दिव्य देशम — एक नज़र में
मंगलाशासनम्: पासुरम् — नम्माळ्वार
मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व
तिरुवारन् विलै — **आरन्मुळा** — केरल के **पत्तनंतिट्टा** ज़िले में, **पंपा** नदी के तट पर है। यहाँ कृष्ण **पार्थसारथी** रूप में विराजते हैं।
**यह पंच पांडव मंदिरों में से एक है, और यह अर्जुन का मंदिर है।**
(पाँचों की साझा कथा — कि हर पांडव ने एक मंदिर प्रतिष्ठित किया — **तिरुच्चेंकुंड्रूर** के पृष्ठ पर है।)
और यह मेल तर्कसंगत है। **"पार्थसारथी" का अर्थ ही है *पार्थ का सारथी*** — और पार्थ अर्जुन का ही नाम है।
यानी जिस भाई ने यह मंदिर बनाया, देवता उसी के सारथी हैं।
परंपरा कहती है कि अर्जुन ने मूर्ति पहले **नीलक्कल** में स्थापित की थी, और बाद में **भूमिदेवी** ने उसे यहाँ पुनः प्रतिष्ठित किया।
**पर इस मंदिर की सबसे बड़ी परंपरा भूमि पर नहीं, नदी पर चलती है।**
**आरन्मुळा वल्लंकळि** — नौका-दौड़ — केरल की सबसे प्रसिद्ध नौका-दौड़ों में है। यह **ओणम्** के समय, **चिंगम्** मास के **उत्रट्टादि** दिन होती है, जो मूर्ति की प्रतिष्ठा की वर्षगाँठ भी मानी जाती है।
इसमें **पळ्ळियोडम्** नामक विशाल सजी हुई नौकाएँ उतरती हैं।
और इससे जुड़ी एक और परंपरा है — **तिरुवोणत्तोणि**, वह अनुष्ठानिक नौका जो कृष्ण की मूर्ति लेकर उत्रट्टादि के दिन मंदिर पहुँचती है। साथ ही **वल्लसद्या** का भोज भी होता है।
⚠️ **नाम-भ्रम टाल लें:** "पार्थसारथी" चेन्नै के **तिरुवल्लिक्केणि** और तिरुनांगूर के **तिरु पार्थन्पळ्ळि** के देवता भी हैं। तीनों अलग दिव्य देशम हैं।
यह गाँव **आरन्मुळा कण्णाडि** के लिए भी जाना जाता है — धातु से बना वह पारंपरिक दर्पण जो यहीं की शिल्प-परंपरा है।
- पंच पांडव मंदिरों में अर्जुन का मंदिर — और देवता पार्थसारथी, यानी अर्जुन के सारथी।
- आरन्मुळा वल्लंकळि — ओणम् के उत्रट्टादि पर होने वाली प्रसिद्ध नौका-दौड़।
- तिरुवोणत्तोणि — वह अनुष्ठानिक नौका जो मूर्ति लेकर मंदिर पहुँचती है।
- परंपरा यहाँ नदी पर चलती है, केवल मंदिर के भीतर नहीं।
- आरन्मुळा कण्णाडि — धातु के पारंपरिक दर्पण की शिल्प-परंपरा।
- ⚠️ तिरुवल्लिक्केणि व तिरु पार्थन्पळ्ळि के देवता भी पार्थसारथी हैं।
पौराणिक कथा
पंच पांडव मंदिरों की साझा कथा तिरुच्चेंकुंड्रूर पर है। यहाँ की अपनी बात नाम और नदी की है।
सारथी का मंदिर, सारथी के रथी ने बनाया
पंच पांडव मंदिरों में यह **अर्जुन** का है।
और यहाँ के देवता **पार्थसारथी** हैं — जिसका अर्थ ही है ***पार्थ का सारथी***।
पार्थ अर्जुन का नाम है।
यानी जिस भाई ने यह मंदिर बनाया, यहाँ के देवता उसी के **सारथी** हैं। पाँच भाइयों में किसे कौन-सा मंदिर मिला, यह संयोग नहीं लगता।
