तिरुक्कण्णपुरम्

Sowriraja Perumal Temple, Thirukkannapuram

वह दिव्य देशम जहाँ भगवान ने एक अर्चक की कही हुई बात सच रखने के लिए अपने केश उगा लिए।

यह स्थान इनमें भी है:108 दिव्य देशम

दिव्य देशम — एक नज़र में

पेरुमाल
नीलमेघ पेरुमाल (सौरिराज पेरुमाल)
थायार
तिरुक्कण्णपुर नायगी

मंगलाशासनम्: पासुरम्पेरियाळ्वार, आंडाळ, कुलशेखर आळ्वार, नम्माळ्वार व तिरुमंगै आळ्वार

मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व

तिरुक्कण्णपुरम् नागपट्टिनम् के बाहरी क्षेत्र में एक गाँव है। यहाँ विष्णु **नीलमेघ पेरुमाल** रूप में विराजते हैं — जिन्हें **सौरिराज पेरुमाल** भी कहा जाता है — और देवी **तिरुक्कण्णपुर नायगी** उनके साथ हैं।

**पाँच आळ्वारों ने इसका मंगलाशासनम् किया** — पेरियाळ्वार, **आंडाळ**, कुलशेखर आळ्वार, नम्माळ्वार और तिरुमंगै आळ्वार।

इनमें **आंडाळ** का नाम विशेष है। उन्होंने बहुत कम मंदिरों का गान किया, इसलिए किसी सूची में उनका होना अपने आप में उल्लेखनीय है।

नम्माळ्वार ने अपने **तिरुवाय्मोऴि** में कहा कि तिरुक्कण्णपुरम् के भगवान का **नाम भर ले लेना** सब दुःख हर लेने के लिए पर्याप्त है।

**पर इस मंदिर का सबसे प्रिय प्रसंग "सौरिराजन्" नाम का है।**

परंपरा कहती है कि यहाँ के एक श्रद्धालु अर्चक **रंगभट्टर** ने भगवान के बारे में कोई बात कही थी — और उस बात को सच रखने के लिए भगवान ने **गर्भगृह में अपने केश उगा लिए**।

उसी से वे **सौरिराजन्** कहलाए।

⚠️ **एक भ्रम टाल लें:** "नीलमेघ पेरुमाल" तंजावुर के **तंजैमामणि कोइल** के देवता भी हैं। दोनों अलग दिव्य देशम हैं।

यह **पंच कृष्ण क्षेत्रों** में से भी एक है, और परंपरा इसे **विभीषण** से भी जोड़ती है।

  • पाँच आळ्वारों का मंगलाशासनम् — पेरियाळ्वार, आंडाळ, कुलशेखर, नम्माळ्वार व तिरुमंगै।
  • आंडाळ ने बहुत कम मंदिरों का गान किया; उनका यहाँ होना विशेष है।
  • सौरिराजन् नाम — भगवान ने अर्चक का वचन सच रखने के लिए केश उगा लिए।
  • नम्माळ्वार: यहाँ के भगवान का नाम भर लेना सब दुःख हरने को पर्याप्त है।
  • पंच कृष्ण क्षेत्रों में से एक; परंपरा में विभीषण से जुड़ाव।

पौराणिक कथा

यहाँ की मुख्य कथा किसी असुर-वध की नहीं है। यह इस बारे में है कि एक आदमी की कही हुई बात झूठी न पड़े।

केश

परंपरा कहती है कि यहाँ के एक श्रद्धालु अर्चक **रंगभट्टर** ने भगवान के विषय में कोई बात कह दी थी।

उस बात को सच रखने के लिए भगवान ने **गर्भगृह में अपने केश उगा लिए**।

उसी से उनका नाम **सौरिराजन्** पड़ा।

यह प्रसंग छोटा लगता है, पर ध्यान दीजिए कि इसमें कौन किसके लिए झुका।

मंदिरों की अधिकांश कथाओं में भक्त भगवान के अनुरूप बदलता है — तप करता है, प्रतीक्षा करता है, शरण जाता है।

