तिरु सिरुपुलियूर

Sthalasayana Perumal Temple, Tirusirupuliyur

वह दिव्य देशम जहाँ भगवान शिशु के आकार में लेटे हैं — और जिसका नाम एक छोटे व्याघ्र पर पड़ा।

यह स्थान इनमें भी है:108 दिव्य देशम

दिव्य देशम — एक नज़र में

पेरुमाल
स्थल शयन पेरुमाल — बाल शयनम्, दक्षिणाभिमुख
थायार
तिरुमामगळ् नाच्चियार
तीर्थम्
मंदिर का पुष्करिणी
विमानम्
नंद वर्धन विमान

मंगलाशासनम्: पासुरम्तिरुमंगै आळ्वार (पेरिय तिरुमोऴि)

मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व

तिरु सिरुपुलियूर कोळ्ळुमंगुडि के पास है — मयिलाडुतुरै से लगभग **17 किलोमीटर** और कारैक्काल से **10 किलोमीटर**। यहाँ विष्णु **स्थल शयन पेरुमाल** रूप में विराजते हैं और देवी **तिरुमामगळ् नाच्चियार** उनके साथ हैं। मंदिर को **अरुळ्माकडल् पेरुमाल मंदिर** भी कहा जाता है।

**मूर्ति यहाँ की सबसे विशिष्ट बात है।**

भगवान **शयन कोलम्** में हैं — लेटे हुए, **दक्षिण** की ओर मुख किए। और यह शयन-मूर्ति छोटी है — इसे **बाल शयनम्** कहा जाता है, यानी *शिशु की शय्या*।

स्रोत कहते हैं कि दक्षिणाभिमुख शयन-मुद्रा वाले दिव्य देशम **केवल दो** हैं, और यह उनमें से एक है।

**नाम की व्युत्पत्ति भी उतनी ही सटीक है।** तमिल में **"सिरु" यानी छोटा**, **"पुलि" यानी व्याघ्र**, और **"ऊर" यानी स्थान**।

दोनों अर्थ एक साथ सच हैं। मूर्ति छोटी है — और परंपरा कहती है कि यहाँ ऋषि **व्याघ्रपाद** ने, **पतंजलि** के साथ, मोक्ष की कामना से तप किया था। "व्याघ्रपाद" का अर्थ ही है *बाघ के पैरों वाला*।

⚠️ **एक भ्रम टाल लें:** महाबलिपुरम् के **तिरु कडल्मलै** के भगवान भी **स्थल शयन पेरुमाल** कहलाते हैं। दोनों अलग दिव्य देशम हैं — और भेद केवल स्थान का नहीं। वहाँ भगवान **शेषनाग के बिना, सीधे भूमि पर** लेटे हैं, और वही उस नाम का शाब्दिक अर्थ है। यहाँ विशेषता मूर्ति का **छोटा आकार** और **दक्षिणाभिमुख** होना है।

गर्भगृह के ऊपर **नंद वर्धन विमान** है, मंदिर में **चार तल का राजगोपुरम्**, और पास ही **आदिशेष** की अलग सन्निधि।

तिरुमंगै आळ्वार ने **पेरिय तिरुमोऴि** में इसका मंगलाशासनम् किया।

  • बाल शयनम् — भगवान शिशु के आकार की छोटी शयन-मूर्ति में।
  • दक्षिणाभिमुख शयन-मुद्रा; स्रोतों के अनुसार ऐसे दिव्य देशम केवल दो हैं।
  • नाम की व्युत्पत्ति — सिरु (छोटा) + पुलि (व्याघ्र) + ऊर (स्थान); दोनों अर्थ सच।
  • परंपरा: व्याघ्रपाद व पतंजलि ने यहाँ मोक्ष हेतु तप किया।
  • नंद वर्धन विमान; चार तल का राजगोपुरम्; आदिशेष की अलग सन्निधि।

पौराणिक कथा

यहाँ का नाम दो अर्थ एक साथ रखता है, और दोनों सच हैं।

छोटा व्याघ्र, छोटा भगवान

तमिल में **"सिरु" यानी छोटा**, **"पुलि" यानी व्याघ्र**, **"ऊर" यानी स्थान**।

परंपरा कहती है कि यहाँ ऋषि **व्याघ्रपाद** ने, **पतंजलि** के साथ, मोक्ष की कामना से तप किया। "व्याघ्रपाद" का अर्थ ही है *बाघ के पैरों वाला* — और उनकी कथा शैव परंपरा में भी बहुत प्रचलित है, विशेषकर चिदंबरम् से जुड़ी हुई।

