मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व
महड रायगड ज़िले में है और अष्टविनायक यात्रा का चौथा पड़ाव।
यहाँ की सबसे व्यावहारिक विशेषता यह है कि **आठों मंदिरों में केवल यहीं भक्तों को स्वयं प्रतिमा के पास जाकर दर्शन करने की अनुमति है।** शेष सात में दर्शन कुछ दूरी से होते हैं।
जो लोग अष्टविनायक की पूरी यात्रा करते हैं, वे प्रायः इसी अंतर की चर्चा करते हैं। दूरी से देखने और पास जाकर खड़े होने में जो फ़र्क़ है, वह कहा नहीं जाता — महसूस होता है।
यहाँ गणेश **वरदविनायक** हैं — वर देने वाले, समृद्धि और सफलता देने वाले। प्रतिमा की सूँड़ बाईं ओर है।
- अष्टविनायक का अकेला मंदिर जहाँ भक्त स्वयं प्रतिमा के पास जाकर दर्शन कर सकते हैं।
- गणेश यहाँ वरदविनायक हैं — वर, समृद्धि व सफलता देने वाले।
- प्रतिमा सन् 1690 में पास के तालाब से प्राप्त हुई बताई जाती है।
- वर्तमान मंदिर 1725 में कल्याण के तत्कालीन सूबेदार रामजी महादेव बिवलकर ने बनवाया।
पौराणिक कथा
महड की कथा एक शापित ऋषि की है, और उस शाप से मिली मुक्ति की।
गृत्समद ऋषि
कथा कहती है कि ऋषि गृत्समद को एक शाप मिला था, और उस शाप से मुक्ति के लिए उन्होंने यहीं गणेश की आराधना की।
गणेश प्रसन्न हुए और उन्हें वर दिया। इसी से वे यहाँ **वरदविनायक** कहलाए — वर देने वाले विनायक।
गृत्समद का नाम वैदिक परंपरा में भी आता है, और गणेश-उपासना की परंपरा में उनका विशेष स्थान माना जाता है।
तालाब से मिली प्रतिमा
वर्तमान प्रतिमा के बारे में कहा जाता है कि वह सन् 1690 में पास के तालाब से प्राप्त हुई।
यह प्रसंग अष्टविनायक और सप्त बद्री दोनों की कई कथाओं में दोहराया जाता है — प्रतिमा जल में मिलना और फिर स्थापित होना। वृद्ध बद्री की कथा में भी शंकराचार्य नारद-कुंड से प्रतिमा निकालते हैं।
परंपरा में इसका एक अर्थ यह लिया जाता है कि जो पूजा किसी काल में छूट गई थी, वह फिर से जुड़ी। जल में पड़ी प्रतिमा खोई हुई नहीं थी — वह प्रतीक्षा कर रही थी।
स्रोत: स्थल-परंपरा; विवरण en.wikipedia.org/wiki/Ashtavinayaka से सत्यापित
इतिहास
रामजी महादेव बिवलकर
प्रतिमा 1690 में तालाब से प्राप्त हुई, और वर्तमान मंदिर सन् 1725 में बना — कल्याण के तत्कालीन सूबेदार रामजी महादेव बिवलकर ने इसे बनवाया।
यानी प्रतिमा और मंदिर के बीच लगभग पैंतीस वर्ष का अंतर है।
स्रोत: en.wikipedia.org/wiki/Ashtavinayaka — 2026-08-04 को देखा गया
दर्शन का समय
महड मंदिर के लिए कोई आधिकारिक दर्शन-समय या आरती-तालिका प्रकाशित नहीं होती।
मंदिर सामान्यतः प्रातःकाल से सायंकाल तक दर्शन हेतु खुला रहता है। यहाँ भक्त स्वयं प्रतिमा के पास जाकर दर्शन कर सकते हैं — अष्टविनायक में यह सुविधा केवल यहीं है, इसलिए भीड़ के समय पंक्ति धीरे चलती है।
कैसे पहुँचें
हवाई मार्ग
छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, मुंबई
मुंबई से महड तक सड़क मार्ग से लगभग ढाई से तीन घंटे।
रेल मार्ग
खोपोली रेलवे स्टेशन
खोपोली से महड पास ही है।
सड़क मार्ग
महड
मुंबई-पुणे मार्ग पर खोपोली के निकट; दोनों नगरों से सुगमता से पहुँचा जा सकता है।
अंतिम चरण: सड़क मंदिर तक जाती है; कोई चढ़ाई नहीं।
सुगमता: सुगम — कोई चढ़ाई नहीं। यह अष्टविनायक का वह मंदिर है जहाँ प्रतिमा तक सीधी पहुँच है, इसलिए वृद्ध व अस्वस्थ यात्रियों के लिए यहाँ का अनुभव विशेष रहता है।
कब जाएँ
सर्वोत्तम समय: अक्टूबर से मार्च। वर्षा-काल में इस क्षेत्र में भारी वर्षा होती है।
प्रमुख त्योहार
- गणेश चतुर्थी
- माघी गणेश जयंती
आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल
- बल्लाळेश्वर — महाराष्ट्र
- खोपोली — मुंबई-पुणे मार्ग का प्रमुख पड़ाव; पास ही।
