तिरुच्चेंकुंड्रूर

Thrichittatt Maha Vishnu Temple, Chengannur

पंच पांडव मंदिरों में पहला — वह मंदिर जिसे परंपरा के अनुसार युधिष्ठिर ने प्रतिष्ठित किया।

यह स्थान इनमें भी है:108 दिव्य देशम

दिव्य देशम — एक नज़र में

पेरुमाल
इमयवरप्प पेरुमाल
तीर्थम्
पंपा

मंगलाशासनम्: पासुरम्नम्माळ्वार

मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व

तिरुच्चेंकुंड्रूर — जिसे **त्रिच्चिट्टाट्ट** भी कहा जाता है — केरल के **चेंगन्नूर** क्षेत्र में, **पंपा** नदी के तट पर है। यहाँ विष्णु **इमयवरप्प पेरुमाल** रूप में विराजते हैं।

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## पंच पांडव मंदिर — पाँच भाइयों के पाँच मंदिर

**यह मंदिर "पंच पांडव मंदिर" नामक समूह का भाग है**, और इस समूह की साझा कथा यहीं दी जा रही है (शेष चार पृष्ठों पर इसे दोहराया नहीं गया है)।

परंपरा कहती है कि **महाभारत के पाँचों पांडवों** ने **पंपा** और निकटवर्ती तटों पर कृष्ण की मूर्तियाँ प्रतिष्ठित कीं — **एक-एक भाई ने एक-एक मंदिर**।

और **पाँचों 108 दिव्य देशम में गिने जाते हैं**:

| मंदिर | किसने प्रतिष्ठित किया | |---|---| | **त्रिच्चिट्टाट्ट (यह मंदिर)** | **युधिष्ठिर** | | **तिरुपुलियूर** | **भीम** | | **आरन्मुळा** | **अर्जुन** | | **तिरुवन्वंदूर** | **नकुल** | | **तिरुक्कडित्तानम्** | **सहदेव** |

दर्शन का परंपरागत क्रम भी यही है — **त्रिच्चिट्टाट्ट से आरंभ**, और तिरुक्कडित्तानम् पर समाप्ति।

**यह इस सूची का तीसरा नामित उप-समूह है, और तीनों की बनावट अलग है।**

**तिरुनांगूर के ग्यारह** एक ही कथा से बने — शिव के तांडव को शांत करने के लिए विष्णु के ग्यारह रूप।

**नव तिरुपति के नौ** **ग्रहों** से बँधे हैं — नौ मंदिर, नौ ग्रह।

और **ये पाँच** **पाँच भाइयों** से बँधे हैं।

यानी एक समूह देवता के रूपों से बना, एक आकाश से, और एक **परिवार** से।

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यह भी ध्यान देने योग्य है कि पंच पांडव मंदिर उन **मलै नाडु के तेरह दिव्य देशम** का भाग हैं जिनमें केरल के ग्यारह और कन्याकुमारी के दो आते हैं।

  • पंच पांडव मंदिरों में पहला — परंपरा के अनुसार युधिष्ठिर द्वारा प्रतिष्ठित।
  • पाँचों पांडवों ने पंपा व निकटवर्ती तटों पर एक-एक मंदिर स्थापित किया।
  • पाँचों 108 दिव्य देशम में गिने जाते हैं।
  • दर्शन का परंपरागत क्रम यहीं से आरंभ होता है।
  • यह सूची का तीसरा नामित उप-समूह — तिरुनांगूर 11 व नव तिरुपति 9 के बाद।
  • मलै नाडु के तेरह दिव्य देशम का भाग।

पौराणिक कथा

यह कथा पाँच भाइयों की है, और पाँच मंदिरों की।

पाँच भाई, पाँच मंदिर

परंपरा कहती है कि **महाभारत के पाँचों पांडवों** ने **पंपा** और आसपास के तटों पर कृष्ण की मूर्तियाँ प्रतिष्ठित कीं — हर भाई ने एक।

**युधिष्ठिर** ने यह मंदिर, **त्रिच्चिट्टाट्ट**। **भीम** ने **तिरुपुलियूर**। **अर्जुन** ने **आरन्मुळा**। **नकुल** ने **तिरुवन्वंदूर**। और **सहदेव** ने **तिरुक्कडित्तानम्**।

और पाँचों **108 दिव्य देशम** में गिने जाते हैं।

दर्शन का परंपरागत क्रम भी यही है — **सबसे बड़े भाई से आरंभ, सबसे छोटे पर समाप्ति**।