यहाँ **भगवान** अपने भक्त के **शब्द** के अनुरूप बदल गए।

भक्ति-परंपरा में इसे बहुत ऊँचा माना गया है — कि भक्त की बात रखने के लिए भगवान अपना रूप बदल लें।

आंडाळ यहाँ आईं

इस मंदिर का मंगलाशासनम् **पाँच आळ्वारों** ने किया — पेरियाळ्वार, आंडाळ, कुलशेखर आळ्वार, नम्माळ्वार और तिरुमंगै आळ्वार।

पाँच अपने आप में बड़ी संख्या है। पर इनमें **आंडाळ** का नाम अलग से ध्यान खींचता है।

आंडाळ बारह आळ्वारों में **अकेली स्त्री** हैं, और उन्होंने बहुत कम मंदिरों का गान किया। इसलिए जिस सूची में उनका नाम आ जाए, वह सूची विशेष हो जाती है।

और नम्माळ्वार ने अपने **तिरुवाय्मोऴि** में इस स्थान के बारे में जो कहा, वह इस मंदिर की सबसे बड़ी स्तुति है — कि यहाँ के भगवान का **नाम भर ले लेना** सब दुःख हर लेने के लिए पर्याप्त है।

मंदिर तक पहुँचना भी नहीं। दर्शन भी नहीं। केवल नाम।

स्रोत: स्थल-परंपरा; विवरण en.wikipedia.org/wiki/Neelamegha_Perumal_temple व अन्य स्थल-स्रोतों से, 2026-08-05.

दर्शन का समय

इस मंदिर के दर्शन-समय किसी आधिकारिक मंदिर/ट्रस्ट स्रोत पर सत्यापित नहीं हो सके।

सामान्यतः प्रातःकाल से मध्याह्न तक और फिर सायंकाल से रात्रि तक दर्शन होते हैं। मंदिर नागपट्टिनम् से पहुँच में है।

हमने यहाँ कोई समय इसलिए नहीं छापा कि वह किसी आधिकारिक स्रोत पर उपलब्ध नहीं है। यात्रा-वेबसाइटों पर मिलने वाले समय आपस में मेल नहीं खाते, और एक ग़लत समय ऐसे स्थान पर बहुत महँगा पड़ता है।

कैसे पहुँचें

निकटतम एयरपोर्ट: तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
निकटतम रेलवे स्टेशन: नागपट्टिनम् रेलवे स्टेशन

हवाई मार्ग

तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा

वहाँ से सड़क मार्ग से लगभग साढ़े तीन घंटे।

रेल मार्ग

नागपट्टिनम् रेलवे स्टेशन

वहाँ से सड़क मार्ग से पहुँचा जा सकता है।

सड़क मार्ग

नागपट्टिनम्

स्थानीय बस व ऑटो उपलब्ध।

अंतिम चरण: सड़क मंदिर तक जाती है; कोई चढ़ाई नहीं।

सुगमता: सुगम — कोई चढ़ाई नहीं।

कब जाएँ

सर्वोत्तम समय: नवंबर से फ़रवरी, जब मौसम सबसे अनुकूल रहता है।

आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल

  • नागपट्टिनम् क्षेत्र के दिव्य देशम

यात्रा सुझाव

वस्त्र: शालीन वस्त्र।

ठहरने की व्यवस्था: ठहरने के विकल्प नागपट्टिनम् व मयिलाडुतुरै में हैं।

एक नज़र में

प्रकारमंदिर
मंदिरश्री सौरिराज पेरुमाल मंदिर
स्थानतिरुक्कण्णपुरम्, नागपट्टिनम् के बाहरी क्षेत्र में
ज़िलानागपट्टिनम्
राज्यतमिलनाडु
प्रबंधनतमिलनाडु हिंदू धार्मिक व धर्मादाय बंदोबस्ती विभाग (HR&CE)

तिरुक्कण्णपुरम् — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न