मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व
कीळपेरुम्पल्लम् तिरुवारूर ज़िले में है और नवग्रह मंदिरों में **केतु** का स्थान। मुख्य देवता **नागनाथस्वामी** हैं — शिव — और केतु की अपनी अलग सन्निधि है।
ग्रह-क्रम में केतु अंतिम हैं, इसलिए नवग्रह यात्रा प्रायः यहीं समाप्त होती है।
ज्योतिष में राहु और केतु एक ही कथा के दो भाग हैं — राहु सर्प का शीश, केतु धड़। इसीलिए दोनों के मंदिरों के नाम भी "नाग" से बने हैं। ⚠️ **इसी कारण एक भ्रम भी होता है**: राहु का मंदिर तिरुनागेश्वरम् में है और उसका नाम भी नागनाथस्वामी है। दोनों अलग मंदिर हैं, अलग गाँवों में।
केतु को परंपरा में मोक्ष, वैराग्य और आध्यात्मिक उन्नति से जोड़ा जाता है — जो शेष आठ ग्रहों से भिन्न भाव है, क्योंकि वे प्रायः सांसारिक फलों से जुड़े हैं।
- नवग्रह मंदिरों में केतु का स्थान; ग्रह-क्रम में अंतिम, इसलिए यात्रा प्रायः यहीं समाप्त होती है।
- मुख्य देवता नागनाथस्वामी — शिव; केतु की सन्निधि अलग।
- ⚠️ राहु के मंदिर (तिरुनागेश्वरम्) का नाम भी नागनाथस्वामी है — दोनों अलग मंदिर हैं।
- केतु परंपरा में मोक्ष व वैराग्य से जुड़े हैं, जबकि शेष ग्रह प्रायः सांसारिक फलों से।
दर्शन का समय
कीळपेरुम्पल्लम् के लिए कोई आधिकारिक दर्शन-समय या पूजा-तालिका सत्यापित स्रोत पर उपलब्ध नहीं मिली।
दक्षिण भारत के मंदिरों में सामान्यतः प्रातःकाल से मध्याह्न तक और फिर सायंकाल से रात्रि तक दर्शन होते हैं, बीच में विराम रहता है।
कैसे पहुँचें
हवाई मार्ग
तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
वहाँ से सड़क मार्ग से लगभग तीन घंटे।
रेल मार्ग
मयिलाडुतुरै जंक्शन
मयिलाडुतुरै से मंदिर तक टैक्सी व बस उपलब्ध।
सड़क मार्ग
पूम्पुहार के निकट
नवग्रह यात्रा के मार्ग पर; तिरुवेंकाडु से पास।
अंतिम चरण: सड़क मंदिर तक जाती है; कोई चढ़ाई नहीं।
सुगमता: सुगम — कोई चढ़ाई नहीं।
कब जाएँ
सर्वोत्तम समय: नवंबर से फ़रवरी, जब तमिलनाडु में मौसम सबसे अनुकूल रहता है।
आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल
- तिरुनागेश्वरम् — कुंभकोणम् के निकट, तमिलनाडु
- तिरुवेंकाडु — मयिलाडुतुरै के निकट, तमिलनाडु
- पूम्पुहार — प्राचीन चोल बंदरगाह-नगर; तमिल साहित्य में इसका विशेष स्थान है।
