तिरुत्तोलै विल्लिमंगलम्

Irattai Tirupathi (Twin Divya Desam), Thoothukudi

वह जुड़वाँ दिव्य देशम जहाँ दो अलग मंदिर मिलकर एक गिने जाते हैं — और दोनों को राहु व केतु मिले हैं।

यह स्थान इनमें भी है:108 दिव्य देशम

दिव्य देशम — एक नज़र में

पेरुमाल
अरविंद लोचन पेरुमाल (केतु) व देवपिरान् पेरुमाल (राहु)
तीर्थम्
ताम्रपर्णी

मंगलाशासनम्: पासुरम्नम्माळ्वार

मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व

तिरुत्तोलै विल्लिमंगलम् तमिलनाडु के **तूतुक्कुडि** ज़िले में, **ताम्रपर्णी** नदी के तट पर है, और **नव तिरुपति** के समूह में गिना जाता है।

**पर यह एक मंदिर नहीं है।**

इसे **इरट्टै तिरुपति** कहा जाता है — यानी **जुड़वाँ तिरुपति**। यहाँ **दो अलग मंदिर** हैं:

- **अरविंद लोचन पेरुमाल** — जो **केतु** से जुड़े हैं - **देवपिरान् पेरुमाल** — जो **राहु** से जुड़े हैं

और **दोनों मिलकर एक दिव्य देशम** गिने जाते हैं।

**यह 108 की गणना-पद्धति का चौथा उदाहरण है**, और अब तक का सबसे रोचक।

हमने इस यात्रा में तीन और देखे — कांचीपुरम् का **तिरु ऊरगम्**, जहाँ **एक** परिसर **चार** दिव्य देशम है; उसी नगर का **तिरु पवळ वण्णन्**, जहाँ **दो** सन्निधियाँ **एक** हैं; और तंजावुर का **तंजैमामणि कोइल**, जहाँ **तीन** मंदिर **एक** हैं।

यहाँ **दो मंदिर एक दिव्य देशम** हैं — **पर दो ग्रह**।

**और यहीं से नव तिरुपति की "नौ" वाली गुत्थी निकलती है।**

कुछ स्रोत इन दोनों को **अलग-अलग गिनकर** नौ पूरे करते हैं। कुछ इन्हें **एक** मानते हैं और नौवाँ स्थान **तिरुवरमंगै** को देते हैं।

यानी "नौ" किसकी गिनती है — मंदिरों की या दिव्य देशम की — यह प्रश्न ठीक इसी जुड़वाँ मंदिर से उठता है। विस्तार **तिरुक्कुरुगूर** के पृष्ठ पर है।

**राहु और केतु का यहाँ होना ध्यान देने योग्य है।**

ज्योतिष में ये दोनों वस्तुतः **एक ही छाया-ग्रह के दो छोर** हैं — सिर और धड़, जो अलग हो गए। शेष सात ग्रहों की तरह वे स्वतंत्र पिंड नहीं हैं।

और परंपरा ने उन्हें ठीक उसी स्थान पर रखा है जो स्वयं **एक होकर भी दो** है।

⚠️ नव तिरुपति के नौ की साझा कथा **तिरुक्कुरुगूर (आळ्वार तिरुनगरि)** के पृष्ठ पर है।

  • इरट्टै तिरुपति — दो अलग मंदिर, मिलकर एक दिव्य देशम।
  • अरविंद लोचनर् केतु से जुड़े, देवपिरान् राहु से।
  • 108 की गणना-पद्धति का चौथा उदाहरण — 2 मंदिर = 1 दिव्य देशम, पर 2 ग्रह।
  • नव तिरुपति की "नौ" वाली गिनती-गुत्थी यहीं से उठती है।
  • राहु-केतु स्वयं एक ही छाया-ग्रह के दो छोर हैं — और स्थान भी एक होकर दो है।

पौराणिक कथा

नव तिरुपति की साझा कथा तिरुक्कुरुगूर के पृष्ठ पर है। यहाँ केवल इस जुड़वाँ की अपनी बात है।

एक होकर दो

यहाँ **दो मंदिर** हैं — अरविंद लोचन पेरुमाल का और देवपिरान् पेरुमाल का — और वे मिलकर **एक** दिव्य देशम गिने जाते हैं।

इसीलिए इसे **इरट्टै तिरुपति**, यानी जुड़वाँ तिरुपति कहा जाता है।

यह 108 की गिनती में चौथी बार है जब मंदिरों की संख्या और दिव्य देशम की संख्या मेल नहीं खातीं।