परंपरा कहती है कि अर्जुन ने मूर्ति पहले **नीलक्कल** में प्रतिष्ठित की थी, और बाद में **भूमिदेवी** ने उसे यहाँ पुनः स्थापित किया।
जो नदी पर होता है
इस मंदिर की सबसे बड़ी परंपरा मंदिर के भीतर नहीं होती।
**वह पंपा नदी पर होती है।**
**आरन्मुळा वल्लंकळि** — नौका-दौड़ — **ओणम्** के समय, **चिंगम्** मास के **उत्रट्टादि** दिन होती है। वही दिन मूर्ति की प्रतिष्ठा की वर्षगाँठ भी माना जाता है।
उसमें **पळ्ळियोडम्** उतरती हैं — विशाल, सजी हुई नौकाएँ, जिन्हें कुशल नाविक खेते हैं।
और उसी दिन **तिरुवोणत्तोणि** आती है — वह अनुष्ठानिक नौका जो कृष्ण की मूर्ति लेकर मंदिर पहुँचती है।
**यह भाव इस सूची में दूसरी बार दिखा है।**
मदुरै के **अऴगर कोविल** में कल्लऴगर हर वर्ष **वैगै नदी में उतरते** हैं। वहाँ भी परंपरा मंदिर से निकलकर नदी तक चली जाती है, और पूरा नगर उसे देखने आता है।
दोनों जगह वही बात है — जो सबसे बड़ा दिन है, वह मंदिर के भीतर नहीं मनाया जाता। वह **पानी पर** मनाया जाता है।
स्रोत: स्थल-परंपरा; विवरण en.wikipedia.org/wiki/Aranmula_Parthasarathy_Temple व केरल पर्यटन से, 2026-08-05.
दर्शन का समय
इस मंदिर के दर्शन-समय किसी आधिकारिक देवस्वम् स्रोत पर सत्यापित नहीं हो सके।
⚠️ **केरल के मंदिरों के वस्त्र-नियम कड़े हैं** — पुरुषों को प्रायः ऊपरी वस्त्र उतारकर मुंडु/धोती में प्रवेश करना होता है। मध्याह्न का अवकाश भी लंबा रहता है। ⚠️ ओणम् व वल्लंकळि के दिनों में मंदिर, गाँव व नदी — तीनों की व्यवस्था बदल जाती है और भीड़ बहुत अधिक होती है।
कैसे पहुँचें
हवाई मार्ग
तिरुवनंतपुरम् / कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
दोनों से सड़क मार्ग उपलब्ध।
रेल मार्ग
चेंगन्नूर रेलवे स्टेशन
वहाँ से सड़क मार्ग से पास।
सड़क मार्ग
आरन्मुळा
चेंगन्नूर व पत्तनंतिट्टा दोनों से बस उपलब्ध।
अंतिम चरण: सड़क मंदिर तक जाती है; कोई चढ़ाई नहीं।
सुगमता: सुगम — कोई चढ़ाई नहीं।
कब जाएँ
सर्वोत्तम समय: अक्टूबर से फ़रवरी सामान्य दर्शन के लिए। पर यदि **वल्लंकळि** देखनी हो तो **ओणम्** (चिंगम् मास, अगस्त–सितंबर) में आना होगा — तब भीड़ बहुत अधिक रहती है और ठहरने की व्यवस्था पहले से करनी चाहिए।
प्रमुख त्योहार
- आरन्मुळा वल्लंकळि (ओणम्, चिंगम् का उत्रट्टादि)
- तिरुवोणत्तोणि
- वल्लसद्या
आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल
- तिरुच्चेंकुंड्रूर — पंपा तट, केरल
- तिरुवल्लिक्केणि — त्रिप्लिकेन (तिरुवल्लिक्केणि), चेन्नै, तमिलनाडु
- आरन्मुळा धरोहर ग्राम — आरन्मुळा कण्णाडि की शिल्प-परंपरा के लिए प्रसिद्ध।
- पंच पांडव मंदिरों के शेष चार — चेंगन्नूर क्षेत्र में।
