मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व
संकट मोचन मंदिर वाराणसी में अस्सी नदी के तट पर है, और इसकी स्थापना **गोस्वामी तुलसीदास** ने सोलहवीं शताब्दी के आरंभ में की।
तुलसीदास वही हैं जिन्होंने **रामचरितमानस** लिखी — और हनुमान चालीसा भी उन्हीं की मानी जाती है। परंपरा कहती है कि उन्हें इसी स्थान पर हनुमान के दर्शन हुए, और उन्होंने वहीं मंदिर बनवाया।
नाम का अर्थ सीधा है: **संकट मोचन** यानी संकट हरने वाले। हनुमान का यही रूप यहाँ पूजित है।
**मंगलवार और शनिवार** को यहाँ हज़ारों लोग पंक्तिबद्ध होते हैं। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की होती है जो शनि और मंगल से जुड़े ज्योतिषीय उपायों के लिए आते हैं।
मंदिर हर वर्ष अप्रैल में **संकट मोचन संगीत समारोह** कराता है — शास्त्रीय संगीत और नृत्य का उत्सव, जिसमें देश भर के कलाकार आते हैं। यह परंपरा लगभग नब्बे वर्ष पुरानी है।
7 मार्च 2006 को आरती के समय यहाँ एक विस्फोट हुआ था। उसके बाद मंदिर परिसर में स्थायी पुलिस चौकी स्थापित की गई।
- गोस्वामी तुलसीदास द्वारा 16वीं सदी के आरंभ में स्थापित।
- परंपरा के अनुसार उसी स्थान पर बना जहाँ तुलसीदास को हनुमान के दर्शन हुए।
- मंगलवार व शनिवार को हज़ारों की भीड़ — विशेषकर शनि व मंगल के उपायों हेतु।
- हर अप्रैल में संकट मोचन संगीत समारोह; यह परंपरा लगभग नब्बे वर्ष पुरानी है।
- अस्सी नदी के तट पर स्थित।
पौराणिक कथा
इस मंदिर की कथा तुलसीदास की है — और उस दर्शन की जो उन्हें यहाँ हुआ।
तुलसीदास का दर्शन
परंपरा कहती है कि तुलसीदास को इसी स्थान पर हनुमान के दर्शन हुए, और उन्होंने वहीं यह मंदिर स्थापित किया।
तुलसीदास और हनुमान का संबंध भक्ति-परंपरा में विशेष है। रामचरितमानस के रचयिता ने राम तक पहुँचने का मार्ग हनुमान से होकर देखा — और हनुमान चालीसा, जो आज करोड़ों लोग नित्य पढ़ते हैं, उन्हीं की मानी जाती है।
यह मंदिर इसीलिए केवल एक स्थान नहीं है। यह उस कवि का स्थान है जिसने हनुमान को घर-घर पहुँचाया।
स्रोत: स्थल-परंपरा; विवरण en.wikipedia.org/wiki/Sankat_Mochan_Hanuman_Temple से सत्यापित
इतिहास
स्थापना व आगे का इतिहास
मंदिर की स्थापना सोलहवीं शताब्दी के आरंभ में तुलसीदास ने की।
7 मार्च 2006 को आरती के समय यहाँ हुए तीन विस्फोटों में से एक इस मंदिर में हुआ। उसके बाद परिसर में स्थायी पुलिस चौकी स्थापित की गई, जो आज भी है।
स्रोत: en.wikipedia.org/wiki/Sankat_Mochan_Hanuman_Temple — 2026-08-04 को देखा गया
दर्शन का समय
संकट मोचन मंदिर के लिए कोई आधिकारिक दर्शन-समय या आरती-तालिका सत्यापित स्रोत पर उपलब्ध नहीं मिली।
मंदिर प्रातःकाल से रात्रि तक दर्शन हेतु खुला रहता है। मंगलवार और शनिवार को यहाँ हज़ारों लोग आते हैं और पंक्ति बहुत लंबी हो जाती है — उन दिनों समय लेकर जाएँ। सुरक्षा-जाँच के कारण प्रवेश में भी समय लगता है।
कैसे पहुँचें
हवाई मार्ग
लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, वाराणसी
नगर से लगभग एक घंटे की दूरी पर।
रेल मार्ग
वाराणसी जंक्शन
देश के लगभग हर बड़े नगर से सीधी गाड़ियाँ आती हैं।
सड़क मार्ग
वाराणसी
मंदिर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के पास है; नगर के भीतर ऑटो व ई-रिक्शा से पहुँचा जा सकता है।
अंतिम चरण: मंदिर तक सड़क जाती है; परिसर के पास वाहन रोक दिए जाते हैं।
सुगमता: सुगम — कोई चढ़ाई नहीं। भीड़ के दिनों में पंक्ति लंबी रहती है।
कब जाएँ
सर्वोत्तम समय: अक्टूबर से मार्च। हनुमान जयंती और अप्रैल के संगीत समारोह के समय यहाँ विशेष आयोजन होते हैं। मंगलवार व शनिवार को भीड़ सामान्य दिनों से कहीं अधिक रहती है।
प्रमुख त्योहार
- हनुमान जयंती
- संकट मोचन संगीत समारोह (अप्रैल)
आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल
- काशी — वाराणसी, उत्तर प्रदेश
- दुर्गा मंदिर — पास ही; वाराणसी का प्रसिद्ध देवी मंदिर।
- बनारस हिंदू विश्वविद्यालय — परिसर में नया विश्वनाथ मंदिर भी है।
