तिरुपुलियूर

Puliyur Mahavishnu Temple, Chengannur

पंच पांडव मंदिरों में भीम का — पाँच भाइयों की उस यात्रा का दूसरा पड़ाव।

यह स्थान इनमें भी है:108 दिव्य देशम

दिव्य देशम — एक नज़र में

पेरुमाल
मायपिरान् पेरुमाल
तीर्थम्
पंपा

मंगलाशासनम्: पासुरम्नम्माळ्वार

मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व

तिरुपुलियूर केरल के **चेंगन्नूर** क्षेत्र में, **पंपा** नदी के तट पर है। यहाँ विष्णु **मायपिरान् पेरुमाल** रूप में विराजते हैं।

**यह पंच पांडव मंदिरों में से एक है, और परंपरा इसे भीम का मंदिर मानती है।**

दर्शन के परंपरागत क्रम में यह **दूसरा** है — युधिष्ठिर के **त्रिच्चिट्टाट्ट** के बाद।

(पाँचों की साझा कथा — कि हर पांडव ने पंपा के तट पर एक मंदिर प्रतिष्ठित किया — **तिरुच्चेंकुंड्रूर** के पृष्ठ पर है।)

⚠️ **एक नाम-भ्रम टाल लें।** तमिल का "पुलि" यानी व्याघ्र कई नामों में आता है, और इस सूची में तीन मिलते-जुलते नाम हैं:

- **यह** — तिरुपुलियूर, केरल में - **तिरु सिरुपुलियूर** — मयिलाडुतुरै में, जहाँ शिशु-आकार की दक्षिणाभिमुख शयन-मूर्ति है - **तिरुप्पुलिंगुडि** — तूतुक्कुडि में, नव तिरुपति का बुध-मंदिर

तीनों अलग दिव्य देशम हैं।

  • पंच पांडव मंदिरों में भीम का मंदिर।
  • दर्शन के परंपरागत क्रम में दूसरा — युधिष्ठिर के त्रिच्चिट्टाट्ट के बाद।
  • पंपा नदी के तट पर, चेंगन्नूर क्षेत्र में।
  • ⚠️ तिरु सिरुपुलियूर व तिरुप्पुलिंगुडि से भिन्न — तीनों नाम मिलते-जुलते हैं।

पौराणिक कथा

पंच पांडव मंदिरों की साझा कथा तिरुच्चेंकुंड्रूर के पृष्ठ पर है। यहाँ केवल इस मंदिर का स्थान है।

दूसरा पड़ाव

पंच पांडव मंदिरों में यह **भीम** का है, और दर्शन-क्रम में **दूसरा**।

यह क्रम संयोग नहीं है। भक्त पाँचों मंदिरों में **जन्म-क्रम** से जाता है — युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल, सहदेव।

यानी यात्रा वस्तुतः उस परिवार के क्रम से चलती है, भूगोल के क्रम से नहीं।

भीम पाँचों में सबसे बलशाली माने जाते हैं, और महाभारत में उनकी पहचान बल से ही बनती है।

पर यहाँ जो उन्होंने किया, वह बल का काम नहीं था। उन्होंने एक मूर्ति प्रतिष्ठित की — वही काम, जो उनके चारों भाइयों ने किया।

पाँच बहुत अलग स्वभाव के भाई थे। इस यात्रा में वे पाँच एक-से हो जाते हैं।

स्रोत: स्थल-परंपरा; साझा कथा हेतु देखें तिरुच्चेंकुंड्रूर। विवरण संबद्ध स्रोतों से, 2026-08-05.

दर्शन का समय

इस मंदिर के दर्शन-समय किसी आधिकारिक देवस्वम् स्रोत पर सत्यापित नहीं हो सके।

⚠️ केरल के मंदिरों के वस्त्र-नियम कड़े हैं — पुरुषों को प्रायः ऊपरी वस्त्र उतारकर मुंडु/धोती में प्रवेश करना होता है। मध्याह्न का अवकाश लंबा रहता है।

हमने यहाँ कोई समय इसलिए नहीं छापा कि वह किसी आधिकारिक स्रोत पर उपलब्ध नहीं है। यात्रा-वेबसाइटों पर मिलने वाले समय आपस में मेल नहीं खाते, और एक ग़लत समय ऐसे स्थान पर बहुत महँगा पड़ता है।

कैसे पहुँचें

निकटतम एयरपोर्ट: कोच्चि / तिरुवनंतपुरम् अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
निकटतम रेलवे स्टेशन: चेंगन्नूर रेलवे स्टेशन

हवाई मार्ग

कोच्चि / तिरुवनंतपुरम् अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा

रेल मार्ग

चेंगन्नूर रेलवे स्टेशन

मंदिर चेंगन्नूर क्षेत्र में ही है।

सड़क मार्ग

चेंगन्नूर

पंच पांडव मंदिरों के मार्ग पर।

अंतिम चरण: सड़क मंदिर तक जाती है; कोई चढ़ाई नहीं।

सुगमता: सुगम — कोई चढ़ाई नहीं।

कब जाएँ

सर्वोत्तम समय: अक्टूबर से फ़रवरी। पंच पांडव मंदिरों के लिए एक दिन रखना उचित है।

आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल

  • पंच पांडव मंदिरों के शेष चार

यात्रा सुझाव

वस्त्र: ⚠️ केरल-शैली के नियम लागू — पुरुषों को प्रायः मुंडु/धोती में प्रवेश करना होता है।

ठहरने की व्यवस्था: ठहरने के विकल्प चेंगन्नूर व तिरुवल्ला में हैं।

एक नज़र में

प्रकारमंदिर
मंदिरश्री मायपिरान् पेरुमाल मंदिर
स्थानपुलियूर, चेंगन्नूर, पंपा तट
ज़िलाअलप्पुऴा
राज्यकेरल
प्रबंधनट्रावणकोर देवस्वम् बोर्ड

तिरुपुलियूर — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न