दिव्य देशम — एक नज़र में
मंगलाशासनम्: पासुरम् — तिरुमऴिसै आळ्वार व तिरुमंगै आळ्वार
मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व
तिरुएव्वुळूर — आज **तिरुवळ्ळूर** — चेन्नै के पास है और 108 में **उनसठवाँ** दिव्य देशम गिना जाता है। यह **तोंडैमंडलम्** के 22 दिव्य देशम में भी है।
यहाँ विष्णु **वीरराघव** रूप में विराजते हैं — और उन्हें विशेष रूप से **वैद्य वीरराघव** कहा जाता है, यानी *वैद्य*।
**यह नाम केवल उपाधि नहीं है।** यह उन थोड़े दिव्य देशम में है जहाँ श्रद्धालु विशेष रूप से **रोग-निवृत्ति** की कामना लेकर आते हैं।
मंदिर का तीर्थ भी वही कहता है। उसका नाम है **हृत्ताप नाशिनी** — *हृदय का ताप मिटाने वाला*।
ध्यान दीजिए कि नाम शरीर के रोग का नहीं कहता। वह **हृदय के ताप** का कहता है — वह जलन जो भीतर रहती है।
**कथा एक ऋषि की है।**
परंपरा कहती है कि भ्रमण करते हुए ऋषि **सालिहोत्र** यहाँ पहुँचे, इसी तीर्थ में स्नान किया, और उसके तट पर **एक वर्ष** तक बिना अन्न-जल के तप करने का निश्चय किया।
वर्ष पूरा हुआ। और ठीक उसी क्षण विष्णु एक **वृद्ध ब्राह्मण** के वेश में आए, और भोजन तथा आश्रय माँगा।
जिस ऋषि ने पूरे वर्ष कुछ नहीं खाया था, उसने अपना **सारा भोजन** उस ब्राह्मण को दे दिया, और सोने के लिए अपनी कुटिया भी।
मूर्ति में यह कथा आज भी दिखती है — भगवान का एक हाथ **नीचे की ओर**, हथेली **सालिहोत्र के सिर पर** रखी हुई, आशीर्वाद देते हुए।
तिरुमऴिसै आळ्वार और तिरुमंगै आळ्वार — दोनों ने इसका मंगलाशासनम् किया।
- भगवान वैद्य वीरराघव कहलाते हैं; श्रद्धालु विशेष रूप से रोग-निवृत्ति की कामना से आते हैं।
- तीर्थ का नाम हृत्ताप नाशिनी — हृदय का ताप मिटाने वाला।
- सालिहोत्र ऋषि ने यहाँ एक वर्ष बिना अन्न-जल के तप किया।
- मूर्ति में भगवान की हथेली सालिहोत्र के सिर पर रखी दिखती है।
- 108 में उनसठवाँ; तोंडैमंडलम् के 22 दिव्य देशम में से एक।
- प्रबंधन श्री अहोबिल मठ के पास — HR&CE के नहीं।
पौराणिक कथा
यह कथा एक ऐसे व्रत की है जो पूरा होते ही परखा गया।
एक वर्ष का उपवास
परंपरा कहती है कि भ्रमण करते हुए ऋषि **सालिहोत्र** यहाँ पहुँचे।
उन्होंने इस तीर्थ में स्नान किया, और उसी तट पर निश्चय किया कि **एक वर्ष** तक बिना अन्न और बिना जल के, मौन रहकर तप करेंगे।
वर्ष बीता। व्रत पूरा हुआ।
और ठीक उसी क्षण एक **वृद्ध ब्राह्मण** वहाँ आ पहुँचा, और उसने **भोजन** माँगा, तथा रात बिताने के लिए **आश्रय**।
जो अपने पहले निवाले से पहले दे दिया गया
सोचिए वह क्षण।
एक वर्ष का उपवास अभी-अभी टूटने वाला था। भोजन सामने था।
