तिरुक्कोळूर

Vaithamanidhi Perumal Temple, Thirukkolur

वह दिव्य देशम जहाँ भगवान का सिर अनाज नापने के पात्र पर टिका है — और जहाँ कुबेर को उनका खोया धन लौटा।

यह स्थान इनमें भी है:108 दिव्य देशम

दिव्य देशम — एक नज़र में

पेरुमाल
वैत्त मानिधि पेरुमाल — मरक्काल पर सिर टिकाए
तीर्थम्
ताम्रपर्णी

मंगलाशासनम्: पासुरम् — नम्माळ्वार तथा मधुरकवि आळ्वार से संबद्ध स्थान

मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व

तिरुक्कोळूर तमिलनाडु के तूतुक्कुडि ज़िले में, ताम्रपर्णी के तट पर है और नव तिरुपति के नौ में गिना जाता है। यहाँ विष्णु वैत्त मानिधि पेरुमाल रूप में विराजते हैं — नाम का अर्थ है *सच्चे धन का रक्षक*।

नव तिरुपति में यह मंगल से जुड़ा है, और इसका वार मंगलवार है। (साझा नव तिरुपति कथा तिरुक्कुरुगूर के पृष्ठ पर है।)

मूर्ति यहाँ की सबसे विशिष्ट बात है, और वह पूरी तरह धन के प्रतीकों से बनी है।

भगवान का सिर मरक्काल पर टिका है — वह काठ का पात्र जिससे अनाज नापा जाता है। यानी तकिया कोई शेषनाग नहीं, एक नापने का बर्तन है।

उनके दाहिने कंधे के नीचे नवनिधि हैं — कुबेर के नौ प्रकार के कोष।

और वे अपनी बाईं हथेली देख रहे हैं — मानो हिसाब रख रहे हों कि धन कहाँ-कहाँ है।

कथा कुबेर की है।

परंपरा कहती है कि कुबेर ने पार्वती की ओर अनुचित दृष्टि डाली, और उसी कारण उन्होंने अपनी नवनिधि, एक आँख और अपना रूप — सब खो दिया।

पश्चात्ताप करने पर शिव और पार्वती ने उन्हें तिरुक्कोळूर में तप करने भेजा।

और वैत्त मानिधि पेरुमाल ने उन्हें आधी नवनिधि, उनका रूप और उनकी आँख — तीनों लौटा दिए।

यह मधुरकवि आळ्वार की जन्मभूमि भी है।

मधुरकवि आळ्वार बारह आळ्वारों में से एक हैं — और वे नम्माळ्वार के शिष्य थे, जिनकी जन्मभूमि तिरुक्कुरुगूर पास ही है।

यह इस सूची का चौथा कवि-स्थान है — तेराऴुंदूर में कंबन, महाबलिपुरम् में भूतत्ताळ्वार, तिरुक्कुरुगूर में नम्माळ्वार, और यहाँ मधुरकवि।

  • भगवान का सिर मरक्काल पर टिका है — अनाज/धन नापने का काठ का पात्र।
  • दाहिने कंधे के नीचे नवनिधि; बाईं हथेली देखते हुए, मानो हिसाब रखते हों।
  • नाम का अर्थ — वैत्त मानिधि, यानी सच्चे धन का रक्षक।
  • कुबेर को यहीं उनकी खोई नवनिधि, आँख व रूप लौटे।
  • मधुरकवि आळ्वार की जन्मभूमि — जो नम्माळ्वार के शिष्य थे।
  • नव तिरुपति में मंगल से जुड़ा; वार मंगलवार।

पौराणिक कथा

नव तिरुपति की साझा कथा तिरुक्कुरुगूर पर है। यहाँ की अपनी कथा धन की है — और उसे खोने तथा लौटाने की।

कुबेर, जिसने सब खो दिया

कुबेर धन के स्वामी हैं। उनके पास नवनिधि थीं — नौ प्रकार के कोष।

परंपरा कहती है कि उन्होंने पार्वती की ओर अनुचित दृष्टि डाली, और उसी कारण उन्होंने सब खो दिया — नवनिधि, एक आँख, और अपना रूप भी।

जो सबको देता था, वह स्वयं रिक्त हो गया।

पश्चात्ताप करने पर शिव और पार्वती ने उन्हें दंड नहीं दिया — उन्होंने मार्ग बताया। कहा कि तिरुक्कोळूर जाकर तप करो।

और यहाँ वैत्त मानिधि पेरुमाल ने उन्हें आधी नवनिधि, उनकी आँख और उनका रूप लौटा दिया।

ध्यान दीजिए — आधी, पूरी नहीं।

यह इस क्षेत्र का जाना-पहचाना स्वर है। तिरुक्कंडियूर में विष्णु ने शिव को ब्रह्महत्या-दोष से मुक्त किया था, और नाथन् कोइल में शिव के वाहन को। यहाँ शिव और पार्वती स्वयं किसी को विष्णु के पास भेज रहे हैं।

