तिरुवरमंगै

Vanamamalai Perumal Temple, Nanguneri

वह दिव्य देशम जहाँ भगवान का प्रतिदिन तेल से अभिषेक होता है — और वह तेल मंदिर के भीतर एक पच्चीस फ़ुट गहरे कुएँ में जाता है।

यह स्थान इनमें भी है:108 दिव्य देशम

दिव्य देशम — एक नज़र में

पेरुमाल
तोताद्रिनाथ पेरुमाल
तीर्थम्
मंदिर के भीतर का 25 फ़ुट गहरा कुआँ (तैल-कूप)

मंगलाशासनम्: पासुरम्नम्माळ्वार

मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व

तिरुवरमंगै — जिसे **वानमामलै** और **नांगुनेरि** भी कहा जाता है — तिरुनेलवेली से लगभग **तीस किलोमीटर** दक्षिण में है। यहाँ विष्णु **तोताद्रिनाथ पेरुमाल** रूप में विराजते हैं, और क्षेत्र **तोताद्रि क्षेत्रम्** कहलाता है।

**यहाँ की सबसे विशिष्ट बात एक प्रतिदिन होने वाली प्रथा है।**

**यहाँ भगवान का नित्य तैल-अभिषेक होता है** — तेल से स्नान — और वह तेल मंदिर के भीतर बने एक **पच्चीस फ़ुट गहरे खुले कुएँ** में डाल दिया जाता है।

यह इस सूची की **तीसरी** ऐसी जीवित प्रथा है, जो कथा से निकलकर आज भी चल रही है:

- **तिरु विण्णगर** में नैवेद्य में **नमक नहीं** पड़ता - **कोविलाडि** में **प्रति रात्रि नेय्याप्पम्** चढ़ता है - और **यहाँ** प्रतिदिन **तैल-अभिषेक** होता है

**कारण कथा में है।** परंपरा कहती है कि राजा **कार्य महाराज** को आदेश हुआ कि नांगुनेरि में भूमि के नीचे दबे भगवान की पूजा करें। राजा ने खुदाई करवाई — और भगवान के **मस्तक से रक्त बहने लगा**।

तब भगवान ने स्वयं कहा कि **तैल-अभिषेक** किया जाए और वह तेल इसी कुएँ में डाला जाए।

यानी यह प्रथा किसी उत्सव की नहीं — एक **घाव के उपचार** की है, जो आज तक हर दिन दोहराया जाता है।

**यह वानमामलै मठ का मूल स्थान भी है** — वही मठ जो कुंभकोणम् के पास **नाथन् कोइल** का प्रबंधन करता है।

⚠️ **नव तिरुपति की सदस्यता पर स्रोत बँटे हैं।** कुछ इसे उन नौ में गिनते हैं; कुछ इसके स्थान पर **इरट्टै तिरुपति** के दोनों मंदिरों को अलग-अलग गिनकर नौ पूरे करते हैं। विस्तार **तिरुक्कुरुगूर** के पृष्ठ पर है।

इस स्थान की कथा का उल्लेख **ब्रह्मांड पुराण, स्कंद पुराण** और **नरसिंह पुराण** में मिलता है। **नम्माळ्वार** ने इसका मंगलाशासनम् किया।

  • नित्य तैल-अभिषेक — और वह तेल मंदिर के भीतर 25 फ़ुट गहरे खुले कुएँ में जाता है।
  • प्रथा का कारण — खुदाई पर भगवान के मस्तक से रक्त बहा, तब उन्होंने स्वयं तैल-अभिषेक कहा।
  • यह सूची की तीसरी जीवित प्रथा — नमक-रहित नैवेद्य व नित्य नेय्याप्पम् के बाद।
  • वानमामलै मठ का मूल स्थान — वही मठ जो नाथन् कोइल का प्रबंधन करता है।
  • कथा का उल्लेख ब्रह्मांड, स्कंद व नरसिंह पुराण में।
  • ⚠️ नव तिरुपति की सदस्यता पर स्रोत बँटे हुए हैं।

पौराणिक कथा

नव तिरुपति की साझा कथा तिरुक्कुरुगूर पर है। यहाँ की अपनी कथा एक खुदाई से शुरू होती है।

जब खुदाई में रक्त निकला

परंपरा कहती है कि राजा **कार्य महाराज** को आदेश मिला कि नांगुनेरि में **भूमि के नीचे दबे** भगवान की पूजा करें।

