मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व
थेऊर पुणे ज़िले में है, नगर से लगभग पच्चीस किलोमीटर दूर, और अष्टविनायक यात्रा का पाँचवाँ पड़ाव।
यहाँ गणेश **चिंतामणि** कहलाते हैं — चिंता हरने वाले। नाम एक रत्न से आया है, जिसकी कथा नीचे है।
प्रतिमा की सूँड़ बाईं ओर है और उसकी **आँखों में माणिक और हीरे जड़े हैं।**
मंदिर का पेशवा परिवार से गहरा संबंध रहा। भीतरी लकड़ी का सभागृह पेशवाओं ने बनवाया, और बाहरी सभागृह पेशवा माधवराव ने। परंपरा कहती है कि माधवराव इस मंदिर से विशेष रूप से जुड़े थे और उन्होंने अपने जीवन के अंतिम दिन थेऊर में ही बिताए।
- गणेश यहाँ चिंतामणि हैं — चिंता हरने वाले।
- प्रतिमा की आँखों में माणिक और हीरे जड़े हैं; सूँड़ बाईं ओर।
- पेशवा परिवार से गहरा संबंध; पेशवा माधवराव ने अपने अंतिम दिन यहीं बिताए।
- मुख्य मंदिर धरणीधर महाराज देव ने बनवाया — पेशवा माधवराव के बाहरी सभागृह से लगभग सौ वर्ष पहले।
पौराणिक कथा
चिंतामणि की कथा एक रत्न की है — और उस रत्न को अंत में किसी ने अपने पास नहीं रखा।
गुण का लोभ
कथा कहती है कि कपिल ऋषि के पास चिंतामणि नामक एक रत्न था, जो माँगी हुई हर वस्तु दे देता था।
राजा गुण ने वह रत्न देखा और लोभ में आकर उसे छीन लिया।
कपिल ऋषि ने गणेश की शरण ली। गणेश ने गुण से युद्ध कर वह रत्न वापस लिया और कपिल को लौटा दिया।
जो लौटाया गया, वह रखा नहीं गया
कथा का असली मोड़ यहाँ है। कपिल ऋषि ने वह रत्न अपने पास नहीं रखा। उन्होंने उसे गणेश के गले में पहना दिया।
जिस वस्तु के लिए युद्ध हुआ, उसे पाकर उन्होंने दे दिया।
इसी से गणेश यहाँ चिंतामणि कहलाए। और इसी में कथा का अर्थ है — जिस रत्न ने माँगी हर वस्तु दी, वह चिंता मिटा नहीं सका; उसने तो चिंता बढ़ाई, क्योंकि उसी के कारण छीना-झपटी हुई।
चिंता तब मिटी जब उसे छोड़ दिया गया। स्थान का नाम उस छोड़ने पर पड़ा, पाने पर नहीं।
स्रोत: स्थल-परंपरा (मुद्गल पुराण की परंपरा से); विवरण en.wikipedia.org/wiki/Ashtavinayaka से सत्यापित
इतिहास
थेऊर का मंदिर दो चरणों में बना, और दोनों के बीच लगभग सौ वर्ष का अंतर है।
धरणीधर महाराज देव और पेशवा
मुख्य मंदिर धरणीधर महाराज देव ने बनवाया।
लगभग सौ वर्ष बाद पेशवा माधवराव ने बाहरी सभागृह जोड़ा। भीतरी लकड़ी का सभागृह भी पेशवाओं की देन है।
पेशवा माधवराव का इस मंदिर से विशेष लगाव रहा और परंपरा कहती है कि उन्होंने अपने अंतिम दिन थेऊर में ही बिताए। मराठा इतिहास और इस मंदिर का यह जुड़ाव अष्टविनायक में सबसे गहरा है।
स्रोत: en.wikipedia.org/wiki/Ashtavinayaka — 2026-08-04 को देखा गया
दर्शन का समय
थेऊर मंदिर के लिए कोई आधिकारिक दर्शन-समय या आरती-तालिका प्रकाशित नहीं होती।
मंदिर सामान्यतः प्रातःकाल से सायंकाल तक दर्शन हेतु खुला रहता है।
कैसे पहुँचें
हवाई मार्ग
पुणे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
पुणे से थेऊर लगभग 25 किमी; सड़क मार्ग से एक घंटे से कम।
रेल मार्ग
पुणे जंक्शन
पुणे से सड़क मार्ग से आगे।
सड़क मार्ग
थेऊर — लगभग 25 किमी
पुणे-सोलापुर मार्ग पर; अष्टविनायक में पुणे के सबसे निकट मंदिरों में।
अंतिम चरण: सड़क मंदिर तक जाती है; कोई चढ़ाई नहीं।
सुगमता: सुगम — कोई चढ़ाई नहीं।
कब जाएँ
सर्वोत्तम समय: अक्टूबर से मार्च। गणेश चतुर्थी व माघी गणेश जयंती पर विशेष उत्सव होता है।
प्रमुख त्योहार
- गणेश चतुर्थी
- माघी गणेश जयंती
आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल
- महागणपति — पुणे-अहमदनगर मार्ग पर, महाराष्ट्र
- मुळा-मुठा नदी संगम — मंदिर के पास; थेऊर तीन नदियों के संगम के निकट बसा है।
