तिरुवेदंतै

Nithya Kalyana Perumal Temple, Thiruvidandai

वह दिव्य देशम जहाँ भगवान का विवाह प्रतिदिन होता है — और जहाँ लोग अपने विवाह की बाधा दूर होने की कामना से आते हैं।

यह स्थान इनमें भी है:108 दिव्य देशम

दिव्य देशम — एक नज़र में

पेरुमाल
नित्य कल्याण पेरुमाल (आदि वराह)
थायार
अखिलवल्लि थायार

मंगलाशासनम्: पासुरम्तिरुमंगै आळ्वार

मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व

तिरुवेदंतै — जिसे **तिरुविडंदै** भी कहा जाता है — चेन्नै के पास, **ईस्ट कोस्ट रोड (ECR)** पर है। यहाँ विष्णु **नित्य कल्याण पेरुमाल** रूप में विराजते हैं — **आदि वराह** के रूप में — और देवी **अखिलवल्लि थायार** उनकी **बाईं जंघा** पर विराजती हैं।

**"नित्य कल्याण" का अर्थ है — प्रतिदिन का विवाह।**

और यह केवल नाम नहीं है। **यहाँ प्रतिदिन भगवान का विवाह-संस्कार किया जाता है।**

इसी कारण यह मंदिर उन लोगों के लिए जाना जाता है जिनके **विवाह में विलंब या बाधा** है। बहुत से श्रद्धालु यहाँ इसी कामना से आते हैं।

**कथा एक पिता की है।**

परंपरा कहती है कि ऋषि **कलव मुनि** की **तीन सौ साठ** कन्याएँ थीं, और उन्होंने विष्णु से प्रार्थना की कि सबके लिए योग्य वर मिलें।

विष्णु **ब्रह्मचारी** के वेश में आए — और **प्रतिदिन एक कन्या** से विवाह करते गए। हिंदू वर्ष के तीन सौ साठ दिनों में, एक-एक करके, सबसे।

अंतिम दिन कलव मुनि ने पहचान लिया कि वह युवक कोई और नहीं, स्वयं नारायण हैं।

तब भगवान ने उन तीन सौ साठ कन्याओं को **एक ही रूप में मिला दिया** — **अखिलवल्लि थायार**, जो आज उनकी बाईं जंघा पर विराजती हैं।

**नाम भी वहीं से आया।** भगवान ने देवी को अपनी **बाईं ओर** स्थान दिया — तमिल में "तिरु इड एंदै", जो समय के साथ **तिरुविडवंदै** और फिर **तिरुविडंदै** हो गया।

⚠️ कन्याओं की संख्या पर स्रोत थोड़े भिन्न हैं — सबसे प्रचलित 360 है (वर्ष के दिनों के अनुसार), कुछ स्रोत 365 कहते हैं।

तिरुमंगै आळ्वार ने आठवीं शताब्दी में इसके पासुरम् रचे।

  • यहाँ प्रतिदिन भगवान का विवाह-संस्कार होता है — "नित्य कल्याण" का शाब्दिक अर्थ।
  • विवाह में विलंब या बाधा की कामना लेकर आने वालों का प्रमुख स्थान।
  • कलव मुनि की 360 कन्याओं से भगवान ने एक-एक दिन कर विवाह किया।
  • सभी कन्याएँ अखिलवल्लि थायार में मिल गईं, जो बाईं जंघा पर विराजती हैं।
  • नाम की व्युत्पत्ति — देवी को बाईं ओर स्थान देने से "तिरु इड एंदै"।
  • भगवान आदि वराह रूप में; ECR पर, चेन्नै के पास।

पौराणिक कथा

यह कथा एक पिता की चिंता से शुरू होती है — और उस चिंता का उत्तर एक वर्ष लेता है।

तीन सौ साठ कन्याएँ

परंपरा कहती है कि ऋषि **कलव मुनि** की **तीन सौ साठ** कन्याएँ थीं।

उन्होंने विष्णु से प्रार्थना की — सबके लिए योग्य वर मिलें।

विष्णु **ब्रह्मचारी** के वेश में आए, और विवाह करने लगे। **प्रतिदिन एक।**

हिंदू वर्ष के तीन सौ साठ दिन, तीन सौ साठ कन्याएँ। एक-एक करके, सबसे।

(⚠️ संख्या पर स्रोत थोड़े भिन्न हैं — कुछ 365 कहते हैं। 360 सबसे प्रचलित है, क्योंकि वह वर्ष के दिनों से मेल खाता है।)