पर नाम का दूसरा अर्थ मूर्ति में है।

भगवान यहाँ **छोटे** हैं — शिशु के आकार की शयन-मूर्ति, जिसे **बाल शयनम्** कहा जाता है।

यानी नाम एक साथ ऋषि की भी बात कह रहा है और भगवान की भी।

दक्षिण की ओर मुख

भगवान यहाँ **दक्षिण** की ओर मुख किए लेटे हैं।

दक्षिण दिशा भारतीय परंपरा में सहज नहीं मानी जाती — वह यम की दिशा है, और मंदिरों में मूर्तियाँ प्रायः पूर्व या पश्चिम की ओर मुख किए होती हैं।

स्रोत कहते हैं कि दक्षिणाभिमुख शयन-मुद्रा वाले दिव्य देशम **केवल दो** हैं, और यह उनमें से एक है।

जिस दिशा को लोग टालते हैं, उसी ओर मुख किए भगवान लेटे हैं — और वह भी शिशु के रूप में।

दो बातें जो अलग-अलग असहज लगतीं, यहाँ एक साथ रख दी गई हैं।

स्रोत: स्थल-परंपरा; विवरण en.wikipedia.org/wiki/Sthalasayana_Perumal_Temple,_Tirusirupuliyur से, 2026-08-05.

दर्शन का समय

इस मंदिर के दर्शन-समय किसी आधिकारिक मंदिर/ट्रस्ट स्रोत पर सत्यापित नहीं हो सके।

सामान्यतः प्रातःकाल से मध्याह्न तक और फिर सायंकाल से रात्रि तक दर्शन होते हैं। मंदिर मयिलाडुतुरै व कारैक्काल दोनों से पहुँच में है।

हमने यहाँ कोई समय इसलिए नहीं छापा कि वह किसी आधिकारिक स्रोत पर उपलब्ध नहीं है। यात्रा-वेबसाइटों पर मिलने वाले समय आपस में मेल नहीं खाते, और एक ग़लत समय ऐसे स्थान पर बहुत महँगा पड़ता है।

कैसे पहुँचें

निकटतम एयरपोर्ट: तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
निकटतम रेलवे स्टेशन: मयिलाडुतुरै रेलवे स्टेशन · 17 किमी

हवाई मार्ग

तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा

वहाँ से सड़क मार्ग से लगभग तीन घंटे।

रेल मार्ग

मयिलाडुतुरै रेलवे स्टेशन — लगभग 17 किमी

वहाँ से लगभग 17 किमी।

सड़क मार्ग

कोळ्ळुमंगुडि

कारैक्काल से लगभग 10 किमी; स्थानीय बस उपलब्ध।

अंतिम चरण: सड़क मंदिर तक जाती है; कोई चढ़ाई नहीं।

सुगमता: सुगम — कोई चढ़ाई नहीं।

कब जाएँ

सर्वोत्तम समय: नवंबर से फ़रवरी। वैकासि (मई–जून) में ब्रह्मोत्सवम् होता है।

प्रमुख त्योहार

  • ब्रह्मोत्सवम् (वैकासि, मई–जून)

आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल

  • कारैक्काल (लगभग 10 किमी)
  • मयिलाडुतुरै के दिव्य देशम (लगभग 17 किमी)

यात्रा सुझाव

वस्त्र: शालीन वस्त्र।

ठहरने की व्यवस्था: ठहरने के विकल्प मयिलाडुतुरै व कारैक्काल में हैं।

एक नज़र में

प्रकारमंदिर
मंदिरश्री स्थल शयन पेरुमाल मंदिर
स्थानकोळ्ळुमंगुडि के निकट, मयिलाडुतुरै से लगभग 17 किमी
ज़िलामयिलाडुतुरै
राज्यतमिलनाडु
प्रबंधनतमिलनाडु हिंदू धार्मिक व धर्मादाय बंदोबस्ती विभाग (HR&CE)

तिरु सिरुपुलियूर — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न