दिव्य देशम — एक नज़र में
मंगलाशासनम्: पासुरम् — नम्माळ्वार
मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व
तिरुवरगुणमंगै तमिलनाडु के **तूतुक्कुडि** ज़िले में **नादम्** गाँव में है, तिरुचेंदूर–तिरुनेलवेली मार्ग पर, **ताम्रपर्णी** के तट पर। यहाँ विष्णु **विजयासन पेरुमाल** रूप में विराजते हैं।
**यह नव तिरुपति के नौ में से एक है, और चंद्र से जुड़ा है** — इसका वार **सोमवार** है। समूह में इसे दूसरा गिना जाता है।
(नव तिरुपति की पूरी कथा — ये नौ क्यों हैं और यहाँ नवग्रह की अलग सन्निधियाँ क्यों नहीं होतीं — **तिरुक्कुरुगूर** के पृष्ठ पर है।)
**भगवान का एक और नाम ध्यान खींचता है — परमपद नाथन्।**
"परमपद" वैकुंठ का ही नाम है। और 108 दिव्य देशम में **तिरुप्परमपदम्** स्वयं एक प्रविष्टि है — पर वह **पार्थिव नहीं** है, वहाँ कोई यात्रा नहीं होती।
यह मंदिर पृथ्वी पर है, और यहाँ भगवान उसी परमपद के स्वामी कहलाते हैं।
यह भाव इस सूची में बार-बार लौटता है। **तिरुवैकुंठम्** का नाम ही वैकुंठ है; तिरुनांगूर के **तिरु वैकुंड विण्णगरम्** का गर्भगृह वैकुंठ-समतुल्य माना जाता है।
जिस स्थान तक पहुँचा नहीं जा सकता, परंपरा उसे बार-बार पृथ्वी पर उतार लेती है।
- नव तिरुपति के नौ में से एक; चंद्र से जुड़ा, वार सोमवार।
- भगवान का दूसरा नाम परमपद नाथन् — परमपद यानी वैकुंठ।
- ताम्रपर्णी के तट पर, तिरुचेंदूर–तिरुनेलवेली मार्ग पर।
- साझा नव तिरुपति कथा तिरुक्कुरुगूर के पृष्ठ पर है।
पौराणिक कथा
नव तिरुपति की साझा कथा तिरुक्कुरुगूर पर है। यहाँ केवल नाम का भाव है।
परमपद, पृथ्वी पर
यहाँ के भगवान को **परमपद नाथन्** भी कहा जाता है — यानी *परमपद के स्वामी*।
"परमपद" वैकुंठ का ही नाम है, और 108 दिव्य देशम में **तिरुप्परमपदम्** स्वयं एक प्रविष्टि है। पर वह पार्थिव नहीं है — वहाँ न यात्रा होती है, न दर्शन।
यह मंदिर पृथ्वी पर है।
यह बात इस सूची में तीसरी बार आ रही है। इसी नव तिरुपति में **तिरुवैकुंठम्** का नाम ही वैकुंठ है। और तिरुनांगूर के **तिरु वैकुंड विण्णगरम्** का गर्भगृह वैकुंठ के समतुल्य माना जाता है।
परंपरा उस स्थान को अपहुँच छोड़ नहीं देती। वह उसे बार-बार पृथ्वी पर उतार लेती है — कभी नाम से, कभी भाव से।
स्रोत: स्थल-परंपरा; साझा कथा हेतु देखें तिरुक्कुरुगूर। विवरण संबद्ध स्रोतों से, 2026-08-05.
दर्शन का समय
इस मंदिर के दर्शन-समय किसी आधिकारिक मंदिर/ट्रस्ट स्रोत पर सत्यापित नहीं हो सके।
सामान्यतः प्रातःकाल से मध्याह्न तक और फिर सायंकाल से रात्रि तक दर्शन होते हैं। नव तिरुपति के मंदिर पास-पास हैं और प्रायः एक ही दिन में किए जाते हैं।
कैसे पहुँचें
हवाई मार्ग
तूतुक्कुडि हवाई अड्डा
तिरुनेलवेली क्षेत्र से जुड़ा हुआ।
रेल मार्ग
तिरुनेलवेली
वहाँ से तिरुचेंदूर मार्ग पर।
सड़क मार्ग
नादम्
तिरुनेलवेली से बस उपलब्ध।
अंतिम चरण: सड़क मंदिर तक जाती है; कोई चढ़ाई नहीं।
सुगमता: सुगम — कोई चढ़ाई नहीं।
कब जाएँ
सर्वोत्तम समय: नवंबर से फ़रवरी। नव तिरुपति के लिए एक पूरा दिन रखना उचित है।
आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल
- तिरुक्कुरुगूर — ताम्रपर्णी तट, तिरुनेलवेली के पास, तमिलनाडु
- तिरुवैकुंठम् — ताम्रपर्णी तट, तिरुनेलवेली के पास, तमिलनाडु
- नव तिरुपति के अन्य मंदिर — ताम्रपर्णी के तट पर।