यानी भक्त जब यह यात्रा करता है, तो वह वस्तुतः **जन्म-क्रम** से चलता है।

तीन समूह, तीन बनावटें

यह इस पूरी सूची का **तीसरा नामित उप-समूह** है, और तीनों की बनावट अलग है।

**तिरुनांगूर के ग्यारह** एक ही कथा से बने हैं — शिव का तांडव, और उसे शांत करने के लिए विष्णु के ग्यारह रूप। वहाँ जोड़ **देवता के रूपों** का है।

**नव तिरुपति के नौ** **ग्रहों** से बँधे हैं — ताम्रपर्णी के तट पर नौ मंदिर, और नौ ग्रह। वहाँ जोड़ **आकाश** का है।

और **ये पाँच** **पाँच भाइयों** से बँधे हैं। यहाँ जोड़ **परिवार** का है।

तीनों बार पूछा गया प्रश्न एक ही था — कई मंदिरों को एक इकाई कैसे बनाया जाए?

और तीनों बार उत्तर अलग रहा: एक बार देवता से, एक बार ग्रहों से, और एक बार उन पाँच लोगों से जो आपस में भाई थे।

स्रोत: स्थल-परंपरा; विवरण संबद्ध स्थल-स्रोतों से, 2026-08-05.

दर्शन का समय

इस मंदिर के दर्शन-समय किसी आधिकारिक देवस्वम् स्रोत पर सत्यापित नहीं हो सके।

⚠️ **केरल के मंदिरों में वस्त्र-नियम कड़े होते हैं** — पुरुषों को प्रायः ऊपरी वस्त्र उतारकर व मुंडु/धोती पहनकर प्रवेश करना होता है, और महिलाओं के लिए साड़ी या सलवार-कमीज़ अपेक्षित रहती है। साथ ही केरल में मध्याह्न का अवकाश प्रायः लंबा होता है। जाने से पहले पूछ लेना उचित है।

हमने यहाँ कोई समय इसलिए नहीं छापा कि वह किसी आधिकारिक स्रोत पर उपलब्ध नहीं है। यात्रा-वेबसाइटों पर मिलने वाले समय आपस में मेल नहीं खाते, और एक ग़लत समय ऐसे स्थान पर बहुत महँगा पड़ता है।

कैसे पहुँचें

निकटतम एयरपोर्ट: तिरुवनंतपुरम् / कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
निकटतम रेलवे स्टेशन: चेंगन्नूर रेलवे स्टेशन

हवाई मार्ग

तिरुवनंतपुरम् / कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा

दोनों से सड़क मार्ग उपलब्ध।

रेल मार्ग

चेंगन्नूर रेलवे स्टेशन

मंदिर चेंगन्नूर क्षेत्र में ही है।

सड़क मार्ग

चेंगन्नूर

पंच पांडव मंदिरों में से तीन इसी क्षेत्र में हैं।

अंतिम चरण: सड़क मंदिर तक जाती है; कोई चढ़ाई नहीं।

सुगमता: सुगम — कोई चढ़ाई नहीं।

कब जाएँ

सर्वोत्तम समय: अक्टूबर से फ़रवरी। ⚠️ पंच पांडव मंदिरों के दर्शन का परंपरागत क्रम यहीं से आरंभ होता है, इसलिए यात्रा की योजना उसी क्रम से बनाना उचित है।

आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल

  • पंच पांडव मंदिरों के शेष चार — तिरुपुलियूर, आरन्मुळा, तिरुवन्वंदूर व तिरुक्कडित्तानम्।

यात्रा सुझाव

वस्त्र: ⚠️ केरल-शैली के नियम लागू — पुरुषों को प्रायः ऊपरी वस्त्र उतारकर मुंडु/धोती में प्रवेश करना होता है। पैंट-शर्ट में प्रवेश प्रायः वर्जित रहता है।

ठहरने की व्यवस्था: ठहरने के विकल्प चेंगन्नूर व तिरुवल्ला में हैं।

एक नज़र में

प्रकारमंदिर
मंदिरश्री इमयवरप्प पेरुमाल मंदिर (त्रिच्चिट्टाट्ट)
स्थानचेंगन्नूर, पंपा तट
ज़िलाअलप्पुऴा
राज्यकेरल
प्रबंधनट्रावणकोर देवस्वम् बोर्ड

तिरुच्चेंकुंड्रूर — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न