राजा ने खुदाई करवाई।

और खुदाई में भगवान के **मस्तक से रक्त बहने लगा**।

तब भगवान ने स्वयं कहा कि उनका **तैल-अभिषेक** किया जाए, और वह तेल यहीं बने कुएँ में डाला जाए।

**और वह आज तक हो रहा है।**

प्रतिदिन तैल-अभिषेक होता है, और तेल उस **पच्चीस फ़ुट गहरे खुले कुएँ** में जाता है।

यह ध्यान देने योग्य है कि यह प्रथा किसी उत्सव या विजय की स्मृति नहीं है। यह एक **घाव के उपचार** की है — और वह उपचार हर दिन दोहराया जाता है, जैसे वह अभी भी आवश्यक हो।

तीसरी जीवित प्रथा

इस सूची में यह तीसरी बार है जब कोई कथा **रसोई या पूजा की प्रथा** में बचकर रह गई है — पत्थर या शिलालेख में नहीं।

**तिरु विण्णगर** में मार्कंडेय की चिंता से वह प्रथा निकली कि नैवेद्य में **नमक नहीं** पड़ता — और आज भी नहीं पड़ता।

**कोविलाडि** में उपमन्यु के प्रायश्चित्त से **प्रति रात्रि नेय्याप्पम्** की परंपरा बनी।

और **यहाँ** एक खुदाई में बहे रक्त से **नित्य तैल-अभिषेक**।

तीनों में एक बात समान है। परंपरा कोई स्मारक नहीं बनाती — वह एक **काम** तय कर देती है, जो हर दिन करना पड़ता है।

मंदिर की दीवार पर कुछ लिखा हो तो वह पढ़ा भी जा सकता है और नहीं भी। पर जो हर दिन करना पड़े, वह भूला नहीं जा सकता।

स्रोत: स्थल-परंपरा; विवरण संबद्ध स्थल-स्रोतों से, 2026-08-05.

दर्शन का समय

इस मंदिर के दर्शन-समय किसी आधिकारिक मंदिर/मठ स्रोत पर सत्यापित नहीं हो सके।

सामान्यतः प्रातःकाल से मध्याह्न तक और फिर सायंकाल से रात्रि तक दर्शन होते हैं। ⚠️ तैल-अभिषेक यहाँ की मुख्य प्रथा है; उसका समय जानने के लिए मंदिर में पूछ लेना उचित है।

हमने यहाँ कोई समय इसलिए नहीं छापा कि वह किसी आधिकारिक स्रोत पर उपलब्ध नहीं है। यात्रा-वेबसाइटों पर मिलने वाले समय आपस में मेल नहीं खाते, और एक ग़लत समय ऐसे स्थान पर बहुत महँगा पड़ता है।

कैसे पहुँचें

निकटतम एयरपोर्ट: तूतुक्कुडि / मदुरै हवाई अड्डा
निकटतम रेलवे स्टेशन: नांगुनेरि / तिरुनेलवेली · 30 किमी

हवाई मार्ग

तूतुक्कुडि / मदुरै हवाई अड्डा

तिरुनेलवेली क्षेत्र से जुड़ा हुआ।

रेल मार्ग

नांगुनेरि / तिरुनेलवेली — लगभग 30 किमी

तिरुनेलवेली से लगभग 30 किमी।

सड़क मार्ग

नांगुनेरि

नागरकोइल राजमार्ग पर; तिरुक्कुरुंगुडि से लगभग 10 किमी।

अंतिम चरण: सड़क मंदिर तक जाती है; कोई चढ़ाई नहीं।

सुगमता: सुगम — कोई चढ़ाई नहीं।

कब जाएँ

सर्वोत्तम समय: नवंबर से फ़रवरी, जब मौसम सबसे अनुकूल रहता है।

आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल

  • तिरुक्कुरुंगुडि (लगभग 10 किमी) — एक और दिव्य देशम, लगभग 10 किमी दूर।

यात्रा सुझाव

वस्त्र: शालीन वस्त्र।

ठहरने की व्यवस्था: ठहरने के विकल्प तिरुनेलवेली में हैं।

एक नज़र में

प्रकारमंदिर
मंदिरश्री तोताद्रिनाथ पेरुमाल मंदिर
स्थाननांगुनेरि, तिरुनेलवेली से लगभग 30 किमी दक्षिण
ज़िलातिरुनेलवेली
राज्यतमिलनाडु
प्रबंधनवानमामलै मठ

तिरुवरमंगै — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न