और सालिहोत्र ने वह **सारा भोजन** उस अपरिचित वृद्ध को दे दिया — और सोने के लिए अपनी कुटिया भी।
वह वृद्ध विष्णु थे।
यह कथा उपवास की नहीं है। यह उस एक क्षण की है जो उपवास के **तुरंत बाद** आया — जब सबसे बड़ी भूख थी, और तभी माँगने वाला आ गया।
वर्ष भर का तप उस क्षण के सामने छोटा पड़ गया।
मूर्ति में यह आज भी दिखता है। भगवान का एक हाथ नीचे की ओर है, हथेली **सालिहोत्र के सिर पर** — आशीर्वाद देते हुए। यानी प्रतिमा उस पल को पकड़े हुए है जब देने वाले को उत्तर मिला।
वैद्य
यहाँ के भगवान **वैद्य वीरराघव** कहलाते हैं — वैद्य, यानी चिकित्सक।
और तीर्थ का नाम **हृत्ताप नाशिनी** है — *हृदय का ताप मिटाने वाला*।
दोनों नाम एक साथ पढ़िए। भगवान वैद्य हैं, पर तीर्थ शरीर के रोग का नाम नहीं लेता — वह **हृदय के ताप** का नाम लेता है।
भक्ति-परंपरा में यह भेद जानबूझकर है। जो जलन भीतर रहती है — शोक, भय, पछतावा — उसे भी रोग ही माना गया, और उसका भी एक वैद्य माना गया।
⚠️ **एक बात स्पष्ट कह देनी चाहिए।** आस्था और चिकित्सा एक-दूसरे के विकल्प नहीं हैं। रोग का उपचार योग्य चिकित्सक ही करते हैं, और मंदिर आना उस उपचार के स्थान पर नहीं, उसके साथ होना चाहिए।
स्रोत: स्थल-परंपरा; विवरण संबद्ध स्थल-स्रोतों से, 2026-08-05.
दर्शन का समय
इस मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट उपलब्ध है, पर उस पर दर्शन-समय प्रकाशित नहीं हैं — इसलिए हमने कोई समय नहीं छापा। अनुमान लगाने के बजाय नीचे मंदिर के आधिकारिक दूरभाष क्रमांक दिए जा रहे हैं, ताकि जाने से पहले सीधे पुष्टि की जा सके।
आधिकारिक संपर्क: 044-27660378 व 044-27664333 (स्रोत: svdtiruvallur.org, 5 अगस्त 2026)। सामान्यतः प्रातःकाल से मध्याह्न तक और फिर सायंकाल से रात्रि तक दर्शन होते हैं। उत्सव के दिनों में समय बदलता है, इसलिए फ़ोन कर लेना सबसे भरोसेमंद है।
कैसे पहुँचें
हवाई मार्ग
चेन्नै अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
वहाँ से सड़क मार्ग से लगभग डेढ़ घंटा।
रेल मार्ग
तिरुवळ्ळूर रेलवे स्टेशन
चेन्नै उपनगरीय रेल से सीधी सेवा — यही सबसे सुविधाजनक मार्ग है।
सड़क मार्ग
तिरुवळ्ळूर
चेन्नै से नियमित बस व टैक्सी उपलब्ध।
अंतिम चरण: सड़क मंदिर तक जाती है; कोई चढ़ाई नहीं।
सुगमता: सुगम — कोई चढ़ाई नहीं।
कब जाएँ
सर्वोत्तम समय: नवंबर से फ़रवरी, जब मौसम सबसे अनुकूल रहता है।
प्रमुख त्योहार
- नवरात्रि
आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल
- तिरुवल्लिक्केणि — त्रिप्लिकेन (तिरुवल्लिक्केणि), चेन्नै, तमिलनाडु
- तिरु कडल्मलै — महाबलिपुरम् (मामल्लपुरम्), तमिलनाडु
- चेन्नै क्षेत्र के अन्य दिव्य देशम