नापने का बर्तन

इस मंदिर की मूर्ति पूरी तरह धन के प्रतीकों से बनी है — और उनमें सबसे असाधारण तकिया है।

भगवान का सिर मरक्काल पर टिका है — वह काठ का पात्र जिससे अनाज नापा जाता है।

विष्णु की शयन-मूर्तियाँ प्रायः शेषनाग पर होती हैं। तिरु कडल्मलै में वे सीधे भूमि पर लेटे हैं, और वही उस मंदिर की विशेषता है।

यहाँ उनका तकिया एक माप है।

उनके दाहिने कंधे के नीचे नवनिधि हैं, और वे अपनी बाईं हथेली देख रहे हैं — जैसे कोई हिसाब देख रहा हो कि क्या कहाँ है।

यह भाव सुंदर है। धन के देवता कुबेर हैं, पर यहाँ धन का रक्षक विष्णु हैं — और रक्षक का काम बाँटना नहीं, नापना है।

नाम भी यही कहता है: वैत्त मानिधि, यानी *सच्चे धन का रक्षक*।

और एक कवि यहाँ जन्मा

यह मधुरकवि आळ्वार की जन्मभूमि है।

वे बारह आळ्वारों में से एक हैं, और उनकी पहचान एक बात से बनती है — वे नम्माळ्वार के शिष्य थे।

और नम्माळ्वार की जन्मभूमि तिरुक्कुरुगूर यहीं पास है, इसी ताम्रपर्णी के तट पर, इसी नव तिरुपति में।

यानी गुरु और शिष्य — दोनों के गाँव पास-पास हैं, और दोनों 108 में हैं।

यह इस सूची का चौथा कवि-स्थान है। तेराऴुंदूर में कंबन जन्मे, महाबलिपुरम् में भूतत्ताळ्वार, तिरुक्कुरुगूर में नम्माळ्वार, और यहाँ मधुरकवि।

एक ही नदी के किनारे दो आळ्वार जन्मे — और उनमें से एक ने वह लिखा जिससे यह पूरी सूची बनी।

स्रोत: स्थल-परंपरा; विवरण en.wikipedia.org/wiki/Vaithamanidhi_Perumal_Temple व अन्य स्रोतों से, 2026-08-05.

दर्शन का समय

इस मंदिर के दर्शन-समय किसी आधिकारिक मंदिर/ट्रस्ट स्रोत पर सत्यापित नहीं हो सके।

सामान्यतः प्रातःकाल से मध्याह्न तक और फिर सायंकाल से रात्रि तक दर्शन होते हैं। नव तिरुपति के मंदिर पास-पास हैं और प्रायः एक ही दिन में किए जाते हैं।

हमने यहाँ कोई समय इसलिए नहीं छापा कि वह किसी आधिकारिक स्रोत पर उपलब्ध नहीं है। यात्रा-वेबसाइटों पर मिलने वाले समय आपस में मेल नहीं खाते, और एक ग़लत समय ऐसे स्थान पर बहुत महँगा पड़ता है।

कैसे पहुँचें

निकटतम एयरपोर्ट: तूतुक्कुडि हवाई अड्डा
निकटतम रेलवे स्टेशन: आळ्वार तिरुनगरि / तिरुनेलवेली

हवाई मार्ग

तूतुक्कुडि हवाई अड्डा

तिरुनेलवेली क्षेत्र से जुड़ा हुआ।

रेल मार्ग

आळ्वार तिरुनगरि / तिरुनेलवेली

वहाँ से सड़क मार्ग से पास।

सड़क मार्ग

तिरुक्कोळूर

तिरुनेलवेली से बस उपलब्ध; नव तिरुपति के मार्ग पर।

अंतिम चरण: सड़क मंदिर तक जाती है; कोई चढ़ाई नहीं।

सुगमता: सुगम — कोई चढ़ाई नहीं।

कब जाएँ

सर्वोत्तम समय: नवंबर से फ़रवरी। नव तिरुपति के लिए एक पूरा दिन रखना उचित है।

आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल

  • नव तिरुपति के अन्य मंदिर — ताम्रपर्णी के तट पर, पास-पास।

यात्रा सुझाव

वस्त्र: शालीन वस्त्र।

ठहरने की व्यवस्था: ठहरने के विकल्प तिरुनेलवेली व तूतुक्कुडि में हैं।

एक नज़र में

प्रकारमंदिर
मंदिरश्री वैत्त मानिधि पेरुमाल मंदिर
स्थानतिरुक्कोळूर, ताम्रपर्णी तट, तिरुनेलवेली के पास
ज़िलातूतुक्कुडि
राज्यतमिलनाडु
प्रबंधनतमिलनाडु हिंदू धार्मिक व धर्मादाय बंदोबस्ती विभाग (HR&CE)

तिरुक्कोळूर — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न