**तिरु ऊरगम्** में एक परिसर के भीतर चार दिव्य देशम हैं। **तिरु पवळ वण्णन्** में दो सन्निधियाँ मिलकर एक। **तंजैमामणि कोइल** में तीन मंदिर मिलकर एक।

और यहाँ दो मंदिर मिलकर एक — **पर दो ग्रह**।

यानी दिव्य देशम की गिनती में वे एक हैं, और ग्रहों की गिनती में दो।

यही कारण है कि नव तिरुपति की सदस्य-सूची पर स्रोत बँटे हुए हैं (विस्तार तिरुक्कुरुगूर पर)।

राहु और केतु

इन दोनों मंदिरों को जो ग्रह मिले हैं, वे भी ध्यान देने योग्य हैं।

**अरविंद लोचनर् को केतु, और देवपिरान् को राहु।**

ज्योतिष में राहु और केतु शेष सात ग्रहों जैसे नहीं हैं। वे स्वतंत्र पिंड नहीं, **छाया-ग्रह** हैं — और परंपरा उन्हें एक ही सत्ता के **दो छोर** मानती है: सिर और धड़, जो कट कर अलग हो गए।

यानी वे भी एक हैं, और दो भी।

और परंपरा ने उन्हें ठीक उसी स्थान पर बिठाया है जो स्वयं एक दिव्य देशम है और दो मंदिर।

यह संयोग हो सकता है। पर जो भी हो, आकार दोनों जगह एक ही है।

स्रोत: स्थल-परंपरा; विवरण en.wikipedia.org/wiki/Nava_Tirupati व अन्य स्रोतों से, 2026-08-05.

दर्शन का समय

इन मंदिरों के दर्शन-समय किसी आधिकारिक मंदिर/ट्रस्ट स्रोत पर सत्यापित नहीं हो सके।

⚠️ ध्यान रहे कि यहाँ **दो** मंदिर हैं और दोनों के दर्शन करने होंगे — एक देखकर लौटना अधूरा रहेगा, क्योंकि दिव्य देशम दोनों मिलकर है। दोनों के समय अलग हो सकते हैं।

हमने यहाँ कोई समय इसलिए नहीं छापा कि वह किसी आधिकारिक स्रोत पर उपलब्ध नहीं है। यात्रा-वेबसाइटों पर मिलने वाले समय आपस में मेल नहीं खाते, और एक ग़लत समय ऐसे स्थान पर बहुत महँगा पड़ता है।

कैसे पहुँचें

निकटतम एयरपोर्ट: तूतुक्कुडि हवाई अड्डा
निकटतम रेलवे स्टेशन: तिरुनेलवेली / आळ्वार तिरुनगरि

हवाई मार्ग

तूतुक्कुडि हवाई अड्डा

तिरुनेलवेली क्षेत्र से जुड़ा हुआ।

रेल मार्ग

तिरुनेलवेली / आळ्वार तिरुनगरि

वहाँ से सड़क मार्ग से।

सड़क मार्ग

तोलैविल्लिमंगलम्

तिरुनेलवेली से बस उपलब्ध; नव तिरुपति के मार्ग पर।

अंतिम चरण: ⚠️ दोनों मंदिर पास-पास हैं, पर अलग-अलग हैं — दोनों जाना आवश्यक है।

सुगमता: सुगम — कोई चढ़ाई नहीं।

कब जाएँ

सर्वोत्तम समय: नवंबर से फ़रवरी। नव तिरुपति के लिए एक पूरा दिन रखना उचित है।

आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल

  • नव तिरुपति के अन्य मंदिर — ताम्रपर्णी के तट पर, पास-पास।

यात्रा सुझाव

वस्त्र: शालीन वस्त्र।

ठहरने की व्यवस्था: ठहरने के विकल्प तिरुनेलवेली व तूतुक्कुडि में हैं।

एक नज़र में

प्रकारमंदिर
मंदिरश्री अरविंद लोचन पेरुमाल व श्री देवपिरान् पेरुमाल मंदिर
स्थानतोलैविल्लिमंगलम्, ताम्रपर्णी तट, तिरुनेलवेली के पास
ज़िलातूतुक्कुडि
राज्यतमिलनाडु
प्रबंधनतमिलनाडु हिंदू धार्मिक व धर्मादाय बंदोबस्ती विभाग (HR&CE)

तिरुत्तोलै विल्लिमंगलम् — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न