मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व
तिंगलूर तंजावुर ज़िले में है और नवग्रह मंदिरों में चंद्र का स्थान। मुख्य देवता **कैलासनाथर** हैं — शिव — और चंद्र की अपनी अलग सन्निधि है।
यहाँ की सबसे उल्लेखनीय बात प्रतिमा में है। **चंद्र की प्रतिमा काले ग्रेनाइट की है, पर उसे सदा शुद्ध श्वेत वस्त्रों में सजाया जाता है।**
यह विरोधाभास अपने आप में कुछ कहता है। चंद्रमा का अपना प्रकाश नहीं होता — वह सूर्य का प्रकाश लौटाता है। काले पत्थर पर श्वेत वस्त्र वही बात दोहराते हैं: जो दिखता है वह ऊपर से आया है, भीतर से नहीं।
तमिल में "तिंगल्" का अर्थ ही चंद्रमा है, और गाँव का नाम वहीं से आया।
- नवग्रह मंदिरों में चंद्र का स्थान।
- चंद्र की प्रतिमा काले ग्रेनाइट की है, पर सदा शुद्ध श्वेत वस्त्रों में सजी रहती है।
- मुख्य देवता कैलासनाथर — शिव; चंद्र की सन्निधि अलग।
- तमिल में "तिंगल्" का अर्थ चंद्रमा; गाँव का नाम वहीं से।
- नौ नवग्रह मंदिरों में अकेला जो तंजावुर ज़िले में है।
दर्शन का समय
तिंगलूर के लिए कोई आधिकारिक दर्शन-समय या पूजा-तालिका सत्यापित स्रोत पर उपलब्ध नहीं मिली।
दक्षिण भारत के मंदिरों में सामान्यतः प्रातःकाल से मध्याह्न तक और फिर सायंकाल से रात्रि तक दर्शन होते हैं, बीच में विराम रहता है। परंपरा में चंद्र का वार सोमवार है।
कैसे पहुँचें
हवाई मार्ग
तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
तिरुचिरापल्ली से कुंभकोणम् तक सड़क मार्ग से लगभग दो घंटे।
रेल मार्ग
कुंभकोणम् रेलवे स्टेशन
कुंभकोणम् से मंदिर तक टैक्सी व ऑटो उपलब्ध हैं।
सड़क मार्ग
कुंभकोणम्
नवग्रह यात्रा के मार्ग पर।
अंतिम चरण: सड़क मंदिर तक जाती है; कोई चढ़ाई नहीं।
सुगमता: सुगम — कोई चढ़ाई नहीं।
कब जाएँ
सर्वोत्तम समय: नवंबर से फ़रवरी। परंपरा में सोमवार चंद्र का वार माना जाता है।
आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल
- सूर्यनार कोविल — कुंभकोणम् के निकट, तमिलनाडु
