिन हो जाती है।

हमने यहाँ कोई समय इसलिए नहीं छापा कि वह किसी आधिकारिक स्रोत पर उपलब्ध नहीं है। यात्रा-वेबसाइटों पर मिलने वाले समय आपस में मेल नहीं खाते, और एक ग़लत समय ऐसे स्थान पर बहुत महँगा पड़ता है।

कैसे पहुँचें

निकटतम एयरपोर्ट: प्रयागराज हवाई अड्डा
निकटतम रेलवे स्टेशन: चित्रकूट धाम (कर्वी) रेलवे स्टेशन

हवाई मार्ग

प्रयागराज हवाई अड्डा

प्रयागराज से चित्रकूट तक सड़क मार्ग से लगभग तीन घंटे।

रेल मार्ग

चित्रकूट धाम (कर्वी) रेलवे स्टेशन

वहाँ से रामघाट व हनुमान धारा तक ऑटो व टैक्सी उपलब्ध।

सड़क मार्ग

चित्रकूट

प्रयागराज, बांदा व सतना से नियमित बस सेवा।

पैदल यात्रा (ट्रेक)

पहाड़ी की तलहटी से लगभग किमी की चढ़ाई — लगभग 30 से 45 मिनट · कठिनाई: मध्यम — लगभग 360 से 400 सीढ़ियाँ

ऊपर तक पहुँचने के लिए लगभग साढ़े तीन से चार सौ सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। सीढ़ियों की सही संख्या स्रोतों में भिन्न बताई जाती है, इसलिए यहाँ सीमा दी गई है। सीढ़ियाँ पक्की हैं और बीच-बीच में विश्राम की जगह है, पर चढ़ाई खड़ी है। गर्मियों में सुबह जल्दी चलना ही ठीक रहता है।

स्रोत: संबद्ध स्रोत, 2026-08-04

अंतिम चरण: तलहटी में वाहन खड़ा कर सीढ़ियाँ चढ़नी होती हैं।

सुगमता: सीढ़ियों का कोई विश्वसनीय विकल्प नहीं है — घुटनों या साँस की तकलीफ़ वाले यात्रियों को यह ध्यान में रखकर योजना बनानी चाहिए।

कब जाएँ

सर्वोत्तम समय: अक्टूबर से मार्च। ग्रीष्म में यहाँ अत्यधिक गर्मी पड़ती है और सीढ़ियाँ चढ़ना कठिन हो जाता है। वर्षा-काल में सीढ़ियाँ फिसलन भरी रहती हैं, यद्यपि तब धारा सबसे तेज़ रहती है।

प्रमुख त्योहार

  • हनुमान जयंती
  • दीपावली (चित्रकूट का मेला)

आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल

  • रामघाट (लगभग 5 किमी) — मंदाकिनी के तट पर; चित्रकूट का मुख्य घाट।
  • कामदगिरि — परिक्रमा के लिए प्रसिद्ध पर्वत; चित्रकूट का केंद्रीय स्थल।
  • भरत मिलाप मंदिर — जहाँ भरत राम से मिलने आए माने जाते हैं।

यात्रा सुझाव

वस्त्र: शालीन वस्त्र और पकड़ वाले जूते — सीढ़ियाँ चढ़नी हैं। पानी साथ रखें।

ठहरने की व्यवस्था: चित्रकूट में धर्मशालाओं व होटलों की व्यवस्था है।

एक नज़र में

प्रकारमंदिर
मंदिरश्री हनुमान धारा मंदिर
स्थानचित्रकूट
ज़िलाचित्रकूट
राज्यउत्तर प्रदेश

हनुमान धारा — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न