मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व
तिरुवेंकाडु मयिलाडुतुरै ज़िले में है और नवग्रह मंदिरों में बुध का स्थान। मुख्य देवता **श्वेतारण्येश्वर** हैं — शिव — और बुध की अपनी अलग सन्निधि है।
नाम अपने आप में एक चित्र बनाता है। संस्कृत में "श्वेत अरण्य" का अर्थ है श्वेत वन, और तमिल नाम "वेण्काडु" भी वही कहता है — वेण् यानी सफ़ेद, काडु यानी वन। परंपरा कहती है कि यह भूमि कभी ऐसे ही वन से घिरी थी।
ज्योतिष में बुध को बुद्धि, वाणी और विद्या से जोड़ा जाता है, और उन्हीं से जुड़ी प्रार्थनाओं के लिए भक्त यहाँ आते हैं।
- नवग्रह मंदिरों में बुध का स्थान।
- मुख्य देवता श्वेतारण्येश्वर — शिव; नाम का अर्थ "श्वेत वन का ईश्वर"।
- तमिल नाम "वेण्काडु" भी वही अर्थ कहता है — वेण् यानी सफ़ेद, काडु यानी वन।
दर्शन का समय
तिरुवेंकाडु के लिए कोई आधिकारिक दर्शन-समय या पूजा-तालिका सत्यापित स्रोत पर उपलब्ध नहीं मिली।
दक्षिण भारत के मंदिरों में सामान्यतः प्रातःकाल से मध्याह्न तक और फिर सायंकाल से रात्रि तक दर्शन होते हैं। परंपरा में बुध का वार बुधवार है।
कैसे पहुँचें
हवाई मार्ग
तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
वहाँ से सड़क मार्ग से लगभग तीन घंटे।
रेल मार्ग
मयिलाडुतुरै जंक्शन
मयिलाडुतुरै से मंदिर तक टैक्सी व बस उपलब्ध।
सड़क मार्ग
मयिलाडुतुरै
नवग्रह यात्रा के मार्ग पर।
अंतिम चरण: सड़क मंदिर तक जाती है; कोई चढ़ाई नहीं।
सुगमता: सुगम — कोई चढ़ाई नहीं।
कब जाएँ
सर्वोत्तम समय: नवंबर से फ़रवरी। परंपरा में बुधवार बुध का वार माना जाता है।
आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल
- वैतीश्वरन् कोविल — मयिलाडुतुरै के निकट, तमिलनाडु