अंतिम दिन कलव मुनि ने पहचान लिया — वह युवक स्वयं नारायण थे।

तब भगवान ने उन सब कन्याओं को **एक रूप में मिला दिया**: **अखिलवल्लि थायार**।

वे आज भी भगवान की **बाईं जंघा** पर विराजती हैं — और स्थान का नाम भी वहीं से पड़ा। भगवान ने देवी को अपनी बाईं ओर स्थान दिया, इसलिए "तिरु इड एंदै", जो घिसकर **तिरुविडंदै** हो गया।

एक दिन में एक

इस कथा में एक बात ध्यान देने योग्य है।

भगवान चाहते तो एक ही दिन में, एक ही क्षण में, सबका वर बन सकते थे। कथा में उनके लिए यह कठिन नहीं था।

पर उन्होंने ऐसा नहीं किया।

उन्होंने **एक दिन में एक** से विवाह किया, और इसमें पूरा वर्ष लगा दिया।

यानी हर कन्या को उसका अपना दिन मिला। किसी का विवाह भीड़ में नहीं हुआ।

और इसी से वह प्रथा निकली जो आज भी चलती है — **यहाँ प्रतिदिन भगवान का विवाह होता है।** मंदिर का नाम ही **नित्य कल्याण** है।

जो लोग अपने या अपने बच्चों के विवाह में विलंब से चिंतित होकर यहाँ आते हैं, वे इसी भाव से आते हैं — कि यहाँ विवाह रुकता नहीं, हर दिन होता है।

स्रोत: स्थल-परंपरा; विवरण संबद्ध स्थल-स्रोतों से, 2026-08-05.

दर्शन का समय

इस मंदिर के दर्शन-समय किसी आधिकारिक मंदिर/ट्रस्ट स्रोत पर सत्यापित नहीं हो सके।

सामान्यतः प्रातःकाल से मध्याह्न तक और फिर सायंकाल से रात्रि तक दर्शन होते हैं। ⚠️ यदि आप विशेष रूप से कल्याण-उत्सव (विवाह-संस्कार) में सम्मिलित होना चाहते हैं या कोई अर्चना करवानी है, तो जाने से पहले मंदिर में पूछ लेना उचित है — इसके अपने समय व व्यवस्था होती है।

हमने यहाँ कोई समय इसलिए नहीं छापा कि वह किसी आधिकारिक स्रोत पर उपलब्ध नहीं है। यात्रा-वेबसाइटों पर मिलने वाले समय आपस में मेल नहीं खाते, और एक ग़लत समय ऐसे स्थान पर बहुत महँगा पड़ता है।

कैसे पहुँचें

निकटतम एयरपोर्ट: चेन्नै अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
निकटतम रेलवे स्टेशन: चेन्नै (उपनगरीय)

हवाई मार्ग

चेन्नै अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा

वहाँ से सड़क मार्ग से लगभग डेढ़ घंटा।

रेल मार्ग

चेन्नै (उपनगरीय)

वहाँ से ECR द्वारा सड़क मार्ग से।

सड़क मार्ग

तिरुविडंदै, ECR

चेन्नै से ईस्ट कोस्ट रोड द्वारा सीधी बस व टैक्सी। महाबलिपुरम् इसी मार्ग पर आगे है, इसलिए दोनों एक ही दिन में किए जा सकते हैं।

अंतिम चरण: सड़क मंदिर तक जाती है; कोई चढ़ाई नहीं।

सुगमता: सुगम — कोई चढ़ाई नहीं।

कब जाएँ

सर्वोत्तम समय: नवंबर से फ़रवरी, जब चेन्नै का मौसम सबसे अनुकूल रहता है। ECR का मार्ग स्वयं सुंदर है।

आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल

  • महाबलिपुरम् — इसी मार्ग पर आगे; यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल।
  • कोवलम् तट — पास ही।

यात्रा सुझाव

वस्त्र: शालीन वस्त्र।

ठहरने की व्यवस्था: ठहरने के विकल्प चेन्नै व महाबलिपुरम् दोनों में हैं; ECR पर कई विश्राम-स्थल भी हैं।

एक नज़र में

प्रकारमंदिर
मंदिरश्री नित्य कल्याण पेरुमाल मंदिर
स्थानतिरुविडंदै, ईस्ट कोस्ट रोड (ECR), चेन्नै के पास
ज़िलाचेंगलपट्टु
राज्यतमिलनाडु
प्रबंधनतमिलनाडु हिंदू धार्मिक व धर्मादाय बंदोबस्ती विभाग (HR&CE)

तिरुवेदंतै — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न